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United Nations और United Nations Security Council क्यों खामोश है? क्या ये संस्थाएं तमाशबीन है? जिहादियों का हीरो उस्मान हादी, भारत तोड़ने की ख्वाहिश और ग्रेटर बांग्लादेश का सपना

जिस मुल्क में किसी जेहादी की मौत पर तांडव किया जाए, एक दिन का सरकारी बंद घोषित किया जाए, वह मुल्क ज्यादा दिन रहेगा। लेकिन इतना नरसंहार होने पर United Nations और United Nations Security Council क्यों खामोश है? क्या ये संस्थाएं तमाशबीन है? क्यों नहीं ये संस्थाएं संज्ञान लेकर बांग्लादेश पर कार्यवाही करतीं? नरसंहार में सिर्फ हिन्दू ही नहीं विदेशी भी हैं?        
बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा का दौरा शुरू हो गया है। ढाका में शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। उस्मान हादी के समर्थकों ने मीडिया संस्थानों, शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग और भारतीय उच्चायोग को निशाना बनाया। जगह-जगह तोड़फोड़ और आगजनी की।

उस्मान हादी पर शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को गोलियों से हमला हुआ था, जिसके बाद से वह सिंगापुर के अस्पताल में भर्ती था। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (18 दिसंबर 20205) को बयान जारी कर कहा, “डॉक्टरों के तमाम कोशिशों के बावजूद, हादी ने अपने घावों के कारण दम तोड़ दिया।”

इस घोषणा के तुरंत बाद ही आक्रोशित उस्मान हादी के समर्थक सड़कों पर उतर आए और हादी की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की माँग करने लगे। भारी संख्या में भीड़ जमा होने से तनाव फैल गया। देखते ही देखते प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और भारत-विरोधी नारे तक लगने लगे। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर बांग्लादेश में हिंसा का कारण बना उस्मान हादी कौन है?

कौन है उस्मान हादी?

उस्मान हादी का जन्म बांग्लादेश के झलकाठी जिले के नलचिती उपजिला में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उसके पिता मदरसा में पढ़ाते थे। हादी ने भी नेराबाद कामिल मदरसे से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद ढाका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग का छात्र था।

वह करीब 32 वर्ष की उम्र में ही इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ का प्रवक्ता बन गया था, जो कट्टरपंथी विचारधारा को प्रचार करता है।

शेख हसीना के तख्तापलट में उस्मान हादी की भूमिका?

शरीफ उस्मान बिन हादी बांग्लादेश में साल 2024 में उपजे छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा था, जिसने शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट कराया था। इसके चलते शेख हसीना को देश तक छोड़ना पड़ा था। उस्मान हादी बांग्लादेश के इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ का संयोजक था। यह संगठन शेख हसीना की ‘अवामी लीग’ को खत्म करने में सबसे आगे रहा है।

उस्मान हादी बांग्लादेश में आगामी फरवरी 2026 में होने वाले चुनाव लड़ने की तैयारी में था। वह ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्रचार कर रहा था।

उस्मान हादी का भारत-विरोधी रुख

उस्मान हादी ने भारत के खिलाफ भी कई भड़काऊ बयान दिए हैं। वो शेख हसीना की ‘अवामी लीग’ को भारत से प्रभावित होने के चलते कट्टर आलोचना करता था। वो अक्सर अवामी लीग को उसके भारत के साथ संबंधों को लेकर पार्टी को निशाना बनाता था।

कुछ जगहों पर वह BNP और यूनुस की अंतरिम सरकार पर भारत के नियंत्रण से मुक्त होने में विफल रहने का आरोप लगाता था। उस्मान की मौत के बाद ‘इंकलाब मंच’ ने फेसबुक पोस्ट में भारत का जिक्र करते हुए कहा, “भारतीय वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष में, अल्लाह ने महान क्रांतिकारी उस्मान हादी को बलिदानी के रूप में स्वीकार किया है।”

हादी के भारत-विरोधी रुख ने ही साल 2024 के जुलाई विद्रोह के बाद युवा आंदोलनों को गति दी। अब हादी की मौत के बाद उसके समर्थकों ने भारत पर हमलावरों को शरण देने का आरोप लगाया और भारतीय उच्चायोग बंद करने की माँग की। हादी की बहन महफूजा ने भी हमले के लिए भारत के RAW पर उंगली उठाई।

बांग्लादेश के नक्शे में दिखाए भारत के पूर्वोत्तर राज्य

12 दिसंबर 2025 को उस्मान हादी पर हमले से पहले भी उस्मान हादी ने विवादित फेसबुक पोस्ट किया था। फेसबुक पोस्ट में उसने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा दिखाया था, जिसमें भारत के 7 पूर्वोत्तर राज्य भी शामिल थे। इस पोस्ट के कुछ घंटों बाद ही ढाका में हादी पर सड़क पर कुछ नकाबपोशों ने गोलियाँ बरसाईं थीं।

अब हादी की मौत के बाद उसके समर्थक भी भारत-विरोधी नारे लगा रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि हादी की मौत का कारण भारत है और आरोप लगाया है कि हादी के हमलावर भारत भाग चुके हैं। गुस्साई भीड़ ने बांग्लादेश में भारत के उच्चायोग को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने समय रहते संभाल लिया। इसके बाद भीड़ ने भारत के उप उच्चायुक्त के घर के बाहर जमा हुई, जिसे हटाने के लिए पुलिस को आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।