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सीनेट में बजट बिल पास ना होने से अमेरिका में लागू हुआ ‘शटडाउन’: नॉन-एसेंशियल सेवाएँ बंद, जानें कैसे ‘ठप’ हो जाएगा US

सीनेट में बजट बिल पास नहीं करा सके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका में 'शटडाउन' का खतरा बढ़ा (साभार: आई स्टॉक, अमर उजाला)
पूरी दुनिया का ठेका लेकर नोबेल की आस लगाए बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में एक बिल भी पास ना करा सके। जिसके बाद अमेरिका में एक बार फिर से सरकारी ‘शटडाउन’ लग गया है। मंगलवार (30 सितंबर 2025) को सीनेट में सरकार को खर्चे के लिए फंड देने वाला बजट बिल पास नहीं हो पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को सीनेट में अस्थायी फंडिंग बिल पास कराने के लिए कम से कम 60 वोटों की जरूरत थी, लेकिन पक्ष में सिर्फ 55 वोट मिले। अब अमेरिकी सरकार का कामकाज ठप हो गया है और बुधवार (1 अक्टूबर 2025) से ‘नॉन-एसेंशियल’ यानी कम जरूरी सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। इसका असर एयर ट्रैवल से लेकर आर्थिक रिपोर्ट्स, पर्यावरण सुरक्षा, छोटे व्यापारों के लोन और वैज्ञानिक रिसर्च तक पड़ेगा।

जानिए क्या है ‘शटडाउन’?

दरअसल, अमेरिका में हर साल सरकार को चलाने के लिए बजट पास करना होता है। अगर संसद समय पर खर्च के बिल को मंजूरी नहीं देती, तो सरकारी दफ्तरों को फंडिंग नहीं मिलती। ऐसे में सरकार ‘शटडाउन’ मोड में चली जाती है। यानी जिन सेवाओं को जरूरी नहीं माना जाता, उन्हें रोक दिया जाता है।

लाखों सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के घर भेज दिए जाते हैं, जिसे ‘फरलो’ कहा जाता है और जो कर्मचारी जैसे सैनिक, बॉर्डर गार्ड्स या पुलिस जैसे जरूरी काम में हैं, वो ड्यूटी पर रहते हैं लेकिन सैलरी बाद में मिलती है।

इस बार का झगड़ा सिर्फ बजट पर नहीं बल्कि हेल्थकेयर सब्सिडी को लेकर भी है। डेमोक्रेट्स पार्टी चाहती है कि बजट में ओबामाकेयर के तहत मिलने वाली सब्सिडी को स्थायी कर दिया जाए ताकि 24 मिलियन यानी 2.4 करोड़ लोगों का इलाज सस्ता बना रहे लेकिन रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि बजट और हेल्थकेयर को अलग-अलग देखा जाए। इसी टकराव में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को और भड़का दिया है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि अगर सरकार बंद होती है, तो और कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा और वो ‘डेमोक्रेट’ होंगे।

पहले ही इस हफ्ते 1.5 लाख कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ चुके हैं, जो पिछले 80 सालों में सबसे बड़ा सरकारी एक्सोडस है। इसके अलावा हजारों कर्मचारियों को पहले ही निकाला जा चुका है। ट्रंप सरकार ने कुछ एजेंसियों को आदेश दिए हैं कि वे डेमोक्रेट्स को शटडाउन का दोष दें, जो आमतौर पर सरकारी नियमों के खिलाफ होता है।

क्या होगा ‘शटडाउन’ का असर?

अब बात ये है कि असर कितना बड़ा होगा। एयरलाइंस ने कहा है कि इससे उड़ानों में देरी होगी। लेबर डिपार्टमेंट बेरोजगारी की रिपोर्ट जारी नहीं करेगा। स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन लोन नहीं देगा। एनवायरनमेंट एजेंसी प्रदूषण की सफाई पर काम रोक देगी।

वहीं, सोशल सिक्योरिटी और जस्टिस डिपार्टमेंट जैसे अहम विभागों ने भी शटडाउन प्लान तैयार कर लिया है। दो यूनियनों ने कोर्ट में याचिका दी है कि जब तक मामला साफ न हो, तब तक कर्मचारियों को निकाला न जाए, लेकिन कोर्ट ने ट्रंप को काम जारी रखने की छूट दी है।

सीनेट में रिपब्लिकन लीडर जॉन थ्यून ने कहा है कि बुधवार (1 अक्टूबर 2025) को एक और वोट होगा। लेकिन डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स में कोई समझौते के संकेत नहीं हैं। डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने कहा कि हम अमेरिकियों की हेल्थ के लिए लड़ रहे हैं और इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर रिपब्लिकन्स का आरोप है कि डेमोक्रेट्स बजट को राजनीति के लिए रोक रहे हैं, ताकि 2026 के चुनावों से पहले अपने वोटर्स को खुश किया जा सके।

लंबा है शटडाउन का इतिहास

यह पहली बार नहीं हो रहा, अमेरिका में 1981 से अब तक 15 बार शटडाउन हो चुका है। ज्यादातर शटडाउन कुछ घंटों या एक-दो दिन में खत्म हो जाते हैं, लेकिन 2018-19 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में शटडाउन 35 दिन तक चला था, जो अब तक का सबसे लंबा था।

उस समय अमेरिका को करीब 3 बिलियन डॉलर यानी लगभग 25,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इस बार दाव पर सिर्फ एक बजट बिल नहीं, बल्कि देश की 1.7 ट्रिलियन डॉलर की सरकारी मशीनरी है, जो पूरे अमेरिका के बजट का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।

बाकी का बजट पेंशन, स्वास्थ्य योजनाएँ और कर्ज के ब्याज में जाता है। यानी अगर ये शटडाउन लंबा चला, तो असर सिर्फ कर्मचारियों तक नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

साफ है कि ये सिर्फ पैसों की लड़ाई नहीं, ये राजनीति और पब्लिक सर्विस के बीच खिंचती रस्साकशी है, जिसमें नुकसान जनता का हो रहा है। अब सबकी निगाहें बुधवार (1 अक्टूबर 2025) की वोटिंग और दोनों दलों की जिद पर टिकी हैं।

अमेरिका के इस शटडाउन का असर भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी पड़ना शुरू हो गया है। दूतावास ने 1 अक्टूबर से अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट अपडेट करने बंद कर दिए हैं।