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‘भारत हमारा अच्छा दोस्त’: प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात करने के बाद ईरानी राष्ट्रपति का बयान

                                  मोदी ने की ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत (साभार : NDTV)
पश्चिम एशिया में मचे भारी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की है। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत है।

मोदी ने इस तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से माल और ऊर्जा की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए, क्योंकि यह भारत की बड़ी प्राथमिकता है।

तनाव कम करने और भारतीयों की सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि भारत शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। पीएम ने जोर देकर कहा कि किसी भी विवाद का हल युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। भारत ने ईरान और इजरायल दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को टाला जा सके।

भारतीयों की सुरक्षा और व्यापारिक चिंताएँ

हाल ही में फारस की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम तीन भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान से बातचीत में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई। इसके अलावा, भारत के लिए यह क्षेत्र व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए पीएम ने सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की बात दोहराई।

ईरान ने की भारत की जमकर तारीफ

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बातचीत के दौरान भारत के स्टैंड को सराहा। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक ‘संतुलित और रचनात्मक’ भूमिका निभाई है। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह भारत को अपना एक सच्चा दोस्त मानता है। पेजेश्कियान ने पीएम मोदी को बताया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और कूटनीति से मसले हल कर रहा था, लेकिन अमेरिका और इजरायल के हमलों ने स्थिति बिगाड़ दी। ईरान ने माना कि भारत की कोशिशें जंग खत्म करने की दिशा में बहुत प्रभावी रही हैं।

सबकी बात सुनने वाला इकलौता नेता

आज के दौर में पीएम मोदी दुनिया के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो संघर्ष के दोनों पक्षों से सीधे बात कर सकते हैं। उन्होंने हाल के दिनों में इजरायली पीएम नेतन्याहू के साथ-साथ कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन जैसे देशों के नेताओं से भी संपर्क साधा है। भारत किसी एक गुट या गठबंधन का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी बात रख रहा है।

मध्यस्थ के रूप में भारत की साख

पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र के देश भारत को एक ‘स्थिरता लाने वाली शक्ति’ के रूप में देखते हैं। चूंकि भारत का रिश्ता ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों, तीनों के साथ गहरा है, इसलिए शांति और संयम बरतने की भारत की अपील को पूरी दुनिया में गंभीरता से सुना जा रहा है। भारत का एकमात्र उद्देश्य एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को रोकना और मानवीय हितों की रक्षा करना है।