न्यायपालिका में अंदरूनी टकराव शुरू हो गया क्या? राजस्थान के एक्टिंग चीफ जस्टिस के खिलाफ शिकायत जस्टिस संदीप मेहता को देने की बजाय CJI सूर्यकांत को क्यों नहीं दी गई

सुभाष चन्द्र

राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को 26 सितंबर, 2026 को रिटायर होना है। लेकिन ठीक उनके रिटायरमेंट के दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को 2 अगस्त, 12 अगस्त और 17 अगस्त को तीन पत्र लिखकर एक्टिंग चीफ जस्टिस शर्मा की जगह किसी और को हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने के लिए कहा।

जस्टिस संदीप मेहता ने जस्टिस शर्मा पर मामलों की लिस्टिंग और Misuse of Administrative Authority का आरोप लगाया। X पर एक  पोस्ट में कहा गया कि ने राजस्थान हाई कोर्ट के कई जज मुझे मिले और उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा अपने साथी जजों को ट्रांसफर समेत “ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई” की धमकी देते हैं क्योंकि उनके सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से घनिष्ठ संबंध हैं।

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस शर्मा को Fair Opportunity देने की बात की है और यह भी कहा है कि आरोप से दोष साबित नहीं होता। जस्टिस मेहता के आरोपों पर आंतरिक जांच की जा रही है लेकिन यह कोई नहीं जानता उसकी रिपोर्ट जस्टिस शर्मा के रिटायर होने से पहले आएगी भी या नहीं?

एक केस की सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जजों को चेतावनी दी थी कि वे रिटायरमेंट से पहले “छक्के” मारने की कोशिश न करें। इस बात का मतलब साफ़ निकलता है कि “छक्के” मारने वाले निर्णय “पक्षपातपूर्ण” होते हैं और कमाई का साधन भी हो सकते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि राजस्थान हाई कोर्ट के जजों ने केवल जस्टिस संदीप मेहता को शिकायत क्यों की? केवल इसलिए कि वो भी राजस्थान से आते हैं। राजस्थान से आने का यह मतलब नहीं है कि वो राजस्थान के प्रतिनिधि हैं। वो सुप्रीम कोर्ट के जज हैं और सभी राज्यों को बराबर दृष्टि से देखना उनका कर्तव्य है न कि अपने गृह राज्य पर केंद्रित होना। हाई कोर्ट के जजों को शिकायत थी तो सीधे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को करनी चाहिए थी।

जस्टिस संदीप मेहता का यह आरोप निराधार लगता है कि जस्टिस शर्मा मामलों की लिस्टिंग में मनमानी करते हैं। ऐसा तो हर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी होता मिलेगा। जब से लालू यादव ने झारखंड हाई कोर्ट में अपनी 5 सजा के खिलाफ अपील की हैं, हाई कोर्ट में 8 चीफ जस्टिस रहे हैं लेकिन किसी ने एक भी मामले की सुनवाई नहीं की। दिल्ली हाई कोर्ट 2G मामले में CBI/ED की अपील 8 साल से लिए बैठा है। राहुल गांधी के मामले सुप्रीम कोर्ट और अन्य कोर्ट में वर्षों से लटक रहे हैं और जस्टिस संजीव खन्ना तो केजरीवाल की मौज करा गए।

एक महीने बाद जस्टिस शर्मा रिटायर हो जाएंगे। लगता है जस्टिस संदीप मेहता ने उनके खिलाफ “रिटायरमेंट” से पहले “छक्का” मार दिया। अगर किसी और हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर भी दिया तो वो एक महीने भी वहां गुल खिला सकते हैं। एक कहावत है जिसने कमाई करनी है, वो लहरों को गिनने में भी कमा लेता है।

लगता है जस्टिस संदीप मेहता के जो करीबी जज हैं हाई कोर्ट में, उनकी वजह से मेहता जी को शर्मा जी के खिलाफ कोई निजी रंजिश पैदा हुई है। 

वैसे जस्टिस संदीप मेहता का जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से मिले 15 करोड़ के अधजले नोटों की बारे में क्या कहना है? याद रहे सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया लेकिन संसदीय समिति ने वर्मा को दोषी पाया है।

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