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क्या मुख्यमंत्री हेमंत बदलेंगे पाला? JMM-कांग्रेस के इनकार के बावजूद बढ़ी बेचैनी

                                                              झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री 
हेमंत सोरेन पिछले कुछ दिनों से अपनी पत्नी और गांडेय एमएलए कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली में हैं। इससे दोनों गठबंधन पार्टनर्स कांग्रेस और आरजेडी के कुछ हिस्सों में बेचैनी बढ़ रही है। पॉलिटिकल सर्कल और सोशल मीडिया पर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जेएमएम, बीजेपी के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि राज्य को सेंट्रल फंड में 'कमी' के कारण फंड की बढ़ती कमी का सामना करना पड़ रहा है।

बिहार में महागठबंधन की करारी हार के बाद अब पड़ोसी राज्य झारखंड में सियासी पारा चरम पर है। हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम (JMM) को बिहार में एक भी सीट ना देने वाले महागठबंधन को झारखंड में झटका लग सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों दिल्ली में सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने बीजेपी के शीर्ष नेता से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सियासी खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है।

सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि हेमंत सोरेन और बीजेपी नेता के बीच बातचीत केवल औपचारिक नहीं थी। बल्कि, दावे यहां तक किए जा रहे हैं कि दोनों दलों (बीजेपी और जेएमएम) के साथ आने की प्रारंभिक सहमति बन चुकी है।

हेमंत सोरेन 29 नवंबर से दिल्ली में

बिहार में हार के बाद, अफवाहों ने और जोर पकड़ लिया कि जेएमएम, आरजेडी और कांग्रेस से अलग होने के ऑप्शन पर सोच-विचार कर सकता है। बिहार चुनाव में सीटें न मिलने के बाद, रूलिंग जेएमएम ने पहले ही कांग्रेस और आरजेडी के साथ अपने गठबंधन की गहरी समीक्षा की बात कही थी। हालांकि जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने ऑफिशियली इसे खारिज कर दिया, जैसा कि अपोजिशन कैंप ने भी किया।

हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन 29 नवंबर की शाम को दिल्ली के लिए निकले थे। जेएमएम के अंदर के लोगों ने आज कहा कि वे 5 दिसंबर से झारखंड असेंबली के विंटर सेशन से पहले बुधवार को लौट सकते हैं।

भाजपा ने गठबंधन की संभावना को नकारा

इन अटकलों के बीच, भाजपा ने भी जेएमएम के साथ किसी भी समझौते की संभावना से साफ इनकार किया है। झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा और जेएमएम 'समुद्र के दो किनारे' हैं, जिनके बीच की दूरी इतनी है कि वे एक-दूसरे को देख भी नहीं सकते। उन्होंने जोर दिया कि दोनों पार्टियों की नीतियाँ बिल्कुल विपरीत हैं।

जेएमएम और कांग्रेस का कड़ा खंडन

जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज़ करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है। जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास को एक 'निजी यात्रा' बताया। उन्होंने भाजपा पर 'फेक एजेंडा' चलाने का आरोप लगाया और कहा कि बाकी जो कुछ भी फैलाया जा रहा है, वह सिर्फ बीजेपी का एजेंडा है, जो फर्जी खबरें फैलाकर झारखंड में खुद को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सीएम शीतकालीन सत्र से पहले जरूर लौटेंगे।

कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने भाजपा को चेतावनी दी कि वह गठबंधन सरकार को अस्थिर करने में पहले भी नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि आगामी राज्यसभा चुनावों से पहले, यह भाजपा की ओर से प्रायोजित अफवाहें हैं, जो लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सीएम के दिल्ली जाने का मतलब सरकार बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा आईटी सेल लगातार अफवाहें फैलाकर अस्थिरता पैदा करना चाहती है, लेकिन वे सफल नहीं होंगे।

चर्चा तो यह भी है कि डिप्टी सीएम के पद को लेकर भी बातचीत फाइनल हो गई है। अब अगर हेमंत सोरेन एनडीए में जाने का फैसला करते हैं तो झारखंड विधानसभा में समीकरण क्या होंगे?

