बेगम स्वरा भास्कर ने उगला सनातन के विरुद्ध जहर

आपको क्या लगता है स्वरा भास्कर ऐसे ही कुछ भी बकवास कर गई है?

GenZ प्रोटेस्ट के बाद ही अचानक हिंदू धर्म और इसके इतिहास पर प्रहार तेज हो गए हैं..
पहले राहुल जी का मनुस्मृति वाला बयान..
अभी स्वरा का जौहर पर की गई शर्मनाक टिप्पणी..
वामपंथी गैंग पहले भी एक्टिव होते थे होली दिवाली पर..
वो ज्ञान देते थे कैसे पर्यावरण को नुकसान हो रहा,कैसे होली में महिलाओं की अस्मिता को खतरा होता है आदि आदि..
चूंकि वामपंथियों को बुद्धिजीवी माना जाता था तो सीधे सादे लोग समझते थे बात तो सही बोल रहे ये लोग..
पर जल्दी ही लोगों को इनका एजेंडा समझ आने लगा और इन वामपंथियों के विरोध में खुल के लिखने लगे..
अपने त्योहारों को और धूम धाम से मनाने लगे..
महिलाओं ने समझा कि ये सिंदूर का विरोध करने वाली वामपंथनें खुद फ्रस्ट्रेट हैं जिंदगी में इसलिए इतना जहर उगल रहीं..
और जब चारों तरफ से इस गैंग का विरोध हुआ तो ये दुम दबा के गायब हो गए..
तीज त्योहारों पर इनका जहर भरा पोस्ट या बयान आना बंद हो गया..
अब जब GenZ प्रोटेस्ट के बाद इस गैंग को समझ आ गया कि कम उम्र के लड़के लड़कियाँ मोदी जी से नाराज हैं तो यह मोदी जी की बुराई करने के बहाने धीरे धीरे धर्म पर प्रहार करने लगे..
बच्चों को परिवारवाद के खिलाफ भड़काने लगे..
अपने इतिहास पर शर्म और नफरत करना सिखाने लगे..
स्वरा ने कैसे चालाकी से जौहर की स्थिति को बलात्कार से जोड़ दिया अगर आप विचार करोगे तो पाओगे ये सब कैसे नई पीढ़ी को भ्रामक जानकारी देकर उन्हें उनके धर्म से विमुख करना चाहते हैं, उनके इतिहास से उन्हें गर्व करना सिखाने के बजाए शर्म करना सिखाना चाहते हैं..
2026 में भी कोई स्त्री किसी पुरुष द्वारा उसकी मर्जी के बिना खुद को छूने भर की भी कल्पना नहीं कर सकती..
लेकिन फिर भी न चाहते भी कहीं किसी कोने में किसी बहन बेटी का ब लात्कार हो जाता है..
जिसके लिए कानून में दंड का प्रावधान हैं और दोषियों को कठोर से कठोर सजा मिलती है..खैर इसमें तो मृत्युदंड से नीचे कुछ भी स्वीकार नहीं होना चाहिए..
और पीड़िता को भी आगे सहज जिंदगी जीना चाहिए जिसमें समाज और परिवार का कर्तव्य है उसके साथ खड़ा होना..
लेकिन आज से सात आठ सौ साल पहले स्त्रियों को पता चला होगा कि जब उसके राज्य पर हमला होगा तो उनका सिर्फ़ ब लात्कार नहीं होगा अपितु वह ताउम्र एक से क्स स्लेव बन कर रह जाएगी..
उसके लिए कोई कानून नहीं, उसके रे पिस्टों का ही शासन रहेगा तो उसके पास क्या विकल्प बचता?
इस ताउम्र की गुलाम भोग्या बनने के अलावा कोई ऑप्शन था क्या?
वह 1300 ईस्वी हो 2026 कोई भी स्वाभिमानी स्त्री मृ त्यु ही चुनेगी..
हाँ!अगर वह योनि विनिमय ना कर रही हो तो..
(योनि विनिमय अर्थात किसी पुरुष के साथ संबंधन बनाने के बदले उनसे पैसे या कोई वस्तु लेना अर्थात प्रॉस्टीट्यूशन))
लेकिन जौहर ही क्यों?
क्योंकि जब बात जबरदस्ती की है तो हमारे मृत शरीर को भी कोई पुरुष ना छू पाए..
और बस रानी पद्मिनी और हजारों रानियों ने जौहर का चुनाव किया अपनी मर्जी से..
किसी पुरुष ने नहीं कहा था ऐसा करने को..वह उनकी अपनी मर्जी थी..
तुम चाहे देश जीत लो,दुनिया जीत लो लेकिन एक स्वाभिमानी स्त्री के सतीत्व को कभी नहीं जीत पाओगे..
अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मिनी का मृ त शरीर तक नहीं मिला..
उसकी जीत को रानी पद्मिनी के सतीत्व ने हरा दिया..
लेकिन एक दो टके की वामपंथन जिसको अब कोई नहीं पूछ रहा वह अपने वक्षों की प्रदर्शनी लगा कर जौहर और रानी पद्मिनी पर टीका टिप्पणी कर रही ताकि कोई तो उसको देखे..
उसके अंगों की खूबसूरती को निहारे..
नेगेटिव पब्लिसिटी तो हो..
और नई पीढ़ी सोचने लगे कि हमारे धर्म में कितनी खामियां हैं..
लेकिन रसभरी की ऐसी रसीली स्वरा भास्कर मेरे जूते की नोक पर.

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