2018 में उर्दू अखबार ‘इंकलाब’ ने एक खबर छापी जिसमें राहुल गाँधी का एक बयान था जिसमें कहा गया था कि ‘कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है’। तब कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को झुठलाने की कोशिश की लेकिन पार्टी के ही तब के अल्पसंख्यक मोर्चा के चेयरमैन ने इस बयान की पुष्टि की थी। इस बात को 8 साल बीत गए हैं।
दूसरे, इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हिन्दू धर्म को बदनाम करने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का जहर फैलाया गया। और बेशर्म हिन्दू भी इस जहर को पीकर आनंदित होता रहा। सच्चाई को जानने की कोशिश नहीं की। मुस्लिम समाज को एकजुट रखने के लिए हिन्दुओं को जातिगत सियासत में बाँटने का घिनौना खेल आज तक खेला जा रहा है। है किसी में हिम्मत जो ईसाई और मुसलमानों की जातियों में खतरनाक भेदभाव को दूर करने के लिए मुंह सके। सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दुओं को गुमराह किया जाता रहा है एक बात याद रखनी चाहिए कि एक हाथ से ताली नहीं बजती। लेकिन यहाँ एक हाथ से ही ताली बजाई जा रही है।
अब सोमवार(4 मई 2026) को राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आए। कांग्रेस के उस दावे में कितना सच था या नहीं थे इस थोड़ी देर के लिए भूल जाते हैं और नतीजों से कांग्रेस के मौजूदा स्वरूप को समझने की कोशिश करते हैं। बात करते हैं, असम और पश्चिम बंगाल की, इन दोनों राज्यों में बीजेपी सत्ता में आई है।
बंगाल में टक्कर TMC-BJP के बीच थी तो कांग्रेस की गर्त में जाना लगभग तय था, हुआ भी वही। असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी के आक्रामक प्रचार ने राज्य में पार्टी की जीत की हैट-ट्रिक लगा दी।
कांग्रेस को असम और पश्चिम बंगाल में कुल जमा 21 विधानसभा सीटें मिलीं। असम में पार्टी ने 19 सीटें जीतीं जबकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के खाते में 2 सीटें आईं। इसमें एक दिलचस्प बात जो सामने आई वो उस 2018 के अखबार की उस रिपोर्ट की ही याद दिला रही थी जो राहुल गाँधी ने तब कथित तौर पर कहा था।
असम में जीते कांग्रेस के 19 विधायकों में केवल 1 विधायक हिंदू है। असम की नोबोइचा सीट से जीते जोय प्रकाश दास राज्य में कांग्रेस के इकलौते हिंदू विधायक हैं बाकी विधायकों के नाम आप इस लिस्ट में देख सकते हैं।
असम में जीते कांग्रेस के विधायक (साभार: ECI Result)यही हाल पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का हुआ। पश्चिम बंगाल के फरक्का में कांग्रेस के मोताब शेख और रानीनगर में जुल्फीकार अली ने जीत दर्ज की है।
पश्चिम बंगाल में जीते कांग्रेस के विधायक (साभार: ECI Result)वहीं, केरल में कांग्रेस उस इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ गठबंधन में सरकार बनाने जा रही है जिसकी कट्टरपंथी विचार किसी ने छिपे नहीं है। इस कट्टरपंथी और हिंदू विरोधी पार्टी को राहुल गाँधी सेकुलर तक बता चुके हैं।
भले ही IUML यह दावा करती है कि उसका गठन 1948 के बाद हुआ लेकिन असल में यह ऑल इंडिया मुस्लिम लीग (AIML) की ही एक शाखा है। AIML वही पार्टी थी जिसे पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बनाया था। देश के बँटवारे के बाद AIML की जगह पाकिस्तान में मुस्लिम लीग और भारत में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने ले ली।
IUML का गठन AIML की सोच और विचारधारा को जिंदा रखने के लिए किया गया था। इसका एक बड़ा उदाहरण यह है कि IUML के पहले अध्यक्ष मोहम्मद इस्माइल खुद देश के बँटवारे के आंदोलन में शामिल थे और पाकिस्तान बनने के समर्थक थे।
कांग्रेस का मुस्लिम घुसपैठियों से भी प्रेम बताता है कि उसकी आज की दशा क्या हो गई है। असम और बंगाल दोनों ऐसे राज्य हैं जो घुसपैठ और डेमोग्राफी परिवर्तन से जूझ रहे हैं लेकिन कांग्रेस को ना ये अवैध घुसपैठिए नजर आते हैं, ना ही डेमोग्राफी में बदलाव नजर आता है। वो जमीनी हकीकत को भी जानते समझते हुए भी केवल वोट के लिए या कहें तो मुस्लिम वोट के लिए इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखती है।
अब भले ही 2018 में राहुल गाँधी ने कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताया हो या ना बताया हो लेकिन पार्टी के कृत्य तो इस बात को स्थापित करते ही हैं। बाकी अभी इन दोनों राज्यों में कांग्रेस के करीब 95% चुने गए विधायक मुस्लिम हैं, आगे ये आँकड़ा और कांग्रेस की राजनीति कहाँ जाएगी ये तो वक्त ही बताएगा।
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