डोनाल्ड ट्रंप और तुलसी गबार्ड अमेरिका में शरिया पर बैन करने की तैयारी में हैं; आज Muslim Brotherhood को आतंकी संगठन घोषित किया

सुभाष चन्द्र

कुछ ज्योतिषविदों की भविष्यवाणी सुनी थी कि जल्द ही इस्लाम और ईसाई मजहबों के मानने वालों के बीच भीषण संघर्ष होगा वह गाज़ा में दिखाई दिया और अब अमेरिका और ईरान के बीच तलवारें खिचनें से दिखाई दे रहा है जो आगे बढ़ भी सकता है। 

कल अमेरिका ने लेबनान, मिस्र और जॉर्डन की Muslim Brotherhood के Chapters  को आतंकी संगठन घोषित कर दिया जबकि राहुल गांधी ने RSS को Muslim Brotherhood के जैसा बताया था लेकिन ट्रंप ने RSS को बैन नहीं किया और इस बात से राहुल गांधी को झटका लगा होगा 

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डोनाल्ड ट्रंप विश्व के अकेले ऐसे नेता है जो “इस्लामिक टेर्रोरिस्म” शब्द का उपयोग करते हैं और अब उन्होंने शरिया पर पूरे अमेरिका में प्रतिबंध लगाने की पेशकश की है उन्होंने कहा ➖

““We need to ban muslims”

Donald Trump is calling for a total and complete shutdown of Muslims entering the United States until our country’s representatives can figure out what the hell is going on, You have no choice”. इसके चलते आज ट्रंप ने 21 जनवरी से 75 देशों के वीसा पर बैन लगा दिया जिनमें पाकिस्तान/बांग्लादेश समेत अनेक इस्लामिक देश हैं 

उसके बाद DNI तुलसी गबार्ड ने भी “अमेरिका के सभी 50 राज्यों में शरिया क़ानून पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में बात की है। उन्होंने यह भी कहा कि “शरिया क़ानून अमेरिकी संस्कृति के अनुरूप नहीं है।”

उन्होंने कहा कि “इस्लामी विचारधारा स्वतंत्रता के लिए सीधा ख़तरा है” और कुछ मुस्लिम समुदाय तथा संगठन, जैसे कि काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR), कानूनी और राजनीतिक प्रणालियों या हिंसा के माध्यम से न्यू जर्सी, पैटरसन, टेक्सास, ह्यूस्टन और अन्य अमेरिकी शहरों में शरिया कानून लागू करने के लिए काम कर रहे हैं।

उनकी इन टिप्पणियों की CAIR और अन्य मुस्लिम नागरिक अधिकार संगठनों ने “भ्रामक और ख़तरनाक” कहकर आलोचना की और कहा कि शरिया के बारे में ऐसे दावे झूठे हैं

इस्लामिक विचारधारा केवल अमेरिकी संस्कृति से ही मेल नहीं खाती बल्कि वह किसी भी संस्कृति के अनुरूप नहीं है क्योंकि अगर ऐसा होता तो आज 56 इस्लामिक देश अपनी अपनी संस्कृति से चल रहे होते लेकिन तलवार के दम पर उनका इस्लाम में धर्मान्तरण कर दिया गया। और इसी कारण ईरान, उसके आतंकी संगठन और कई इस्लामिक देश इज़रायल के अस्तित्व को ही मिटा देना चाहते हैं इस्लाम के प्रमुख शत्रु है- यहूदी, हिंदू और ईसाई

अमेरिका में इस्लामिक शक्तियां सर उठा रही है और शायद इसी वजह से ट्रंप और तुलसी खुलकर शरिया को बैन करने की बात कर रहे हैं शिकागो में फिलिस्तीनी इस्लामिक विद्वान Mohammad Nusarat ने कहा कि “हम यहां किसी के साथ रहने नहीं आए हैं हम बाकी सबसे बेहतर हैं और हमसे आगे कोई नहीं निकल सकता, हमारे ऊपर कोई नहीं है, अगर कोई हमारे साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें अल्लाह की पूजा करनी होगी”

(The Prophet Muhammad said:) “Islam is always Superior and should never be surpassed”

“Islam is raised high and nothing is raised above Islam,Islam came to remove the oppression of all those religions and it is the only truth, and it is the only way to justice”.

इसके अलावा कैलिफ़ोर्निया में इस्लामिक विद्वान् उथमन फ़ारूक़ ने कहा है कि “ “Islam will enter every household in America and everyone will have to convert, whether they like it or not”.

जो इस्लाम का खतरा भारत में है और अन्य कट्टर इस्लामिक देशों के हिंदुओं पर है, वह खतरा अमेरिका में भी लगातार बढ़ रहा है भारत और अमेरिका में अंतर इतना है कि वहां राष्ट्रपति को बहुत शक्तियां हैं जो भारत में प्रधानमंत्री को नहीं हैं भारत का न्यायतंत्र भी आवश्यकता से अधिक “सेकुलर” है जबकि अमेरिका सेकुलर होने के साथ मुस्लिमों को सही ठिकाने पर लगाता रहा है और दूसरी तरफ चीन भी लगा रहा है एक दिन बहुत देशों को चीन के मार्ग पर चलना पड़ेगा वरना अस्तित्व संकट में आ जाएगा

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