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उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी विधायक को तुलसीदास के ग्रन्थ से दिक्कत, कहा – हिम्मत है तो मेरी ताड़ना कर के दिखाओ

 सपा विधायक पल्लवी पटेल
सनातन धर्म को कलंकित कर यदि छद्दम धर्म-निरपेक्ष सत्ता तक पहुँच जाएंगे अपने इस पाखंड को सुधारने में उनकी भलाई है। अगर अखिलेश यादव अपनी पार्टी को बचाना चाहते हैं, इन कुरीतियों पर लगाम लगानी होगी। सनातन धर्म पर कीजड़ फेंकने से हिन्दू तो क्या मिलने वाले मुस्लिम वोटों में उम्मीद से अधिक गिरावट देखोगे, क्योकि कट्टरपंथियों को छोड़ आम मुसलमान भी समझ रहा है कि 'जो अपने धर्म का नहीं, वह किसी के मजहब की क्या इज्जत करेगा', जो समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियों के लिए खतरे की घंटी है। सनातन पर जितने अधिक हमले होंगे, उतनी ही तेजी से वोट ध्रुवीकरण भी हो रहा है, इस सच्चाई को भी गंभीरता से समझना होगा।

रामचरितमानस को अपमानित करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। रामचरितमानस पर सबसे अधिक सवाल समाजवादी पार्टी उठा रही है। सबसे पहले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस ग्रंथ पर आपत्ति जताई और अनर्गल बयान दिए। अब इस कडी में सिराथू सीट से सपा विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह रामचरितमानस को नहीं मानती हैं और इसमें शूद्र शब्द हटाने के लिए आंदोलन करेंगी। जरूर करना चाहिए, क्योकि पार्टी को गठ्ठे में फेंकने का और कोई सुगम मार्ग दूर तक नज़र भी नहीं आ रहा। 
साभार सोशल मीडिया 

उन्होंने इसके साथ ही सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया और साथ ही पूछा कि उन्होंने इतनी देर से आपत्ति क्यों उठाई। अगर उन्हें इस बात का बुरा लगा था तो उन्होंने पहले ही पार्टी छोड़ देनी चाहिए थी। लेकिन वह भाजप के साथ बने रहे। पल्लवी दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य के उस बयान का संदर्भ दे रही थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव ने जब सीएम की कुर्सी छोड़ी थी, तब उस कुर्सी को गंगाजल से धोया गया था।

पललवी ने रामचरितमानस से कुछ शब्दों को हटाने की माँग की और अपने बयान में कहा, “बहुत से लेखकों ने इसे लिखा है। और, वाल्मीकि जी की रामायण को जिन्होंने अनुवाद किया है, उन्होंने सभी रामायणों का अनुवाद करके और उसमें अपने विचार मिलाकर रामचरितमानस का निर्माण किया है। इस्लाम और कुरान में लिखा है कि मूर्ति पूजन हराम है, लेकिन मैं यह नहीं मानती। हमारे लिए मूर्ति पूजा साकार ब्रह्म है। जिसको मैं मानती नहीं हूँ। उसकी मैं बात नहीं करती हूँ। किसी पंक्ति को हटाना, महत्वपूर्ण नहीं है। हमें आंदोलन इतना बड़ा करना है कि लोगों की मानस पटल से यह बात हटें। सबसे पहले शूद्र शब्द को हटाने की बात होती है। शूद्रों का जिस तरह से दमन हुआ है। उनका शोषण हुआ है। इस चीज को लोगों के मन से हटना जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा कि रामचरितमानस में यह भी लिखा हुआ है कि ढोल्, गँवार, शुद्र, पशु, नारी, सब हैं ताड़न के अधिकारी। साथ ही धमकी के अंदाज़ में कहा कि मैं आपके सामने नारी बैठी हुई हूँ, कोई करके दिखा दे मेरी ताड़ना। यह पूछे जाने पर कि क्या आप रामचरितमानस में विश्वास नहीं करती हैं, उन्होंने कहा, “मैं रामचरितमानस में विश्वास नहीं करती हूँ। मैं उन्हें संत नहीं मानती हूँ। मैं उन्हें केवल एक अनुवादक मानती हूँ। वो एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने सभी रामायण को पढ़ते हुए एक नई रामायण का निर्माण किया।”