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मुहर्रम पर हुए दंगों पर जेहादियों और आतंकियों के समर्थक हिन्दू-विरोधी हिन्दू और मौलाना क्यों खामोश हैं? किस कब्र में छुप गए गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाई देने वाले? किसकी साज़िश थी? क्यों नहीं जेहादियों को ब्लैकलिस्ट किया जाता?

आखिर इतना पीटने पर पाकिस्तान और भारत विरोधी क्यों आंखे दिखाते हैं, इस मुहर्रम ने साफ कर दिया कि भारत में आतंकियों के sleeper cell की कोई कमी नहीं। आतंकियों और जेहादियों को बेगुनाह बताने वाले बताएं कि अब किस मस्जिद के आगे DJ बजा, किसने जयश्री राम के नारे लगाए और किसने नमाज के दौरान भारत माता की जय के नारे लगाए। पता नहीं जेहादियों और आतंकियों को बचाने victim card खेलने वाले किस कब्र में छुप गए हैं? केन्द्र और राज्य सरकारों को इन दंगाई पर रासुका लगाने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए साथ में इस कार्यवाही का विरोध करने वालों का चाहे वह मानवाधिकार ही क्यों न हो? जब तक इस तरह की सख्ती नहीं होगी ये जेहादी और इनके आका भारत में शांति भंग करते रहेंगे। इस अति गंभीर मुद्दे पर निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट और इनकी पैरवी करने वकीलों के विरुद्ध बार कौंसिल को सख्ती से पेश आना होगा।      
बिहार के मोतिहारी में मुहर्रम जुलूस में विवाद के बाद हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। मृतक युवक की पहचान 22 वर्षीय अजय यादव के रूप में हुई है। इस्लामी कट्टरपंथियों ने अजय यादव पर तलवार से सिर पर वार किया। घटना में दो अन्य हिंदू युवक घायल हुए हैं। जबकि अजय की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मोतिहारी जिले के मेहसी थाना क्षेत्र के कनकट्टी बाजार की है। पुरानी रंजिश को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुहर्रम जुलूस की आड़ में अजय यादव की हत्या की साजिश रची। रविवार (06 जुलाई 2025) शाम 7 बजे क्षेत्र में मुहर्रम के ताजिया का जुलूस निकाला जा रहा था।

जुलूस में शिया मुस्लिम की भीड़ लाठी-डंडे, तलवार और बरछी लेकर करतब दिखा रहे थे। वही देखने अमवा निवासी अजय यादव, भाई धनंजय यादव और चचेरे भाई नवल किशोर यादव पहुँचे थे। तभी जुलूस में शामिल करतब दिखाने वाले लोगों से अजय यादव की कहासुनी हो गई। तभी तलवार भांज रहे एक मुस्लिम ने अजय के गले पर तलवार से वार किया। अजय के साथियों से भी मारपीट की।

घटना में अजय यादव बुरी तरह घायल हो गया, जिसके बाद उसे और बाकी दोनों घायलों को मेहसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहाँ डॉक्टर हरेंद्र कुमार रवि ने अजय यादव को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अजय के चचेरे भाई नवल किशोर को मुजफ्फरपुर SKMCH में बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

 वहीं, अजय के भाई धनंजय यादव ने घटना की पूरी जानकारी दी। धनंजय यादव ने कहा, “भैया पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। तलवार से सिर पर पीछे से मार दिया। गाँव का ही निजामुल आया और उन्हें गोद में उठा लिया। जब मना किया तो मुझे भी मारा।”

पुरानी रंजिश को लेकर मुहर्रम जुलूस की आड़ में रची हत्या की साजिश

घटना के बाद क्षेत्र में भारी सुरक्षाबल को तैनात किया गया है। मोतिहारी SP स्वर्ण प्रभात ने बताया कि मेहसी थाना क्षेत्र में घटना मोहर्रम जुलूस में हुई, लेकिन मोहर्रम से जुड़ी नहीं है। पुरानी रंजिश को दोनों पक्षों की आपस में मारपीट हो गई। 15 दिन पहले भी आपसी विवाद हुआ था। उस मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

