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‘साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है’: कानपुर में सपा प्रत्याशी के जनसंपर्क अभियान में लगे देश विरोधी नारे

आज मोदी-योगी विरोधियों के दिमाग का लगता है दिवाला निकल गया है। योगी-मोदी विरोध में पाकिस्तान की बोली बोले जाने का चुनाव आयोग को संज्ञान लेकर ऐसी पार्टियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। चुनाव चिन्ह जब्त करना चाहिए। कोई सत्ता में आने पर हिन्दुओं को सबक सिखाने की धमकी देता है तो कोई अन्य बातों से हिन्दुओं में डर बैठाने की बात करता है, यदि स्थिति विपरीत होती ये छद्दम चुनाव आयोग तो क्या कोर्ट तक पहुँच गए होते। जो पार्टी देश विभाजन की बात करे, उसे सियासत से बाहर करने में जनता को इन्हें एक भी वोट न देकर चारों खाने चित कर सबक सिखाना होगा।  
उत्तर प्रदेश के कानपुर में जिन्ना के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी का पाकिस्तान प्रेम उजागर हुआ है। बिठूर विधानसभा से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थकों द्वारा पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने की बात सामने आई है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में “साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है” के नारे सुनाई दे रहे हैं। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद यूपी पुलिस इसकी जाँच में जुट गई है।

कानपुर की बिठूर विधानसभा से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थकों ने कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में लगाए नारे…
साइकिल का बटन दबाना है पाकिस्तान बनाना है#SamajwadiParty #UttarPradeshElection2022 pic.twitter.com/TcDszINajx

— Alok Kumar (@dmalok) February 4, 2022

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि बिठूर सीट एसपी प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थक जनसंपर्क कर रहे थे। इसी दौरान नारे लग रहे थे कि मोहर मारो तान के साइकिल को पहचान के। इसी बीच पाकिस्तान के नारे लगे और ढोल बजने लगा। ट्विटर पर वीडियो वायरल होने के बाद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने कहा कि वीडियो के स्थान तथा व्यक्तियों के संबंध में जानकारी पता लगाई जा रही है। मामले की पुष्टि होते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि सपा का पाकिस्तान प्रेम नया नहीं है, इसके पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव भी जिन्ना की तारीफ कर चुके हैं।

हालाँकि, सपा समर्थकों का दावा है कि वीडियो एडिटेड है। कानपुर की बिठूर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक कथित वीडियो टिकरा गाँव में जनसंपर्क के दौरान राष्ट्रविरोधी नारा लगाते हुए दर्शाया गया है। ये वीडियो पूरी तरह से भ्रामक है। यह वीडियो विरोधियों की साजिश है। उनके जनसंपर्क के दौरान कहीं भी इस तरह के नारे नहीं लगाए गए हैं। यह वीडियो एडिटेड है।

विधानसभा चुनाव 2012 में एसपी से मुनींद्र शुक्ला ने जीत दर्ज की थी। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 बीजेपी के अभिजीत सांगा ने सपा के मुनींद्र शुक्ला को 58,987 मतों से हराया था। बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा को 1,13,289 वोट मिले थे। वहीं, एसपी के मुनींद्र शुक्ला को 54,302 वोट मिले थे। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में एक दूसरे के धुर विरोधी नेता आमने सामने हैं।

अयोध्या : राम जन्मभूमि पर यूनिवर्सिटी चाहने, भूमि घोटाले का ‘मनगढंत आरोप लगाने वाले अब वोट के लिए ‘राम भक्त’ बनें सिसोदिया-संजय

वोट के लिए 'राम भक्त' बनें सिसोदिया-संजय, पहुँचे अयोध्या
राजनीति नहीं बल्कि सियासत रंग बदलने में गिरगिट को बहुत पीछे छोड़ देती है। कल तक राममंदिर का घोर विरोध करने वाले आज वोट के लिए अयोध्या जाकर रामभक्त बन रहे हैं। ये पाखंड आम आदमी पार्टी ही नहीं सभी पार्टियां कर रही है। और जनता इनके पाखंड में फंस जाएगी। बीजेपी तो प्रारम्भ से ही अयोध्या के अलावा अन्य हिन्दू तीर्थों को मुक्त करने के कहती रही है, लेकिन तुष्टिकरण पुजारी बीजेपी को सांप्रदायिक पार्टी के नाम से बदनाम करते रहे और आज बीजेपी के शुभ काम के आगे माथा टेकना क्या सिद्ध करता है? सांप्रदायिक कौन : बीजेपी या बीजेपी विरोधी? फिर भी क्या अब बोलेंगे कि राममंदिर तोड़ बाबरी मस्जिद बनाई गयी थी? 

