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ब्रिटेन : नाक फोड़ी, दाँत तोड़े और पुलिस को मारे लात-घूँसे: लंदन की सड़कों पर एक साथ उतरे 1.5 लाख अंग्रेज, क्यों निकाली गई ‘यूनाइट द किंगडम’ रैली

               लंदन में अप्रवासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे 1.50 लाख लोग (साभार: The Guardian)
ब्रिटेन के लंदन में शनिवार (14 सितंबर 2025) को 1.50 लाख से ज्यादा लोग ‘यूनाइट द किंगडम’ के बैनर लिए सड़क पर उतरे। इस रैली का नेतृत्व एंटी इमिग्रेशन एक्टिविस्ट टॉमी रॉबिन्सन ने किया। लंदन के व्हाइट हॉल के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प भी हुई, जिसमें 26 पुलिसकर्मी घायल हो गए, इनमें 4 की हालत गंभीर है।

 प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन और अमेरिका के झंडे में लिपटे हुए ‘Stop the Boats’, ‘Send Them Home’ और ‘We Want Our Country Back’ जैसे नारे लगाए। असिस्टेंट कमिश्नर मैट ट्विस्ट ने कहा, “बहुत लोग शांतिपूर्ण तरीके से आए थे लेकिन बड़ी संख्या में लोग हिंसा फैलाने की नीयत से पहुँचे थे। उन्होंने पुलिस पर लात-घूँसों से हमला किया और सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की। कई पुलिसकर्मी के दाँत टूटे हैं और नाक भी फोड़ी गई। “

इस रैली में अमेरिकी एक्टिविस्ट चार्ली किर्क को भी याद किया गया। उनकी याद में एक मिनट का मौन रखा गया और बगपाइपर ने ‘अमेजिंग ग्रेस’ धुन बजाई।

‘यूनाइट द किंगडम’ प्रदर्शन की वजह क्या है ?

ब्रिटेन में ‘यूनाइट द किंगडम’ प्रदर्शन देश में अवैध अप्रवासन के खिलाफ किया जा रहा है। इस प्रदर्शन की माँग है कि अवैध प्रवासियों को देश से बाहर किया जाए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल 28 हजार से ज्यादा प्रवासी इंग्लिश चैनल के रास्ते नावों से ब्रिटेन पहुँचे हैं।

टॉमी रॉबिन्सन ने बुलाई रैली

टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। रॉबिन्सन ने इंग्लिश डिफेंस लीग की स्थापना की है और लगातार एंटी मुस्लिम और एंटी इमिग्रेशन मामले में आवाज उठा रहे हैं। रॉबिन्सन ने ही एंटी-इमिग्रेशन के खिलाफ लंदन में भीड़ जुटाई।

रॉबिन्सन ने भीड़ से कहा कि प्रवासियों को अदालत में ‘ब्रिटिश जनता, जो इस राष्ट्र के निर्माता हैं’ से अधिक अधिकार प्राप्त हैं। उनके आह्वान पर लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। इस दौरान टॉमी रॉबिन्सन ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “आज लाखों लोग यूनाइटेड द किंगडम फ़्री स्पीच फ़ेस्टिवल में शामिल होने के लिए आ रहे हैं!!!!”

टॉमी रॉबिन्सन ने आगे लिखा, “कोई भी मेनस्ट्रीम मीडिया जो इसके अलावा कुछ भी छापता है, वह झूठ बोल रहा है। तो बेझिझक उनकी बकवास पर उन्हें फटकार लगाएँ और यह वीडियो उन्हें भेजें।”

ब्रिटेन में अप्रवासन बड़ा राजनीतिक मुद्दा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में अप्रवासन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर सामने आया है। इस मुद्दे से देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था की चिंताए दब गई हैं क्योंकि देश में शरण के लिए काफी संख्या में लोग आ रहे हैं। साल 2025 में अब तक 28000 से ज्यादा प्रवासी छोटी नावों में चैनल पार करके पहुँच चुके हैं।

अब इस्लामी कानून से ब्रिटेन को हाँक रहे मुस्लिम, चल रहे 85 शरिया कोर्ट: 4 बीवी की रवायत को बढ़ावा; भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण करने वालों को आंखें खोलनी चाहिए

इंग्लैंड का कानून इस्लामी कट्टरपंथ के आगे घुटने टेक रहा है। कभी दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाला इंग्लैंड अब मुस्लिम कट्टरपंथियों के नतमस्तक है। जिस इंग्लैंड ने ‘कानून का राज’ की अवधारणा दी थी, उस देश में अब इस्लामी अदालतें चल रही हैं। ब्रिटेन में दशकों से आदर्शवादी और लिबरल बनने के चक्कर में कट्टरपंथ पर मुंह बंद रखा गया था।

इंग्लैंड में जो कुछ घटित हो रहा है उसे देख भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले हिन्दू खासकर संघचालक मोहन भागवत जैसों को अपनी आंखें ही नहीं दिमाग भी खोलने की जरुरत है। मुस्लिम कट्टरपंथी जब फंसे होते है तभी संविधान की बात करते हैं, हकीकत में इनकी मंशा संविधान की आड़ में वही है जो इंग्लैंड में हो रहा है। भारत में संविधान सिर्फ तभी तक सुरक्षित है जब तक हिन्दू बहुसंख्यक है। 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले संविधान में जो संशोधन किये गए सभी देश को शरीयत का संकेत देते हैं। यही वजह है कि विपक्ष 2024 चुनावों में संविधान बचाओ का शोर मचाकर जनता को गुमराह करती है और मूर्ख जनता इनके झांसे में आ गयी। 

     

