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क्या राहुल की न्यूजलॉन्ड्री और ThinkTank ही कांग्रेस को तबाह-बर्बाद करने की कमर कस चुकी है? राहुल गाँधी ने ‘वोट चोरी’ के प्रेजेंटेशन में दिखाई न्यूजलॉन्ड्री की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट, लिखने वाले हिंदू-विरोधी विशाल वैभव और सुमेधा मित्तल

राहुल गाँधी 'वोट चोरी' प्रोपेगेंडा
सनातन के गुरु स्वामी विवेकानन्द का कहना था कि हर बुराई में अच्छाई छिपी होती है। इस कड़वे सच को कोई झुठला नहीं सकता। "विनाश काले विपरीत बुद्धि" LoP बने राहुल गाँधी जिस तरह Newslaundry और जॉर्ज सोरोस के पटकथा पर काम कर रहे हैं, निश्चितरूप से कांग्रेस की पतन की बहुत तेजी से बढ़ रही है। वैसे कांग्रेस के पतन की भविष्यवाणी 7 नवम्बर 1966 को पार्लियामेंट स्ट्रीट पर आचार्य कृपालु महाराज कर दी गयी थी। जब गो-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु समाज से खून की होली खेलते हुए पूरी पार्लियामेंट स्ट्रीट साधुओं की लाशों और लहू से पट गयी थी। तब आचार्य कृपालु जी ने हुंकार भरी थी कि "इन्दिरा तेरी पार्टी को बर्बाद करने हिमालय से आधुनिक ड्रेस में एक तपस्वी आएगा", इस बात को मेरी आयु के सियासत से लेकर पत्रकारिता से जुड़े लोग भूले नहीं होंगे। परिणाम सामने है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में कांग्रेस और विपक्ष देश विरोध कर अपने पतन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।  
इतना ही नहीं, तब एक महान आत्मा यानि श्रद्धेय साधु ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पर ही भूख हड़ताल कर अपने प्राण दे दिए, लेकिन कांग्रेस गुलाम किसी भी मीडिया ने इस दुखद समाचार को प्रकाशित नहीं किया। खैर, कांग्रेस के पतन की पटकथा 1966 में ही पार्लियामेंट स्ट्रीट पर लिख दी गयी थी।      

कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग पर बेबुनियाद ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाकर उसे ‘मुद्दा’ बनाने की कोशिश करती है, जबकि उसके समर्थक प्रोपेगेंडा चैनल अपने राजनीतिक आकाओं के दावों को ‘विश्वसनीय’ बताते हुए झूठे तथ्यों का प्रचार-प्रसार करते हैं।

पत्रकार विजय पटेल ने इस सांठगांठ को उजागर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हाल ही में पोस्ट डाला है। इसमें बताया गया है कि कैसे राहुल गाँधी और कांग्रेस का ‘वोट चोरी‘ प्रचार अभियान भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है और हिन्दू विरोधियों के हाथों में इसकी डोर है।

कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी की 7 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई ‘वोट चोरी’ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन पहले ही सवालों के घेरे में आ चुकी है, लेकिन हालिया खुलासे चुनावी धोखाधड़ी के उनके दावों को और कमजोर कर देते हैं। गाँधी को न केवल ‘वोट चोरी’ प्रेजेंटेशन के कारण, बल्कि वामपंथी प्रचारक न्यूज़लॉन्ड्री में प्रकाशित हिटजॉब्स पर उनकी निर्भरता के कारण भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

ये प्रोपेगैंडा लेख कट्टर हिंदू-विरोधी लोगों द्वारा लिखे गए हैं। इनमें से एक की पहचान विशाल वैभव के रूप में हुई है। ये लोग चुनाव आयोग के खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

विवादास्पद पीपीटी के चौथे पेज पर, राहुल गाँधी ने दावा किया, “महाराष्ट्र के नतीजों ने बड़े पैमाने पर वोट चोरी के हमारे संदेह की पुष्टि की है।” पीपीटी में न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। विशाल वैभव और सुमेधा मित्तल द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट का शीर्षक है, “नए मतदाताओं की बाढ़? कामठी का अजीबोगरीब मामला, जहाँ महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख जीते।”

चुनाव आयोग की ईमानदारी पर सवाल उठाने के लिए न्यूज़लॉन्ड्री के प्रचार लेखों का सहारा लेना, उनके ‘वोट चोरी’ के दावों की विश्वसनीयता को दर्शाता है। हालाँकि यह बात सामने आई है कि न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार विशाल वैभव हिंदू विरोधी हैं, जो वैचारिक मतभेदों को लेकर हिंदू समर्थक सोशल मीडिया यूजर्स पर ‘गौमूत्र’, ‘cowf&kers’ और ‘D%kless Hindutva’ जैसे तंज कसते हैं।

