प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज पूरे देश में सनातन विरासत को सहेजने और कल्चरल टूरिज्म को नई ऊंचाई देने का ऐतिहासिक कार्य हो रहा है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाकर राज्य को भयमुक्त माहौल दिया है और विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण से देश में सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व पंख लगे हैं। पावन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जब मथुरा-वृंदावन में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है, तो उनकी सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए आधुनिक व्यवस्था की आवश्यकता और भी प्रखर हो उठती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी खोई जमीन तलाश रहे विपक्षी दलों को यह विकास और सांस्कृतिक जागरण पच नहीं रहा है। वोट बैंक को साधने और तुष्टीकरण की पुरानी राजनीति के तहत अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बांके बिहारी कॉरिडोर का विरोध करने पर उतर आई हैं। संभल से लेकर वृंदावन तक, आस्था के केंद्रों के पुनरुद्धार को रोकने की यह साजिश सीधे तौर पर प्रदेश के विकास और लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को बाधित करने का कुत्सित प्रयास है।
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— Himanshu Jain (@HemanNamo) June 29, 2026
Vrindavan’s iconic, centuries-old Kunj Galis are on the cusp of their biggest transformation in modern history. The Uttar Pradesh Government’s ₹500+ crore Shri Banke Bihari Temple Corridor Project aims to decongest the shrine and create a world-class 5-acre spiritual… pic.twitter.com/aFRJjSjI1c
मथुरा-वृंदावन बना 2027 की राजनीति का नया अखाड़ा: पश्चिमी यूपी में ध्रुवीकरण की फिराक में विपक्ष
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मुहाने पर खड़े राज्य में मथुरा-वृंदावन अब सियासी टकराव का नया केंद्र बन चुका है। एक तरफ बीजेपी की डबल इंजन सरकार कॉरिडोर, सुगम दर्शन और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए ब्रज को विकास का वैश्विक मॉडल बनाने में जुटी है, वहीं मुद्दाविहीन विपक्ष स्थानीय विस्थापन और बुनियादी समस्याओं का झूठा हौव्वा खड़ा कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई जमीन तलाश रहा है। आने वाले समय में बांके बिहारी कॉरिडोर का यह विषय केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पश्चिमी यूपी में राष्ट्रवाद और विकास बनाम अवसरवादी तुष्टीकरण की राजनीति के बीच एक निर्णायक चुनावी बहस का रूप लेगा।
विकास के नाम पर विपक्ष का प्रलाप: अजय राय और प्रदीप माथुर के बेबुनियाद आरोप
बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा की आवश्यकता को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने परियोजना पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने वृंदावन पहुंचकर इसे विकास के नाम पर विध्वंस करार दिया और काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प की तुलना करते हुए बेतुके आरोप लगाए कि स्थानीय पहचान खत्म की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने भी भ्रम फैलाते हुए दावा किया कि कॉरिडोर के जरिए सेवायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं और बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है। असल में कांग्रेस का यह विरोध श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के प्रति उसकी घोर उपेक्षा को ही दर्शाता है।
राहुल के ‘ग्रंथ ज्ञान’ का ढोंग: जब सब पढ़ा तो हिंदू आस्था से बैर क्यों?
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सार्वजनिक मंचों पर दावा करती रही हैं कि राहुल गांधी ने दुनिया भर के धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया है, जिनमें रामायण, महाभारत, गीता और वेद-पुराण शामिल हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि राहुल गांधी और उनकी पार्टी भारतीय सनातन संस्कृति और शास्त्रों के इतने बड़े ज्ञाता हैं, तो फिर हिंदू आस्था के केंद्रों के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के हर प्रयास का विरोध कांग्रेस क्यों करती है? काशी विश्वनाथ से लेकर बांके बिहारी तक, हर पवित्र धाम के पुनरुत्थान में अड़ंगा लगाना कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र और ढोंग की पोल खोल देता है।
हे भगवान! बको सुनकर शर्म आनी चाहिये कि राहुल गांधी ने वेदों और अनेक धार्मिक ग्रन्थों को पढ़ा है,क़ुरान ही नहीं विश्व भर के धर्म ग्रन्थों को पढ़ा है,बहुत बड़े वाले खिलाड़ी है,नेशनल चैम्पियन भी रहे है।कितनी योग्यता है भाई कोई प्र मं बना दो। pic.twitter.com/KreGbISS3J
— Nutan (@nutan_gyan) September 2, 2026
विभाजन की नींव रखने वाली कांग्रेस का सनातन के प्रति पुराना वैमनस्य
कांग्रेस का यह रुख कोई नया नहीं है। सत्ता की लालसा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में धर्म के आधार पर देश का विभाजन स्वीकार करने वाली कांग्रेस आज भी उसी विभाजनकारी सोच पर चल रही है। तुष्टीकरण की नीति को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस दशकों तक भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाती रही और अब संभल के प्राचीन स्थलों से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी धाम तक हिंदुओं के पूज्य स्थलों के सुंदरीकरण और विकास को रोकने के लिए भ्रम का जाल बुन रही है।
सपा का दोहरा रुख: विकास के हर कदम पर रोड़ा अटकाने की आदत
