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टेलीग्राम पर NEET का फर्जी पेपर बेचते 19 साल के छात्र को राजस्थान पुलिस ने किया गिरफ्तार: अभ्यर्थियों से वसूले हजारों रुपए

         एग्जाम से पहले बेच रहा था री-नीट का फर्जी पेपर, आरोपित आकाश गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) के री-एग्जाम ठीक तीन दिन पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में पुलिस ने फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 19 वर्षीय छात्र टेलीग्राम चैनल के जरिए अभ्यर्थियों को री-नीट का लीक पेपर देने का झाँसा देकर पैसे वसूल रहा था। आरोपित पहचान छिपाने के लिए विदेशी नेटवर्क और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। मामले में बैंक लेन-देन, डिजिटल गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की जाँच जारी है।

पुलिस के मुताबिक, भारत सरकार के एस-मेक (S-MEC) पोर्टल के माध्यम से विशेष शाखा को सोशल मीडिया पर पेपर लीक से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसी दौरान जिला विशेष टीम (DST) को भी सूचना मिली कि भीलवाड़ा के पटेल नगर क्षेत्र में रहने वाला एक युवक ऑनलाइन री-नीट का फर्जी पेपर बेच रहा है।

इनपुट मिलने के बाद पुलिस टीम गठित की गई और 18 जून 2026 की देर रात करीब एक बजे छापेमारी कर आरोपित आकाश चौधरी को उसके घर से हिरासत में लिया गया। जाँच में सामने आया कि आरोपित ने टेलीग्राम पर ‘पेपर माफिया’ नाम से चैनल बना रखा था। पुलिस का दावा है कि वह अमेरिका आधारित VPN नंबर और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए चैनल संचालित कर रहा था ताकि उसकी पहचान और गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो।

4 हजार में बेचे जा रहे थे पेपर, NEET की किताबों से तैयार करता था सामग्री

प्रारंभिक जाँच में पता चला कि आरोपित प्रत्येक री-नीट पेपर के बदले चार हजार रुपए तक ले रहा था। भुगतान के लिए वह इच्छुक छात्रों को क्यूआर कोड भेजता था और रकम सीधे अपने बैंक खाते में मंगवाता था। पुलिस को उसके टेलीग्राम चैनल पर करीब 52 लोगों के संपर्क में होने की जानकारी मिली है।

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि वह नीट की तैयारी से जुड़ी पुस्तकों के पन्ने स्कैन कर उनसे डमी प्रश्नपत्र तैयार करता था और उन्हें असली लीक पेपर बताकर अभ्यर्थियों तक पहुँचाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल फोन, नीट की तैयारी की किताब और कुछ अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं।

जयपुर में कर रहा था तैयारी, अब नेटवर्क और ठगी की रकम की जाँच

आकाश ने स्थानीय स्तर पर पढ़ाई पूरी करने के बाद 12वीं पास की और फिलहाल जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह कार्रवाई से दो दिन पहले ही जयपुर से वापस भीलवाड़ा आया था। प्रताप नगर थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईटी एक्ट, धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस मोबाइल से डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों के लेन-देन, संभावित साथियों और इस ठगी से प्रभावित छात्रों की संख्या की जाँच कर रही है।

पाकिस्तान का एक-एक इंच भारत की जद में, बिना किसी की मदद के कर दिया नेस्तनाबूत: अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति ने गिनाया कैसे सफल रहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’

                       अमरुल्लाह साहेल, अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति (फोटो साभार: ChatGPT/Canva)
अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने रविवार (11 मई 2025) को भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर भारत की कार्रवाई को एक बड़ी रणनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ साफ तौर पर एक निर्णायक जीत है और इसके बाद हुआ युद्धविराम भारत की कूटनीतिक कामयाबी को दिखाता है।
पाकिस्तान के DGMO के निवेदन को नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकार करने से पाकिस्तान और इसके समर्थक देशों को जरुरत से ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत है। प्रोटोकॉल तोड़ पाकिस्तान जाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ मिलना भी मोदी द्वारा पाकिस्तान को सुधरने का खुला न्यौता था। लेकिन आतंकवादियों के इशारे पर नाचने वाली पाकिस्तान सरकार मोदी की रणनीति को समझने में पूरी तरह से फेल रहे हैं। दूसरे, वर्तमान आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत ने विश्व को दिखा दिया कि पाकिस्तान की सरकार और फौज आतंकियों के पैरों में सिर झुकाये हुए है। फिर भी जो भी देश पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है वह आतंकवाद का समर्थक है। उन देशों को जनता की जान और माल की बिलकुल भी चिंता नहीं।  

