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जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों के पीछे आंख बंद करके कह सकते हैं, जिम्मेदार पाकिस्तान, हमारी कांग्रेस, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा हैं

सुभाष चन्द्र

जम्मू कश्मीर में हो रही इस्लामिक आतंकवाद से निपटने के लिए हिन्दू सम्राट पोरस और सिकन्दर युद्ध को स्मरण करना होगा। सिकन्दर के जैसे ही भारत की पावन धरती पर कदम रखते ही हिन्दू सम्राट पोरस ने ऐसी मार लगाई कि अपने जीवन में दुबारा भारत की तरफ सोंचना तो दूर निगाह करने की हिम्मत नहीं हुई। 

दूसरे, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान मोहम्मद रफ़ी का बहुचर्चित गीत "कहनी है एक बात हमें, इस देश के पहरेदारों से, संभलकर रहना अपना देश में छिपे हुए गद्दारों से..." आज भी प्रासांसिग है। जब तक सरकार इन पाकिस्तान समर्थकों और आतंकियों को संरक्षण देने वालों पर प्रहार नहीं करेगी, भारत से आतंकवाद और नक्सलवाद समाप्त नहीं होगा। और जिस दिन इन लोगों पर प्रहार करना शुरू कर दिया किसी आतंकवादी की भारत में कदम रखने की हिम्मत नहीं होगी। 

कांग्रेस और फारूक अब्दुल्ला आतंकी हमलों पर जश्न मना रहे हैं लेकिन मोदी को दोष दे रहे हैं कि वह जीत का जश्न मना रहे हैं और बधाई संदेशों का जवाब देने में व्यस्त हैं। 

सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस सरकार बनाने की उम्मीद लगाए बैठी थी और पाकिस्तान भी कांग्रेस की तरफ मुंह उठा कर देख रहा था कि कांग्रेस की सरकार बने और उसे करोड़ों की भिक्षा मिल सके क्योंकि कांग्रेस ने तो “पाकिस्तान” गोद ले लेना था।

लेकिन सरकार बना ली मोदी ने और इसी से जल भुन कर कांग्रेस ने पाकिस्तान में बैठे अपने चेले चपाटों को इशारा किया कि अभी हम देश को आग लगाने में असमर्थ हैं, इसलिए तुम लोग जम्मू कश्मीर आतिशबाजी कर दो। फारूक अब्दुल्ला जैसे निर्लज्ज पाकिस्तानी दलाल हर आतंकी हमले पर पाकिस्तान के आगे नाक रगड़ने की वकालत करने लगते हैं कि पाकिस्तान से बातचीत बिना शांति नहीं हो सकती।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
फारूक को दर्द है उसका पुत्र कश्मीर से चुनाव हार गया और महबूबा खुद हार गई, इसलिए फारूक, महबूबा और कांग्रेस की तिकड़ी के गुलाम पाकिस्तान में बैठे हैं जो आतंकियों का हैंडल घुमाते हैं मैदान में उतार दिए। एक के बाद एक 4 दिन में 4 हमले करा दिए। पहला तो मोदी की शपथ से एक घंटे पहले किया जिससे कांग्रेस के जलते हुए दिल पर ठंडक पड़ गई।

नवाज़ शरीफ ने कहा था कि अटलबिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा के बाद पाकिस्तान ने करगिल युद्ध छेड़कर गलती की थी। क्यों मज़ाक करते हो नवाज़ शरीफ, तुम्हारी मोदी को बधाई देने से पहले ही तुम्हारे कायर शागिर्दों ने रियासी में हमला कर 10 निर्दोषों की हत्या कर दी। उसके बाद 3 हमले और किये। नवाज़ मियां गलती यह है जो तुमने फिर से दोहराई। बधाई तुमनें उसी वक्त दी जब रियासी में हमला करना था, वरना तो मोदी की सरकार बनने का फैसला 3 पहले होते ही अनेक देशों ने बधाई दे दी थी।

पाकिस्तान और उसके आतंकियों ने जोर लगा दिया मोदी सत्ता में वापस न आए, भारत के मुसलमानों को भड़काते रहे (जो पहले से मोदी से नफरत करते हैं सब सुविधाएं लेकर) और अपनी गुलाम कांग्रेस और फारूक से मोदी को अपने एटम बम की धमकी दिलवा कर दोस्ती करने की सलाह दिलवाते रहे लेकिन सारे मंसूबे धरे रह गए जो मोदी फिर से आ गया।