झारखंड की कुल 81 विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 41 चाहिए। अभी सरकार हेमंत सोरेन चला रहे हैं। उनकी पार्टी झामुमो के पास 34 सीटें हैं। उनके साथ गठबंधन में कांग्रेस, राजद और लेफ्ट हैं। कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और लेफ्ट के पास 2 विधायक हैं। कुल संख्या 56 है।

वहीं, अगर हेमंत सोरेन एनडीए के साथ जाने का फैसला करते हैं तो नंबर गेम काफी बदल जाएगा। जेएमएम के पास 34, बीजेपी के पास 21, लोजपा के पास 1, आजसू के पास 1, जेडीयू के पास 1 सीट है। ऐसे में कुल 58 विधायक होंगे, जो बहुमत से काफी ज्यादा होंगे।

हेमंत सोरेन: 5 वर्षों में जिनकी उम्र बढ़ गई 7 साल, प्लॉट 2 से हो गए 23…; क्या चुनाव आयोग ऐसे फरेबी को जेल भेजेगा? जालसाझी करने वाले को क्या किसी दुकान में कोई छोटा काम करने के लिए दुकान रखेगा?

झारखंड विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उम्र और संपत्ति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 2019 के चुनावी हलफनामे में हेमंत सोरेन ने अपनी उम्र 42 साल बताई थी, लेकिन इस बार 2024 में दाखिल हलफनामे में उन्होंने अपनी उम्र 49 साल बताई है। यह देखकर राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है कि पाँच साल में उनकी उम्र सात साल कैसे बढ़ गई। इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सोरेन की उम्मीदवारी रद्द करने की माँग की है।

बीजेपी ने न केवल हेमंत सोरेन की उम्र पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उनके संपत्ति के ब्योरे पर भी सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने JMM पर निशाना साधते हुए कहा कि जेएमएम पार्टी में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, और हेमंत सोरेन ने हलफनामे में भी गड़बड़ी की है।

हेमंत सोरेन के दो हलफनामे (फोटो साभार: इंडिया टीवी)

बीजेपी प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने हलफनामे में संपत्ति की जानकारी छिपाई है। 2019 में जहाँ उन्होंने सिर्फ दो भूखंडों का जिक्र किया था, वहीं इस बार 23 भूखंडों का जिक्र किया है। यह भूखंड 2006 से 2008 के बीच खरीदे गए थे, लेकिन पिछले हलफनामे में उनका कोई उल्लेख नहीं था। बीजेपी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग को उनकी उम्मीदवारी रद्द करनी चाहिए। शहजाद ने कहा, “जेएएम का मतलब ‘झोल, मुस्लिम अपीजमेंट और माफिया’ है।”

इस मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह हार के डर से यह विवाद खड़ा कर रही है। JMM प्रवक्ता मनोज पांडेय का कहना है कि सभी दस्तावेज चुनाव आयोग के पास हैं, और रिटर्निंग ऑफिसर ने हेमंत सोरेन का नामांकन स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि बीजेपी हार की बौखलाहट में जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है।

इस बार बरहेट सीट से बीजेपी ने गमालिएल हेम्ब्रोम को अपना उम्मीदवार बनाया है। हेम्ब्रोम का कहना है कि बरहेट के लोगों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह इन मुद्दों को हल करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। हेम्ब्रोम ने 2019 में आजसू पार्टी के टिकट पर बरहेट से चुनाव लड़ा था और अब वह बीजेपी के टिकट पर सीएम के खिलाफ मैदान में हैं।

झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटों के लिए 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण में 13 नवंबर को 43 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें 743 उम्मीदवार मैदान में हैं। दूसरे चरण में 20 नवंबर को शेष 38 सीटों पर वोटिंग होगी। उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जाँच पूरी हो चुकी है और 1 नवंबर तक उम्मीदवार अपने नामांकन वापस ले सकते हैं। मतगणना 23 नवंबर को होगी।

PML Act में नित नई व्याख्या करने से बेहतर है मीलॉर्ड, या तो खुद पूरा कानून लिख दो और या इस कानून को रद्द कर दो; लेकिन अपराधियों को संरक्षण देना बंद कीजिए ; #हेमंत सोरेन और #sec 45

सुभाष चन्द्र 

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस खानविलकर की बेंच ने 27 जुलाई, 2022 को PML Act, 2002 और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दी गई की शक्तियों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कानून को सही कहा था। 

लेकिन तब ही से लगातार अलग अलग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस कानून के बारे में नई नई व्याख्या देकर उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह भ्रष्टाचारियों को बचने के रास्ते मिल रहे हैं जिसकी वजह से ऐसे अपराधियों को कानूनी संरक्षण मिल रहा है। विपक्ष तो चाहता ही है कि कानून ख़त्म हो जाए और उसकी मुहीम में अदालतें भी सहयोग कर रही हैं जिससे कानून कुंद होता जाए और प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार पर चोट कमजोर पड़ जाए

