शांति वार्ता से पहले ट्रंप की युद्ध वाली चेतावनी: ‘बात बनी तो ठीक, नहीं तो अंजाम बुरा होगा’: ईरान बोला- शर्तें मानने पर ही होगी बातचीत शुरू

                           ट्रंप-ईरान के बीच शांति वार्ता होगी पाकिस्तान में (साभार : Aajtak, Jagran)
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार (11 अप्रैल 2026) को अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होने जा रही है। इस महा-बैठक से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री रास्ता) को तुरंत खोल दे, वरना अंजाम बुरा होगा।

ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान जंग हार चुका है और अब यह बातचीत ही उसका आखिरी मौका है। दूसरी तरफ, ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी अपनी कड़ी शर्तों के साथ इस्लामाबाद पहुँच चुका है।

ईरान की अपनी शर्तें और अमेरिका का कड़ा रुख

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ एक भारी-भरकम डेलीगेशन के साथ शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को ही इस्लामाबाद पहुँच गए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका उनकी शर्तें मानेगा।

ईरान की मुख्य माँगों में लेबनान में तुरंत युद्धविराम और अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड को जारी करना शामिल है। गलिबाफ ने कहा कि ईरान बातचीत तो चाहता है लेकिन उसे अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।

ट्रंप की युद्ध वाली चेतावनी

उधर, अमेरिका के तेवर और भी तीखे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी केवल समुद्री रास्तों को रोककर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि अमेरिकी युद्धपोतों को नए और घातक हथियारों से लैस कर दिया गया है।

अगर शनिवार (11 अप्रैल 2026) की बातचीत फेल होती है, तो अमेरिका ईरान पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह समुद्री रास्ते (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में ईरान को कोई ‘टोल टैक्स’ वसूलने नहीं देंगे।

पाकिस्तान के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

इस बातचीत की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘मेक-ऑर-ब्रेक’ (बनी तो बनी, नहीं तो बिगड़ी) वाली स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि पूरे मिडिल ईस्ट की शांति इसी बैठक पर टिकी है। पाकिस्तान चाहता है कि दोनों देश मिलकर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचें ताकि लंबे समय से चल रहा तनाव खत्म हो सके।
इस चर्चा के लिए दोनों तरफ से दिग्गज नेता मैदान में उतर चुके हैं। ईरान की ओर से इस वार्ता का मोर्चा विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ संभाल रहे हैं, जिनके साथ ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं।
वहीं, अमेरिका की तरफ से टीम की अगुवाई खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, और उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद जारेड कुशनर और अनुभवी सैन्य रणनीतिकार वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर मौजूद हैं।
चूँकि पाकिस्तान इस पूरी बातचीत की मेजबानी कर रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार भी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बने रहेंगे।

क्या होगा आगे?

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या शनिवार (11 अप्रैल 2026) के बाद भी बातचीत का दौर चलेगा, तो उन्होंने सस्पेंस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें 47 साल से सिर्फ बातें कर रही थीं, अब फैसला जल्द होगा।

अमेरिका का मुख्य मकसद यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना पाए और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कब्जा न करे। अब सबकी निगाहें शनिवार की टेबल टॉक पर हैं कि क्या दुनिया को युद्ध से राहत मिलेगी या तनाव और बढ़ेगा।

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