योगी के विदेश जाते ही अखिलेश का शेर बनने का ड्रामा


खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदल लेता है उसी तरह राहुल गाँधी की सौबत में रहकर अखिलेश यादव का भी दिमाग गुड़-गोबर हो गया है। कोई अखिलेश से पूछे मुश्किल से एक साल के बाद उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनाव होना है और इतने कम समय के लिए कौन महामूर्ख मुख्यमंत्री बनने में लालच में पार्टी को छोड़ेगा? वैसे यह गन्दा खेल अखिलेश कई बार खेल चुके हैं लेकिन हर बार परिणाम जीरो ही रहा। अखिलेश ने समझा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व्यापार के लिए भारत से बाहर क्या गए मानो अखिलेश के हाथों कोई बटेर लग गयी। 
मुख्यमंत्री रहते अखिलेश प्रदेश हित के लिए कितनी बार विदेश गए?   
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा डिप्टी सीएम को सौ विधायक लाने पर मुख्यमंत्री बनाने के कथित ऑफर को लेकर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने बिना नाम लिए सपा नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा और कहा कि यह बयान ही साबित करता है कि उनके पास खुद सरकार बनाने की ताकत नहीं है...!!

राजनीति अखाड़े की तरह होती है जहां अपने दम पर लड़ना पड़ता है उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव खुद अखाड़े के पहलवान तैयार करते थे संगठन को खड़ा करते थे और जमीन पर संघर्ष करते थे लेकिन आज हालात यह हैं कि भाड़े के पहलवान के सहारे अखाड़ा जीतने की सोच रखी जा रही है, भाड़े के पहलवान से कभी जीत हासिल नहीं की जा सकती....!!

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