इस्लामी कट्टरपंथ के पैर पसारने को लेकर अगर कोई बोलता है तो उसे इस्लामोफोब करार दिया जाता है। इस्लाम पर इस चुप्पी का सबसे ज्वलंत उदाहरण ग्रूमिंग गैंग रहे हैं, जिन्होंने हजारों ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाया। यह निशाना बनाने वाले मुस्लिम थे और उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अब शरिया अदालतें खुल्लम-खुल्ला ब्रिटिश कानूनों की धज्जियाँ उड़ा रही हैं। ‘शरिया कोर्ट’ के नाम पर चलाई जा रहीं यह अदालतें ब्रिटेन 4 निकाह जैसी सामजिक कुरीतियों को बढ़ावा दे रही हैं। इन अदालतों पर ब्रिटिश सरकार अंकुश नहीं लगा पा रही है। यह अदालतें अवैध निकाह भी करवा रही हैं जिनका कानूनन कोई रिकॉर्ड नहीं है।

ब्रिटिश अखबार द टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लैंड में वर्तमान में 85 ऐसी शरिया अदालतें चल रही हैं। मुस्लिमों के मसलों से निपटने के लिए बनाई गई यह शरिया अदालतें पूरे इंग्लैंड में फैली हुई हैं। यह अदालतें निकाह, तलाक, खुला और चार निकाह जैसे मामलों पर फैसले दे रही हैं। यह अदालतें ब्रिटिश कानून के खिलाफ जाकर तमाम फैसले देती हैं।

रिपोर्ट बताती है कि ऐसी पहली शरिया अदालत इंग्लैंड में लंदन में 1982 में खोली गई थी। तब से यह लगातार बढ़ रही हैं। इनमें से एक अदालत ने एक ऐसे एप को मंजूरी दे रखी थी जो मुस्लिम पुरुषों से उनकी बीवियों की संख्या पूछता था। इसके अलावा इंग्लैंड में चलने वाले एक और एप में भी मुस्लिम युवा निकाह के बाद कितनी बीवियाँ रखेंगे, इसकी जानकारी भर सकते हैं।

ब्रिटिश कानून के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति एक से अधिक शादी/निकाह नहीं कर सकता। ऐसा करने के लिए तलाक और उसका कानूनी आदेश जरूरी है। हालाँकि, यहः शरियाई अदालतें इन सब बातों को नहीं मानती हैं और धड़ल्ले से इन सब कामों में मशगूल हैं।

इन शरिया अदालतों ने लगभग 100000 ऐसे निकाह करवाए हुए हैं, जिनका ब्रिटिश कानून में कोई पंजीकरण नहीं हुआ है। इंग्लैंड के भीतर शरिया अदालतों की धाक इतनी बढ़ गई है कि अब यूरोप के बाकी देशों और अमेरिका से मुस्लिम यहाँ अपने इस्लामी मसले लेकर पहुँच रहे हैं।

यह अदालतें चार निकाह को बढ़ावा दे रही हैं लेकिन ब्रिटिश एजेंसियाँ इनके आगे लाचार हैं। लगातार मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे रहने वाले ब्रिटिश नेताओं ने इस मसले पर आँखे मूँद ली हैं। इसी के चलते इंग्लैंड अब शरिया कोर्ट के पश्चिमी देशों का प्रमुख केंद्र है।

इंग्लैंड में इन शरिया अदालतों को लेकर धर्मनिरपेक्षता को लेकर काम करने वाले संगठन विरोध कर रहे हैं। इंग्लैंड के ऐसे ही एक संगठन नेशनल सेक्युलर सोसायटी ने माँग की है कि ब्रिटेन में चल रही इस समानांतर कानून व्यवस्था पर नकेल कसी जाए। उन्होंने कहा है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर असर पड़ रहा है। हालाँकि, सरकार इस मामले पर शांत है।

ब्रिटेन में इस्लामी कट्टरपंथ पर सरकार और लिबरल समाज का चुप रहना कोई विचित्र बात नहीं है। ग्रूमिंग गैंग के हाथों जब हजारों ब्रिटिश लड़कियाँ शिकार बन गईं तो एक टास्क फ़ोर्स बनाई गई। लेकिन इसी के साथ अब ब्रिटेन में इस्लामी कानून नाफ़िज करने की तैयारी है। ब्रिटिश सरकार ने इस दौरान शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन धँसा ली है।

ब्रिटिश सरकार इस पूरे इस्लामी कट्टरपंथ के तंत्र पर प्रहार नहीं करना चाहती। उसे लगता है कि इससे उसकी कथित उदार छवि पर असर पड़ेगा, जबकि सच्चाई यह है कि इसी का फायदा उठा कर इस्लामी कट्टरपंथी अपनी धाक इंग्लैंड में जमा रहे हैं। वह हिन्दुओं पर हमला करते हैं, महिलाओं को छेड़ते हैं यहाँ तक कि इंग्लैंड में धमाके भी हो चुके हैं।

गिरवी रखा भारत का 100 टन सोना घर लौटा, इंग्लैंड के बैंक से लेकर आई RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपना 100 टन सोना इंग्लैंड से वापस मँगा कर भारत में रखवाया है। अब यह सोना इंग्लैंड की जगह भारत में रखा है। आने वाले कुछ दिनों और भी सोना भारत वापस आने वाला है। अब यह सोना RBI के पास रखा गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में 822 टन सोना है। इसमें से 100.3 टन सोना भारत में रखा गया है जबकि 413.8 टन अभी विदेशों में रखा हुआ है। इसके अलावा 308 टन सोना भारत में नोट जारी करने के लिए रखा गया है।

 रिजर्व बैंक ने बीते कुछ सालों में में विदेशों में सोने के बढ़ते भारतीय स्टॉक के चलते इसे अपने देश वापस लाने का निर्णय किया है। रिजर्व बैंक आगे और भी सोना विदेशों से मँगा कर देश रखेगी। बताया गया है कि रिजर्व बैंक दोबारा से 100 टन सोना देश को वापस ला सकती है।

