सत्य निकेतन की बिल्डिंग गिरने के मामले में जो गिरफ्तार हुए उनकी आयु भी देख लो; जीते जी तो सजा मिल नहीं पाएगी; जो अधिकारी सस्पेंड हुए, उनके घरों और संपत्तियों की जांच हो

सुभाष चन्द्र

सत्य निकेतन की जो बिल्डिंग गिरी और 6 लोग मारे गए, इसमें भवन के मालिक हरिराम गुप्ता, उसकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। हरिराम की आयु 81 वर्ष है, उर्मिला की 75 वर्ष और बेटे महेश की 52 वर्ष है

हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और महेश को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर और देर सवेर वो भी न्यायिक हिरासत में जाएगा

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यह मुकदमा साल 6 महीने में तो ख़त्म होने वाला नहीं है इसकी पूर्ति में कम से कम 10 साल मान कर चलें और तब की उम्र में पति पत्नी को क्या सजा होगी, ईश्वर ही जाने अभी तो अधिक आयु के कारण उनका बीमार पड़ना स्वाभाविक है और सरकार को उनका इलाज भी कराना पड़ेगा

इसके अलावा लापरवाही के लिए जिम्मेदार दक्षिणी जोन के उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षक अभियंता (भवन) रणवीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, AE सुनील चौहान और JE आशीष कुमार को सस्पेंड किया गया है

लेकिन इस पूरे प्रकरण में पुलिस क्यों अछूता छोड़ दिया? क्या सरकार को नहीं मालूम कि नगर निगम का भवन विभाग बिना रिश्वत लिए मंजूरी नहीं देता तो पुलिस भी एक लेंटर का 50 से 60,000 रूपए लेती है। पहले घरेलू मरम्मत के लिए पुलिस कुछ नहीं कहती थी लेकिन अब तो दीवार का हो, चु रही छत या टूट रहे फर्श की मरम्मत करने पर पुलिस बिना रिश्वत लिए नहीं रहती। जबकि नगर निगम ने इन कामों को करवाने की छूट दे रखी है। ये वो कटु सच्चाई है जिसे कोई नहीं नकार सकता।     

इन लोगों के कार्यकाल में जितने भी भवन अनाधिकृत रूप से बने, उन सबकी जांच होनी चाहिए जब ये लोग दूसरों के भवन अनाधिकृत बनने की मंजूरी दे सकते हैं तो अपने घरों को खड़ा करने में तो सभी नियम ताक पर लगा दिए होंगे इन सबके घरों का निरीक्षण होना चाहिए कि कितना हिस्सा अनाधिकृत बना रखा है जिसे तुरंत गिरा देना चाहिए

केजरीवाल & कंपनी को राजनीति करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके समय में भी कई भवन गिरे थे उसने तो अपना शीश महल भी बिना नक्शा पास कराए बना लिया था अगर वो भाजपा सरकार को दोष देना चाहता है क्योंकि आज उसकी सरकार है तो 30 साल पहले जब ये भवन बना था तब तो शीला दीक्षित की सरकार थी, उसे दोष देना चाहिए

अनधिकृत निर्माण बिना निगम के अधिकारियों की मर्जी नहीं हो सकता अभी सुना है 41 जर्जर भवनों को नोटिस दिया गया है लेकिन यह काम नोटिस से नहीं होगा एक विशेष टीम तुरंत सभी भवनों का निरीक्षण करे और जो भी अवैध निर्माण पाया जाए, उसे तुरंत बुलडोज़र से गिरा देना चाहिए 

जो भी अधिकारी निलंबित किए गए हैं, उनकी संपत्ति की जांच ED को सौंप देनी चाहिए बल्कि 41भवनों के अनधिकृत निर्माण के लिए भी जो अधिकारी जिम्मेदार हैं उनकी भी संपत्ति की जांच करा लेनी चाहिए

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