लेखक 
चर्चित YouTuber 
इससे तो बेहतर है मीलॉर्ड एक बार में पूरे कानून को ही रद्द कर दीजिए और या नित नई व्याख्या करके नए कानून में संशोधन करने की बजाय खुद ही पूरा PML Act लिख दो

दो दिन पहले झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को जमानत दे दी और जमानत देते हुए जो कहा, उसे पढ़ कर मेरा दिमाग चकरा गया।जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि - 

“ED ने हेमंत सोरेन पर जमीन कब्ज़ा करने का जो आरोप लगाया है, उससे संबंधित एक भी दस्तावेज़ ED अभी तक कोर्ट में पेश नहीं कर सकी; ED ने इस मामले में जिन लोगों ने बयान लिए हैं, उससे भी साबित नहीं हो रहा कि वह जमीन हेमंत सोरेन से जुड़ी है”। 

हाई कोर्ट ने 13 जून को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था जो 28 जून को सुनाया है और जज साहब की यह दोनों टिप्पणियां कह रही हैं कि हेमंत सोरेन निर्दोष है और ED का उसके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। 

जस्टिस मुखोपाध्याय बताएं कि ED ने 31 मार्च को दायर 5500 पन्नों की चार्जशीट में क्या कोई भजन संग्रह दिया था, फिर ट्रायल कोर्ट ने उस पर संज्ञान कैसे ले लिया और 5 महीने तक हेमंत की जमानत की अर्जियां ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में कैसे ख़ारिज होती रहीं

अगर ED के पास कुछ साबित करने के है ही नहीं तो जमानत क्यों दी आपने, आप उसे बरी ही कर देते

याद रहे ये मुखोपाध्याय जी उसी हाई कोर्ट के जज हैं जहां लालू यादव की 32 साल की सजा के खिलाफ 5 अपील 5 से 11 साल से लंबित हैं

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक और महान व्याख्या की है - 16 मई को जस्टिस AS Oka और जस्टिस Ujjal Bhuyan ने फैसला दिया कि यदि कोई आरोपी special court के summons पर पेश होता है, तो उसे custody में नहीं माना जा सकता और उसे PML Act के कठोर प्रावधानों में (Draconian Conditions) जमानत की अर्जी देने की जरूरत नहीं है CRPC की धारा 88 में कोर्ट उसे बांड भरने को कह सकता है उसके लिए PML Act की section 45 की twin conditions उस पर लागू नहीं होंगी

Section 45 कहता है - “bail can be granted to an accused in a money laundering case only if twin conditions are satisfied, there should be prima facie satisfaction that the accused has not committed the offence and that he is not likely to commit any offence while on bail”.

अब सवाल उठता है मीलॉर्ड कि PML Act में कोई ट्रायल कोर्ट सीधा summon कैसे कर सकता है जबकि यह काम जांच एजेंसी का होता है। अगर ED/CBI के लगातार summons पर कोई हाज़िर नहीं होता जैसे केजरीवाल नहीं हुआ था, तब एजेंसी कोर्ट में शिकायत करती है और तब कोर्ट उसे summon करता है लेकिन वह कोई जांच में भाग लेना नहीं होता। ऐसे में जो व्याख्या की दोनों माननीय जजों ने उसके मायने तो वे ही जाने अलबत्ता उससे अपराधियों को संरक्षण जरूर मिल सकता है

भ्रष्टाचार को कम आंकने की कोशिश मत कीजिए मीलॉर्ड, इसकी आग में एक दिन आपके भी हाथ जल जाएंगे

एक दिन में एक नहीं तीन मक्कारी भरे काम किए Justice (s) खन्ना और दत्ता ने और साबित कर दिया केजरीवाल हिंदुस्तान की किसी भी “फिरदौस” को खरीद सकता है;क्या चुनाव केजरीवाल के लिए है, हेमंत के लिए नहीं?