परम्परागत रूप से विश्व के अधिकांश देश लंदन में ही अपना सोना रखते आए हैं। भारत भी अपना सोना अब तक लंदन में रखता था लेकिन अब उसने निर्णय लिया है कि अपने सोने की बड़ी मात्रा देश के अंदर ही रखेगा। रिजर्व बैंक जहाँ विदेशों से सोना लेकर आ रही है, वहीं वह लगातार नया सोना खरीद भी रही है।

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 में 34.3 टन जबकि 2023-24 में 27.7 टन नया सोना खरीदा है। भारत का लगातार सोना खरीदना यह दिखाता है कि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और वह अपने वित्तीय सुरक्षा प्रबन्धन को मजबूत कर रहा है। रिजर्व बैंक विश्व के उन चुनिंदा बैंकों में से एक है जो सोना खरीद रहे हैं।

भारत का यह सोना वापस देश में लाने के लिए रिजर्व बैंक को विशेष इंतजाम भी करने पड़े थे। रिजर्व बैन ने इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की थी। इसके अलावा इस पर केंद्र सरकार ने कस्टम ड्यूटी भी माफ़ कर दी थी। हालाँकि, रिजर्व बैंक को इस सोने को देश में लाने के बाद GST देनी पड़ी है।

1991 में गिरवीं रख दिया गया था देश का सोना

जहाँ वर्तमान में रिजर्व बैंक विदेशों से अपना सोना वापस लाकर देश में रख रही है, वहीं लगभग 3 दशक पहले की कॉन्ग्रेस-तीसरे मोर्चे की सरकारों ने भारत का सोना गिरवीं रख दिया था। 1991 में अर्थव्यवस्था के कुप्रबन्धन की वजह से उपजे आर्थिक संकट के कारण भारत को अपना सोना विदेशों में भेज कर गिरवीं रखना पड़ा था।
जुलाई, 1991 में कॉन्ग्रेस की नरसिंह राव वाली सरकार ने डॉलर जुटाने के लिए सोना विदेशी बैंकों के पास गिरवीं रखा था। जुलाई 1991 में नरसिंह राव सरकार ने 46.91 टन सोना इंग्लैंड की बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास गिरवीं रखा था ताकि 400 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकें। सोना गिरवीं रखे जाने से पहले भारत ने सोना बेचा भी था।
मई 1991 में भारत ने स्विट्ज़रलैंड की UBS बैंक को सोना बेचा था, इसके जरिए सरकार ने 200 मिलियन डॉलर जुटाए थे। बताया गया कि यह वह सोना था जो कि तस्करों से पकड़ा गया था और देश की बैकों के पास जमा था। रिपोर्ट बताती हैं कि इस दौरान 20 टन सोना बेचा गया था।
अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस खबर को लेकर कहा है कि यह भारत के लिए बड़ा बदलाव है। उन्होंने एक (पहले ट्विटर) पर लिखा, “जबकि किसी की निगाह इस पर नहीं गई थी, तब RBI ने अपने सोने के रिजर्व को वापस भारत से भारत में स्थानांतरित कर दिया है। अधिकांश देश अपना सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड के वॉल्ट्स में या ऐसे कुछ स्थानों पर रखते हैं (और इसके लिए फीस भी देते हैं)। भारत अब अपना अधिकांश सोना अपने पास रखेगा। यह एक लंबा सफ़र है क्योंकि 1991 में देश का सोना रातोरात बाहर ले जाया गया था।”

‘मौत के समय उत्तेजित था ईसा मसीह का लिंग’: थॉमस मैकहेल, चर्च में पादरी


इंग्लैंड में एक पादरी ने ईसा मसीह की मौत को लेकर बड़ा अजीब सा दावा किया है। थॉमस मैकहेल नाम के पादरी ने कहा है कि यीशु की मौत के समय उनका लिंग (प्राइवेट पार्ट) उत्तेजित अवस्था में था। इस दावे को अश्लील बताते हुए उस समय चर्च में मौजूद लोगों ने पादरी पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना रविवार (5 मई 2024) की है। हालाँकि अभी तक पादरी उसी चर्च में अपने पद पर कायम है, जिससे लोगों में और असंतोष फैल रहा।

यह मामला ब्रिटेन के डरहम का है। यहाँ ब्लैकहिल, कॉन्सेट, काउंटी क्षेत्र में आवर ब्लेस्ड लेडी इमैक्युलेट नाम का एक चर्च है। यह चर्च कैथोलिक विचारधारा के ईसाइयों का है। इस चर्च के पादरी 53 वर्षीय थॉमस मैकहेल हैं। यहाँ रविवार (5 मई) को पादरी ने कथित तौर पर अश्लील उपदेश दिया है।

इस उपदेश के दौरान चर्च में लगभग 100 लोग मौजूद थे। इनके बीच पादरी थॉमस ने अपने उपदेश में ईसा मसीह की मृत्यु के वक्त का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जब यीशु की मौत हुई तो उनका लिंग उत्तेजित अवस्था में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पादरी ने आगे कहा कि जब ईसा मसीह को क्रूस पर टाँगा गया था तो उनकी बॉडी का पूरा खून शरीर के निचले हिस्से में चला गया था। लिंग में उत्तेजना की थॉमस ने यही वजह बताई।

इस उपदेश के दौरान चर्च में कई लोग अपने परिवार के साथ बैठे थे। उन्होंने इसे अश्लील बयान माना है। बाद में इस बयान पर हंगामा खड़ा हो गया। पादरी थॉमस को उनके पद से हटाने और सजा देने की माँग उठने लगी। हालाँकि तमाम विरोधों के बावजूद पादरी अभी तभी अपने पद पर बना हुआ है। पादरी पर कार्रवाई न होने से कई लोगों में नाराजगी बताई जा रही है।

लंदन : जिहाद का ऐलान करने वाला निकला सरकारी डॉक्टर, चलाता है हिज़्ब उत-तहरीर: यहूदियों के नरसंहार का मनाया था जश्न

