Showing posts with label #SwissBank. Show all posts
Showing posts with label #SwissBank. Show all posts

कांग्रेस नेता अहमद पटेल को IT नोटिस : 400 करोड़ रुपए का हवाला ट्रांजेक्शन

अहमद पटेल
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
2014 में जब से केंद्र में मोदी सरकार सत्ता में आयी है, कांग्रेस एवं अन्य विपक्षियों पर किसी न किसी घोटाले उजागर हो रहे हैं, लेकिन जनता जानना चाहती है कि इतने वर्षों में कितनी वसूली हुई? फिर 2019 चुनाव रैलियों में कहा गया कि "जेल के दरवाजे तक पहुंचा दिया है, बस दरवाज़ा पार करवाना है।" जो अब तक नहीं हुआ। इतना ही नहीं, 2014 चुनावों में कहते थे, जिस दिन स्विस बैंकों में जमा काला धन भारत वापस आएगा, लोगों के खातों में लाखों रूपए आएंगे, वो काम भी नहीं हुआ, आखिर क्या कारण है कि अब तक जिस-जिस पर हवाला या फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े हैं, जमानत पर बाहर ऐश कर रहे हैं। यदि किसी कारणवश, 2024 में सत्ता परिवर्तित होने पर, सारे केस वापस ठंठे बस्ते में चले जाएंगे और जनता एक भरोसे वाली मोदी सरकार के मुंह को ताकती रहेगी। यदि यही काम  किसी आम नागरिक के साथ होता, पता नहीं कितनी दफाओं में जेल हो चुकी होती। अध्यापक घोटाले में जेल में बैठे चौटाला के पुत्र के हरियाणा के उपमुख्यमंत्री बनते ही जमानत हो गयी, क्यों? आखिर घोटालों की राजनीति से कब तक जनता को पागल बनाया जाएगा?  
सोनिया, राहुल, रोबर्ट, प्रियंका, मोतीलाल वोहरा, चिदम्बरम के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल पर आयकर विभाग का शिकंजा कस गया है। आयकर विभाग ने पटेल को एक समन जारी करते हुए उन्हें 400 करोड़ के हवाला ट्रांजेक्शन मामले में पेश होने का आदेश दिया है। बता दें कि अहमद पटेल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष के पद पर हैं।
इसके पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अहमद पटेल को 11 फरवरी को समन जारी किया था और 14 फरवरी को पेश होने को कहा था, मगर पटेल तबीयत खराब होने की दलील देकर पेश नहीं हुए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें साँस की दिक्कत है और वह फरीदाबाद के मेट्रो अस्पताल में भर्ती हैं। आयकर विभाग ने अब एक बार फिर से उन्हें समन भेजकर पेश होने के लिए कहा है।
अगर इस बार भी वह पेश नहीं होते हैं तो उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। आयकर विभाग ने यह समन आईटी एक्ट के सेक्शन 131 के तहत जारी किया था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस मामले में कांग्रेस के लेखा डिवीजन के अधिकारियों के दफ्तर में भी छापेमारी की थी।

आयकर विभाग विभिन्न कंपनियों द्वारा भेजे गए हवाला ट्रांजेक्शन की जाँच कर रहा है। आरोप है कि हवाला की रकम कांग्रेस के खातों में भी आया था। बताया जा रहा है कि अहमद पटेल के पार्टी के कोषाध्यक्ष होने के दौरान करीब 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम कांग्रेस के खातों में आई थी। पटेल को ये नोटिस मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से कांग्रेस के खातों में आए पैसों की बाबत दिया गया है।
पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल को पूछताछ के लिए तलब किया था। आरोप था कि अहमद पटेल के बेटे फैसल और दामाद इरफान सिद्दीकी ने स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले की धनराशि का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया।
संदेसरा बंधुओं ने कारोबार बढ़ाने की बात कहकर स्टर्लिंग बायोटेक के नाम पर आंध्रा बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह से 5,383 करोड़ रुपए का लोन लिया था। मगर उन्होंने वापस नहीं किया। बैंकों की शिकायत पर सीबीआई ने अक्टूबर 2017 में स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।

