बहुत बातें कही जा चुकी हैं दिलीप कुमार से धर्म परिवर्तन कर बने अल्लाह रखा रहमान के विलाप के बारे में कि पिछले 8 साल से कम काम मिल रहा है क्योंकि सत्ता परिवर्तन के बाद फैसले करने का अधिकार उन लोगों के हाथ में आ गया जो Creativity को नहीं समझते। ये सीधा हमला मोदी के सत्ता में आने पर है लेकिन वो तो सत्ता में साढ़े 11 साल पहले आए थे। तो क्या पहले 3 साल कुछ समस्या नहीं थी? इनका विलाप बिलकुल हामिद अंसारी जैसा है जो 10 साल उपराष्ट्रपति पद की मलाई खाते रहे और रिटायर होते हुए कह गए भारत में डर का माहौल है।
मुसलमानों में एक प्रवृत्ति बन गई है कि कुएं की तरह पेट भरो और बाद में कह दो हम तो मर गए लुट गए बर्बाद हो गए। अजहरुद्दीन मौज करता रहा क्रिकेट कप्तान बन कर लेकिन जब मैच फिक्सिंग में नप गया तो कह दिया कि मुझे मुसलमान होने की वजह से परेशान कर रहे हैं। ऐसे बहुत मिलेंगे लेकिन जितना बॉलीवुड में मुसलमानों ने कमाया और हिंदुओं को अपमानित किया वह कोई कर नहीं कर सकता। एक नहीं अनेक हिंदू कलाकारों के काम बंद कर दिए और या मार दिए गए। गुलशन कुमार और कुछ समय पहले सुशांत सिंह राजपूत का मामला तो याद होगा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
आपके म्यूजिक को श्रोता ही पसंद करते हैं। उन्हें इस बात से मतलब नहीं है कि आपने कौन से राग उपयोग किए और कितने वाद्य बजाए, श्रोता को बस वह म्यूजिक चाहिए जो उसके कानों को मंत्रमुग्ध कर दे और दिल में उतर जाए। फिल्म उद्योग में सैंकड़ों गीतकारों, संगीत निर्देशकों को लोगों ने सिर पर बिठाया है और 40-50 साल पुराना संगीत और गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं। जबकि पिछले 25 साल में ऐसे गीत बने और म्यूजिक दिया गया ज अगले दिन भी किसी की जुबान पर नहीं होते। उन्हें चलाया जाता है तो बस Reality Shows में।
ये व्यक्ति रो रहा है कि आठ साल से काम नहीं मिल रहा जबकि पिछले साल 2025 में ब्लॉकबस्टर ‘छावा’ सहित 5 फिल्मों में इसका संगीत था। पिछले 8 साल में करीब 65 भारतीय फ़िल्मों में इसने संगीत दिया है। हिंदुओं के पवित्र ग्रन्थ रामायण पर सबसे बड़ी फ़िल्म ‘रामायणम’ में भी ये संगीतकार है। इस व्यक्ति ने आज “छावा” को विघटनकारी बता कर साबित कर दिया कि मलाई भी खानी है और गाली भी देनी है।
ये आठ साल की बात कर रहा है लेकिन उसके परिवार ने 5 साल पहले नीच इस्लामिक कट्टरता दिखाई जब 2020 में तमिल कवि और गीतकार PIRAISOODAN इसके निमंत्रण पर इसके घर गए तो इसकी माँ ने उन्हें कहा कि विभूति और कुमकुम हटा कर घर में आ सकते हो। उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया और वापस लौट आए वरना रहमान के परिवार का क्या पता उनका घर में क़त्ल ही कर देते।
बात ये है ये मुस्लिम सभी फायदे उठाते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि दर्शक और संगीत के श्रोता हिंदू बहुल देश भारत में हिंदू बहुत अधिक हैं जो इन लोगों को स्टार बनाते हैं लेकिन फिर एक दिन इन्हें इस्लामिक कीड़ा काट लेता है और याद आता है कि हम तो मुसलमान हैं। हमें तो हिंदुओं से नफरत होनी चाहिए और तब शुरू करते हैं “Victim Card” का खेल। नसीरुद्दीन शाह, आमिर खान और बहुत हैं जिनको इस इस्लामिक कीड़े ने काटा हुआ है।
इसलिए अब समय आ गया है कि बॉलीवुड का चाहे जो भी मुस्लिम कलाकार हो, उसका हिंदुओं को तबियत से बहिष्कार करना चाहिए।

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