‘तुम्हारे लिए जहन्नुम बना देंगे…’ ईरान में सत्ता संग्राम तेज, राष्ट्रपति पेजेशकियान को कट्टरपंथी गुटों ने धमकाया


अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। एक ओर अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार आठवें दिन हवाई हमले किए, वहीं ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और एक जवान लापता बताया गया।

दूसरी तरफ ईरान के भीतर भी राजनीतिक संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अमेरिका से बातचीत करने वाले नेताओं के खिलाफ कट्टरपंथी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी ने सत्ता संघर्ष की अटकलों को और तेज कर दिया है।

जॉर्डन में हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, आठवें दिन भी जारी रही बमबारी

जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अब भी लापता बताया जा रहा है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा किए जा रहे खतरे को कम करना है। अमेरिका ने दावा किया कि इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

दो अमेरिकी सैनिकों की मौत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि दोनों जवान देश की सेवा करते हुए बलिदान हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि सैनिकों का बलिदान अमेरिका के संकल्प को और मजबूत करेगा।

ईरान में सरकार के खिलाफ भड़का गुस्सा, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री बने निशाना

बाहरी युद्ध के बीच ईरान के भीतर भी राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के खिलाफ भीड़ ने ‘समझौतावादी मुर्दाबाद’ के नारे लगाए, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पथराव किया गया।

कट्टरपंथी गुटों ने उन्हें ‘गद्दार’ और ‘बिकाऊ’ तक कहा। इन गुटों का आरोप है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम और बातचीत कर सरकार ने इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों और सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों से समझौता किया है। उनका दावा है कि सरकार बदले की कार्रवाई करने के बजाय वॉशिंगटन के साथ समझौते का रास्ता अपना रही है।

‘हम होंगे, ब्लेड होगा और सामने आपका गला’, राष्ट्रपति को खुली धमकी

अली खामेनेई के उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही मौजूदा हालात पर कोई सार्वजनिक बयान दिया है। उनकी इस गैर-मौजूदगी ने सत्ता संघर्ष की अटकलों को और हवा दे दी है।

कट्टरपंथी धड़ों का आरोप है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची नए सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर सत्ता अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी बीच राजनीतिक विवाद खुली धमकियों तक पहुँच गया। सरकार समर्थक कट्टरपंथी मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति पेजेशकियान को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सर्वोच्च नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारे हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला होगा। हम तुम्हारे लिए जहन्नुम बना देंगे।”

दूसरी ओर तख्तापलट की आशंका जताने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया, जिसे सरकार द्वारा कट्टरपंथी धड़े की बढ़ती सक्रियता पर लगाम लगाने की कोशिश माना जा रहा है।

दो मोर्चों पर घिरा ईरान, बढ़ सकता है पश्चिम एशिया का संकट

युद्धविराम टूटने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने अमेरिका को ‘अविस्मरणीय सबक’ सिखाने की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में ईरान एक साथ दो बड़े संकटों का सामना कर रहा है।

एक तरफ अमेरिका के साथ तेज होता सैन्य संघर्ष है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच टकराव खुलकर सामने आ चुका है। यदि यह आंतरिक संघर्ष और गहराता है, तो इसका असर केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।

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