कांग्रेस और उसके संगी साथी होश की पी लें और surgical strike/Balakot याद रख लें, मोदी की चुप्पी तूफ़ान से आने के पहले की शांति है - अपने “सबूत मांगने वाले गैंग” को तैयार कर लो क्योंकि पाकिस्तान को अबकी बार तबियत से ठोका जाएगा मोदी के इटली से वापस आने के बाद। अब यह मैं क्यों कह रहा हूं वह बताने वाली बात नहीं है।

पाकिस्तान इतना समझ ले, उसने एक बार फिर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उसके आतंकियों को फारूक और महबूबा के लोग जो मदद कर रहे है, उन्हें भी ठोका जाएगा। अबकी बार नेतन्याहू की तरह ठोकेगा मोदी। 

जम्मू : शिव खोड़ी से लौट रहे श्रद्धालुओं पर लश्कर-ए-तैयबा ने किया हमला

रियासी में आतंकी हमला
जम्मू-कश्मीर के रियासी में शिवखोड़ी से कटरा लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकी हमला हुआ। घटना में एक बच्चे समेत 10 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हैं। पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकियों ने बस के ऊपर चारों ओर से गोलियाँ चलाईं और जब तक बस खाई में नहीं गिरी तब तक ये ताबड़तोड़ गोली बरसाते रहे। सूत्रों के हवाले से आए शीर्ष अधिकारियों के बयान से पता चलता है कि जानबूझकर इस हमले को 9 जून को ही अंजाम दिया गया क्योंकि नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे।

अब इस आतंकी हमले के संबंध में चश्मदीदों ने कुछ खुलासे किए हैं। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के रहने वाले संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि वो लोग शिवखोड़ी में दर्शन के बाद वो कटरा की ओर जा रहे थे, जब बस ऊपर से नीचे उतर रही थी तभी एक आतंकवादी बीच सड़क पर फायरिंग शुरू कर दी। इस बीच ड्राइवर को एक गोली लग गई और बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। इस दौरान सामने खड़े होकर एक आतंकी ने करीबन 20 मिनट तक गोली चलाई थी। बाकी आतंकी इधर-उधर से फायरिंग कर रहे थे।

चश्मदीदों के अनुसार, आतंकी 5-6 मिनट रुकते थे और फिर से फायरिंग करनी शुरू कर देते थे। उन्होंने ऐसा तब तक किया जब तक बस गिरी नहीं। गोंडा की नीलम गुप्ता कहती है कि बस में 40 लोग थे, बच्चे भी थे। हमारे हाथ-पैर में चोट आई है। साथ में पति और ननद-नंदोई भी है। वहीं नीलम गुप्ता का बेटा पल्लव इस घटना पर कहता है- पता नहीं गोलियाँ किसने चलाई थी, लेकिन जब बस खाई में गिरी तो मेरा सिर सीट के नीचे आ गया था, डैडी ने मुझे निकाला।

तीर्थ यात्रियो के अनुसार, 6-7 आतंकियो ने उनपर हमला किया था। उनके चेहरे नकाब से ढके थे। शुरू में उन्होंने बस को खाई में गिराने के लिए गोलीबारी की। बाद में जब सब गिर गए तो वो इसलिए गोली चलाते रहे कि सारे लोग मर जाएँ। तीर्थ यात्री बताते है कि वो लोग एक दम चुप हो गए थे ताकि आतंकियों को पता न चले कि वो लोग जिंदा हैं। कुछ समय बाद स्थानियों और सुरक्षाकर्मियों ने आकर उन्हें बचाया।

इस घटना के बारे में सुनने के बाद हर कोई सिर्फ यही कह रहा है कि श्रद्धालुओं पर हमला सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि वो हिंदू थे। ये भी कहा जा रहा है कि जानबूझकर 9 जून को ये हमला हुआ क्योंकि इसी दन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार पीएम बनने की शपथ ले रहे थे।

घटना में मरने वाले वाले अधिकतर यूपी के रहने वाले थे। इनमें तीन महिला और एक बच्चे की भी मौत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना की जानकारी होने पर स्थिति का जायजा लिया और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए कहा। वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह तीर्थ यात्रियों पर हुए हमले में शामिल आतंकियों को बख्शेंगे नहीं।