वहीं, मृतक अजय यादव के भाई धनंजय यादव ने बताया कि पंचायत चुनाव में चचेरे भाई राजेश यादव प्रत्याशी थे। चुनाव के दौरान उनका निजामुद्दीन से विवाद हुआ था। तभी से मनमुटाव चल रहा है। अब निजामुद्दीन ने साजिश रचकर मुहर्रम जुलूस की आड़ में भाई अजय यादव की हत्या कर दी।

बता दें कि पुलिस ने मामले में शामिल 12 लोगों को हिरासत में लिया है। साथ ही इलाके में शांति का माहौल बनाए रखने की अपील की है।

BJP ने तेजस्वी यादव की चुप्पी पर किया सवाल

मोतिहारी में अजय यादव की हत्या पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने चुप्पी साधी हुई है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राजद को घेरा है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तेजस्वी यादव को यादव समाज का साथ न देने का आरोप लगाया है।
अमित मालवीय ने ट्वीट कर लिखा, “तेजस्वी यादव ने हाल ही में मंच से ‘शाहबुद्दीन ज़िंदाबाद’ के नारे लगवाए और उसके तुरंत बाद ही बिहार में अराजक तत्वों ने मुहर्रम के जुलूस की आड़ में हिंदू समाज पर हमले शुरू कर दिए।”
उन्होंने मोतिहारी में अजय यादव की हत्या का मामला बताते हुए कहा, “मोतिहारी में ऐसी ही एक घटना में अजय यादव की नृशंस हत्या कर दी गई। तेजस्वी यादव, जो स्वयं यादव समाज से आते हैं, ने अब तक इस हत्या पर एक शब्द नहीं बोला। क्या राजद की राजनीति में मुस्लिम तुष्टिकरण इतना हावी हो गया है कि यादव समाज की जान की कोई कीमत ही नहीं रह गई?”
तेजस्वी यादव के शहाबुद्दीन प्रेम को लेकर अमित मालवीय ने घेरते हुए कहा, “मुहर्रम के नाम पर हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में हुई हिंसा उसी शाहबुद्दीनवादी मानसिकता का परिणाम है, जिसे तेजस्वी यादव मंच से महिमामंडित कर रहे हैं।”

तेजस्वी यादव ने ‘शहाबुद्दीन जी अमर रहे’ के लगाए थे नारे

बता दें कि अमित मालवीय जिस शहाबुद्दीन की बात कर रहे हैं। वो वही शहाबुद्दीन है, जिसके अमर रहने के नारे तेजस्वी यादव ने राजद के स्थापना दिवस पर लगाए थे। और यह वही शहाबुद्दीन है, जिसका बिहार के सीवान जिले में राज चला करता था। गैंगस्टर के नाम पर शहाबुद्दीन ने कई मासूम लोगों की जान ली। इनमें चंदा बाबू के तीन बेटें भी शामिल हैं, जिनको तेजाब से नहला दिया गया था।
इसी शहाबुद्दीन के समर्थन में तेजस्वी यादव ने नारे लगाए। जबकि तेजस्वी यादव अपने ही समाज के युवक अजय यादव की इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा की गई हत्या पर खामोश हैं।

दूसरे देशों के लिए गड्ढे खोद रहे अमेरिका और चीन खुद भी ऐसे ही अपने गड्ढे में गिरेंगे; ब्रिटेन को 75 साल पुराने कर्म का फल मिलना शुरू हो गया है