समाजवादी पार्टी भी इस मामले में कांग्रेस से पीछे नहीं है। जून 2025 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन वृंदावन पहुंचे और कॉरिडोर का विरोध करने वालों को हवा दी। सपा हमेशा से तुष्टीकरण की सियासत के जरिए एक खास वर्ग को खुश करने के लिए बहुसंख्यक समाज की आस्था से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर सवाल खड़े करती रही है। विस्थापन और स्थानीय अधिकारों की आड़ लेकर सपा असल में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और वृंदावन के आधुनिकीकरण के खिलाफ खड़ी दिख रही है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 50 लाख से अधिक श्रद्धालु: क्यों अनिवार्य है भव्य सुरक्षा और कॉरिडोर?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मथुरा-वृंदावन में धार्मिक उत्साह चरम पर नजर आया और प्रशासनिक अनुमानों के मुताबिक उत्सव में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य कार्यक्रम के अलावा बांके बिहारी मंदिर, द्वारिकाधीश, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में देश-विदेश से लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। इतने विशाल जनप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए मंदिरों और प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल तथा पीएसी के जवानों की तैनाती करनी पड़ी। 50 लाख से अधिक भक्तों की यह ऐतिहासिक आमद स्पष्ट रूप से सिद्ध करती है कि संकरी गलियों के भरोसे मथुरा-वृंदावन को नहीं छोड़ा जा सकता और बांके बिहारी कॉरिडोर जैसी आधुनिक व्यवस्था श्रद्धालुओं के जीवन की सुरक्षा के लिए कितनी अपरिहार्य बन चुकी है।
सनातन संस्कृति के केंद्रों का विकास अनवरत जारी रहेगा: सीएम योगी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा पहुंचकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण के कार्यों में जनता के साथ खड़ी है तथा बांके बिहारी मंदिर, बरसाना, वृंदावन और गोवर्धन सहित पूरे ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों की आस्था कृष्ण, राम और भगवान विश्वनाथ में नहीं है, वे जनता की धार्मिक भावनाओं को कभी नहीं समझ सकते। उन्होंने साफ किया कि समाज में विभाजन और अविश्वास फैलाने वाले तत्वों के मंसूबों को सरकार कभी सफल नहीं होने देगी और सनातन संस्कृति के केंद्रों का विकास अनवरत जारी रहेगा।
यह सरकार तो कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्री राम, बाबा विश्वनाथ और माँ विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है... pic.twitter.com/rItLZY5kmd
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 4, 2026
मंदिर फंड पर विपक्ष का सफेद झूठ: ठाकुर जी के नाम ही होगी भूमि की रजिस्ट्री
कांग्रेस और सपा जनता के बीच यह भ्रामक प्रचार कर रहे हैं कि सरकार मंदिर का खजाना और फंड हड़पना चाहती है। जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार ने अदालत और सार्वजनिक मंचों पर साफ किया है कि कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की जाने वाली 5 एकड़ भूमि सीधे तौर पर स्वयं ‘ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज’ के नाम ही दर्ज होगी। निर्माण और विकास कार्यों का मुख्य वित्तीय भार भी राज्य सरकार अपने बजट से वहन कर रही है। विपक्ष का यह अनर्गल प्रलाप केवल श्रद्धालुओं को भड़काने और मंदिर के विकास को रोकने की सोची-समझी चाल है।
सेवायतों का सम्मान सुरक्षित, बिचौलियों के सिंडिकेट पर चोट
विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है कि प्रस्तावित मंदिर न्यास के जरिए स्थानीय गोस्वामियों और सेवायतों के अधिकार छीन लिए जाएंगे। हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। प्रस्तावित कानून में स्वामी हरिदास जी के वंशज गोस्वामी समाज के पूजा, सेवा, भोग और पारंपरिक धार्मिक अधिकारों को पूर्ण विधिक संरक्षण दिया गया है। ट्रस्ट में सेवायत प्रतिनिधियों की अनिवार्य भागीदारी तय की गई है। सरकार का उद्देश्य सेवायतों का हक छीनना नहीं, बल्कि मंदिर के नाम पर सक्रिय अवैध बिचौलियों, फर्जी गाइडों और श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली करने वाले सिंडिकेट पर नकेल कसना है। विपक्ष असल में इसी सिंडिकेट के बचाव में ढाल बनकर खड़ा है।
वर्ष 2025 में 156 करोड़ पर्यटक प्रदेश में आए...
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 3, 2026
यह बदलते उत्तर प्रदेश का प्रमाण है,
यह बेहतर कनेक्टिविटी का प्रमाण है,
यह मजबूत कानून-व्यवस्था का प्रमाण है,
यह विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का भी प्रमाण है... pic.twitter.com/yN0JdthZzn
गर्भगृह अछूता: कुंज गलियों के वास्तविक स्वरूप की रक्षा
अजय राय और विपक्षी नेता लगातार यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि कॉरिडोर से वृंदावन का प्राचीन स्वरूप और कुंज गलियां समाप्त हो जाएंगी। जबकि सरकार का प्लान स्पष्ट करता है कि मंदिर के प्राचीन गर्भगृह, पारंपरिक वास्तुशिल्प और आंतरिक स्वरूप को तनिक भी स्पर्श नहीं किया जाएगा। 5 एकड़ का होल्डिंग और सर्कुलेशन एरिया मंदिर के बाहरी परिधि क्षेत्र में बनाया जा रहा है। जब प्रतिदिन उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को बाहरी गलियारे में प्रबंधित कर लिया जाएगा, तब जाकर आंतरिक कुंज गलियों को अत्यधिक दबाव और जाम से मुक्ति मिलेगी तथा संतों और स्थानीय निवासियों के लिए वृंदावन का मूल शांत स्वरूप सुरक्षित रहेगा।
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