मटर सिर्फ़ सब्ज़ी नहीं, बल्कि आयुर्वेद का एक ग्रीन हेल्थ

 ये कहावत की हमारी रसोई दवाइयों की खान है, गलत नहीं। जिसका उल्लेख हमें आयुर्वेद में मिलता है। हमारा दुर्भाग्य रहा कि 2014 तक रही तथाकथित सेक्युलरिस्ट्स सरकारों ने आयुर्वेद को कालीन के नीचे दबा दिया था। परमपिता परमेश्वर ने हर मौसम में हर सब्जी को दिया है जिनका स्वाद उस मौसम में आता है अन्य मौसम में नहीं। सर्दी के मौसम जो स्वाद मटर, गोभी पत्ते वाले चुकंदर और शलगम में आता है गर्मी में नहीं।  
आयुर्वेद के अनुसार मटर (मटर/हरित मटर) के फायदे-

आयुर्वेद में मटर को “शिम्बी धान्य” वर्ग में रखा गया है। मटर हल्की, पोषक और शरीर को ताकत देने वाली सब्ज़ी मानी जाती है।
1. पाचन शक्ति बढ़ाता है
मटर में भरपूर रेशा (फाइबर) होता है, जो
➡️ कब्ज को कम करता है
➡️ आंतों को साफ रखता है
➡️ भूख को बैलेंस करता है
सही तरीके से पकाकर खाने पर ये पचने में आसान हो जाता है।
2. शरीर को ताकत और ऊर्जा देता है
मटर में प्रोटीन अच्छा होता है, इसलिए
➡️ कमजोरी दूर करता है
➡️ बच्चों और टीनेजर्स के लिए सुपर फूड है
➡️ मांसपेशियों को पोषण देता है
3. दिमाग के लिए फायदेमंद मटर सत्वगुणी माना जाता है
➡️ याददाश्त में मदद करता है
➡️ थकान और आलस कम करता है
,➡️ पढ़ाई करने वालों के लिए 💯
4. रक्त (खून) को पोषित करता है मटर
➡️ रक्त को शुद्ध करता है
➡️ हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक है
➡️ त्वचा में नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है।
5. दोषों पर प्रभाव
वात दोष: ज़्यादा खाने पर बढ़ सकता है
पित्त दोष: संतुलित रखता है
कफ दोष: हल्का बढ़ा सकता है
इसलिए मटर को घी और मसालों के साथ पकाना बेस्ट रहता है।
मटर कैसे खाएं (Ayurvedic Tips)
✔️ अच्छी तरह पकाकर
✔️ थोड़ा देसी घी डालकर
✔️ हींग, जीरा, अदरक के साथ
❌ कच्चा या बहुत ज़्यादा नहीं खाना चाहिए
आयुर्वेदिक ग्रंथों में मटर का उल्लेख
मटर के गुण इन आयुर्वेदिक पुस्तकों में बताए गए हैं:
भावप्रकाश निघंटु (Bhavaprakasha Nighantu)
राज निघंटु (Raja Nighantu)
चरक संहिता – शिम्बी धान्य वर्ग के अंतर्गत
मटर सिर्फ़ सब्ज़ी नहीं, बल्कि आयुर्वेद का एक ग्रीन हेल्थ जेम है

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