सुभाष चन्द्र

अमेरिका और चीन ने न जाने कितने देशों को अस्थिर कर दिया। किस किस का नाम लीजिए, नाइजीरिया, सूडान, सोमालिया, इथोपिया, जिम्बाब्वे, कांगो, ईरान, इराक, सीरिया, फिलिस्तीन, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, वेनेजुएला, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, यूक्रेन, कज़ाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार - फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन और कनाडा भी है लेकिन उसके लिए मैं उन्ही देशों को जिम्मेदार मानता हूं आखिर क्या मिल रहा है अमेरिका और चीन को? 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अमेरिका और चीन एक बार अगर ब्रिटेन की हालत देख लें तो शायद कुछ समझ आए लेकिन अहंकार में डूबे ये दोनों मुल्क बस अपनी चौधराहट चाहते हैं

ब्रिटेन ने अत्यंत घिनौना खेल खेला था भारत का विभाजन करके और हिन्दू मुसलमानों के बीच स्थाई झगड़ा पैदा किया। 48 मुल्कों को ब्रिटेन ने अपनी गुलामी से मुक्त किया लेकिन टुकड़े केवल भारत के किए परंतु काल चक्र कभी कभी पूरा होने में और कर्मफल मिलने में समय लगता है जो ब्रिटेन को मिलना शुरू हो गया है आज ब्रिटेन उन्हीं मुस्लिमों के कारण गृहयुद्ध के मुहाने पर खड़ा है और भारत के 2 टुकड़े किये थे ब्रिटेन ने लेकिन उसके कई टुकड़े होंगे जैसा हिंदुओं का नरसंहार 1947 में हुआ वैसा ही ब्रिटेन के अंग्रेज़ों के साथ होना तय है

और जो आज ब्रिटेन में हो रहा है वह चीन और अमेरिका में भी होना निश्चित है चीन ने अपने यहां मुस्लिमों को कुचल दिया लेकिन समय का क्या पता कब कैसी करवट ले ले जो घुसपैठ वो Democratic Nations में कर रहा है, वो खेल उसके यहां होना कठिन जरूर है लेकिन असंभव नहीं है क्योंकि चीन में सत्ताधीशों को एक खतरा हमेशा रहता है कि कोई उनका तख्ता पलट न कर दे, फिर चाहे कितने भी प्रतिबंध लग जाए, सत्ता पलट सकती है

आज जो बांग्लादेश में हो रहा है उसे देखकर भारत के कुछ ढक्कन नेता खुश हो रहे हैं और कह रहे हैं हसीना तानाशाह थी और उसके साथ जो हुआ वो मोदी के साथ भी होगा ये लोग कभी चीन की तानाशाही पर बोलने की हिम्मत नहीं करते क्योंकि उन्हें फंडिंग उसी से होती है और कुत्ते अपने मालिक के सामने हमेशा नहीं भौंकते बस पूंछ हिलाते हैं

बांग्लादेश में जो कुछ हुआ और जो अब हिंदुओं के साथ हो रहा है, उसे देख लग रहा है हसीना को हटाने के साथ बांग्लादेश को हिंदुओं से मुक्त करने की भी साजिश थी महिलाओं के साथ हो रहे वहशीपन को भी देखकर खुश होने वाली अरफ़ा खानुम शेरवानी, राणा अयूब और महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिज़ा मुफ़्ती अपने अल्लाह से डरो और सोचो अगर तुम्हारे साथ कभी ऐसा हो गया तो क्या होगा? और यह बात अमेरिका को भी समझनी होगी कि बस कुछ समय की बात है, वहां भी नज़ारा ऐसा ही होगा

एक बार बांग्लादेश को देखकर फिर साबित हुआ कि इस्लाम को मानने वाले न खुद चैन से रह सकते  हैं और न दूसरों को रहने देते हैं यह सभी इस्लामिक देशों में हो रहा है हर मुल्क में सत्ता में बैठे हुए लोगों को अपने ही मुस्लिमों से डर रहता है कब कौन खेल उल्टा कर दे

