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बांग्लादेश : कट्टरपंथ फैलाते-फैलाते यूनुस ने भर ली जेब, एक साल में 1.61 करोड़ टका बढ़ी संपत्ति: बीवी भी हुईं मालामाल


मुस्लिम कट्टरपंथियों के इशारे पर नाचने वाले उपद्रवियों को आंखें खोलनी चाहिए। उन्हें मिलती गोली, जेल या फिर जिस्मानी चोट, जबकि उनके आका अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश इसकी मिसाल है। ये हाल सभी जगह है। दंगों में मरता आम नागरिक है किसी कट्टरपंथी और उनके आकाओं के घर के परिंदे तक कुछ नहीं होता। मरती जनता ही है चाहे वह उपद्रवी ही क्यों न हो।   

बांग्लादेश चुनाव से दो दिन पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सलाहकारों की संपत्ति का ब्योरा जारी किया गया है कैबिनेट डिवीजन ने इसे मंगलवार को जारी किया इस ब्योरा के अनुसार 30 जून तक अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहाकार मोहम्मद यूनुस की कुल संपत्ति 15 करोड़, 62 लाख, 44 हजार और 65 टका है

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की संपत्ति में पिछले एक साल के दौरान बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, जून 2024 में मोहम्मद यूनुस की कुल संपत्ति 14.01 करोड़ टका थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 15.62 करोड़ टका हो गई है।

यानी महज एक साल में उनकी दौलत करीब 1.61 करोड़ टका बढ़ गई। दिलचस्प बात यह है कि देश का नेतृत्व कर रहे यूनुस पूरी तरह कर्ज मुक्त हैं। यूनुस की कमाई में यह उछाल मुख्य रूप से बैंक बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), निवेश योजनाओं और विरासत में मिले शेयरों की वजह से आया है।

मोहम्मद यूनुस की वित्तीय संपत्ति अब 14.76 करोड़ टका है, जबकि विदेशों में मौजूद उनकी संपत्ति भी बढ़कर लगभग 64.73 लाख टका हो गई है। साथ ही, उनकी बीवी अफरोजी यूनुस की संपत्ति भी 2.11 करोड़ से बढ़कर 2.27 करोड़ टका हो गई है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नेताओं की संपत्ति सार्वजनिक करने की बढ़ती माँग के बीच ये आँकड़े सामने आए हैं।

एक साल पहले यह 14 करोड़, 13 लाख, 96 हजार और 73 टका थी. यानी, एक साल में मोहम्मद यूनुस की संपत्ति में 1 करोड़, 61 लाख, 4 हजार 392 टका की बढ़ोतरी हुई

उन्होंने कहा कि सेविंग्स सर्टिफिकेट को कैश कराने, सेविंग्स या टर्म डिपॉजिट में बढ़ोतरी, विरासत में मिले शेयर वगैरह की वजह से कुल संपत्ति बढ़ी

जानें यूनुस की पत्नी के पास कितनी संपत्ति

चीफ एडवाइजर की पत्नी अफरोजी यूनुस की कुल संपत्ति एक करोड़, 27 लाख, 63 हजार और 360 टका है यह पिछले साल दो करोड़, 11 लाख, 77 हजार, 278 टका था. इस तरह से उनकी संपत्ति में 84 लाख, 13 हजार और 914 टका की कमी आई है

प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक, संपत्ति किसी टैक्सपेयर के मालिकाना हक वाली अचल, चल, फाइनेंशियल और कैपिटल संपत्ति का जोड़ है

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का किया था वादा

उन्होंने अपने भाषण में यह भी बताया कि राज्य लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संविधान के आर्टिकल 77 में किए गए वादे के मुताबिक एक ओम्बड्समैन नियुक्त करने के लिए एक ऑर्डिनेंस बनाया जाएगा
उस साल 1 अक्टूबर को, अंतरिम सरकार के एडवाइजर और बराबर हैसियत वाले लोगों की इनकम और संपत्ति के खुलासे की पॉलिसी, 2024 जारी की गई थी
पॉलिसी में कहा गया है कि अंतरिम सरकार के एडवाइजर और बराबर हैसियत वाले लोग, जो सरकार या रिपब्लिक की सेवा में काम कर रहे हैं, हर साल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख के 15 वर्किंग डेज के अंदर कैबिनेट डिवीजन के जरिए चीफ एडवाइजर को अपनी इनकम और संपत्ति जमा करेंगे
अगर पत्नी या पति की अलग इनकम है, तो वह भी जमा करनी होगी चीफ एडवाइजर इस बयान को अपनी समझ के हिसाब से पब्लिश करेंगे