न्यूज़लॉन्ड्री पर ऑथर पेज के अनुसार, विशाल वैभव आईआईटी-दिल्ली में भौतिकी के पूर्व प्रोफेसर हैं। हालाँकि एक्स अकाउंट ‘@panchagavyag’, जो पहले ‘@vvaibhav_iid’ था, अब मौजूद नहीं है। इसमें हिंदू-विरोधी पोस्ट के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन दिख जाएँगे।

शायद, न्यूज़लॉन्ड्री के प्रोपेगैंडा फैक्ट्री का हिस्सा बनने के लिए हिंदुओं को ‘गाली देना’ अनिवार्य पात्रता है। राहुल गाँधी ने अपनी वोट चोरी वाले पीपीटी में जिस न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर की सह-लेखिका सुमेधा मित्तल की बात की, अब उसके बारे में बात करते हैं। उसका कांग्रेस पार्टी से पुराना नाता रहा है। सुमेधा मित्तल के लिंक्डइन पेज के अनुसार, उन्होंने कुछ समय के लिए सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) नामक एक थिंक टैंक में काम किया था। इस थिंक टैंक की ऑनर और संचालक विवादास्पद कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर है।

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे सीपीआर विदेशी फंडिंग मानदंडों के उल्लंघन के लिए जाँच के घेरे में रहा है और केंद्र सरकार ने इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया था। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर सितंबर 2022 में आयकर छापे पड़े थे। जुलाई 2023 में अय्यर के सीपीआर को टैक्स छूट मिलना भी बंद हो गया।

मित्तल इंडियास्पेंड (IndiaSpend) पोर्टल के साथ काम कर चुके हैं। इंडियास्पेंड कांग्रेस पार्टी की वैचारिक विचारधारा से सबसे ज़्यादा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती इंडियास्पेंड के संस्थापक ट्रस्टी हैं। हालाँकि, इंडियास्पेंड की वेबसाइट में उनका नाम नहीं है। ऑपइंडिया ने कई मौकों पर इंडियास्पेंड के हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी झूठों का पर्दाफ़ाश किया है। इंडियास्पेंड ने पहले भी अपने डेटाबेस में मुस्लिम पीड़ितों की संख्या बढ़ाने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। कई मामलों में ऐसा देखा गया है।

न्यूज़लॉन्ड्री की वरिष्ठ रिपोर्टर सुमेधा मित्तल ने द वायर और द कारवां जैसे भाजपा-विरोधी और इस्लाम-समर्थक प्रोपोगेंडा आउटलेट्स में भी काम किया है।

दिलचस्प बात यह है कि नवंबर 2021 से सितंबर 2022 के बीच, सुमेधा मित्तल ने मोदी विरोधी और कुख्यात शासन विरोधी जॉर्ज सोरोस की क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) में काम किया। OCCRP को अमेरिकी विदेश विभाग और अब भंग हो चुकी अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) से भारी मात्रा में धन प्राप्त हुआ। OCCRP को जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन (OSF), फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन और रॉकफ़ेलर ब्रदर्स फ़ाउंडेशन जैसी संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलती है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि OCCRP ने व्यवसायी गौतम अडानी और सेबी के खिलाफ़ हिटजॉब्स प्रकाशित किए थे। OCCRP भारतीय लोकतंत्र को कमज़ोर करने के लिए बार-बार दुष्प्रचार भी करता रहा है। भारत में ‘वोट चोरी’, म्यांमार में डेटा संकलन, झूठ और भ्रामक सूचनाओं को ‘ज़बरदस्त’ खुलासे के रूप में प्रस्तुत किया गया

कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ पीपीटी के साथ एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा करने की कोशिश कर रही थी। इस बीच से बात सामने आयी कि ये दस्तावेज म्यांमार में तैयार किए गए थे। ‘वोट चोरी’ वेबसाइट पर अपलोड की गई पीडीएफ फाइलों के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि राहुल गाँधी की प्रस्तुति के तीनों संस्करण म्यांमार मानक समय (एमएमटी) में बनाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं और आईटी सेल ने इन आरोपों को हालाँकि खारिज किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

