टेस्ला ने 2025 में भारतीय कंपनियों से करोड़ों के ऑटो पार्ट्स खरीदे (फोटो साभार : vynmsa)
इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी ‘टेस्ला’ अब भारतीय कलपुर्जों (पार्ट्स) पर अपना भरोसा तेजी से बढ़ा रही है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में टेस्ला ने भारतीय कंपनियों से करीब 4 से 4.5 अरब डॉलर (लगभग 37,000 करोड़ रुपए से अधिक) के पार्ट्स खरीदे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और भारत के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के बावजूद एलन मस्क की कंपनी भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को मजबूती से आगे बढ़ा रही है।
भारत की बढ़ती अहमियत और निवेश
टेस्ला का लक्ष्य इस साल भारत में अपने खर्च को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुँचाने का है। यह 2023 के मुकाबले पाँच गुना ज्यादा है। कंपनी ऐसा इसलिए कर रही है ताकि वह चीन और ताइवान जैसे देशों पर अपनी निर्भरता कम कर सके और एक सुरक्षित सप्लाई चेन बना सके। जानकारों का कहना है कि उत्तरी अमेरिका के बाहर भारत अब टेस्ला के लिए सबसे तेजी से विकसित होने वाला केंद्र बन चुका है।
‘प्रोजेक्ट रेडवुड’ ने बदली तस्वीर
भारत से बढ़ती इस खरीदारी के पीछे टेस्ला की नई किफायती कार ‘रेडवुड’ (Redwood) का बड़ा हाथ है। यह एक सस्ता मॉडल है जिसे दुनिया भर में लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इस कार को बनाने के लिए जरूरी जटिल पार्ट्स और भारी मात्रा में कलपुर्जों के ऑर्डर भारतीय सप्लायर्स को दिए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियों की इंजीनियरिंग क्षमता और कम लागत ने टेस्ला को अपनी ओर आकर्षित किया है।
रणनीतिक साझेदारी का फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी दोनों के लिए फायदे का सौदा है। टेस्ला को जहाँ सस्ते और बेहतर पार्ट्स मिल रहे हैं, वहीं भारतीय कंपनियों की साख अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही है। इससे न केवल भारत का ‘इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग’ मजबूत हो रहा है, बल्कि चीन को टक्कर देने की भारत की क्षमता भी दुनिया के सामने आ रही है।
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