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उत्तर प्रदेश : कानपुर में सिर्फ ‘I Love Muhammad’ के बैनर पर नहीं है विवाद, हिंदुओं के धार्मिक पोस्टर फाड़ने की छिपाई जा रही बात

                                              बिहार में मुस्लिम समुदाय का प्रदर्शन (फोटो: दैनिक जागरण)
जब भी हिन्दू त्यौहार आते हैं मुस्लिम कट्टरपंथी किसी न किसी बहाने माहौल ख़राब करते रहते हैं, आखिर सरकार और अदालतें इन लोगों पर क्यों नहीं करती? क्या हिन्दू पुलिस के पहरे में अपने त्यौहार बनाएंगे? कभी शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी कभी कुछ कभी कुछ। आखिर हिन्दू भी सरकार या अदालत के सहारे कब तक रहेगा? क्यों उनके संयम की अग्नि परीक्षा ली जा रही है? फिर अपने में victim card खेलते हैं जिस चुंगल में सभी आकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं, लेकिन जेहादी अपनी जेहादी हरकतों से बाज़ नहीं आते।  

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कथित तौर पर ‘I Love Muhammad’ के बैनर हटाने को लेकर हुए विवाद की चपेट में पूरा देश आता जा रहा है। बिहार से लेकर हैदराबाद तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। गुजरात के गोधरा में तो इस मामले को लेकर हिंसा भी हुई है और कट्टरपंथियों ने थाने में तोड़फोड़ कर दी है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक संगठित अभियान चलाया जा रहा है और मुस्लिम युवा ‘I Love Muhammad’ के हैशटेग के साथ अपने पोस्ट शेयर कर रहे हैं। इस पूरे प्रदर्शन के पीछे प्रदर्शनकारियों का दावा है, “पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी की जा रही है।”

पुलिस ने इससे जुड़े मामले में करीब एक दर्जन युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके बाद से ही ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि यह विवाद सिर्फ ‘I Love Muhammad’ के पोस्टर को लेकर है।

क्या है असली कहानी?

यह बात सही है कि ‘I Love Muhammad’ के बैनर लगाने को लेकर विवाद हुआ था लेकिन पूरी कहानी इस विवाद से आगे की है। ऑपइंडिया द्वारा ऐक्सेस की गई FIR को पढ़ने के बाद असली बात सामने आ गई।

इस विवाद की शुरुआत हुई 4 सितंबर को रावतपुर थाना क्षेत्र के सैयद नगर मोहल्ले में जफर वाली गली के सामने मुस्लिम समुदाय द्वारा बारावफात की रोशनी के कार्यक्रम में सजावट के लिए ‘I Love Muhammad’ का लाइट बोर्ड लगाया गया। पुलिस द्वारा दर्ज FIR में लिखा गया है, “ऐसा पहले नहीं हुआ था और यह मुस्लिम समुदाय के बारावफात कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा नई परंपरा की शुरुआत की जा रही थी।”

इस बोर्ड का स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई और पुलिस ने वहाँ से हटवाकर वो बोर्ड थोड़ी दूरी पर लगवा दिया। इसके बाद मामला शांत हो गया। यानी FIR में यह बात स्पष्ट तौर पर लिखी गई है कि जब मामला शांत कराया गया तो बोर्ड वहाँ लगा हुआ था। तो फिर विवाद कैसे हुआ?

असल में विवाद की शुरुआत हुई इसके अगले दिन यानी 5 सितंबर को इस दिन बारावफात का जुलूस निकाला जाना था। FIR के मुताबिक, “जुलूस निकाले जाने पर रावतपुर गाँव में हिंदू बस्ती से जुलूस निकाल रहे मुस्लिम समुदाय के कुछ अज्ञात मुस्लिम युवकों के द्वारा रास्ते में लगे हिंदू समुदाय के धार्मिक पोस्टर को जानबूझकर जुलूस में शामिल गाड़ी…में सवार मुस्लिम युवको द्वारा डंडों की मदद से फाड़ दिया गया।”

पुलिस को 10 सितंबर को इन घटनाओं की CCTV फुटेज भी प्राप्त हो गई। FIR में कहा गया है, “CCTV रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हो रहा है कि घटना वाले दिनजुलूस में शामिल मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा जानबूझकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने को लेकर ऐसे कृत्य किए गए जिससे क्षेत्र में अराजकता फैल सके तथा सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न हो सके।”

                                          पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR का एक हिस्सा

आप इन शब्दों पर भी ध्यान दें तो स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला केवल ‘I Love Muhammad’ के बैनर से जुड़ा हुआ नहीं है। वो बस इस पूरे विवाद का एक हिस्सा है जबकि असली कहानी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदुओं के धार्मिक पोस्टर को मुस्लिम द्वारा फाड़ने की है।

क्या कह रही है पुलिस?

वहीं, इस मामले में रावतपुर थाने के SHO कृष्ण मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है यह FIR ‘I Love Muhammad’ के बैनर लगाने को लेकर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जिन युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की थी।

इस जानकारी से स्पष्ट है कि यह FIR सिर्फ उस वजह से नहीं लिखी गई है जिसके चलते देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनों के दौरान इसके असली पक्ष को छिपा लिया जा रहा है और विवाद को हवा देने के लिए अधूरी जानकारी का इस्तेमाल हो रहा है। जिस तरह गुजरात में इसे लेकर हिंसा की गई है तो आने वाले वक्त में ऐसे प्रदर्शनों को लेकर और सावधानी बरतने की जरूरत है।