चुनाव आयोग की ईमानदारी पर संदेह जताने के लिए कांग्रेस ने न्यूज़लॉन्ड्री के लेखों का सहारा लेना, अपने आप में उनके ‘वोट चोरी’ के दावों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। हालाँकि, यह सामने आया है कि न्यूज़लॉन्ड्री के लेखक, विशाल वैभव, एक कट्टर हिंदू विरोधी रहे हैं, जो वैचारिक मतभेदों को लेकर हिंदू समर्थक सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर ‘गौमूत्र’, ‘गाय-बकरियों’ और ‘गधा हिंदुत्व’ जैसे व्यंग्य करते रहते हैं। न्यूज़लॉन्ड्री पर उनके लेखक पृष्ठ के अनुसार, विशाल वैभव आईआईटी-दिल्ली में भौतिकी के पूर्व प्रोफेसर हैं। हालाँकि X अकाउंट ‘@panchagavyag’, जो पहले ‘@vvaibhav_iid’ था, अब “मौजूद नहीं है”, लेकिन उनके बेहद विक्षिप्त और हिंदू-विरोधी पोस्ट के स्क्रीनशॉट ऑनलाइन सामने आए हैं।

राहुल गाँधी द्वारा अपने वोट चोरी पीपीटी में उद्धृत न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्ट्स की सह-लेखिका सुमेधा मित्तल की बात करें तो उनका न केवल एक वैचारिक पूर्वाग्रह है, बल्कि कांग्रेस पार्टी से उनका पुराना संबंध भी है।

सुमेधा मित्तल के लिंक्डइन पेज के अनुसार, उन्होंने कुछ समय के लिए सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) नामक एक थिंक टैंक में काम किया था। इस थिंक टैंक का स्वामित्व और संचालन विवादास्पद कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर के पास है। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च सितंबर 2022 में आयकर छापों का विषय रहा है। जुलाई 2023 में अय्यर के थिंक टैंक की कर छूट की स्थिति भी रद्द कर दी गई थी। मित्तल ने द वायर और द कारवां जैसे भाजपा विरोधी और इस्लाम समर्थक प्रचार आउटलेट में भी योगदान दिया है।

राहुल गाँधी की वोट चोरी के दस्तावेजों का म्यांमार में तैयार किया जाना आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि उनका करियर विदेशी ताकतों की संलिप्तता से जुड़े विवादों में घिरा रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, रहस्यमयी विदेश यात्राएँ, विदेशी अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें, कज़ाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया के रोबोट द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्रभाव अभियान, और भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का आह्वान किया जाना, इसकी पुष्टि करते हैं।

22 पेज वाली वोट चोरी की इस पीपीटी में कांग्रेस पार्टी ‘हम हारे नहीं हैं, हमें हरा दिया गया है’ साबित करने की कोशिश करती रही। हालाँकि ऑपइंडिया ने बताया है कि कैसे चुनाव आयोग ने हर आरोप का खंडन किया, चाहे वह मतदाता पंजीकरण और मतदान प्रतिशत में वृद्धि हो, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में गड़बड़ी हो, मतदान प्रक्रिया के सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करना हो या राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए डिजिटल मतदाता सूची को साझा करने से चुनाव आयोग का साफ इनकार हो।

दस्तावेज़ के पेज 8 पर, गाँधी ने यह आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र के आँकड़ों को छिपा रहा है ताकि ‘वोट चोरी’ का पता नहीं चल पाए, लेकिन उनकी टीम ने बड़ी मेहनत से इसकी जाँच की है। हालाँकि, चुनाव आयोग के इस पेज में 30 एंट्री हैं और महादेवपुरा में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 6 लाख है। इसका सीधा अर्थ यह है कि गाँधी के दावों के विपरीत, लाखों नहीं, बल्कि केवल 20,000 पेज की जाँच की आवश्यकता थी। जाहिर है, आँकड़ों पर आधारित प्रचार में भी, कांग्रेस मेलोड्रामा का तड़का लगाना नहीं भूली।

यह दस्तावेज चुनिंदा मामलों से जुड़ा है, जिसमें प्रबंधन या तकनीकी समस्याएँ शामिल थीं और उन्हें ‘वोट चोरी’ के सबूत के रूप में पेश किया गया। कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुओं की उपेक्षा का इतिहास रहा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी अब सरासर झूठ और वैचारिक रूप से पक्षपातपूर्ण प्रचार करने वालों पर निर्भर है और तुच्छ राजनीतिक फायदे के लिए भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

भारतीय समाज आज ‘जयचन्दों’ को पहचाने : बीबीसी डॉक्यूमेंट्री और जलियांवाला बाग हत्याकांड में है समानता