अमेरिका को गर्व है हम 50 राज्य संगठित है, बिखरते देर नहीं लगेगी और चीन सोचे कि उसे कोई डर नहीं तो इन दोनों देशों को याद रहे सोवियत संघ भी इनकी तरह ही मजबूत था लेकिन 15 टुकड़े हो गए बस प्रतीक्षा करो अपने कालचक्र के पूरा होने की चीन नास्तिक है और अमेरिका ईसाई है लेकिन हिंदू दर्शन ही विश्वास करता है कि कर्म फल मिलता जरूर है

पश्चिम बंगाल में रामनवमी हिंसा पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, कहा –जहाँ त्योहार में भी शांति नहीं, वहाँ लोग चुनाव के लायक नहीं: ‘टाल दिया जाए लोकसभा चुनाव’

                                                                   कलकत्ता हाई कोर्ट
राम नवमी के मौके पर हुई हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने कड़ा रुक अपनाया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि जहाँ दो समुदाय 8 घंटे की भी शांति नहीं बना सकते, वहाँ चुनाव की कोई जरूरत नहीं है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 अप्रैल, 2024) को इस साल रामनवमी के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी घटनाओं का न्यायिक संज्ञान लिया और हिंसा के मामलों की सुनवाई की।

रामनवमी पर पश्चिम बंगाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि इस साल जिन निर्वाचन क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की है, उन जगहों पर वह लोकसभा चुनाव 2024 की मंजूरी नहीं देगी। अगर लोग शांति के साथ कोई जश्न नहीं मना सकते हैं, तब चुनाव आयोग से हमारी सिफारिश है कि ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव न हों।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने कहा, “हम चुनाव आयोग से सिफारिश करेंगे कि जब लोग कुछ घंटों के लिए शांति के साथ पर्व नहीं मना सकते हैं तब उन्हें संसदीय प्रतिनिधि चुनने का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसे में चुनाव (वहाँ पर) टाल दिए जाने चाहिए।”

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “कुछ छोटी घटनाओं के चलते बड़ा धमाका हो सकता है। ऐसा नहीं होता कि ये सारी घटनाएँ पहले से सुनियोजित होती हैं। त्योहार के दिन…किसी आदमी के ऊपर कोई चीज सवार हो जाती है और वह (हो सकता है बाकी लोगों को भड़काए)…लेकिन इस तरह की असिहष्णुता दोनों तरफ से है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग के सामने बहरामपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले चुनाव को टालने का प्रस्ताव रखेगा। हिंसा की घटनाओं के बारे में हाई कोर्ट ने राज्य से हलफनामा माँगते हुए मामले को 26 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है। इसमें याचिकाकर्ताओं की स्वीकारोक्ति भी दर्ज है कि यह पहली बार है कि बेहरामपुर में रामनवमी पर ऐसी हिंसा हुई।

हाई कोर्ट की बेंच ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियाँ कीं, जिसमें मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और शक्तिपुर में हिंसा की एनआईए या सीबीआई जाँच की माँग की गई थी। शक्तिपुर इलाके में यह हिंसा रामनवमी जुलूस के एक स्थानीय मस्जिद से गुजरने के तुरंत बाद हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। चीफ जस्टिस ने कहा कि समाचार रिपोर्टों की मानें तो कोलकाता में रामनवमी पर लगभग 33 कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। फिर मुर्शिदाबाद में ये कैसे हुआ?

देश भर में 17 अप्रैल 2024 को रामनवमी का त्योहार मनाया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर हिंसा भड़की। कोलकाता पूरी तरह से शांत रहा, लेकिन अन्य हिस्सों से हिंसा की खबरें आई। यही नहीं, मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ईसी) को ही जिम्मेदार ठहरा दिया था। हालाँकि चुनाव आयोग ने बंगाल में हिंसा होने पर 2 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिसमें मुर्शिदाबाद जिले के शक्तिपुर और बेलडांगा थाने के प्रभारी शामिल थे। ये अधिकारी अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में 17अप्रैल को हुई हिंसा को रोकने में विफल रहे थे। इसी मामले में हाई कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा है।