2600 खाते, ₹300 करोड़: स्विस बैंकों में भारतीयों के खातों का ‘वारिस’ नहीं

Image result for स्विस बैंक में भारतीय पैसासाल 2014 में भारत में आम चुनावों से पहले स्विस बैंक में जमा काले धन के मामले ने काफी तूल पकड़ा था। कुछ समय बाद स्विट्जरलैंड सरकार ने वैश्विक दबाव के चलते साल 2015 में निष्क्रिय खातों की जानकारी को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया था। इस दौरान स्विस बैंक ने नीति बनाई थी कि खातों के दावेदारों को उसमें मौजूद धन हासिल करने के लिए आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने होंगे। हालिया ख़बरों के मुताबिक स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के करीब 12 निष्क्रिय खातों के लिए कोई दावेदार सामने नहीं आया है। आशंका जताई जा रही है कि इन खातों में पड़े पैसे स्विट्जरलैंड सरकार को स्थानांतरित किए जा सकते हैं।
इनमें से कुछ खाते भारतीय निवासियों और ब्रिटिश राज के दौर के नागरिकों से जुड़े हैं। स्विस बैंक के पास मौजूद आँकड़ों के अनुसार पिछले 6 साल में इनके खातों पर किसी ‘वारिस’ ने सफलतापूर्वक दावा नहीं किया है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ खातों के लिए दावा करने की अवधि अगले माह ही समाप्त हो जाएगी। वहीं कुछ अन्य खातों पर 2020 के अंत तक दावा किया जा सकता है।
इस पूरे मामले में खास बात है कि निष्क्रिय खातों में से पाकिस्तानी निवासियों से संबंधित कुछ खातों पर भी दावा किया गया है। इसके अलावा खुद स्विट्जरलैंड ने अपने देश सहित कई और देशों के निवासियों के खातों पर भी दावा किया है।
साल 2015 में पहली बार स्विट्जरलैंड बैंक द्वारा इस तरह के खातों को सार्वजनिक किया गया था। जिसके बाद मालूम चला था कि स्विस बैंक में इस तरह के करीब 2,600 खाते हैं, जिनमें 4.5 करोड़ स्विस फ्रैंक या करीब 300 करोड़ रुपये की राशि पड़ी है। खबरों के अनुसार 1955 से इस राशि पर दावा नहीं किया गया है।
इस सूची को सर्वप्रथम सार्वजनिक किए जाते समय करीब 80 सुरक्षा जमा बॉक्स थे। लेकिन स्विस बैंकिंग कानून के तहत इस सूची में हर साल नए खाते जुड़ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार इन खातों की संख्या करीब 3,500 हो गई है।
2014 के बाद से शुरू हुई भारतीय राजनीति में स्विस बैंक में जमा बेहिसाब धन बड़ी बहस का हिस्सा रहा है। कहा जाता है कि पहले की सरकारों ने स्विट्जरलैंड के बैंक खातों में अपना अथाह धन रखा है।
ऐसे में लगातार सवालों के घेरे में आने के बाद और वैश्विक दवाब के कारण कुछ समय पहले ही स्विट्जरलैंड ने अपनी बैंकिंग प्रणाली को नियामकीय जाँच के लिए खोला है। साथ ही भारत सहित विभिन्न देशों के साथ वित्तीय मामलों पर सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए समझौता भी किया है। जिसके मद्देनजर ही भारत सरकार को हाल में विदेशी बैंकों में जमा काले धन को लेकर बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी। स्विट्जरलैंड सरकार ने भारत को स्विस बैंक में भारतीय खातों की पहली सूची दी थी। भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसे स्विस बैंक से जुड़ी जानकारी मिली है।
स्विट्जरलैंड के टैक्स विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक भारत सरकार को दूसरी सूची सितंबर 2020 में मिलेगी। फिलहाल इस समय स्विट्जरलैंड में दुनिया के 75 देशों के करीब 31 लाख खाते हैं जो कि निशाने पर हैं। इनमें भारत के भी कई खाते शामिल हैं। 

स्विस बैंक द्वारा 31 लाख खातों की डिटेल देने से काला धन रखने वाले कब होंगे नक़ाब?

