Showing posts with label #Bhagwan Srikrishan. Show all posts
Showing posts with label #Bhagwan Srikrishan. Show all posts

786 नंबर का सनातन धर्म से गहरा सम्बन्ध ; जानिए कटु सच्चाई को


'सच विचलित हो सकता है, पराजित नहीं', सनातन को धूमिल और अपमानित करने वालों की भीड़ जरूर बढ़ रही, लेकिन सनातन को बर्बाद करने वाले आये और गए, लेकिन सनातन युगों से स्थिर है। 
ऑफिस में 'अल्लाह', 'नमाज़', काबा और 786 आदि को सनातन से सम्बंधित कहने पर कई बार 'मुल्ला निगम' कहते थे, समय बड़ा बलवान होता है, देखिए मुसलमान ही इन्हें सनातन से सम्बंधित बता रहा है। फेसबुक और व्हाट्सअप पर मेरे ऑफिस सहयोगियों को शायद अब अहसास होगा कि मेरी बात में कितना दम है। दोस्तों, रोज पूजा करते विनती करो कि देश में Ex-Muslims की संख्या दिन-दुगनी रात चौकनी की तरह बढ़े। ताकि उस समय कही बातें धरातल पर चरितार्थ हों।क्योकि असली इस्लाम को बताने की हिम्मत सिर्फ इन Ex-Muslims में है।     
यह हिन्दुओं का दुर्भाग्य है कि 4+ अरब वर्षों प्राचीन सनातन धर्म को अपमानित करने वालो की जय-जयकार की जा रही। कुर्सी के भूखे बेशर्म नेता और उनकी पार्टियां सनातन को अपमानित करने में गौरवविंत हो रहे  हैं।
मुस्लिम कट्टरपंथियों ने अपनी दुकाने चलाने हिन्दू और मुस्लिम के बीच ही दरार नहीं डाली हुई बल्कि मुसलमानों को ही डराकर असली इस्लाम से दूर रखे हुए हैं। ये "सिर तन से जुदा" गैंग से हिन्दुओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन भूल रहे है कि हिन्दुओं का संयम टूटा इस गैंग का कोई सरगना घर से बाहर तक निकलने की हिम्मत करेगा। अभी कुछ ही महीनो पहले बौखलाहट में मौलाना मदनी ने रामलीला ग्राउंड दिल्ली में सच बोल ही दिया कि ॐ और अल्लाह एक हैं। दूसरे, अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के दिनों लखनऊ से News18 के लाइव शो 'भइया जी कहिन' में बुजुर्ग मौलाना अंसारी ने भी 'नमाज़' को संस्कृत शब्द बता दिया। इतना ही नहीं बाकायदा संधि विच्छेद कर मतलब भी समझाया। सच्चाई सामने आने में समय लगेगा, लेकिन उसका शंखनाद हो चुका है। क्योकि इस काम को कोई हिन्दू नहीं बल्कि Ex-Muslim वर्ग कर रहा है। 
हर सनातनी परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करे, यज्ञ करे कि मुस्लिम कट्टरपंथियों का बाजा बजाने भारत में इस्लाम छोड़ EX-Muslim बनने वालों की संख्या जल्दी से जल्दी 1 लाख से अधिक हो। दरअसल मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मुसलमानों को इतना डरा-धमका के रखा हुआ, कि सच्चाई जानने की कोई हिम्मत ही नहीं कर पाता। हिन्दू और मुस्लिम एक दूसरे को नफरत की नज़र से देखते हैं, उसके जिम्मेदार ये कट्टरपंथी तो हैं ही आम मुसलमान भी कम नहीं। इन Ex-Muslim का जलवा नूपुर शर्मा विवाद के दिनों यूट्यूब पर Jaipur Dialogue, Aaj और चैनल News Nation पर 'इस्लाम क्या कहता है' शो पर देखने को मिला। सुरमा भोपाली बन फिर रहे मौलानाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बारात चढ़ती देखी। वातानुकूलित कमरे में पसीना पोंछते देखा गया है। ढंग से कुरान की आयत भी नहीं पढ़ सके। वो भी इन Ex-Muslim ने बताया कि ऐसे पढ़ते हैं।  
इन Ex-Muslims के अलावा अब मुस्लिम महिलाएं भी आगे आ रही हैं। कई लाइव शोज में मौलाना पीटते देखे गए हैं। जब किसी चर्चा में मौलानाओं के पास कोई जवाब नहीं होता हिन्दुओं को विभाजित करने जातपात पर आ जाते हैं। जिसका करवाचौथ 2022 के दिन News 18 पर एंकर अमिश देवगन के 'आर पार' शो में दिखने को मिला, जब मौलाना ने ऋग्वेद का गलत उदाहरण देने पर परिचर्चा में सहभागिनी सुश्री शुभद्रा ने मौलाना रशीदी को जलील किया, अपने बचाव में एंकर अमिश महिला को बेइज्जती करने से रोकने पर अमिश ने कहा: 'मुंह में हाथ दिया है सुनना पड़ेगा'। माहौल इतना गर्म हो गया था कि अगर दोनों स्टूडियो में होते, निश्चितरूप से मौलाना की पिटाई हो गयी होती। इस पुरे प्रकरण की खासबात यह थी कि मौलाना के पास ऋग्वेद है, जिसकी पन्नी भी उसी दिन हटी। चला था ऋग्वेद पर प्रवचन देने। इस शो का पूरा वीडियो कई लेखों में डाल चूका हूँ। हिन्दू ही नहीं मुस्लिम महिलाओं ने तो महिला मुद्दे पर इनकी पिटाई तक कर दी, लेकिन ये हैं कि सुधरते नहीं। 
        