सुभाष चन्द्र

जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता के केजरीवाल को जमानत देने के फैसले ने साबित कर दिया केजरीवाल किसी को भी खरीद सकता है चाहे वह हिंदुस्तान की कोई “फिरदौस” ही क्यों न हो, सुप्रीम कोर्ट के एक चीफ जस्टिस ने वीएन खरे ने रिटायर होने के बाद कहा था कि “पैसा न हो तो न्याय के लिए अदालत की तरफ देखना भी गुनाह है"। आज सुप्रीम कोर्ट के बाहर लिख देना चाहिए कि “हम सब बिकाऊ हैं, खरीदने की हिम्मत होनी चाहिए”

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
कल इन दोनों जजों के 2 और मक्कारी भरे काम नज़र आए जब कल रात सोने से पहले news portals को खंगाल रहा था। इसमें एक मामला था झारखंड के हेमंत सोरेन का और केजरीवाल का और दोनों मामले Parallel देखने चाहिए। केजरीवाल के साथ सोरेन पर चर्चा का मतलब यह नहीं है कि मैं उसके पक्ष में खड़ा हूं। दूसरा मामला था केजरीवाल गिरोह के लोगों के केस लड़ने वाले वकीलों को फीस के भुगतान का। 

आज देश सुप्रीम कोर्ट से जानना चाहता है कि जब केजरीवाल को जमानत मिल सकती है, हेमंत सोरेन को क्यों नहीं? अगर केजरीवाल का दिल्ली और पंजाब में प्रभाव है तो हेमंत का झाड़खंड और समीपवर्ती राज्यों में। क्या चुनाव केजरीवाल के लिए है, हेमंत के लिए नहीं? आरोप दोनों पर घोटाले के हैं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ खामोश क्यों? इसका मतलब है जस्टिस वी एन खरे ने जो कहा था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने ही सच साबित कर दिया। इसकी जाँच कौन करेगा? 

केजरीवाल ने कोई अंतरिम बेल की अर्जी नहीं लगाई, उसने कोर्ट में केवल अपनी गिरफ़्तारी को illegal कहा। दूसरी तरफ 29 अप्रैल को सोरेन ने illegal गिरफ़्तारी के सिवाय “अंतरिम जमानत” की भी अर्जी लगाई थी और खन्ना/दत्ता लगाई ED को उस दिन नोटिस जारी कर 6 मई तक जवाब मांगा था

उसके पहले ही 1 मई को खन्ना जी ने हल्ला ठोक दिया कि केजरीवाल को चुनाव में arrest क्यों किया और 3 मई को उन्हें एक भूत चढ़ गया और स्वतः ही केजरीवाल को Interim Bail का मामला उठा दिया। 7 मई को सुनवाई भी पूरी कर ली लेकिन Order नहीं दिया। 

उधर ED ने सोरेन पर 6 मई को जवाब तो दे दिया होगा लेकिन खन्ना जी की बेंच ने सोरेन की Interim Bail के सुनवाई की जरूरत नहीं समझी। 

अब 11 मई को खन्ना जी और दत्ता को केजरीवाल को येन केन प्रकारेण जेल से बाहर करना ही  था और कर दिया चाहे सोशल मीडिया पर जनता उन्हें कुछ भी कहे। उन्हें तो कुछ “ताकतों” का जैसे कर्ज उतरना था ऐसा लग रहा था

लेकिन 11 मई को ही हेमंत सोरेन के 2 मामले लगे थे। एक तो उसने अपील की थी कि हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ़्तारी को illegal कहने की उसकी याचिका पर फैसला करने का आदेश दिया जाए और उसकी interim bail का मामला। लेकिन खन्ना ने arrest के बारे में कह दिया कि हाई कोर्ट 3 मई को फैसला दे चुका है तो आपकी याचिका “infructuas” हो गई जिसके खिलाफ आपने दूसरी बेंच में अपील की। और दूसरी बेंच ही interim bail का मामला भी देख लेगी 13 मई को

मजे की बात है 13 मई को झारखंड में पहले चरण का चुनाव है पर उसके लिए खन्ना जी ने न सुनवाई की और न order दिए और जो चुनाव दिल्ली में 15 दिन के बाद है, उसके लिए केजरीवाल को छोड़ दिया। 

इसके अलावा केजरीवाल सरकार ने LG के 2 आदेशों और गृह मंत्रालय के एक आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसमें LG ने दिल्ली सरकार को अपनी पसंद के वकील नियुक्त करने और उनकी फीस तय करने से रोका था। इसका मतलब साफ़ है अभी वकीलों की न नियुक्ति  हुई और न उनकी फीस तय हुई लेकिन खन्ना/दत्ता ने कल 11 मई को LG को हुकुम दे दिया की सभी वकीलों  की बकाया फीस का भुगतान कर दिया जाए और इसे Prestige Issue न बनाया जाए