                                          जिहादी डॉक्टर वाहिद आसिफ शाइदा (फोटो साभार : डेली मेल)
इजरायल और हमास के युद्ध के बीच विभिन्न देशों में फिलिस्तीन और गाजा के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले दिनों ब्रिटेन की राजधानी लंदन में फिलिस्तीन के समर्थन में न सिर्फ प्रदर्शन हुए बल्कि प्रदर्शनकारियों ने ‘जिहाद’ के नारे भी लगाए। इस मामले में डेली मेल ने एक ऐसे कट्टरपंथी मुस्लिम डॉक्टर के नाम का खुलासा किया है जिसने इजरायल विरोधी प्रदर्शन में जिहाद का आह्वान किया था। 

दरअसल, ब्रिटेन में हिज़्ब उत-तहरीर के प्रमुख के रूप में डॉ अब्दुल वाहिद शाइदा (Dr Wahid Asif Shaida) का नाम सामने आया है जिसने इस महीने की शुरुआत में हमास के बर्बर आतंकवादी हमलों में 1400 से अधिक इजरायलियों की मौत का जश्न मनाया था। इस प्रोटेस्ट में जिहाद का आह्वान करने वाले की पहचान डॉ. वाहिद आसिफ़ शैदा के रूप में हुई है जो एक पारिवारिक डॉक्टर के रूप में दो दशक से ज़्यादा समय से वहाँ रह रहा है। 

हालाँकि, डॉ के इस आतंकी चेहरे के बारे में उनके मरीजों को कोई खबर नहीं थी वे सभी डॉ वाहिद के दोहरे चरित्र से अनजान थे। जिहाद समर्थक एक एनएचएस डॉक्टर, जो दोहरी जिंदगी जी रहा है। वो प्रदर्शन के दौरान जिहाद की माँग करता है और दूसरी तरफ लोगों का इलाज करता है। उसके बारे में खुलासा होने के बाद लोग चिंता जता रहे हैं कि वो कैसे यहूदियों, समलैंगिकों और महिलाओं का इलाज करता होगा।

दरअसल, इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस में कार्यरत डॉ वाहिद को लेकर लोग चिंतित है कि किस तरह से जिहादी एनएचएस में एंट्री करने में कामयाब हो रहे हैं। जिहादी मानसिकता वाले लोग कैसे आम महिलाओं, समलैंगिकों और यहूदियों का इलाज करेंगे, क्योंकि वो इन्हें ‘खराब’ मानते हैं।

हैरानी की बात है कि डॉ वाहिद ब्रिटेन में हिज़्ब उत-तहरीर संगठन का प्रमुख है, जो जर्मनी सहित कई देशों में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन है। उसकी अगुवाई में हिज्ब ने हमास के उस आतंकी हमलों का जश्न इंग्लैंड में मनाया, जिसमें हमास ने इजरायल के अंदर घुसकर 1400 से अधिक यहूदी पुरुष, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की हत्या कर दी थी।

20 साल से ज्यादा समय से एनएचएस में कार्यरत

डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ वाहिद आसिफ शाइदा जरनल फिजीशियन के तौर पर 20 साल से नेशनल हेल्थ सर्विस में काम कर रहा है। अभी तक उसके जिहादी मानसिकता का खुलासा नहीं हो पाया था, क्योंकि वो अधिकतक समय वाहिद आसिफ के नाम से ही प्रदर्शनों में शामिल होता था। उसके बारे में खुलासा होने के बाद लंदन के उपनगरीय इलाके हैरों में रहने वाले लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ, क्योंकि उन्हें लगता था कि NHS जीपी एक मृदुभाषी व्यक्ति और काम से काम से काम रखने वाला इंसान है।
हिज़्ब उत-तहरीर ने पिछले वीकेंड पर उस समय लोगों में गुस्सा भर दिया, जब इस संगठन के लोगों ने लंदन में मिस्र और तुर्की दूतावासों के बाहर एक रैली के दौरान ‘जिहाद’ के नारे लगाए और इजरायल पर हमला करने के लिए ‘मुस्लिम सेनाओं’ की एकजुटता का आह्वान किया। इस रैली में फिलिस्तीन के लिए जिहाद के नारे लगाए गए और फिलिस्तीनियों को बचाने के लिए सबसे जिहाद में जुटने का आह्वान किया गया।
स्थानीय लोगों ने गृह सचिव सुएला ब्रैवनमैन का विरोध किया है, क्योंकि जिहादी मानसिकता का खुलासा होने के बावजूद न तो डॉ वाहिद को गिरफ्तार किया गया है और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। सुरक्षा विभाग के प्रमुख सर मार्क रोवले ने कहा कि जिहाद का मतलब पवित्र युद्ध होता है, लेकिन उसके खिलाफ हिंसा का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 की सुबह इजरायल में जल, थल और हवा के रास्ते हमला किया। हमास ने इजरायल पर हजारों रॉकेट छोड़े। इन हमलों में 1400 से अधिक लोगों की मौत हो गई, तो 3 हजार से अधिक लोग घायल हो गए।
इस हमले के दौरान हमास ने 225 से अधिक इजरायलियों को बंधक बना लिया और गाजा पट्टी लेकर गए। हालाँकि, इस हमले के बाद इजरायल ने हमास पर पलटवार किया है और इजरायल के हमलों में अब तक 7000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायल ने उत्तरी गाजा को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है, और गाजा पर अभी भी हमला जारी है।

EasyJet के टॉयलेट में सेक्स करता हुआ पकड़ा गया प्रेमी जोड़ा, वीडियो में नंगे कैद हुए दोनों: क्रू मेंबर ने खोला दरवाजा, महिला चिल्लाई – ‘Oh! My F∩cking God’

