तथाकथित गोदी मीडिया और विपक्ष में से किसी ने माँ का दूध नहीं पिया जो मस्जिद, दरगाह और मदरसों में हुए घोटालों पर चर्चा तक सकें। राममन्दिर चंदा चोरी पर कई दिनों तक टीवी पर चर्चा हो सकती है लेकिन चर्च, मस्जिद, दरगाहों और मदरसों के घोटालों पर मुंह खोलने तक की हिम्मत नहीं, क्यों? विपक्ष को तो अपने वोटबैंक का लालच है लेकिन मीडिया को किसका लालच है?
ऑपरेशन सिंदूर के हीरो रहे एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा जी को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी भगवान भोले नाथ के प्रति अटूट आस्था रही है और प्रभु राम की सेवा मिलना ईश्वरीय आदेश है।
श्री मदन मोहन पांडेय और डॉ निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है और डॉ महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इन सभी को नियुक्ति पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। प्रभु श्री राम से उन्हें कार्य निष्पादन की शक्ति मिले।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
आज उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय कह रहा है कि CEO मिश्र की नियुक्ति मंदिर में हुई चोरी को वैध ठहराने के लिए की गई है। बाहर से CEO को नियुक्त न करके साधु संतों और शंकराचार्यों को यह काम देना चाहिए था।
कांग्रेस का एक नेता इमरान मसूद कह रहा है मंदिर चलाना साधु संतों, पुजारियों और ब्राह्मणों का काम है। RSS की नज़र मंदिर के पैसे पर है और जितेंद्र मिश्र RSS के जाल में फंस गए हैं।
आरएसएस कोई कांग्रेस की तरह राजनीतिक पार्टी नहीं है जो किसी भी राज्य में सरकार बनते ही कमाई शुरू कर देती है। कांग्रेस ने 10 साल के केंद्र में राज में करोड़ों की लूट मचाई। तुम कहते हो मंदिर चलाना ब्राह्मणों का काम है लेकिन समाजवादी पार्टी कहती है कि ब्राह्मण वेश्याओं से भी ज्यादा गिरे हुए होते हैं।
इमरान मसूद के अलावा राशिद अल्वी भी भड़क रहा है। तुम लोग मुस्लिम हो, तुम अपनी कौम पर ध्यान दो, तुम्हें मंदिरों पर बोलने का क्या मतलब है और इमरान मसूद तो मोदी की बोटी बोटी करने वाला शातिर खिलाड़ी है।
अखिलेश यादव अलग तड़प रहा है कि नियुक्तियों का दिखावा हुआ है जबकि ये सब भाजपा ने किया है। जो कुछ मंदिर में हुआ वो भगवान राम से छुपा हुआ नहीं है लेकिन राम के नाम पर मंदिर में चोरी हुई।
ठीक बात है जो चोरी हुई वो भगवान राम से छुपी नहीं है जैसे तुम्हारी पार्टी का राम भक्तों पर गोली चलाना राम जी से छुपा नहीं था और सही समय आने पर तुम्हें दंड मिला। जो भी चोरी में शामिल रहे और या जो उनके पीछे थे उन सबका हिसाब राम जी ही करेंगे।
तुम अखिलेश जी अपना समय कैसे भूल गए जब 2006 और 2007 में लखनऊ, फैज़ाबाद और वाराणसी में सीरियल धमाके करने वाले आतंकियों के केस आपने वापस ले लिए थे। वो तो राम मंदिर में चोरी से भी बड़ा महापाप था और आज आप राम मंदिर की बात कर रहे हो।
विपक्ष क्या समझता है कोई सेना का अधिकारी राम भक्त नहीं हो सकता और क्या उसे ईश्वर में आस्था रखने का कोई अधिकार नहीं है। विपक्ष जितेंद्र मिश्र जी पर क्यों उंगली नहीं उठाए जब वो पाकिस्तान से हर टकराव पर सेना के शौर्य पर सवाल उठाते हुए सबूत मांग रहा था।
अखिलेश जी मस्जिद में अपनी पत्नी का मौलाना द्वारा किया अपमान भी सहन कर गए क्योंकि वो अपमान करने वाले मौलाना थे और डर था मुस्लिम वोट बैंक न छिन जाए। वोट बैंक के लिए पत्नी का अपमान भी कबूल है लेकिन हिंदुओं के मंदिर के खिलाफ कुछ भी बोल सकते हैं और मुस्लिम वोट बैंक के लिए आज तक रामलला के दर्शन को नहीं गए।

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