                                                                                                                             साभार 

भारत को बदनाम करने के लिए बनाई गई बीबीसी डॉक्यूमेंट्री और जलियांवाला बाग हत्याकांड में काफी समानता है। जलियांवाला बाग हत्याकांड में अंग्रेज अफसर ने हुक्म दिया था, लेकिन गोली चलाने वाले भारतीय थे और मरने वाले निर्दोष लोग भी भारतीय थे! बीबीसी डॉक्यूमेंट्री भी बिल्कुल इससे मिलती-जुलती है। बीबीसी डॉक्यूमेंट्री से जुड़े किरदारों में प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर के पत्रकार अलीशान जाफरी, वेबसाइट द कारवां के राजनीतिक संपादक हरतोष सिंह बल, मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी फर्म न्यूज़क्लिक से जुड़े नीलांजन मुखोपाध्याय और लेफ्ट लिबरल लेखिका अरुंधति रॉय आदि शामिल रहे हैं। ऐसे में भारतीय समाज के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि आज वह देश से गद्दारी करने वाले जयचंदों को समझे जिससे प्रगति के पथ पर अग्रसर भारत को कमजोर न किया जा सके।

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पहला किरदार- अलीशान जाफरी

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री @alishan_jafri से शुरू होता है। वह प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर के पत्रकार हैं। वह आर्टिकल 14 और मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी प्रोपेगेंडा फर्म न्यूज़क्लिक के लिए भी लिखते हैं।

दूसरा किरदार- हरतोष सिंह बल

इस प्रोपगेंडा डॉक्यूमेंट्री में दूसरा किरदार हरतोष सिंह बल का है। वह प्रोपेगेंडा न्यूज वेबसाइट द कारवां के राजनीतिक संपादक हैं। कहने को तो वह पत्रकार हैं लेकिन वह पीएम मोदी के खिलाफ मुखर होकर लिखते रहे हैं। इससे उनकी विचारधारा को समझी जा सकती है।

तीसरा किरदार- नीलांजन मुखोपाध्याय

बीबीसी के प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री में दिखाई देने वाला तीसरा किरदार नीलांजन मुखोपाध्याय है। दिलचस्प बात यह है कि वह प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर और द कारवां के लिए भी लिखते हैं। वह पीएम मोदी और हिंदू धर्म के खिलाफ लिखते रहे हैं। वह मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी फर्म न्यूज़क्लिक के लिए काम करते हैं उससे वेतन प्राप्त करते हैं।

चौथा किरदार- अरुंधति रॉय

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री में दिखाई देने वाला चौथा चरित्र अरुंधति रॉय है। फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट Altnews और उनके कम्युनिस्ट मालिकों को फंड देने वाली वह पहली महिला थीं! अरुंधति की विचारधारा जगजाहिर है। उन्होंने कहा था- NPR पर जानकारी मांगी जाए तो अपना नाम रंगा-बिल्ला बताइए। उनके कुछ अन्य बयान देखिए- कश्मीर समस्या का एकमात्र हल कश्मीर की आजादी है। 70 लाख भारतीय सैनिक मिलकर ‘आजादी गैंग’ को हरा नहीं पाते। अफजल गुरु के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे। 1998 में अटल सरकार का परमाणु परीक्षण करना गलत था। इससे आप समझ सकते हैं अरुंधति किस विचारधारा की पोषक हैं।

पांचवां किरदार- जैफ्रेलॉट क्रिस्टोफ़

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री में पांचवां चरित्र जैफ्रेलॉट क्रिस्टोफ़ हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके प्रचार कार्यों को द वायर और द कारवां जैसी ही संस्थाओं द्वारा प्रचारित किया जाता है।

प्रोपेगेंडा राइटर जैफ्रेलॉट क्रिस्टोफ ने बीबीसी के इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को देखने और शेयर करने के लिए भारतीय अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल को टैग किया है।

छठा किरदार- जैक स्ट्रॉ

बीबीसी प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री में छठा चरित्र जैक स्ट्रॉ हैं। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माण में ब्रिटेन के इस पूर्व विदेश मंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। क्या संयोग है कि डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के बाद वेबसाइट द वायर पर उनका एक विशेष साक्षात्कार प्रसारित किया गया। क्या इत्तेफाक है कि उन्होंने इंटरव्यू के लिए द वायर को ही चुना!

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री रिलीज होते ही प्रोपेगेंडा पत्रकारों ने काम शुरू कर दिया

बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री के रिलीज़ होने के बाद, द वायर और द कारवां के प्रोपेगेंडा पत्रकारों और IPSMF ने योजना के अनुसार अपना काम किया है (?)