EasyJet के विमान में बाथरूम में सेक्स करता हुआ पकड़ा गया कपल (प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI/Dreamstime)
इंग्लैंड में एक विमान के टॉयलेट में एक कपल सेक्स करता हुआ पाया गया, जिसके बाद उन्हें विमान से उतार कर पुलिस को सौंप दिया गया। उनका वीडियो भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि जब फ्लाइट एटेंडेंट ने बाथरूम का दरवाजा खोला, उस दौरान दोनों ही नग्न अवस्था में पाए गए। इसके बाद जल्दी से उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। विमान इस दौरान हवा में था। सोशल मीडिया पर भी ये वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं।

जैसे ही दरवाजा खुला, विमान में बैठे अन्य यात्री उन दोनों को आपत्तिजनक और अश्लील अवस्था में देख कर हँस पड़े। दरवाजा खोलने से पहले केबिल क्रू को लोग ‘कम ऑन, कम ऑन’ बोल रहे थे। वहीं एक अन्य यात्री कपल को सेक्स करते हुए देख कर चिल्लाया, “ओह माय फकिंग गॉड!” EasyJet के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये विमान इंग्लैंड के लुटॉन से स्पेन के द्वीप इबिज़ा जा रहा था। घटना शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) की है। पुलिस को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।

हालाँकि, UK में ऐसा कोई कानून नहीं है जो विमान में सेक्स करने के संबंध में कुछ कहती हो। हालाँकि, सार्वजनिक रूप से जानबूझकर यौन संबंधों में लिप्त होना अपराध माना गया है। सन् 2004 के ‘सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट’ की धारा-71 में ये व्यवस्था की गई है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों ने कहा, “आशा है कि इस हरकत में लिप्त व्यक्ति पायलट नहीं होगा।” वीडियो में यात्री कपल को चीयर करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जो कपल टॉयलेट में सेक्स करते हुए पकड़ा गया, वो प्रेमी-प्रेमिका थे। जो महिला यात्री उन्हें देख कर चिल्लाती है, वो वीडियो में अपने साथी यात्री से पूछते हुए दिखाई दे रही है कि उसने वीडियो बनाया या नहीं। फिर साथी यात्री बताता है कि उसने सब कुछ कैमरे में कैद कर लिया है। हालाँकि, बेडफॉर्डशायर की पुलिस ने इस संबंध में कपल पर क्या कार्रवाई की है, ये स्पष्ट नहीं है। लेकिन, सोशल मीडिया में लोग वीडियो पर मजे ले रहे हैं।

ब्रिटेन : ‘महिला को कमर तक दफन करो, फिर पत्थर फेंक कर मार डालो’: इमाम का Video, नफरत कम करने के लिए मस्जिद को सरकार ने दिए थे 24 करोड़ रूपए

ब्रिटेन की एक मस्जिद से इमाम का औरतों को पत्थर मारने का वीडियो वायरल (चित्र साभार- मेघ अपडेट ट्विटर हैंडल)
सोशल मीडिया पर मंगलवार (22 अगस्त 2023) से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शेख ज़काउल्लाह सलीम नाम का इमाम लोगों के सामने तकरीर (भाषण) पेश कर रहा है। इस लेक्चर में इमाम किसी महिला की पत्थर मार कर हत्या करना सही बता रहा है। साथ ही इमाम ऐसी सजा का तरीका भी सिखा रहा है। यह वायरल वीडियो ब्रिटेन के बर्मिंघम में मौजूद ग्रीन लेन मस्जिद का बताया गया है। इसी मस्जिद को हाल ही में ब्रिटिश सरकार ने युवाओं की मदद के नाम पर £2.2 मिलियन (23.24 करोड़ रुपए) का अनुदान दिया था।

वायरल वीडियो में इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम ने लोगों से बताया कि पत्थर मारने से पहले महिला को कमर तक जमीन में दफना देना चाहिए। आधा शरीर जमीन में गाड़ने के पीछे इमाम ने इस्लाम के ‘शरिया’ कानून का हवाला दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) पर यह वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स का कहना कि क्या सच में शेख ज़काउल्लाह सलीम ऐसी सजा का समर्थन करता है, क्योंकि इसी इमाम का एक और वीडियो भी वायरल है जिसमें पत्थर मार कर की जाने वाली हत्या को ‘ज़िना’ (इस्लाम के मुताबिक अवैध संबंध) की सजा बता रहे हैं।

इस वीडियो में शेख ज़काउल्लाह सलीम ने इस्लामी शरिया का हवाला देते हुए कहा है कि जिना करने वाले व्यक्ति को शरिया के मुताबिक सजा दी जाएगी। इमाम ने बताया कि ज़िना करने वाले विवाहित व्यभिचारी पुरुष या महिला के लिए यही सज़ा है कि उन्हें पत्थर मार-मार कर मार डाला जाए। इमाम ने इस्लामी कानून के ही हवाले से अविवाहितों के लिए जिना पर मुस्लिमों की सभा में 100 कोड़े मारे जाने का कानून बताया।

इमाम ने आगे कहा, “जैसा कि अल्लाह ने सूरह अन-नूर की शुरुआत में कहा है कि जो पुरुष और महिला ज़िना करते हैं उन्हें मारो। जब अल्लाह के मजहब की बात आती है तो आपको किसी भी प्रकार की दया या सहानुभूति नहीं दिखानी चाहिए।” इमाम ने अपनी मज़हबी किताब के हवाले से बाकी लोगों को भी ऐसी सजा का गवाह बनने की अपील की।

 वीडियो में दिख रहे इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम का परिचय बर्मिंघम स्थित ग्रीन लेन मस्जिद की वेबसाइट पर दर्ज है। वेबसाइट में इमाम को कारी बताते हुए मस्जिद में शिक्षा का प्रमुख बताया गया है। मज़हबी पढ़ाई के साथ इमाम ने काफी कम उम्र में कुरान रट लिया था। इमाम शेख जाकउल्लाह ने कई मौकों पर तरावीह की नमाज का नेतृत्व भी किया था। इसी के साथ उन्होंने हाल ही में मार्कफील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन से इस्लामिक एजुकेशन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की है।