इस वकीलों पर फैसले से फिर से यकीन पक्का होता है कि मीलॉर्ड भी जनता के पैसे की लूट में भागीदार हो गए लगते हैं क्योंकि जब वकीलों की फीस तय ही नहीं हुई तो भुगतान क्यों? आखिर क्यों केजरीवाल पर इतने मेहरबान क्यों हैं मीलॉर्ड

जिस कांग्रेस सांसद के ठिकानों से मिला 390 रूपए करोड़ कैश, उसी ने हेमंत सोरेन को दी BMW कार

कांग्रेस नेता धीरज साहू (बाएँ) ने पूर्व CM हेमंत सोरेन (दाएँ) को दी थी BMW कार
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फ़िलहाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की गिरफ्त में हैं। जाँच एजेंसी ने उनकी एक BMW कार भी जब्त की थी। अब पता चला है कि ये कार कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू ने ये लक्जरी कार खरीद कर उन्हें दी थी। ‘रिपब्लिक’ ने अपने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है। बता दें कि धीरज साहू के घर से ही आयकर (IT) विभाग ने 390 करोड़ रुपए जब्त किए थे। गुरुग्राम और कई ठिकानों पर छापेमारी कर के ED ने साहू-सोरेन लिंक का पता लगाया।

इसी दौरान पता चला कि उक्त BMW कार एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है, जब कंपनी को लेकर छानबीन की गई तो पता चला कि इसका स्वामित्व हेमंत सोरेन के पास है। बता दें कि 7 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। एक नहीं, बल्कि 2 BMW कार उनके ठिकानें से बरामद की गई थीं। साथ ही 36 लाख रुपए और कुछ दस्तावेज भी मिले थे। हेमंत सोरेन 2 दिनों तक गायब रहे थे। वो दिल्ली से निकले, राँची में प्रकट हुए और इस्तीफा देकर चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री नियुक्त किया।

आर्किटेक्ट विनोद सिंह को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ही गिरफ्तार किया गया है, अब ED ने उसके साथ हेमंत सोरेन के चैट्स होने का भी खुलासा किया है। ये चैट्स 539 पेज की है। इसमें JSSC के कई एडमिट कार्ड्स भी हैं, ट्रांसफर-पोस्टिंग और लेनदेन की बातें हैं। उधर हेमंत सोरेन की रिमांड भी 5 दिन बढ़ा दी गई है। बिरसा मुंडा जेल (होटवार) में पदस्थापित जेल अधीक्षक नरेंद्र प्रसाद सिंह और हजारीबाग सेन्ट्रल जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार की पोस्टिंग के लिए 75 लाख रुपए का ऑफर दिया गया था।

इसी तरह IAS शशि रंजन को हजारीबाग या बोकारो का DC बनाने के लिए पैरवी की गई थी। इसी तरह JSSC के तत्कालीन डिप्टी सेक्रेट्री रविराज शर्मा को RTA हजारीबाग का सेक्रेट्री या राँची नगर निगम का AMC और DRDA के ज्वाइंट सेक्रेटरी मोहम्मद हैदर अली को लातेहार का DDC बनाने की पैरवी भी की थी। बड़गाई अंचलाधिकारी, राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद की भी हेमंत सोरेन के साथ मिलीभगत है और इन्होंने मिल कर जमीन पर कब्ज़ा किया था।

झारखंड : फरार हो गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या हो गया अपहरण? दिल्ली आवास पर डेरा डाल कर बैठी है ED

क्या झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन घोटाला कर के फरार हो गए हैं? कम से कम मीडिया में तो यही चल रहा है। साथ ही भाजपा का भी यही आरोप है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) जमीन घोटाले में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच चल रही है। अब ED उनसे दोबारा पूछताछ करने के लिए उन्हें खोज रही है। खबर है कि वो मिल ही नहीं रहे हैं। उन्हें पेश होने के लिए बुधवार (31 जनवरी, 2024) तक का समय दिया गया है। उनके दिल्ली स्थित आवास पर एजेंसी के अधिकारी डेरा डाले हुए हैं।

