राहुल का झूठ देश को पंहुचा रहा नुकसान: बार-बार पोल खुलने के बावजूद झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे राहुल गांधी

यह भारत का दुर्भाग्य है कि ऐसा Leader of Opposition मिला है जो देश को लाभ पहुँचाने की बजाए नुकसान ज्यादा कर रहा है। गौतम अडानी के विरुद्ध बोलने से जो लाभ भारत को मिला था केन्या ने वह अनुबंध Leader of Opposition के आका चीन को दे दिया। वैसे भी राहुल गाँधी जब भी कोई बात बोलते हैं उसकी पोल खुलने से पहले देश को नुकसान हो चूका होता है। समझ में नहीं आता जनता ऐसे नेता को वोट देती ही क्यों है? राहुल और उनकी पार्टी बताए कि Leader of Opposition द्वारा बोली गयी किसी भी बात में दम हो? झूठ का पिटारा से ज्यादा कुछ नहीं। Leader of Opposition और INDI गठबंधन को देशभक्ति ईरान और इजराइल से सीखनी चाहिए जहाँ युद्ध के दौरान विपक्ष भी सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन यहाँ दुश्मन देश की बोली बोल जनता को गुमराह किया जाता है। 

क्या कोई युद्ध के दौरान अपने सरकार से नुकसान होने की बात पूछता है लेकिन हमारा Leader of Opposition और INDI गठबंधन पूछता है जो दुश्मन देश की सुर्खियां बन जाती है। कसूर राहुल का नहीं राहुल के इशारे पर नाचने वाली पार्टियों का भी है।    

भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेशी ताकतें तरह-तरह के नैरेटिव बनाती हैं। इनको आगे बढ़ाने का काम बिना किसी तथ्य के कांग्रेस के युवराज और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करते हैं। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की राजनीति अब तथ्यों, तर्कों और जिम्मेदारी से ज्यादा सनसनी, भ्रम और झूठे नैरेटिव पर टिकती दिख रही है। संसद से सड़क तक वे लगातार ऐसे झूठे आरोप उछालते रहते हैं, जिनका या तो बाद में खुद उनके ही दावों से खंडन हो गया, या फिर अदालत, सेना, चुनाव आयोग और सरकारी रिकॉर्ड ने उनकी बातों की धज्जियां उड़ा दीं। कभी सेना के “हाथ बांध देने” का आरोप लगाकर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए, तो कभी चुनाव आयोग को “वोट चोरी” का औजार बताकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर हमला किया गया। संसद में बोलने नहीं देने का रोना रोने वाले राहुल गांधी की पोल खुद लोकसभा के रिकॉर्ड ने खोल दी।

कई महत्वपूर्ण बहसों में राहुल ने स्वयं हिस्सा तक नहीं लिया। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि झूठ को हथियार बनाकर देश में अविश्वास फैलाने की राजनीति है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राहुल गांधी के आरोप अक्सर अधूरी जानकारी, गलत तथ्यों और भावनात्मक उकसावे पर आधारित होते हैं। राफेल से लेकर अग्निवीर, EVM से लेकर विदेशी नेताओं की मुलाकातों तक, बार-बार उनके दावों की हवा निकलती रही, लेकिन झूठ का सिलसिला नहीं रुका। कभी सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी, तो कभी सेना और चुनाव आयोग को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। यदि नेता प्रतिपक्ष ही बिना प्रमाण के आरोपों की राजनीति करेगा, तो इससे सिर्फ उसकी विश्वसनीयता नहीं गिरेगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा भी कमजोर होगा। हिट और रन की पॉलिटिक्स कभी भी मेहनत और परिश्रम का विकल्प नहीं हो सकती।दरअसल, राहुल हर हार, हर विवाद और हर असफलता का दोष किसी न किसी संस्था पर डालते हैं, लेकिन आत्ममंथन से लगातार बचते रहते हैं। 