 
वैसे तो हर नंबर आपके लिए भाग्यशाली होता है, लेकिन कुछ नंबर ऐसे भी होते है जो सबसे ज्यादा भाग्यशाली की श्रेणी में रखे गए है। हम आज एक ऐसे ही नंबर की बात कर रहे है जो भाग्यशाली माना जाता है। दरअसल, हम बात कर रहे है 786 नंबर की। इस्लाम धर्म में इस नंबर को काफी भाग्यशाली माना जाता है। जैसे किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले हिंदू धर्म में भगवान गणेश जी की पूजा करके श्रीगणेश किया जाता है वैसे ही इस्लाम धर्म में 786 नबंर की इवादत करके काम की शुरूआत होती है। इस्लाम धर्म में 786 नबंर का मतलब बिस्मिल्लाह उर रहमान ए रहीम माना जाता है।

786 को जोड़ने(7+8+6) पर कुल अंक 21 आता, जो सनातन धर्म में शुभ माना जाता है। फिर 21 को जोड़ने(2+1) पर कुल अंक 3 यानि ब्रह्मा(सृष्टि रचियता), विष्णु(जगत पालनहार) और महेश(विनाशकारी/कल्याणकारी)। महेश यानि शिव जिन्हे आशुतोष(आशु मतलब जल्दी और तोष मतलब खुश होना) भी कहते हैं। क्योकि जब तक विनाश/कल्याण या कहा जाए कि धरती पर आया प्राणी मृत्यु को प्राप्त नहीं होगा, ब्रह्माजी सृष्टि कैसे रचेंगे और विष्णु कैसे पालनहार बनेंगे। 

दूसरा अंक आता है 7, सनातन धर्म में इसका भी बहुत महत्व है। विवाह में फेरे होते है सात(7)। जब गोवर्थन पर्वत की परिक्रमा करते हैं 5,7,9 या 11(व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर) होती हैं और जब मुस्लिम हज करते हैं, तब हाजी 7 चक्कर, जिसे हिन्दू परिक्रमा कहते हैं, लगाते हैं, 6 या 8 नहीं।       

इतना ही नहीं, कट्टरपंथी मौलानाओं ने भारतीय मुसलमानों को इतना डरा-धमका के रखा है, कोई सच्चाई जानने की हिम्मत भी नहीं कर पाता। अगर कोई हिम्मत कर लेता है तो उस पर अल्लाह का कहर लाज़िम कहकर भीखी बिल्ली से बुरी हालत बना देते हैं।  

786 का श्रीकृष्ण से सम्बन्ध 

इस्लाम में 786 नंबर को काफी तबज्जो दी जाती हैं। कई लोग इस नंबर के नोट अपने पर्स में रखते है तो कई लोग अपनी गाड़ियों का नंबर भी यही रखते है। इस्लाम धर्म में इस नंबर को पाक साफ माना जाता है। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि कई लोग इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी बताते हैं। पुराणों के अनुसार कृष्ण जी अपनी 7 छिद्रों वाली बांसुरी को तीन-तीन यानी 6 अंगुलियों से बजाया करते थे और वे देवकी के आठवें पुत्र थे। यानि तीनों अंक मिलकार 786 बनता है। इसके अलावा प्रसिद्ध शोधकर्ता राफेल पताई के अनुसार 786 नंबर की आकृति को देखा जाए तो यह एक संस्कृत में लिखा हुआ ॐ दिखाई देगी।

इस्लाम में 786 का महत्व

इस्लाम धर्म के लोगों का मानना है कि 786 का स्मरण करने के बाद शुरू किए गए हर काम में बरकक्त होती है। इस्लाम में इस अंक को सीधे अल्लाह से जोड़कर देखा जाता है। इस्लाम धर्म के मानने वाले लोग इस नंबर को बेहद पवित्र और अल्लाह का वरदान मानते हैं। यही कारण है कि इस्लाम धर्म को मानने वाले अपने हर कार्य में 786 को शामिल करते हैं। उनका मानना है कि जिस काम में 786 शामिल किया जाता है उसके होने में अल्लाह की पूरी मर्जी होती है। अंक ज्योतिष के अनुसार 786 को परस्पर जोड़ने पर (7+8+6=21) 21 प्राप्त होता है। अब यदि 21 को भी परस्पर जोड़ा जाए तो 3 प्राप्त होता है। तीन को करीब-करीब सभी धर्मों में शुभ अंक माना जाता है।

पशुपतिनाथ मंदिर मे नंदी के दर्शन क्यो नही करना चाहिए?