झारखंड में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “ED अधिकारियों के डर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लापता होने की सूचना समाचार चैनलों के माध्यम से प्राप्त हो रही है। अगर इस खबर में सत्यता है तो यह झारखंड के लिए संवैधानिक संकट की स्थिति है। महामहिम CP राधाकृष्णन से निवेदन है कि वो मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को तलब कर जाँच एजेंसी से भागने का कारण पूछें।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की साख और प्रतिष्ठा दाँव पर है। उन्होंने कहा कि अपनी इन हरकतों से हेमंत ने उनके जनजातीय समाज की प्रतिष्ठा और गौरव को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। साथ ही उन्होंने झारखंड के DGP से जवाब माँगा कि CM हेमंत सोरेन सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर रात को कैसे बाहर निकल कर भाग सकते हैं? उन्होंने की सुरक्षा में लगे कर्मियों को बर्खास्त करने की माँग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत सुरक्षित रूप से पेश किया जाना चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि आखिर एक राज्य का मुख्यमंत्री भगोड़ा कहलाने का पाप कैसे कर सकता है? उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। वहीं गोड्डा के सांसद एवं भाजपा नेता निशिकांत दुबे भी इस मामले में मुखर हैं। डॉ दुबे ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि झारखंड सरकार का महाधिवक्ता मेरे झारखंड की आन बान और शान वीर शिबू सोरेन जी के बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को भगोड़ा घोषित कर देगा। आज मेरी बात सही साबित होती दिख रही है।”

निशिकांत दुबे ने कहा कि मीडिया के ख़बरों के अनुसार या तो हेमंत सोरेन जी भाग गए दिल्ली से या तो बीमार हो गए या तो अपहरण हो गया। उन्होंने झारखंड के राज्यपाल CP राधाकृष्णन से माँग की कि सीएम के सुरक्षा अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड का नाक कट गया। हेमंत सोरेन को अब तक 10 बार समन भेजा जा चुका है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके साथ पूछताछ जारी होने की बात भी कही जा रही है।


झारखंड : सरकार पर खतरे के बीच बैठक से गायब रहे कांग्रेस और झामुमो के 11 विधायक

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  के लिए रास्ते मुश्किल होती जा रही हैं। खनन मामले में विधायकी जाने की आशंकाओं के बीच 20 अगस्त 2022 को राँची में आयोजित की गई बैठक में महागठबंधन के 11 विधायक नहीं पहुँचे। इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित हुई इस बैठक में आने वाले राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। महागठबंधन में शामिल सीएम सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) ने अपने-अपने विधायकों से राँची में रहने का आदेश दिया था।

तीनों के दलों द्वारा अपने विधायकों को जारी किए गए निर्देश के बावजूद बैठक में 11 विधायक नहीं पहुँचे। इनमें सबसे अधिक कांग्रेस के हैं। हाल ही में कांग्रेस के तीन विधायक नकदी के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ाए थे। तब कांग्रेस ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था।

अपने विधायकों के टूटने के डर से और खनन पट्टा मामले में चुनाव आयोग के आने वाले निर्णय में उनकी विधानसभा सदस्यता जाने के कयासों के बीच इस बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि सीएम सोरेन के नेतृत्व में सभी विधायक एकजुट हैं और अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगे राजनीतिक हालात चाहें जैसे भी हों, राज्य की महागठबंधन सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गठबंधन के विधायक गाँव-गाँव जाकर हेमंत सरकार के कामकाज के बारे में लोगों को बताएँगे। इसके साथ ही सरकार को अस्थिर करने की भाजपा की साजिश का पर्दाफाश करेंगे।

झामुमो और कॉन्ग्रेस के विधायक रहे गायब

बताया जा रहा है कि जो 11 विधायक बैठक में नहीं पहुँचे उनमें कांग्रेस और झामुमो के विधायक शामिल हैं। इन विधायकों के बैठक में नहीं पहुँचने की वजह निजी काम एवं समस्याएँ बताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि विधायक भूषण बाड़ा की फ्लाइट मौसम खराब होने के कारण देर से राँची पहुँची।
वहीं, पूर्णिमा नीरज सिंह शहर से बाहर होने के कारण बैठक में नहीं पहुँची। विधायक ममता देवी का स्वास्थ्य ठीक नहीं बताई जा रही है। वहीं, शिल्पी नेहा तिर्की वरिष्ठ नेताओं से मिलने के लिए दिल्ली गई हुई हैं। इस कारण ये लोग बैठक में नहीं पहुँचे। 
कांग्रेस के तीन विधायक कैश कांड में गिरफ्तार हैं। वहीं, झामुमो के सरफराज अहमद विदेश में है, जबकि चमरा लिंडा अस्वस्थ बताई जा रही हैं। समीर मोहंती खराब मौसम के कारण देर शाम तक राँची पहुँचे। वहीं, सीएम सोरेन के भाई बसंत दिल्ली में थे।
पार्टी से निर्देश के बावजूद इन विधायकों के अनुपस्थित रहने पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालाँकि, महागठबंधन का कहना है कि सारे विधायक एकजुट हैं और सरकार कोई खतरा नहीं है।