वायरल हुए वीडियो में दिख रही ग्रीन लेन मस्जिद के मिशन स्टेटमेंट में ‘इंस्पायर एजुकेट सर्व’ लिखा हुआ है। ख़ास बात ये है कि इस मस्जिद को जुलाई 2023 में ब्रिटिश सरकार ने £2.2 मिलियन (23.24 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद दी थी। यह मदद धार्मिक समुदायों को घृणा अपराधों और आतंकवादी हमलों से रोकने में मदद के नाम पर दी गई थी। हालाँकि, दिए गए पैसे के सदुपयोग के विपरीत वायरल वीडियो में इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम महिला को पत्थर मारकर हत्या करने के लिए उकसा रहा है।

जिसकी बीवी की सिगरेट जलाते थे नेहरू, वो निकला बच्चों का यौन शोषक: FBI ने कहा था – सुंदर लड़के उनकी कमजोरी

                                      लॉर्ड माउंटबेटन, एडविना माउंटबेटन और जवाहरलाल नेहरू
ब्रिटिश इंडिया के आखिरी वायसराय रहे लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Mountbatten) पर 1970 के दशक में उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में बॉयज होम में दो बार 11 वर्षीय लड़के का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। पीड़ित की पहचान आर्थर स्मिथ के रूप में की गई है। उसने आरोप लगाया था कि यह घटना 1977 में किनकोरा बॉयज होम में हुई थी। स्मिथ के अनुसार, 2 साल बाद 1979 में उसे आरोपित के बारे में पता चला।

लॉर्ड लुइस माउंटबेटन ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य और मौजूदा प्रिंस चार्ल्स III के चाचा थे। स्मिथ अब 56 साल के हैं और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उन्होंने किनकोरा में बच्चों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने में विफल रहने पर पुलिस सहित स्थानीय निकायों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। याद हो कि लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना के साथ अक्सर जवाहरलाल नेहरू का नाम जोड़ा जाता है और एडविना की सिगरेट जलाते हुए उनकी तस्वीर भी वायरल होती है।

केआरडब्ल्यू लॉ-एलएलपी के केविन विंटर्स अदालत में पीड़ित का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं इस मामले को सबके सामने लाने के लिए आर्थर की बहादुरी की सराहना करता हूँ। अधिकतर मामलों में यौन उत्पीड़न के शिकार कई लोग खामोश रहना ही पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस और स्थानीय निकायों के असंवेदनशील रवैये के कारण उसमें आक्रोश है। यही कारण है कि आर्थर ने इस तरह से अपनी पहचान उजागर की है। उसके निर्णय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।”

विंटर्स ने कहा, “वह अच्छी तरह से समझता है कि इस मामले में कई लोगों की कलई खुलेगी। यह अपराधियों, संस्थानों या अन्य एजेंसियों को उजागर करने सहित कई कारणों से लिया गया निर्णय है, जिन्होंने सच्चाई को दबाने में मदद की। हमारे मुवक्किल ने अपने साथ हुए घृणित कार्य को सबके सामने लाने के लिए काफी कुछ सहा है। उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ इसे सार्वजनिक मंच पर लाने का निर्णय लिया है।”

इस साल सितंबर में बेलफास्ट हेल्थ एंड सोशल केयर ट्रस्ट, बिजनेस सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन, यूके सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, पीएसएनआई के चीफ कांस्टेबल और स्वास्थ्य विभाग सहित कई संस्थानों को इस मामले में पूर्व कार्रवाई को लेकर पत्र जारी किए गए थे।

लॉर्ड माउंटबेटन की कमजोरी थे युवा लड़के: एफबीआई

अगस्त 2019 में ‘द डेली मिरर’ ने डीक्लासिफाइड फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) फाइलों का हवाला देते हुए बताया था कि ब्रिटिश इंडिया के पूर्व वायसराय युवा लड़कों के साथ समलैंगिक रिश्ते बनाने के लिए काफी आतुर रहते थे। कथित फाइलों का पता इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने लगाया था, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘द माउंटबेटन्स: देयर लाइव्स एंड लव्स’ के लिए शोध सामग्री एकत्रित करने के लिए सूचना की स्वतंत्रता कानून का इस्तेमाल किया था।
                                                             मिरर की रिपोर्ट का स्क्रीनग्रैब
‘द डेली मिरर’ ने लॉर्ड माउंटबेटन को यह कहते हुए कोट किया था, “(हमने) अपना सारा विवाहित जीवन दूसरे के बिस्तर पर बिताया।” लोनी की किताब के अनुसार, लॉर्ड माउंटबेटन की पसंदीदा जगह एक एक ऐसा वेश्यालय था, जहाँ समलैंगिक संबंध बनाए जाते थे। यहाँ नौसेना के अधिकारी अक्सर आते-जाते रहते थे। लॉर्ड माउंटबेटन, जिनकी 1979 में प्रोविजनल आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) द्वारा हत्या कर दी गई थी, की अमेरिका द्वारा 3 दशकों से अधिक समय तक जासूसी की गई थी।
एंथनी डेली का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया, “सेना की वर्दी में सुंदर युवा पुरुष और स्कूल की वर्दी में सुंदर लड़के – माउंटबेटन को ये आकर्षित करते थे।” 1944 में एक साक्षात्कार में अमेरिकी लेखक एलिजाबेथ डे ला पोएर बेरेसफोर्ड ने कहा था, “लॉर्ड लुइस माउंटबेटन और उनकी पत्नी को बेहद निम्न मानसिकता वाला व्यक्ति माना जाता है।” FBI ने उन्हें यह कहते हुए कोट किया, “लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को युवा लड़कों के साथ समलैंगिक रिश्ते बनाने के लिए जाना जाता था। इसके चलते वह किसी भी प्रकार के सैन्य अभियानों को निर्देशित करने के लिए एक अयोग्य व्यक्ति थे।”
एक अन्य संघीय दस्तावेज के अनुसार, मई 1968 में लॉर्ड लुई माउंटबेटन की समलैंगिकता को लेकर एक राजनयिक एंथनी न्यूटिंग और पूर्व ब्रिटिश पीएम एंथनी ईडन के साथ चर्चा की गई थी। हाल के दिनों में, इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन के बीच साझा किए गए व्यक्तिगत पत्रों का पता लगाने की कोशिश की थी, हालाँकि वे असफल रहे।

