पाकिस्तान ट्रंप के आगे झुकता है, भरोसे लायक नहीं: ईरान ने मध्यस्थता पर उठाए सवाल (साभार: CNBC)
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में पाकिस्तान लगातार खुद को शांतिदूत दिखाने की कोशिश में लगा हुआ है। वहीं, अब तेहरान ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पाकिस्तान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानता। ईरान के सांसद और संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने खुलकर पाकिस्तान की भूमिका पर आपत्ति जताई है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
हकीकत यह है कि पाकिस्तान शुरू से ही दलालियाँ कर मुल्क को चलाता रहा है। इसने कभी आत्मनिर्भर बनने की कोशिश तक नहीं की। ईरान और अमेरिका में बातचीत का ड्रामा कर अमेरिका को पागल बनाकर नोट खींच रहा है। हैरानी इस बात पर होती है कि अमेरिका जैसा देश इस दोगले पाकिस्तान के इशारे पर नाच रहा है। सोवियत यूनियन को तोड़ने में अमेरिका ने पाकिस्तान और इराक का इस्तेमाल किया और इराक की जो हालत है सबके सामने है और पाकिस्तान एक भिखारी देश। दूसरे, समझ में नहीं आता अमेरिका पाकिस्तान पर भरोसा क्यों कर रहा है? इसी पाकिस्तान ने कहा था कि ओसामा पाकिस्तान में नहीं लेकिन अमेरिका ने ओसामा को मारा पाकिस्तान में। अगर ओसामा पाकिस्तान में नहीं था फिर किस ओसामा को अमेरिका ने मारा था?
फिर सऊदी अरब ने किस घटिया देश के साथ रक्षा समझौता किया है जिसकी सेना 1971 की लड़ाई में भारत के आगे समर्पण किया और अफगानिस्तान और बलूचिस्तान की सेनाओं से पिट रही है।
मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, पाकिस्तान में भरोसे की कमी
इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पाकिस्तान के पास मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अच्छा मित्र और पड़ोसी जरूर है लेकिन बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नीतियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखता है और अक्सर उसी दिशा में झुकाव दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद कभी भी वॉशिंगटन के खिलाफ खुलकर बोलने से बचता है। रेजाई ने कहा, “एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, न कि हमेशा एक पक्ष की ओर झुकाव रखना चाहिए।”
कूटनीतिक हलचल तेज, बातचीत में अनिश्चितता कायम
इन बयानों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने में जुटे हैं। हाल ही में उन्होंने तीन दिनों के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान का दौरा किया और वहाँ आर्मी चीफ असीम मुनीर सहित कई शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की। इससे पहले वे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात कर चुके थे।
अराघची इससे पहले ओमान भी गए थे, जहाँ सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ उनकी बातचीत हुई। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा, नए कानूनी ढाँचे, मुआवजे की माँग, भविष्य में सैन्य कार्रवाई रोकने की गारंटी और अमेरिकी समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान बातचीत चाहता है, तो वह सीधे संपर्क कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगर वे बातचीत करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं या हमें कॉल कर सकते हैं… आप जानते हैं, फोन मौजूद है और हमारे पास सुरक्षित लाइनें हैं।”
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