नेता प्रतिपक्ष का कर्तव्य होता है देशहित की बात करे नाकि अहित की। समय आ गया है जब राहुल गाँधी को वोट देने वालों को अपनी खतरनाक गलती पर पछताना होगा। राहुल द्वारा अडानी का विरोध करने का अंजाम यह हुआ कि गौतम अडानी को केन्या में मिला प्रोजेक्ट चीन को मिल गया यानि भारत को नुकसान। इसका जिम्मेदार कोई और नहीं राहुल गाँधी है।
नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद जो भी कानून पास किए, उनमें कोई ऐसा नहीं है जिसका कांग्रेस और विपक्ष ने विरोध न किया हो चाहे उस विरोध के कारण देश को कितना भी नुकसान उठाना पड़ा हो।
अब सबसे ज्यादा तड़प कांग्रेस को 92000 करोड़ के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से हो रही है क्योंकि इस प्रोजेक्ट से चीन के हितों को नुकसान हो सकता है जो कांग्रेस को कतई बर्दाश्त नहीं है। कभी पर्यावरण मंत्री रहे जयराम रमेश ने प्रोजेक्ट के खिलाफ पर्यावरण के नाम मोर्चा खोला हुआ है और कहते है अभी तक वो 39 पोस्ट X पर डाल चुके हैं। एक वाहियात दलील दे रहे हैं कांग्रेसी कि इस प्रोजेक्ट के लिए 1.5 करोड़ पेड़ काट दिए जाएंगे। सोनिया गांधी लेख लिखती हैं और जो राहुल गांधी विदेशों में घूमता फिरता है, वह भी अंडमान निकोबार हो आया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
कांग्रेस का आरोप है यह प्रोजेक्ट वहां रहने वाले शोम्पेन और निकोबारी आदिवासियों के हितों के खिलाफ है जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार शोम्पेन जनजाति की अनुमानित जनसंख्या 229 है और सरकार पागल नहीं है जो उनके पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करेगी।
कांग्रेस को बस देश की विकास यात्रा में बाधा पहुंचानी है और ऐसा नहीं है भारत के विकास प्रोजेक्ट का विदेशी शक्तियां अब ही विरोध कर रही है। कांग्रेस द्वारा अपने समय में 2012 में तमिलनाडु के कुडनकुलम नुक्लेअर प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट में घसीटा गया था। नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध को भी लटकाया गया जो आज कई राज्यों की प्यास बुझा रहा है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का Infrastructure के लिए क्या महत्व है और इसमें क्या क्या बनाया जाना है -
-इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांस शिपमेंट टर्मिनल (ICTT): गलाथिया बे (Galathea Bay) में एक गहरा बंदरगाह, जहां बड़े मालवाहक जहाज अपना सामान उतार सकेंगे;
-ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट: एक नया हवाई अड्डा, जिसे नागरिक और रक्षा (नौसेना) दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाएगा; और
-टाउनशिप और पावर प्लांट: 450 मेगावाट का बिजली संयंत्र और कर्मचारियों व निवासियों के लिए एक नया शहर बसाया जाना है।
यह प्रोजेक्ट चीन के लिए उसकी सबसे बड़ी कमजोरी 'मलक्का दुविधा' (Malacca Dilemma) को बढ़ा देता है।
मलक्का जलडमरूमध्य पर निगरानी: ग्रेट निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य [Strait of Malacca] के बेहद करीब स्थित है। चीन का लगभग 70-80% कच्चा तेल और भारी मात्रा में व्यापार इसी रूट से गुजरता है।
रणनीतिक बढ़त: इस प्रोजेक्ट के बन जाने से भारतीय नौसेना की इस रूट पर सीधी और मजबूत नजर रहेगी। जरूरत पड़ने पर भारत इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट (Chokepoint) के जरिए चीनी जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित या बाधित कर सकता है।
व्यापारिक प्रभुत्व में कमी: भारत अभी ट्रांसशिपमेंट के लिए श्रीलंका (कोलंबो) और सिंगापुर के बंदरगाहों पर निर्भर है, जिससे चीन को फायदा मिलता है। इस हब के बनने से भारत का अपना कार्गो हैंडल हो सकेगा और चीन के क्षेत्रीय व्यापारिक एकाधिकार को चुनौती मिलेगी।
कांग्रेस से बस “पापा” चीन को होने वाला यह नुकसान बर्दाश्त नहीं हो रहा। कांग्रेस तो रामसेतु के आस पास का 10 लाख टन का थोरियम भंडार बेचने की कोशिश कर रही थी।
कांग्रेस चीन के नमक का हक़ अदा नहीं कर पाएगी क्योंकि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट तो पूरा होकर रहेगा।

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