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बत्तख-हंस छोड़ सूअर खाने लगे चीनी, पंखों का पड़ा अकाल: ‘स्वाद’ में बदलाव से खतरे में बैडमिंटन का खेल

खानपान बदलने से बैडमिंटन के खेल पर असर पड़ रहा है (फोटो साभार- grok AI)

बैडमिंटन की चिड़िया या चिड़ी, जो खेल का सबसे जरूरी हिस्सा होती है, वह अब ‘दुर्लभ’ होने की कगार पर पहुँच रही है। हम बात कर रहे हैं शटलकॉक की, जिसका निर्यात मुख्य रूप से चीन से होता है। बीते कुछ वर्षों से चीन में बदल रही खानपान की आदतों से बैडमिंटन की शटलकॉक खतरे में पड़ गई है। एक ओर चीनी लोगों की खाने की डिशेज बदल रही हैं तो वहीं उसके कारण वैश्विक स्तर पर बैडमिंटन के खिलाड़ियों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

शटल कैसे बनती है?

बैडमिंटन की शटल (shuttlecock) आमतौर पर बत्तख (duck) या हंस (goose) के पंखों से बनाई जाती है। एक अच्छी गुणवत्ता वाली शटल में लगभग 16 पंख लगते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले मैचों में हंस के पंखों से बनी शटल को प्राथमिकता दी जाती है। असल में ये पंख चीन जैसे देशों से निर्यात किया जाता है क्योंकिइन पक्षियों का वहाँ पालन बड़े पैमाने पर होता है।

चीन में खानपान में कैसे हो रहा बदलाव

हाल के वर्षों में चीन में लोगों की खाने की पसंद तेजी से बदली है। जहाँ पहले चीन के लोगों को बत्तख और हंस का मांस काफी पसंद था तो वहीं अब ये जगह सूअर (pork) के मांस ने ले ली है। बीते कई वर्षों से बत्तख खाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। लोग पोर्क की माँग अधिक करने लगे हैं।

हंस और बत्तख की माँग कम होने से किसान भी बत्तख और हंस को पालना कम कर रहे हैं। इसके चलते इन पक्षियों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है।

शटल के उत्पादन पर असर

बत्तख और हंस की संख्या में कमी आने से उनके पंख भी कम मिलते हैं। यही पंख शटल बनाने में इस्तेमाल होते हैं। नतीजा यह हुआ कि शटल की सप्लाई में भारी कमी आ गई है और कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। भारत ही नहीं, फ्रांस, डेनमार्क, इंडोनेशिया और अन्य यूरोपीय देशों में भी बैडमिंटन अकादमियों को शटल की कमी झेलनी पड़ रही है।

भारत में शटल की कीमतों में काफी इजाफा देखा जा रहा है। ये कीमतें ₹12,00 से ₹3,000 प्रति शटल पहुँच गई हैं। गोपीचंद अकादमी में तो दो हफ्ते से भी कम का स्टॉक बचा था। वहीं, छोटे स्तर की अकादमी और खिलाड़ियों को इससे भी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या हो सकते हैं संभावित समाधान

शटल की कमी के संकट को देखते हुए बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) अब प्लास्टिक या सिंथेटिक शटल पर एक बार फिर विचार कर रही है। फ्रांस के बैडमिंटन संघ जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में वैकल्पिक शटल इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं।

फ्रांस के अलावा डेनमार्क जैसे कई यूरोपीय देशों में राष्ट्रीय संघों को उच्च गुणवत्ता वाली शटल प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। इसके साथ ही शटल की गुणवत्ता और उपलब्धता को लेकर कई समस्याएँ सामने आ रही हैं।

इसके अलावा इंडोनेशिया में शटल की आपूर्ति में कमी के कारण कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।

कृत्रिम शटल में भी हैं कई चुनौतियाँ

इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कंपनियाँ हाइब्रिड शटल बना रही हैं। ये आंशिक रूप से प्राकृतिक और आंशिक रूप से कृत्रिम होती हैं। फिलहाल ये शटल बाजार में अभी महँगी हैं और खेल में उतनी टिकाऊ नहीं हैं जितनी कि पारंपरिक शटल होती हैं।

कृत्रिम शटल अपनी दिशा काफी जल्दी बदल लेती हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए उनकी गति और दिशा पर काबू पाना मुश्किल होता है। इसके अलावा ये तेज स्मैश या हिट पर जल्दी टूट जाती हैं। इससे मैच को जारी रखने में काफी मुश्किल होती है।

इसके साथ साथ पारंपरिक शटल का फील कृत्रिम शटल नहीं दे पाती। रैकेट से टकराने के बाद खिलाड़ियों को स्पिन देने में परेशानी आती है।

फिलहाल बैडमिंटन के शटलकॉक के लिए कई समाधान खोजे जा रहे हैं। इसे लेकर उत्पादकता को बढ़ाने और पारंपरिक शटल की कमी को पूरा करने की जद्दोजहद जितनी जल्दी खत्म होगी, खेल जगत के लिए ये उतना ही बेहतर होगा।

जहाँ एक ओर शटल की कमी हो रही है वहीं दूसरी ओर बैडमिंटन के खेल में खिलाड़ियों की संख्या में भी तेजी से इजाफा होता जा रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों के मनोबल के लिए ‘चिड़िया’ की अनुपलब्धता उनके हौसले को डिगाने का काम कर सकती है।

जिस ईमान खलीफ का मुक्का खाकर रोने लगी थी महिला बॉक्सर, वह मेडिकल जाँच में निकली ‘मर्द’: जीता था गोल्ड

                                           ईमान खलीफ निकला पुरुष (फोटो साभार: cbc न्यूज)
पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान अपने जेंडर को लेकर खबरों में आया अल्जीरिया का ट्रांस बॉक्सर ईमान खलीफ फिर चर्चा में है। कथिततौर पर उससे जुड़ी एक रिपोर्ट लीक हुई है जिसका ड्राफ्ट क्रेमलिन-बाइसिट्र अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है।

बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में दावा है कि ईमान असल में अब भी पुरुष ही है। ये मेडिकल रिपोर्ट खुलासा करती है कि इमान के शरीर में महिलाओं के अंग (जैसे यूटरस) गायब और पुरुषों वाले कई अंग पाए गए हैं, जिसमें आंतरिक अंडकोष और XY गुणसूत्र शामिल हैं।

कहा जा रहा है कि यह स्थिति 5-अल्फा रिडक्टेस अपर्याप्तता नामक विकार से संबंधित हो सकती है, जो यौन विकास का एक विकार है और आमतौर पर जैविक पुरुषों में पाया जाता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर माँग उठ रही है कि ईमान से उसका ओलंपिक पदक वापस लिया जाए। भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस संबंध में ट्वीट ईमान से गोल्ड वापस लेने की माँग की है। उनके अलावा अन्य यूजर्स भी ईमान की तमाम वीडियो शेयर करके सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कोई बताए कि ईमान कहाँ से महिला लगता है।

पेरिस ओलंपिक के वक्त इटली की महिला बॉक्सर एंजेला कैरिनी से ईमान के मैच के बाद उसकी ताकत देखते हुए उसके जेंडर पर सवाल खड़े हुए थे। हालाँकि ओलंपिक कमेटी इस मुद्दे पर विचार करने को तैयार नहीं थी। 46 सेकेंड में खत्म हुए मैच के बाद एंजेला ने बताया था कि ईमान ने उन्हें इतनी तेज मुक्का मारा कि उन्हें कभी किसी महिला से ऐसा मुक्का नहीं पड़ा।