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‘हीरो’ से ‘गद्दार’ बने सोनम वांगचुक: अनशन खत्म करते ही टूट पड़ा इस्लामी-वामपंथी गिरोह

       
                                         सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन (X/Sonam Wangchuk)
सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई 2026) को देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना 26 दिन लंबा अनशन खत्म कर दिया। इस दौरान एपेक्स बॉडी ऑफ लेह-लद्दाख के कई प्रमुख सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे।

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा, “इससे पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। कुछ सांसद मुझसे मिलने आए थे जबकि कुछ ने पत्र लिखकर अनुरोध किया था। विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को देखते हुए मैंने यह फैसला लिया।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील करते हुए कहा, “हर जगह किसी भी तरह की हिंसा न होने दें और इस बात को लेकर बेहद सतर्क रहें।”

 उन्होंने एक अन्य पोस्ट में बताया कि केंद्र सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसदों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की जवाबदेही पर संसद में चर्चा होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि हालिया NEET पेपर लीक मामले में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

हालाँकि, इस शांति से इस्लामी-वामपंथी गुट वांगचुक पर ही भड़क गया। दावा किया गया कि जैसे ही उन्हें सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने की जानकारी मिली उन्होंने उनके खिलाफ हमले शुरू कर दिए।

जिससे शक होता है कि मोदी और अमित के लिए अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने वाली इसी इस्लामी-वामपंथी गुट की लड़कियां हैं। इस तरह की अश्लील भाषा किसी सभ्य परिवार की लड़की नहीं कर सकती। ये गैंग ये ना समझे कि सरकार झुक गयी है, उन्हें शायद नहीं मालूम कि इसके बाद क्या खेल होने वाला है। भारत विरोधी विदेशियों भीख पर आंदोलन करने वाले मोदी सरकार को जो हल्के में ले रहे हैं वही इनकी भयंकर भूल है। आग तो लगा दी अब इस आग में कौन-कौन जलेगा यह भविष्य की गर्भ में छिपा है।    

एक एक्स (X) यूजर ने दावा किया कि सोनम वांगचुक को राम मंदिर में हुई चोरी और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़े विवाद से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ‘प्लांट’ किया गया था। यूजर ने यह भी कहा कि अब मामला उनके नियंत्रण से बाहर हो गया है और जेन-जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते ही हैं अब चाहे सोनम वांगचुक उनका समर्थन करें या नहीं।

एक यूजर ने सवाल किया कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके का नाम इस पोस्ट में क्यों नहीं है। उसने यह भी पूछा कि क्या सोनम वांगचुक ने अपना पक्ष बदल लिया है और क्या उन्होंने अब तक सभी को गुमराह किया।

एक अन्य यूजर ने दावा किया कि इस आंदोलन का असली मकसद गैर-लोकतांत्रिक तरीकों और ताकत के जरिए मोदी सरकार को हटाना है। जाहिद जावली नाम के यूजर ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसे नेताओं से भी बड़ा है। इसके बाद उसने इन आरोपों को लोगों का विरोध प्रदर्शन बताते हुए कहा कि ‘तानाशाही शासन’ हर मोर्चे पर विफल हो चुका है और उसके पास व्यवस्था को सुधारने के लिए सही लोग नहीं हैं।

वहीं, सलाहुद्दीन अय्यूब ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ ‘समझौता’ कर लिया है और आंदोलन की माँगों को नजरअंदाज कर दिया है।

कॉन्ग्रेस समर्थक एक यूजर ने भी सोनम वांगचुक को ‘समझौता कर लेने वाला’ बताया। उसने आरोप लगाया कि वांगचुक ने जेन-जी के साथ विश्वासघात किया है। साथ ही उसने कहा कि BJP के खिलाफ किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता और राहुल गाँधी ही एकमात्र विकल्प हैं।

एक अन्य यूजर ने सोनम वांगचुक का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए और ‘हिंदू रक्षक, देशभक्त और राष्ट्रवादी’ बन जाना चाहिए। शख्स ने हिंदू धर्म या भारत के प्रति निष्ठा जताने तक का भी मजाक बना दिया। यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यह समूह हिंदू धर्म और भारत के प्रति किस तरह की सोच रखता है।

इस बीच, ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने सोनम वांगचुक को ‘बेकार’ बताते हुए लिखा, “अब उनके घर जाने, अच्छा खाना खाने और आराम करने का समय आ गया है। अब उनकी जरूरत नहीं है।” 

सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू किया था। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट पेपर लीक मामले के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर शुरू किया गया था। हालाँकि, इसके कुछ ही समय बाद इस प्रदर्शन ने एक हिंसक आंदोलन का रूप ले लिया। पुलिसकर्मियों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया और धीरे-धीरे यह आंदोलन छात्रों को आगे रखकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश का प्रोपेगेंडा बनता जा रहा है।