IPSMF के दानदाता कौन हैं? जो प्रोपेगेंडा वेबसाइटों को फंड देते हैं

अब यहां यह समझना जरूरी है कि IPSMF के दानदाता कौन हैं? IPSMF की शुरुआत 100 करोड़ का फंड हासिल करके की गई थी। नंदन नीलेकणी की पत्नी रोहिणी नीलेकणि ने 30 करोड़ देने का वादा किया था। नंदन नीलेकणी की पत्नी रोहिणी नीलेकणी का रोल मॉडल बिल गेट्स और फोर्ड फाउंडेशन के साथ जॉर्ज सोरोस और उनकी ओपन सोसाइटी फाउंडेशन हैं! यानी वह इन वैश्विक संस्थाओं का अनुसरण करती हैं।

नंदन नीलेकणि 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके चुनाव

आपको याद ही होगा कि नंदन नीलेकणि 2014 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। यही वह समय है जब नंदन नीलेकणि और IPSMF के अन्य दाताओं को यह एहसास हुआ कि उन्होंने अनजाने में फंडिंग की है और यह उनकी गलती थी, उन्हें तुरंत आईपीएसएमएफ को भंग कर देना चाहिए और उन्हें भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते तो हम भारतीय इसे भारत के खिलाफ साजिश मानते। इससे इस बात का खुलासा हो जाता कि कोई गुप्त संस्था भारत को विभाजित करना चाहता है और वे उनकी मदद कर रहे हैं। ठीक उसी तरह जैसे जलियांवाला बाग में आदेश तो एक अंग्रेज ने दिया था लेकिन गोली चलाने वाले भी भारतीय थे और इसमें मरने वाले निर्दोष लोग भी भारतीय थे!

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में हुई बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री “इंडिया: द मोदी क्वेश्चन” को यूट्यूब और ट्विटर पर तो ब्लॉक कर दिया गया है। लेकिन जिस एजेंडे के तहत इसे बनाया गया था उसे आगे बढ़ाने में लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम पीछे नहीं है। यही वजह है कि रोक के बाद भी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों को डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। आरोप है कि छात्रों ने परिसर में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री देखी। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने को लेकर अधिकारी जांच कर रहे हैं।

जेएनयू में भी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाने वाली थी

दिल्ली के जेएनयू में भी ये फिल्म दिखाई जानी थी लेकिन कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। जेएनयू ने छात्रों के एक समूह द्वारा “इंडिया: द मोदी क्वेश्चन” की 24 जनवरी के लिए तय की गई स्क्रीनिंग को रद्द करने का फैसला किया। जेएनयू प्रशासन का कहना था कि इस तरह की डॉक्युमेंट्री कैंपस की शांति भंग कर सकती है। जेएनयू कैंपस में स्क्रीनिंग के कार्यक्रम को लेकर पैंपलेट्स बांटे गए थे। इतना ही नहीं छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने भी विवादित डॉक्‍यूमेंट्री का पोस्‍टर शेयर किया। उन्‍होंने इसकी स्क्रीनिंग का पोस्टर भी शेयर किया था। आइशी का यह पोस्‍ट वायरल होने पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी कर दी है। इसके बाद यहां स्क्रीनिंग को भी रद्द कर दिया गया।

क्या भारतीय समाज में आज भी जयचंद जैसे गद्दार मौजूद हैं?

वर्ष 1191 में तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने अन्य भारतीय हिन्दू राजाओं (जिनमें जयचंद भी शामिल था) के साथ मिलकर मुहम्मद गौरी को पराजित किया। इस युद्ध के एक साल बाद गौरी ने पुनः अपनी सेना इकट्ठी की और दिल्ली पर आक्रमण किया, लेकिन इस बार उसने सिर्फ सैन्य बल का उपयोग नहीं किया बल्कि उसने कूटनीति के दम पर जयचंद समेत कुछ हिन्दू राजाओं को अपनी ओर कर लिया। युद्ध में मदद के एवज में गौरी ने जयचंद को राजगद्दी का प्रलोभन दिया और जयचंद ने गद्दी के लालच में चौहान के साथ गद्दारी कर दी। अगर तराईन के द्वितीय युद्ध में भी अन्य भारतीय राजाओं ने उसका साथ दिया होता तो वह पुनः गौरी को हरा देता और भारतवर्ष की पाक भूमि पर कभी गौरी, बलबन, बाबर और गजनवी जैसे आक्रांता कदम भी नहीं रख पाते। इस एक युद्ध की हार ने भारत में अरब और मध्य एशिया के तमाम लुटेरों को भारत में घुसने का मौका दे दिया और बाकी सब इतिहास में वर्णित है।