संपत्ति के ब्योरा नहीं देने पर आलोचना

लेकिन इसे अब तक पब्लिश न करने पर आलोचना भी हुई थी इस बारे में चीफ एडवाइजर के प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम ने सोमवार को कहा था कि अंतरिम सरकार के सलाहकारों के एसेट स्टेटमेंट एक-दो दिन में पब्लिश कर दिए जाएंगे
5 अगस्त, 2024 को हिंसक छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार गिरने के बाद, 8 अगस्त को प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी

हिन्दू विरोधी हिंसा को रोकने में नाकाम अंतरिम सरकार, ‘कमजोर’ यूनुस के राज में बंद हो रहीं फैक्ट्रियाँ-खत्म हो रहे रोजगार: पाकिस्तान से ज्यादा बुरी दुर्दशा की ओर बढ़ रहा बांग्लादेश

हिन्दुओं के खिलाफ की जा रही हिंसा को रोकने में नाकामयाब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार
बांग्लादेश में शेख हसीना द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद से ही वहाँ हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा तेज़ हो गई। वैसे तो वहाँ दशकों से हिन्दुओं का कत्लेआम चल रहा है, लेकिन हाल के दिनों में वहाँ हिन्दुओं की इतनी दुर्गति हो गई है कि भारत से लगी सीमा पर हजारों लोग पलायन कर के आ गए, तो कइयों को रंगदारी देनी पड़ी। कई महिलाओं का बलात्कार हुआ है। हाल ही में एक युवक को पुलिस स्टेशन से खींच कर पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी गई। उसके माँ-बाप के सामने से ही ले जाकर उसे मार डाला गया।

शेख हसीना को देश छोड़े 1 महीना हो चुका है। अगले चुनाव में खालिदा जिया के नेतृत्व वाले BNP के सत्ता में आने की संभावना है क्योंकि शेख हसीना की ‘आवामी लीग’ के नेताओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। उससे पहले पश्चिमी देशों के करीबी नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। सेनाध्यक्ष वकार-उस-ज़मान भी उनके साथ हैं। JeI का संबंध इजिप्ट स्थित ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से है। हिफाजत-ए-इस्लाम और अंसार-उल-बांग्ला जैसे आतंकी संगठनों से भी इसने हाथ मिला रखा है।

बांग्लादेश में जिस हिन्दू विरोधी आंदोलन को वामपंथियों ने ‘युवा क्रांति’ बताया, उससे निकले छात्र नेता भी इन्हीं कट्टर इस्लामी संगठनों से प्रेरित हैं। ऐसे में कहने को वहाँ लोकतंत्र है लेकिन सत्ता इनके हाथ में ही है। फौज जानबूझकर तमाशबीन बनी हुई है, भले ही उसके सामने हिन्दुओं और ‘आवामी लीग’ के समर्थकों की हत्याएँ होती रहें। वो इस्लामी ताकतों से नहीं उलझना चाहती। भारत में जम्मू कश्मीर सहित कई इलाकों में JeI का प्रभाव है। 1990 के दशक में SIMI के पूरे भारत में प्रसार के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव था।

इस समूह को बाद में ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ ने हथियारों से लैस किया। जम्मू कश्मीर के युवाओं को हथियार देने और उन्हें प्रशिक्षित करने में भी जमात का हाथ है। बांग्लादेश की सरकार अभी हाल-फ़िलहाल में चुनावों की तारीखों का ऐलान करने नहीं जा रही है, ये कमजोर सरकार भी है। इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ने से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी गर्त में जा रही है। JeI ने हाल-फ़िलहाल में बांग्लादेश में खुद को और मजबूत किया है। जब तक ‘आवामी लीग’ के डरे हुए कार्यकर्ता व उससे जुड़े समूह एक न हो जाएँ तब तक इन्हें टक्कर नहीं दी जा सकती।

भारत फ़िलहाल ‘वेट एन्ड वॉच’ की स्थिति में है, ऊपर से मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगी भारत को धमका रहे हैं क्योंकि शेख हसीना ने भारत में ही शरण ली हुई है। एक अंतरिम और कमजोर सरकार जब कोई निर्णय ले ही नहीं पाएगी तब जनता उन्हीं युवा नेताओं से असंतुष्ट होगी जिनके लिए वो सड़कों पर उतरी थी। टेक्सटाइल मिल बंद हो रहे हैं, कपड़ा उद्योग के दरकने से रोजगार खत्म हो रहा है। बांग्लादेश पर वैसे भी 100 बिलियन डॉलर का कर्ज है। 1 साल के भीतर वहाँ एक और बड़ा राजनीतिक विस्फोट हो सकता है। जमात वाले बांग्लादेश के लिए अलग झंडे और राष्ट्रगान की माँग भी कर रहे हैं।