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प्राइवेट स्कूलों को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की चेतावनी, बोलीं- खास दुकान से यूनिफॉर्म-किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते


एक समय था जब स्कूलों के परिणाम आते ही नई सड़क पर किताबों और नोटबुक(कापियों) की दुकानों पर भीड़ लग जाती थी। लेकिन जबसे स्कूलों में किताबों और कापियों को बेच व्यापार शुरू है उसी नई सड़क पर आज सन्नाटा रहता है। नई ड्रैस के लिए कपडे वालों की दुकानों और दर्जियों की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती थी। अब सब इतिहास बन चुका है। ये सब काम कुछ लोगों के हाथ में सिमट रह गया है। और सरकारें खामोश। लगभग सभी पुस्तक विक्रेताओं और प्रकाशकों की दुकानें दूसरे व्यवसाय में बदल चुकी हैं। जबकि स्कूल मनमाने दामों पर किताबें, कॉपी और अब तो स्कूल ड्रेस तक बेच लाभ कमा रहे हैं। यानि स्कूल आज Business Centre बन चुके हैं।   

इतना ही नहीं, जब सरकारी स्कूलों में किताबें फ्री में मिलती है फिर भी कुछ NGOs फ्री में किताबें वितरित कर रहे हैं, क्यों? इसकी भी जाँच बहुत जरुरी है कि जो बच्चे इनसे किताबें ले रहे हैं उन्हें स्कूल से किताबें मिल रही है या नहीं और अगर नहीं मिल रही हैं तो क्यों? क्या दिल्ली प्रशासन उन स्कूलों तक किताबें नहीं पहुंचा रहा?         

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम कस दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि वह कभी भी किसी स्कूल का औचक निरीक्षण कर सकती हैं। उन्होंने साफ निर्देश दिया कि स्कूल अब अभिभावकों को किसी खास दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे।

अगर कोई स्कूल नियमों के खिलाफ जाकर दबाव बनाएगा, तो सरकार उस स्कूल का अधिग्रहण (कब्जा) कर लेगी। मुख्यमंत्री ने सभी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर साफ लिखें कि पैरेंट्स कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं।

देखना यह है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह बयान सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या जमीनी स्तर पर लागु होगा? 

यह फैसला अभिभावकों से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ न बढ़े।

भारतीय संस्कृति : माँ केवल माँ ही नहीं, देवतुल्य

रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है-"जन्म दिन मुबारक लल्ला"

बेटा गुस्सा हो जाता है और माँ से कहता है - सुबह फोन करतीं, इतनी रात को नींद खराब क्यों की? कह कर फोन रख देता है।
थोडी देर बाद पिता का फोन आता है। बेटा पिता पर गुस्सा नहीं करता बल्कि कहता है- सुबह फोन करते

फिर पिता ने कहा - मैनें तुम्हें इसलिए फोन किया है कि "तुम्हारी माँ पागल है" जो तुम्हें इतनी रात को फोन किया। वो तो आज से 25 साल पहले ही पागल हो गई थी।
जब उसे डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा और उसने मना किया था। वो मरने के लिए तैयार हो गई पर ऑपरेशन नहीं करवाया।
रात के 1:30 बजे को तुम्हारा जन्म हुआ। शाम 6 बजे से रात 1:30 तक वो प्रसव पीड़ा से परेशान थी। लेकिन तुम्हारा जन्म होते ही वो सारी पीड़ा भूल गयी। उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।
तुम्हारे जन्म से पहले डॉक्टर ने दस्तखत करवाये थे कि अगर कुछ हो जाये तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे। तुम्हे साल में एक दिन फोन किया तो तुम्हारी नींद खराब हो गई
मुझे तो रोज रात को 25 साल से रात के 1:30 बजे उठाती है और कहती है देखो हमारे लल्ला का जन्म इसी वक्त हुआ था, बस यही कहने के लिए तुम्हें फोन किया था। इतना कहके पिता फोन रख देते हैं।
बेटा सुन्न हो जाता है। सुबह माँ के घर जाकर माँ के पैर पकड़कर माफी मांगता है. तब माँ कहती है, देखो जी मेरा लाल आ गया।
फिर पिता से माफी मांगता है तब पिता कहते हैं- आज तक ये कहती थी कि हमें कोई चिन्ता नहीं हमारी चिन्ता करने वाला हमारा लाल है। पर अब तुम चले जाओ मैं तुम्हारी माँ से कहूंगा कि चिन्ता मत करो, मैं तुम्हारा हमेशा की तरह आगे भी ध्यान रखूंगा!
तब माँ कहती है- माफ कर दो बेटा है।
सब जानते हैं दुनियाँ में एक माँ ही है जिसे जैसा चाहे कहो फिर भी वो गाल पर प्यार से हाथ फेरेगी। पिता अगर तमाचा न मारे तो बेटा सर पर बैठ जाये। इसलिए पिता का सख्त होना भी जरुरी है।
माता पिता को आपकी दौलत नहीं बल्कि आपका प्यार और वक्त चाहिए। उन्हें प्यार दीजिए। माँ की ममता तो अनमोल है।
माँ के चरणों में अगर स्वर्ग होता, तो स्वर्ग जाने का द्वार पिता के ही चरणों में होता है। यही भारतीय संस्कृति है। इसीलिए त्रेता युग से लेकर द्वापर युग होते हुए आज कलयुग में भी श्रवण कुमार का श्रद्धा से नाम लिया जाता है। हर माँ-बाप की यही इच्छा होती है कि यदि उनकी संतान श्रवण कुमार नहीं बन सके, कम से कम उसके मार्ग पर चल उनके और अपने जन्म को सफल करें। 
इसको पढ़कर अगर आँखों में आंसू बहने लगें तो रोकिये मत, बह जाने दीजिये। मन हल्का हो जायेगा! भगवान से बढ़कर माता पिता होते हैं