सीएम सोरेन की पत्नी कल्पना को मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी

खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग का फैसला आने वाला है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की। 
इसके साथ ही हाल ही में कांग्रेस के तीन विधायक 48 लाख रुपए की नकदी के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ाए थे। इसके बाद से उन्हें पार्टी में टूट का डर सताने लगा है। इस घटना के बाद से दोनों पार्टियाँ अलर्ट मोड में हैं।
इस पर गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांंत दुबे ट्वीट कर कहा था, “झारखंड में भाभी जी के ताजपोशी की तैयारी, परिवारवादी पार्टी का बेहतरीन नुस्ख़ा गरीब के लिए।” उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की ओर इशारा किया।

अब ‘भाभीजी CM’ देखेगा झारखंड?

अगर चुनाव आयोग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन के खिलाफ फैसला देेता है और वर्तमान सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि लालू यादव की तर्ज पर हेमंत सोरेन अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो कल्‍पना सोरेन झारखंड की पहली महिला मुख्‍यमंत्री होंगी।

झारखंड में राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विधानसभा की सदस्यता जाती देख पत्नी को मुख्यमंत्री बनाने की की तैयारी कर रहे हैं। यह दावा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने किया है।

साल 1997 में चारा घोटाले में जेल जाने से पहले बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम की कुर्सी सौंप दी थी।

गोड्डा से भाजपा सांसद दुबे ने ट्वीट कर कहा, “झारखंड में भाभी जी के ताजपोशी की तैयारी, परिवारवादी पार्टी का बेहतरीन नुस्ख़ा गरीब के लिए।” उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन (Kalpna Soren) की ओर इशारा किया।

अपने एक अन्य ट्वीट में निशिकांत दुबे ने कहा था, “झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉन्ग्रेस दिल्ली-राँची क्यों दौड़ लगा रही है? हमने बोला बरहेट, दुमका में उपचुनाव होगा तो हमें काँके भेज रहे थे। अब तो विधानसभा अध्यक्ष को कनाडा जाने से रोक दिया गया। इस्तीफा ही विकल्प है, इसलिए दे दीजिए।”

इसके पहले दुबे ने भाजपा कार्यकर्ताओं को विधानसभा उपचुनाव के लिए तैयार रहने को कहकर राज्य की राजनीति गर्मा दी थी। उन्होंने कहा था कि बरहेट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दुमका से उनके भाई बसंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता जा सकती है। उन्होंने दावा किया था कि सीएम सोरेन अगस्त बीता लें तो बड़ी बात होगी।

खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग का फैसला आने वाला है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की। 

इसके साथ ही हाल ही में कॉन्ग्रेस के तीन विधायक 48 लाख रुपए की नकदी के साथ पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पकड़ाए थे। इसके बाद से उन्हें पार्टी में टूट का डर सताने लगा है। इस घटना के बाद से दोनों पार्टियाँ अलर्ट मोड में हैं।

इसको देखते हुए हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कॉन्ग्रेस (Congress) वाली गठबंधन सरकार में मंथन चल रहा है। इसको लेकर शनिवार (20 अगस्त 2022) को 11 बजे महत्वपूर्ण बैठक भी थी, जिसका विवरण सामने आना अभी बाकी है। महागठबंधन के दलों ने अपने-अपने विधायकों को राँची में ही रहने के लिए कहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि JMM प्रमुख शिबू सोरेन (Shibu Soren) के नाम पर सहमति बन सकती है, लेकिन उनके खिलाफ भी दिल्ली लोकपाल में 25 अगस्त को सुनवाई होने वाली है।

कुछ विश्लेषक हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन और जामा से विधायक हेमंत की भाभी सरिता सोरेन के नाम को लेकर भी चर्चा हो सकती है। महागठबंधन की बैठक में राजनीति के अगले के कदम के बारे में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।

‘…यहीं बंधक बना लेंगे’: झारखंड मुक्ति मोर्चा के MLA ने दी महिला थानेदार को धमकी

पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए झारखंड JMM विधायक जिग्गा सोरो (चित्र साभार - संजीवनी समाचार)

झारखंड के राँची में JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के विधायक जिग्गा होरो ने एक महिला थानेदार को बंधक बना लेने की धमकी दी है। महिला इंस्पेक्टर का नाम ममता कुमारी है। इस धमकी का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है।