बेलफास्ट में लड़कों का घर

2017 में, हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूशनल एब्यूज इंक्वायरी द्वारा की गई एक जाँच में पाया गया कि किनकोरा बॉयज होम में उसके मालिक विलियम मैकग्राथ द्वारा 39 लड़कों का यौन शोषण किया गया था। यह जाँच सेवानिवृत्त न्यायाधीश एंथनी हार्ट द्वारा की गई थी। उनके अनुसार, पुलिस (रॉयल अल्स्टर कांस्टेबुलरी) इस मामले की जाँच करने में पूरी तरह से नाकाम रही। उन्होंने कहा कि अगर उचित जाँच की गई होती तो कई पीड़ितों को बचाया जा सकता था।
कथित तौर पर, बॉयज होम के तीन पूर्व कर्मचारी, मैकग्राथ, रेमंड सेम्पल और जोसेफ मेन्स को 1981 में कुल 11 लड़कों का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्त में लिया गया था। इस होम को Protestant Paramilitary Organisation के एक सदस्य द्वारा चलाया जा रहा था। हालाँकि, न्यायाधीश ने इन दावों को खारिज कर दिया था कि किनकोरा बॉयज होम में एक समलैंगिक वेश्यालय संचालित किया जा रहा था और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियाँ रसूखदार नेताओं की जासूसी करने के लिए आरोपित पीडोफाइल को ब्लैकमेल कर रही थीं।
उन्होंने कहा, “हमारी जाँच में यह दिखाने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है कि किनकोरा में स्थानीय लोगों के यौन शोषण में दूसरों लोगों की संलिप्तता के बारे में वर्षों से लगाए गए आरोपों का कोई आधार है, या फिर सुरक्षा एजेंसियों की इसमें कोई मिलीभगत थी।”

4 बच्चों की माँ ने खुलेआम सबके सामने किया सेक्स, अब कोर्ट की कार्रवाई

इंग्लैंड के लिवरपूल में चार बच्चों की माँ ने खुलेआम सभी लोगों के सामने सड़क पर सेक्स किया, जिसके बाद इस मामले में कोर्ट की कार्रवाई चल रही है। केली कजिन्स नामक महिला को अदालत ने तलब किया, जहाँ उसने माना कि सोशल मीडिया पर उसने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से सेक्स का ये वीडियो शेयर किया था। 35 वर्षीय महिला पर सार्वजनिक स्थल पर अश्लीलता फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पिछले महीने शहर के कंसर्ट स्क्वायर पर उक्त महिला का एक पुरुष के साथ सेक्स करते हुए कई वीडियो वायरल हुए थे। उस व्यक्ति की पहचान जो फिरबी के रूप में हुई है, जो कोर्ट में पेश नहीं हुआ। उसने कहा कि उसकी नौकरी चली गई है और वो अदालत में पेश होने में सक्षम नहीं है। केली कजिन्स ने सोशल मीडिया पर ‘रूबी रोज’ नाम से एक छद्म हैंडल बना रखा है। स्थानीय पुलिस और मेयर ने भी इस घटना की निंदा की है।

मूल रूप से ब्रैडफोर्ड की रहने वाले केली कजिन्स फ़िलहाल बूटले में रहती है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इन वीडियोज को लेकर उससे पूछताछ की। 2 अगस्त, 2022 को रातोंरात ये वीडियोज वायरल हो गए थे। कजिन्स ने वीडियो पोस्ट करते हुए लोगों से पूछा था, “अब अगला कहाँ?” स्थानीय लोगों ने लोगों से इन वीडियोज को शेयर करने से लोगों को मना किया है और इस घटना को नुकसान पहुँचाने वाला और आपराधिक बताया है।

इस घटना के कुछ दिनों बाद ही केली कजिन्स को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने बताया कि जब उक्त महिला के सेक्स वाले फुटेज को उसके सामने चलाया गया, तब वो मुस्कुरा रही थी। जिला जज ने भी इसे एक गंभीर मामला बताया है और आशंका जताई है कि शराब के नशे में ऐसा किया गया। महिला को अगली सुनवाई तक जमानत दे दी गई है। साथ ही उन्होंने सेक्स करने के लिए जो लोकेशन चुना गया, उसे लेकर भी चिंता जताई।

इंग्लैंड : हिंदू मंदिर को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने घेरा, ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारों के साथ अश्लील हरकत

हिंदू मंदिर की दीवार पर चढ़ अश्लील हरकत करता एक कट्टरपंथी मुस्लिम
इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमले का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर आई है। जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक शहर में 20 सितंबर 2022 को स्पॉनलेन में स्थित मंदिर के बाहर करीब 200 कट्टरपंथी मुस्लिम इकट्ठा हो गए।

इंग्लैंड पुलिस की मौजूदगी में दुर्गा भवन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेर लिया। इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया। कुछ तो मंदिर की दीवार पर भी चढ़ गए। मंदिर और मंदिर जाने वाले लोगों में खौफ पैदा करने के लिए इन लोगों ने ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे लगाए। साथ ही मंदिर की ओर मुँह करके हस्तमैथुन जैसे इशारे किए।

सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आप इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ को स्पॉनलेन स्थित दुर्गा भवन हिंदू सेंटर की ओर बढ़ते और कई लोगों को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए देख-सुन सकते हैं।

इंग्लैंड की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने को वहाँ मौके पर पहुँची। हालाँकि वो कुछ ज्यादा नहीं कर पाए। उनकी मौजूदगी में ही भीड़ में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम मंदिर की दीवारों पर चढ़ गए। इतना ही नहीं, “फक यू” और हस्तमैथुन करने जैसे इशारे करके उन्होंने हिंदुओं को डराने का भी काम किया।

बर्मिंघम वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘अपना मुस्लिम’ नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने मंगलवार को दुर्गा भवन मंदिर के बाहर ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के लिए भीड़ को बुलाया था। मंदिर की दीवार पर चढ़ना अगर शांतिपूर्ण विरोध है, मंदिर के सामने हस्तमैथुन जैसे इशारे अगर शांतिपूर्ण विरोध है तो आतंकी हरकत किसे कहते हैं?

स्काई न्यूज के मुताबिक, मंदिर के बाहर करीब 200 लोग (इस्लामी कट्टरपंथी भीड़) एकत्र हो गई थी। इनमें में से किसी ने बोतलें भी फेंकी। इससे हालात काफी संवेदनशील हो गया।

लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं पर हमला

बर्मिंघम के स्मेथविक से दुर्गा मंदिर के बाहर हंगामे की खबर से पहले लेस्टर में हिंदुओं पर हमला किया गया। इसकी शुरुआत एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बाद से हुई थी। पाकिस्तान के हारने के बाद हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था।
लेस्टर में 18 सितंबर, 2022 को हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। इस दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए मंदिर पर भी अटैक हुआ और उसके ऊपर लगे भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिरा दिया गया। हिंदुओं के समूह पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमले में पुलिस अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेस्टर पुलिस ने 19 सितंबर 2022 को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।
लेस्टर पुलिस के अनुसार, शहर में फैली अशांति के मामले में 20 वर्षीय एक युवक को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया। ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) नाम के इस शख्स को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई है।

ब्रिटेन के खालिस्तान समर्थक खालसा टीवी ने अपना लाइसेंस सरेंडर किया; प्राइम टाइम पर दिखाता था- जलता लाल किला, इंदिरा गाँधी के मुँह से खून

ब्रिटेन में खालसा टेलीविजन लिमिटेड (Khalsa Telivision Ltd- KTV) ने मीडिया वॉचडॉग ऑफकॉम की कार्रवाई के बाद अपना प्रसारण लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। ऑफकॉम की जाँच में पाया गया कि केटीवी पर 95 मिनट के ‘प्राइम टाइम’ शो में हिंसा के लिए उकसाया गया था। 

इस साल 31 मार्च को जाँच के बाद ब्रिटिश टेलीकॉम रेगुलेटर ‘ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशंस- ऑफकॉम’ (British Telecom regulator Ofcom) ने उसका (KTV) प्रसारण लाइसेंस निलंबित कर दिया था। जाँच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि खालसा टेलीविजन लिमिटेड या केटीवी ने प्रसारण नियमों का उल्लंघन किया और खालिस्तान समर्थक दुष्प्रचार में शामिल रहा।

ऑफकॉम के मुताबिक, ‘प्राइम टाइम’ शो के दौरान प्रस्तुतकर्ता (Anchor) जगजीत सिंह जीता ने भड़काऊ बयान दिए थे। उसने सिखों से सिख अलगाववादी नेताओं का अनुसरण करने और खालिस्तान के लिए हत्या सहित किसी भी तरह की हिंसा को जायज बताया था। यह टेलीविजन चैनल यूनाइटेड किंगडम (UK) में सिख समुदाय द्वारा संचालित किया जाता है।

ऑफकॉम ने अपने आदेश में कहा था कि यह बयान अपराध और अव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला और नियमों के खिलाफ है। आदेश में यह भी कहा गया था, “इस उल्लंघन की गंभीर प्रकृति को देखते हुए और हमारे निलंबन नोटिस में निर्धारित कारणों के तहत हम खालसा टेलीविजन लिमिटेड के यूके में प्रसारण के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रहे हैं।”

खालिस्तानी नेटवर्क ने भारत के खिलाफ हिंसा का किया था आह्वान

यह टीवी चैनल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है। पिछले साल फरवरी में ऑफकॉम ने खालिस्तान समर्थक नेटवर्क- खालसा टेलीविजन (KTV) पर एक कार्यक्रम के दौरान चर्चा में घृणा फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने के कारण 50,000 पाउंड का जुर्माना लगाया था। इस चर्चा में आतंक का संदर्भ देते हुए ब्रिटिश सिखों को हिंसा करने के लिए उकसाया गया था। उस दौरान ब्रिटिश मीडिया नियामक ऑफकॉम ने केटीवी को चेतावनी दी थी कि वह इस तरह की भड़काऊ सामग्री परोस कर नियमों का उल्लंघन ना करे।
वीडियो एवं शो में भारतीय लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की अपील और सिख अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने वाले हिंसक कृत्यों का महिमामंडन किया गया था। शो में सिख धर्म की आलोचना करने वालों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी संगठनों को वैध बताया। संगीत वीडियो में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तस्वीरें थीं और उस तस्वीर के मुँह से खून टपक रहा था।
उसके कैप्शन में लिखा था, “तूने मासूमों का खून पिया, दुष्ट औरत”। गीत में लिखा था, “लड़ाके तेरे राज्य को नष्ट कर देंगे”। इस में दिल्ली के लाल किले को आग की लपटों में दिखाया गया था। इस शो और वीडियो को ऑफकॉम ने ‘भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत करने वाला’ माना था।