आयुर्वेद के अनुसार मटर (मटर/हरित मटर) के फायदे-
आयुर्वेद में मटर को “शिम्बी धान्य” वर्ग में रखा गया है। मटर हल्की, पोषक और शरीर को ताकत देने वाली सब्ज़ी मानी जाती है।
मटर में भरपूर रेशा (फाइबर) होता है, जो
सही तरीके से पकाकर खाने पर ये पचने में आसान हो जाता है।
2. शरीर को ताकत और ऊर्जा देता है
मटर में प्रोटीन अच्छा होता है, इसलिए
3. दिमाग के लिए फायदेमंद मटर सत्वगुणी माना जाता है
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4. रक्त (खून) को पोषित करता है मटर
5. दोषों पर प्रभाव
वात दोष: ज़्यादा खाने पर बढ़ सकता है
पित्त दोष: संतुलित रखता है
कफ दोष: हल्का बढ़ा सकता है
इसलिए मटर को घी और मसालों के साथ पकाना बेस्ट रहता है।
मटर कैसे खाएं (Ayurvedic Tips)
आयुर्वेदिक ग्रंथों में मटर का उल्लेख
मटर के गुण इन आयुर्वेदिक पुस्तकों में बताए गए हैं:
भावप्रकाश निघंटु (Bhavaprakasha Nighantu)
राज निघंटु (Raja Nighantu)
चरक संहिता – शिम्बी धान्य वर्ग के अंतर्गत
मटर सिर्फ़ सब्ज़ी नहीं, बल्कि आयुर्वेद का एक ग्रीन हेल्थ जेम है
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