विधायक जिग्गा होरो की लगातार डांट सुन कर महिला पुलिस अधिकारी वहाँ से चुपचाप चली गईं। इसके बाद भी विधायक मौके पर मौजूद बाकी पुलिसकर्मियों को डांटते रहे। वीडियो गुरुवार (17 मार्च) का बताया जा रहा है। विधायक जिग्गा होरो के अनुसार किसी का उग्रवादी बनना उसकी मजबूरी होती है। 

धमकी देने वाले विधायक जिग्गा सुसारन होरो (Jiga Susaran Horo) सिसई विधानसभा से निर्वाचित हैं। वायरल वीडियो में वो महिला इंस्पेक्टर को कह रहे हैं:

“ज्यादा होशियार मत बनो, नहीं तो यहीं बंधक बना लेंगे। किस चीज की ड्यूटी करते हो आप जो टाइम से एक्शन नहीं लेते। छेड़ो नहीं, वरना छोड़ेगा नहीं। तमाशा बना कर रखे हैं आप लोग। ड्रामा मत कीजिए, रात को आप को हम फोन किए थे। कोई गवर्नर हैं क्या? जब मामला कोर्ट में है तो आप छापेमारी कर रहे हैं। हम बता दे रहे हैं कि हम आपकी छापेमारी करवा देंगे।”

इस दौरान महिला पुलिसकर्मी ने अपनी सफाई में कोई जवाब देना चाहा तो उसे डाँट कर चुप करा दिया गया।

उग्रवादी बनना मजबूरी – JMM विधायक

JMM विधायक जिग्गा होरो ने पुलिसकर्मियों को डांटते हुए आतंकी बनना किसी की मजबूरी बताया है। उन्होंने कहा, “आप लोग चाहते हैं कि यहाँ का लड़का आतंकवादी बन जाए। फिर वो जंगल चला जाए। मजबूरी में आदमी क्या करेगा। जंगल चला जाएगा। उग्रवादी बनेगा और लूटेगा। मारेगा और काटेगा। पढ़ने के लिए जगह नहीं मिलेगा। वैसे भी यहाँ अतिक्रमण किया जा रहा है। यहाँ का जंगल लूटा जा रहा है। यहाँ के आदिवासियों की जमीनों को लूटा जा रहा है। अगर यूथ छेड़ोगे तो राँची को पागल कर देगा। यही चाहते हो क्या कि बच्चे बदमाश बन जाएँ। जब ये जंगल चले जाएँगे तब आप छापेमारी करिएगा?”

विधायक का बयान और झारखंड पुलिस एसोसिएशन

महिला पुलिसकर्मी ममता कुमारी के खिलाफ JMM विधायक जिग्गा होरो की बयानबाजी के खिलाफ झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने रोष जताया है। एक पत्रकार वार्ता में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय महामंत्री अक्षय कुमार राम ने कहा, “महिला थाना प्रभारी के ऐसा व्यवहार निंदनीय ही नहीं बल्कि अपराध के समान है। विधायक का ऐसा बर्ताव सिर्फ महिला पुलिसकर्मी ही नहीं बल्कि तमाम महिलाओं का भी अपमान है।”
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इसकी लिखित शिकायत झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से करने की बात की है। साथ ही विधायक जिग्गा होरो के आचरण की जाँच कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग भी की जाएगी।
16 मार्च को झारखंड की राजधानी राँची में लगभग 250 लोगों की भीड़ नवीन सरना कॉलेज के हॉस्टल को खाली करवाने पहुँची थी। इस भीड़ का नेतृत्व बिशु उरांव नाम का व्यक्ति कर रहा था, जो हॉस्टल की जमीन को अपना बताता है। इस दौरान हॉस्टल में जम कर हंगामा हुआ। हॉस्टल के पीछे की दीवार को तोड़ दिया गया। वहाँ मौजूद छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की गई।
घटना के बाद बिशु उरांव समेत 250 अज्ञात के खिलाफ सुखदेवनगर थाने में FIR दर्ज की गई। इन सभी हमलावरों पर हथियारों से लैस होने और 50 लाख की रंगदारी माँगने का भी आरोप लगा है। विधायक जिग्गा होरो इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। उनके साथ मांडर विधायक बंधु तिर्की, खिजरी विधायक राजेश कच्छप, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक सुखदेव भगत और अन्य नेता मौजूद थे।