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EVM को बताया ब्लैक बॉक्स और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
राहुल गांधी ने 16 जून 2024 को एक्स पर लिखा, “भारत में ईवीएम एक ‘ब्लैक बॉक्स’ है. किसी को भी इनकी स्क्रूटनी करने की अनुमति नहीं है. हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं. जब संस्थाओं में जवाबदेही की कमी होती है, तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है.” हकीकत में हमारी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और EVM प्रणाली का लोहा दुनिया मान चुकी है। भारत का चुनाव आयोग लगातार कहता रहा है कि EVM मशीनें सुरक्षित हैं और VVPAT प्रणाली के कारण मतदान का सत्यापन संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने भी EVM को पूरी तरह हटाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। चुनाव आयोग ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में ईवीएम से चुनाव हिंसा रहित कराए हैं।

संसद में बोलने नहीं दिया जाता
राहुल गांधी ने 26 मार्च 2025 को आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में विपक्ष की और उनकी आवाज दबाई जाती है और उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का अवसर नहीं मिलता। उनके इस झूठ की पोल खोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने उनके सदन से अनुपस्थित रहने के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पलटवार किया है कि विपक्ष केवल हंगामा करना चाहता है, सार्थक चर्चा नहीं। सरकार और भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी खुद सदन में नियमों के तहत नहीं बोलते या चर्चा से भागते हैं।

रक्षा बजट घटाने का आरोप, जबकि 15 प्रतिशत बढ़ा
राहुल गांधी ने कई मौकों पर कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और रक्षा तैयारियों में कमियां हैं। 12 नवंबर 2021 को राहुल ने फिर कहा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से आपराधिक खिलवाड़ किया जा रहा है, क्योंकि मोदी सरकार के पास कोई स्ट्रैटेजी नहीं है । दूसरी ओर हकीकत यह है कि भारत का रक्षा बजट पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है और यह विश्व के सबसे बड़े रक्षा व्ययों में शामिल है। मोदी सरकार ने रक्षा मंत्रालय के केंद्रीय बजट 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च आवंटन किया, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों से 15 प्रतिशत अधिक है।

लद्दाख में चरागाह और जमीन खोने का आरोप
राहुल गांधी ने 20 अगस्त 2023 को झूठा आरोप लगाते हुए कहा कि लद्दाख के लोगों के चरागाह क्षेत्र चीन के नियंत्रण में चले गए हैं। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। चीनी कब्जे की तरह यह आरोप भी बेदम ही निकला। राहुल ने आरोप लगाया था कि लद्दाख के कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों और चरवाहों ने उनसे चराई क्षेत्रों तक पहुंच कम होने की शिकायत की है। वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि सीमा पर भारत की स्थिति बेहद मजबूत है और संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया। ना ही लद्दाख में चरवारों को जमीन का नुकसान हुआ है।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर सरकार पर सवाल
राहुल गांधी ने 11 अगस्त 2024 को आरोप लगाते हुए कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद सरकार को अडानी मामले पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता के धन की रक्षा करने वाली नियामक संस्था SEBI की सत्यनिष्ठा गंभीर रूप से प्रभावित और समझौता-युक्त हो चुकी है। हकीकत में उनका झूठ पकड़ा गया। हिंडनबर्ग एक शॉर्ट-सेलिंग रिसर्च फर्म है, जिसकी रिपोर्ट ने अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाए थे। अडानी समूह ने इन आरोपों को खारिज किया। मामला SEBI और न्यायिक निगरानी में जांच का विषय रहा। बाद में कोर्ट से भी अडानी की हिंडनबर्ग के आरोपों में क्लीन चिट मिल गई।

LIC और बैंकों का पैसा खतरे में, रिपोर्ट में पैसा सुरक्षित
राहुल गांधी ने 9 सितंबर 2020 को एक बार फिर से अपने आरोप में कहा कि अडानी समूह में निवेश के कारण LIC और सरकारी बैंकों का पैसा खतरे में है। लेकिन उनके इस झूठ की भी कलई जल्द ही खुल गई। लाइफ इन्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि उसका निवेश कुल निवेश पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा है और वह वित्तीय रूप से बेहद सुरक्षित है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अपने एक्सपोजर को सुरक्षित सीमा में बताया।

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