मनीष सिसोदिया रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुँच गए। महत्वपूर्ण घोषणा है, खासकर इसलिए क्योंकि यही सिसोदिया श्री राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर नहीं बल्कि विश्वविद्यालय चाहते थे। अब जबकि राम मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है, “मंदिर वहीं बनाएँगे पर तारीख नहीं बताएँगे” जैसे व्यंग्यात्मक नारे अब नहीं सुने जाएँगे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर संघर्ष और अदालती लड़ाई किसने लड़ी, यह जगजाहिर है। दशकों तक चले आंदोलन का विरोध किस-किस स्तर पर हुआ और किसने-किसने किया, ये तथ्य भी अब इतिहास के दस्तावेजों का हिस्सा बन चुके हैं।

सत्तासीन सेक्युलर राजनीतिक दलों ने कब और क्या-क्या किया, उसका जिक्र राजनीतिक तौर पर हमेशा होता रहेगा। कारसेवकों पर गोलियाँ बरसाने से लेकर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त करने तक, सारे तथ्य सरकारी दस्तावेज में समा चुके हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को अदालती कार्रवाई में कैसे दरकिनार करने की कोशिशें हुईं, यह भी किसी से नहीं छिपा। सर्वोच्च न्यायालय में मुक़दमे की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव तक रोकने की सिफारिश किसने की, वह भी अब ऐतिहासिक दस्तावेजों का हिस्सा है। कौन श्री राम जन्मभूमि स्थल पर विश्वविद्यालय चाहता था, कौन अस्पताल और कौन स्मारक, यह आने वाले कई दशकों तक याद किया जाएगा। 

श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर जिन लोगों ने विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनवाने की इच्छा जाहिर की थी उनमें आम आदमी पार्टी के नेता प्रमुख थे। मनीष सिसोदिया का एक वीडियो आज भी जब तब चलने लगता है जिसमें वे मंदिर की जगह एक विश्वविद्यालय बनाने की इच्छा जाहिर करते हुए देखे जाते हैं। पार्टी के अन्य नेता भी समय-समय पर श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर न बनाए जाने की इच्छा जाहिर कर चुके थे। यह सब उस तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के नाम पर तब किया गया जब सेकुलरिज्म फैशन में था और सब फैशनेबल दिखना चाहते थे। यहाँ तक कि अंतिम प्रयास के रूप में श्री राम जन्मभूमि न्यास पर जमीन घोटाले का निराधार आरोप लगाने में भी नहीं हिचके।

अब फैशन बदल गया है और साथ-साथ सिसोदिया और केजरीवाल भी। श्री राम जन्मभूमि के मुक़दमे में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद जब दिल्ली विधानसभा के चुनाव आए तब अरविन्द केजरीवाल ने खुद को विधानसभा में दिल्ली के बुजुर्गों का श्रवण कुमार घोषित कर दिया और यह वादा किया कि उनकी सरकार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद दिल्ली के हर बुजुर्ग को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ स्थल के दर्शन फ्री में करवाएगी। अब उत्तर प्रदेश में चुनाव आ रहे हैं तो मामला दिल्ली सरकार से आगे जाकर पार्टी और उसके नेताओं तक पहुँच गया है। यही चुनाव का मौसम है जो सिसोदिया को अचानक रामलला की याद आ गई है और वे अयोध्या जा तो रहे हैं पर उनके लिए जाने से अधिक महत्वपूर्ण जाते हुए दिखना है।  

अब आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए उत्तर प्रदेश में एंट्री मन ही मन “प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कोसलपुर राजा” के गायन से शुरू होती है। अभी तक मन में चल रहे इस गायन की आवाज़ जल्द ही मुँह से निकलेगी। चुनाव आ रहे हैं तो मन ही मन गायन करने वाले बाकायदा समूह बनाकर अयोध्या काण्ड का पाठ करेंगे। केजरीवाल श्रवण कुमार बनेंगे। सिसोदिया और संजय सिंह भी कुछ न कुछ बन लेंगे। इन्हें देखकर भारत भर को वीर सावरकर का वह वक्तव्य याद आयेगा कई; यदि जनेऊ पहनने से वोट मिलेंगे तो कॉन्ग्रेसी सूट के ऊपर जनेऊ धारण करने लगेंगे।