दिल्ली सरकार ने 'इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर' नाम की किताब को किया जब्त (साभार: ANI/Amazon)
"चलो देर आए दुरुस्त आए" यानि जो काम कई साल हो जाना चाहिए था चलो उसकी शुरुआत हो गयी है। दिल्ली की बीजेपी सरकार ने इस्लामिक कट्टरपंथी और उनके आकाओं पर जो कुठाराघात करने का काम किया है वह ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। जिन बातों का उल्लेख मुस्लिम लेखक अनवर शेख ने अपनी किताबों में किया था Islamic Ethics of Warfare तो सिर्फ एक हल्की-सी झांकी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अभी फिल्म का ट्रेलर और पूरी फिल्म बाकी है।
अयातुल्लाह खेमैनी सलमान रुश्दी के खिलाफ तो फतवा देने की हिम्मत कर सका लेकिन अनवर शेख पर नहीं। जबकि खेमानी की जिंदगी में अनवर ने 2 या 3 किताबों का प्रकाशन कर दिया था। अगर भारत एवं अन्य सरकारों ने अनवर को गंभीरता से लिया होता शायद आतंकवाद नहीं होता। गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार नहीं होते। लेकिन सभी तुष्टिकरण कर मालपुए खाने में लगे रहे। उसी का अंजाम है कि आतंकवाद एक नासूर बन चूका है। बस संक्षेप में इतना ही कहना है कि अनवर शेख के अधूरे काम को पूरा कर रही है अली सीना की किताब Understanding Mohammad And Muslim, इसके खिलाफ भी फतवा देने की किसी में अब तक हिम्मत नहीं। मेरे अनुभव से अली सीना की किताब अनवर शेख की किताबों का संकलन है। किताब के Preface में सीना का कहना है कि किताब पढ़कर मुसलमान इस्लाम छोड़ रहे हैं जबकि कहा ये जा रहा है कि अनवर शेख को पढ़कर।
खैर, इस अति गंभीर मुद्दे पर सरकार को बहुत काम करना है। बहुत छापेमारी भी करनी है। जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भिड़ के छत्ते को छेड़ा है तो केन्द्रीय गृह मंत्री और सुप्रीम कोर्ट को पत्थरबाजों पर blind firing के आदेश और इसके खिलाफ खड़े होने वाले दलाल वकीलों पर भी सख्त आदेश देने के लिए बोलिए।
दिल्ली की बीजेपी सरकार ने ‘इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर’ नाम की किताब को जब्त करने के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह किताब मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाती है और सशस्त्र विद्रोह करने को उकसाती है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किताब को जब्त किया है।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग से जारी आदेश में कहा गया, “सरकार के ध्यान में बात आई है कि ‘इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर’ नाम की किताब लोगों, खासकर विशेष समुदायों के लोगों को हथियार उठाने और हिंसक सोच की तरफ भड़काती है। यह किताब कट्टर विचारधारा को बढ़ावा देती है, जिससे देश की सुरक्षा और जनता की शांति को खतरा हो सकता है।”
आदेश में यह भी कहा गया है कि सबूतों और जाँच में यह साफ पता चला है कि इस किताब में मजहबी बातों का गलत इस्तेमाल करके हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की गई है, इसीलिए तुरंत कार्ऱवाई करना जरूरी है। इसीलिए दिल्ली सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 98 के तहत किताब और इसकी सारी कॉपियों को जब्त किया है।
किताब में क्या लिखा?
दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक, यह किताब सिर्फ इस्लाम को सबसे श्रेष्ठ मानती है और दूसरे धर्मों के खिलाफ लड़ाई की बात करती है। इसमें दूसरे धर्मों की मान्यताओं पर हमला करके अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाई गई है। साथ ही इस किताब में लोगों को कट्टर बनाने के लिए कुरान और अन्य मजहबी किताबें को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इससे लोगों में अलगाव की भावना पैदा की गई और हिंसा व आतंकवाद की सोच को बढ़ावा दिया गया है।
इसके अलावा यह भी पाया गया कि यह किताब भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ गलत और भ्रामक जानकारी फैलाती है। इसीलिए किताब पर BNS, 2023 की धारा 196, 197(1)(c), 197(1)(d) भी लागू की गई है।
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