भारत सहित पूरी दुनिया में भोलेनाथ के सैकड़ो मंदिर और तीर्थ स्थान मौजूद है। जो अपने चमत्कारों और धार्मिकता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। वैसे तो भोलेनाथ के अनेको नाम है। उन्ही में से एक नाम है पशुपति मंदिर..यह मंदिर शिव के 12 ज्योतिर्लिगों में एक माना जाता है। इस मंदिर के बारें में कहा जाता है कि आज भी यहां पर भगवान शिव विराजमान है..पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3 किमी उत्तर-पश्चिम देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित है। यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में शामिल भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के आठ सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। नेपाल में यह भगवान शिव का सबसे पवित्र मंदिर है। जानिए इस मंदिर से जुड़े कुछ रहस्यों के बारें में। जिन्हें जानकर आप आश्चर्य चकित हो जाएगे..

1- भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों संख्या में भक्त यहां पर आते है। इस मंदिर में भारतीय पुजारियों की सबसे अधिक संख्या है। सदियों से यह परंपरा चलती चली आ रही है कि मंदिर में चार पुजारी और एक मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के ब्राह्मणों में से रखे जाते हैं।
2 - पशुपति मंदिर को 12 ज्योतिर्लिगों में से एक केदारनाथ का आधा भाग माना जाता है। जिसके कारण इस मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। साथ ही शक्ति और बढ़ जाती है।
3- इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग के पांचो मुखों के गुण अलग-अलग हैं। जो मुख दक्षिण की और है उसे अघोर मुख कहा जाता है, पश्चिम की ओर मुख को सद्योजात, पूर्व और उत्तर की ओर मुख को तत्वपुरुष और अर्धनारीश्वर कहा जाता है। जो मुख ऊपर की ओर है उसे ईशान मुख कहा जाता है। यह निराकार मुख है। यही भगवान पशुपतिनाथ का श्रेष्ठतम मुख है।
4- यह शिवलिंग बहुत ही कीमती और चमत्कारी है। माना जाता है कि यह शिवलिंग पारस के पत्थर से बना है। पारस का पत्थर ऐसा होता है कि लोह को भी सोना बना देता है।
5 - पशुपति मंदिर में चारों दिशाओं में एक मुख और एक मुख ऊपर की और है। हर मुख के दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंडल मौजूद है।
6 - इस मंदिर में बाबा का प्रकट होने के पीछे भी पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब महाभारत के युद्ध में पांडवों द्वारा अपने ही रिश्तेदारों का रक्त बहाया गया तब भगवान शिव उनसे बेहद क्रोधित हो गए थे। श्रीकृष्ण के कहने पर वे भगवान शिव से मांफी मांगने के लिए निकल पड़े। गुप्त काशी में पांडवों को देखकर भगवान शिव वहां से विलुप्त होकर एक अन्य स्थान पर चले गए। आज इस स्थान को केदारनाथ के नाम से जाना जाता है।
7 - शिव का पीछा करते हुए पांडव केदारनाथ भी पहुंच गए लेकिन भगवान शिव उनके आने से पहले ही भैंस का रूप लेकर वहां खड़े भैंसों के झुंड में शामिल हो गए। पांडवों ने महादेव को पहचान तो लिया लेकिन भगवान शिव भैंस के ही रूप में भूमि में समाने लगे। इस पर भीम ने अपनी ताकत के बल पर भैंस रूपी महादेव को गर्दन से पकड़कर धरती में समाने से रोक दिया। भगवान शिव को अपने असल रूप में आना पड़ा और फिर उन्होंने पांडवों को क्षमादान दे दिया। लेकिन भगवान शिव का मुख तो बाहर था लेकिन उनका देह केदारनाथ पहुंच गया था। जहां उनका देह पहुंचा वह स्थान केदारनाथ और उनके मुख वाले स्थान पशुपतिनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
8- इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि अगर आपने पशुपति मंदिर के दर्शन किए तो पूरा पुण्यपाने के लिए आपको केदार मंदिर में भी भोले के दर्शन करने जाना पडेगा। क्योंकि पशुपतिनाथ में भैंस के सिर और केदारनाथ में भैंस की पीठ के रूप में शिवलिंग की पूजा होती है।
9- पशुपति मंदिर को लेकर मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति यहां पर दर्शन के लिए आता है तो उसे किसी जन्म में पशु की योनि नहीं मिलती है।
10- इस मंदिर को लेकर एक दूसरी मान्यता यह भी है कि अगर आपने पशुपति के दर्शन किएं तो आप नंदी के दर्शन न करें। नहीं तो आपको दूसरे जन्म में पशु का जन्म मिलेगा। केदारनाथ जी के दर्शन करने के बाद अगर आपको नंदी दर्शन होता है, तो दोष नही लगता।
11- इस मंदिर के बाहर एक घाट बना हुआ है जिसे आर्य घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट के बारें में कहा जाता है कि सिर्फ इस घाटका ही पानी मंदिर के अंदर जाता है। और किसी जगह के पानी को ले जाना वर्जित है।
पशुपतिनाथ की जय हो, हर-हर महादेव, जय महाकाल, जय गोविंदा