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एक युद्ध समाप्त हो सकता है तो दूसरा और भड़क सकता है, जिसके परिणाम घातक होंगे पूरे विश्व के लिए

सुभाष चन्द्र

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान पुतिन-मोदी की Chemistry देख कर जिस तरह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भड़के थे और पुतिन समेत मोदी के लिए भी  अपमानित करने वाली भाषा प्रयोग की थी उसे देख कर यूक्रेन भारत के मित्र देशों की श्रेणी में तो नहीं माना जा सकता, लेकिन अब समाचार मिल रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अगस्त में यूक्रेन की यात्रा पर जाएंगे। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं मोदी जी की यूक्रेन यात्रा के लेकिन मेरा मानना है कि जैसे जैसे अमेरिकी चुनाव करीब आ रहा है जेलेंस्की को अमेरिकी मदद मिलना बंद होना निश्चित हो रहा है और अब जेलेंस्की युद्ध बंद कर Honourable Exit Route तलाश रहा है और यह उसे भी पता है और अमेरिका समेत पूरा यूरोप भी जानता है कि मोदी अकेला वो शख्स है जो राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध रोकने के लिए प्रभावशाली ढंग से मना सकता है और शायद इसलिए ही जेलेंस्की ने युद्ध रोकने की पूरी तैयारी करके ही मोदी को यूक्रेन आने के लिए मनाया है जेलेंस्की मोदी के सामने अपनी वो शर्तें रखेगा जिससे उसकी इज़्ज़त भी बनी रहे और युद्ध भी समाप्त हो जाए यह मेरा आंकलन है लेकिन मुझे शंका है कि अमेरिका इस युद्ध को रुकने देगा, यह समय ही बताएगा

दूसरी तरफ Hamas chief Ismail Haniyeh को इज़रायल द्वारा ईरान में मार गिराने के बाद ईरान, हमास, हिज़्बुल्ला, हूती की तरफ से इजराइल के साथ भयंकर युद्ध छिड़ने की संभावना बन रही है देखना यह होगा कि कितने इस्लामिक देश ईरान के साथ युद्ध में साथ देते है क्योंकि ईरान के युद्ध में लीडर बनने का मतलब है इस्लामिक वर्ल्ड पर शिया प्रभुत्व कायम होना और यह सुन्नी बहुल इस्लामिक देश शायद कबूल नहीं करेंगे 

हमास का इजरायल के साथ युद्ध एक पागलपन के सिवाय कुछ नहीं है और जो सोच हमास की हैं वह ईरान, हिज्बुल्लाह और हूती भी पाले बैठे हैं इज़राइल के अस्तित्व को ये लोग मिटा देना चाहते हैं और यह सोच पूरे विश्व को हो सकता है एक अघोषित युद्ध में धकेल दे विश्व के अनेक देशों में फलीस्तीन को समर्थन देने की आड़ में “हमास” को ही समर्थन दिया गया है

यह युद्ध पागलपन है यह इसी बात से साबित हो जाता है कि अब तक 38000 लोग गाज़ा में मर चुके हैं और Ismail Haniyeh ने कहा था कि उसके परिवार के 60 लोग मारे गए हैं भला क्या मिला लेकिन फिर इजराइल को ख़त्म करने का भूत सवार है

और इजराइल के खिलाफ ईरान और अन्य कटटरपंथी आतंकियों संगठनों द्वारा छेड़ा गया युद्ध एक Christian+Jews बनाम इस्लाम  युद्ध में बदल सकता है और जिस तरह हर मुल्क में इस्लामिक ताकतें टकराव पैदा कर रही हैं चाहे वो जर्मनी हो, ब्रिटैन हो या अन्य यूरोपीय देश हों, हर मुल्क में गृह युद्ध की स्तिथि पैदा हो सकती है जिसमें भारत भी शामिल होगा 

ऐसा कहा जा रहा है कि Ismail Haniyeh के उत्तराधिकारी का चयन आसान नहीं होगा जिसके दावेदार हैं Khaled Mashaal और Khalil al -Hayya, यह कहना है मिस्र अलकायदा के पूर्व-संस्थापक अबू मुहम्मद अल मसरी का। Khaled Mashaal वही लीडर है हमास का जिसने इज़रायल पर हमास के हमले  के कुछ दिन बाद 27 अक्टूबर को केरल के मल्लापुरम में Virtually भाषण देकर गाज़ा की unity के लिए call दी थी

उसके हमास का चीफ बनने से हमास की एंट्री भारत में होने की पूरी सम्भावना है क्योंकि कांग्रेस और सेकुलर खरपतवार खुली बाँहों से उनका स्वागत करेंगे और नेतृत्व करेगा ओवैसी यह एक अलग बहाना मिलेगा कांग्रेस को भारत को अस्थिर करने का आने वाला समय चुनौतियों से भरा होगा भारत के लिए भी हो सकता है Ismail Haniyeh जैसे क़तर में रहता था Khaled Mashaal छुप कर भारत में रहे और इजराइल उसे भारत में ठोक दे