काला धन
कालेधन के ख़िलाफ़ लड़ाई में मोदी सरकार को बड़ी सफलता मिली है। स्विस बैंक में भारतीय खातों का विवरण प्राप्त करने के लिए भारत काफ़ी दिनों से प्रयास कर रहा था। अब पहले दौर का विवरण स्विट्जरलैंड ने भारत को सौंप दिया है। इसमें बैंक में भारतीयों के सक्रिय खातों से सम्बंधित जानकारियाँ शामिल हैं। स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन ने 75 देशों को वैश्विक मानदंडों के तहत ऐसे वित्तीय खातों का विवरण दिया है। भारत भी इन देशों में शामिल है।
स्विट्जरलैंड ने इन सभी देशों को 31 लाख खातों का विवरण मुहैया कराया है और बदले में उसे भी इन देशों से 24 लाख जानकारियाँ मिली हैं। विवरण में खाताधारक की पहचान, खाते में जमा रकम और अन्य जानकारियाँ शामिल हैं। इसमें खाताधारक का नाम, पता, राष्ट्रीयता, टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर और वित्तीय संस्थानों से जुड़ी अन्य सूचनाएँ शामिल हैं। स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने बताया कि पहली बार भारत को इस तरह की जानकारियाँ मुहैया कराई गई हैं।
इन सूचनाओं में न सिर्फ़ सक्रिय खातों की जानकारियाँ बल्कि 2018 में बंद किए जा चुके बैंक एकाउंट्स से सम्बंधित सूचनाएँ भी शामिल हैं। इसी कड़ी में स्विट्जरलैंड अब सितम्बर 2020 में स्विस बैंक में भारतीयों के बैंक एकाउंट्स से सम्बंधित अन्य जानकारियाँ भारत के साथ साझा करेगा। स्विट्जरलैंड ने भारत को क्या जानकारी दी है, इस सम्बन्ध में अधिकारियों ने कुछ कहने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि यह गोपनीयता का मामला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई अन्य देशों में रह रहे भारतीय व्यवसायियों से सम्बंधित जानकारियाँ इसमें शामिल हैं। स्विस बैंक दशकों से अपनी गोपनीयता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों से इसके ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान चला, जिससे उसे ये जानकारियाँ अन्य देशों के साथ साझा करनी पड़ी। इस अभियान के कारण कई लोगों ने जल्दबाजी में बैंक से रुपया निकालना शुरू कर दिया। यही कारण है कि 2018 में बंद किए जा चुके बैंक एकाउंट्स से सम्बंधित जानकारियाँ भी दी जा रही हैं।
स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, स्विस बैंक में भारतीयों द्वारा जमा रकम 2018 में लगभग 6% घटकर 6,757 करोड़ रुपए हो गई थी। पिछले 2 दशक में जमा रकम का यह दूसरा सबसे निचला स्तर है। साल 2018 में कई विदेशी ग्राहकों द्वारा स्विस बैंक में जमा रकम 4% से ज्यादा घटकर 99 लाख करोड़ रुपए रही थी।
लोकसभा में इसी साल जून में वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 1980 से लेकर साल 2010 के बीच भारतीयों ने 246.48 अरब डॉलर से लेकर 490 अरब डॉलर के बीच काला धन देश के बाहर भेजा था। एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम के अध्ययन के आधार पर समिति ने यह आकलन किया था।