ईरान के सुप्रीम लीडर ने आतंकी हमास के सरगना को बेरंग लौटाया, पहले देना चाहते थे हथियारों की मदद

           ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और फिलिस्तीन के प्रमुख इस्माइल (साभार: leader.ir)
फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास को धन और हथियार सहित हर तरह से मदद करने वाले ईरान ने अब मदद से इनकार कर दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई ने मिलने आए हमास के नेता से कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर किए गए हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इसलिए हमास की ओर से ईरान युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा। वहीं, हमास के ठिकाने से बरामद हुए दस्तावेजों से पता चला है कि हमले से पहले ईरान आतंकी संगठन हमास को हथियार बनाने में मदद देना चाहता था।

अयातुल्ला अली खामेनेई ने हमास के नेता इस्माइल हनीयेह से कहा कि ईरान फिलिस्तीनी संगठन हमास को लंबे समय से राजनीतिक और नैतिक समर्थन देना जारी रखेगा, लेकिन युद्ध में वह सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा। दरअसल, इस्माइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनाई से इस साल नवंबर के शुरुआत में मुलाकात करके समर्थन माँगा था।

हमास के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि खामेनाई ने इस्लामइल पर फिलीस्तीनी समूह की उन आवाजों को कम करने के लिए दबाव डाला, जो ईरान और उसके लेबनानी सहयोगी और हिजबुल्लाह को इजरायल के खिलाफ लड़ाई में पूरी ताकत से शामिल होने के लिए कह रहे थे। हिज्बुल्लाह लेबनान में शिया गुट का इस्लामी आतंकी संगठन है, जिसे ईरान का समर्थन हासिल है।

हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले से लेबनान का हिज्बुल्लाह भी आवाक रह गया था। इजरायल की सीमा से सटे गाँवों में तैनात उसके आतंकियों को भी इस हमले के बारे में जानकारी नहीं थी। हिज्बुल्लाह के करीबी तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि इसके आतंकियों को वहाँ से तुरंत बुलाना पड़ा था। ये आतंकी साल 2006 में इजरायल के साथ युद्ध में अग्रिम पंक्ति में थे।

जिस दिन हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमला किया था, उस दिन हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद डेफ ने अपने सहयोगियों से इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने एक ऑडियो संदेश में कहा था, “लेबनान, ईरान, यमन, इराक और सीरिया में इस्लामी प्रतिरोध के हमारे भाई, यह वह दिन है जब आपका प्रतिरोध फिलिस्तीन के लोगों के लिए भी है।”

इसके पहले ईरान ने हमास के आतंकियों को हथियार बनाने में मदद देने की बात कही थी। CNN ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गाजा के बाहर हमास के पिकअप ट्रक के अंदर पाए गए कंप्यूटर से इस संबंध में एक दस्तावेज बरामद किया गया है। इजरायली अधिकारियों द्वारा बरामद किए गए इस दस्तावेज से पता चलता है कि हमास के एक सैन्य कमांडर ने हमास के आतंकियों को प्रशिक्षण देने के लिए ईरान से अनुरोध किया था।

यह दस्तावेज़ हमास के एक सैन्य कमांडर का जुलाई 2023 में ईरानी सरकार को लिखा पत्र प्रतीत होता है। इसमें ईरान सरकार से अनुरोध किया गया है कि उसकी इकाई के सात सदस्यों को एक छात्रवृत्ति कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ईरान की यात्रा करने की अनुमति दी जाए। इज़रायली अधिकारी के अनुसार, हमास लड़ाकों को विश्वविद्यालय कार्यक्रम के माध्यम से विस्फोटक इंजीनियरिंग के प्रशिक्षण की भी पेशकश की गई थी। इसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स दिया गया था।

इसी संबंध में अमेरिकी अखबार वॉल स्‍ट्रीट जर्नल ने भी एक रिपोर्ट में बताया है कि इजरायल पर हुए अभूतपूर्व हमले के पहले हमास के लड़ाकों ने ईरान के रिवोल्‍यूशनरी गार्ड कॉर्प्‍स में ट्रेनिंग की थी। इस ट्रेनिंग में आतंकी संगठन ‘इस्‍लामिक जिहाद’ के 500 खूंखार आतंकी भी शामिल थे।

इज़रायली सरकार ने इस दस्तावेज़ पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालाँकि सरकार के सूत्रों ने इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने फिलहाल इसकी पुष्टि करने से इनकार कर दिया है। खुफिया जानकारों का कहना है कि ईरान प्रशिक्षण के जरिए इन आतंकियों को उनकी सैन्य उत्पादकता में वृद्धि करना चाहता था, ताकि उनकी ईरानी पर निर्भरता को कम किया जा सके।