सालेह ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर की तुलना पाकिस्तान के ऑपरेशन ‘बनयान उल मरसूस’ से करते हुए कहा कि भारत का नजरिया ज़्यादा साफ, आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से असरदार रहा। उन्होंने भारत की उस नीति की तारीफ की जो उसके सैन्य और राजनीतिक फैसलों को निर्णायक बनाती है।

भारत की रणनीतिक आजादी और आत्मविश्वास

अमरुल्लाह सालेह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की रणनीतिक आजादी का प्रतीक बताया। सालेह ने कहा कि भारत ने इस बार पहली बार किसी भी तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से न तो अनुमति माँगी और न ही कोई सहानुभूति, उसने पाँचों महाशक्तियों को नजरअंदाज दिया। यह भारत के आत्मविश्वास, संप्रभुता और स्वतंत्र सोच का मजबूत संदेश था।

आतंकियों और उनके मददगारों दोनों पर सीधा वार

सालेह ने कहा कि भारत ने आतंकवादियों और उसे पालने-पोसने वाले, दोनों को एकसाथ निशाना बनाकर ये दिखा दिया कि अब राज्य प्रायोजित आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत ने यह सोच खत्म कर दी कि आतंकी अपने राज्य से अलग-थलग काम करते हैं। भारत ने पाकिस्तान में न सिर्फ आतंकियों, बल्कि उन्हें पालने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की, जो अब एक नए रणनीतिक दौर की ओर इशारा करता है। इससे पाकिस्तान की ‘इनकार की नीति’ पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पाकिस्तान की सैन्य महत्वाकांक्षाएँ और उसकी कमजोर आर्थिक हालत

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा कि युद्ध के दौरान ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज माँगा और हैरानी की बात है कि उसे कर्ज मिल भी गया। लेकिन यह जंग लड़ने के लिए काफी नहीं है। सालेह के मुताबिक, पाकिस्तान के पास युद्ध शुरू करने की ताकत हो सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक खींचने की क्षमता नहीं है। IMF से मिला पैसा कोई युद्ध नहीं जिता सकता।

रणनीतिक संयम की परीक्षा

सालेह ने बताया कि 22 अप्रैल को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने भारत के रणनीतिक संयम की परीक्षा लेने की कोशिश की। संभव है कि वे जानते-बूझते यही नतीजा चाहते थे, लेकिन उन्हें इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आतंकी शायद भारत को खुलेआम शर्मिंदा करना चाहते थे, लेकिन उनकी सोच आज भी 2008 में अटकी हुई लगती है।

नूर खान एयरबेस पर हमला – भारत की पहुँच का बड़ा संदेश

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने अपनी ताकत और पहुँच का ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस, जिसे पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता था, वह भी हमले से नहीं बच पाया। सालेह ने कहा, “मैं हमेशा सोचता था कि यह एयरबेस पाकिस्तान का सबसे महफूज़ ठिकाना है, लेकिन अब साफ हो गया कि पाकिस्तान का कोई भी हिस्सा भारत की पहुँच से बाहर नहीं है।”

मजहबी फतवों में भी भारत की कूटनीतिक जीत

पाकिस्तान ने हमेशा मुस्लिम दुनिया की सहानुभूति पाने के लिए मजहबी फतवों का सहारा लिया है, लेकिन इस बार यह दाँव भी नहीं चला। भारत के उलेमा, खासकर देवबंद के उलेमा ने भारत के समर्थन में फतवा जारी किया, जिससे पाकिस्तान का यह खास ‘हथियार’ भी उससे छिन गया। सालेह ने कहा, “पाकिस्तान अब इस्लामी दुनिया में सहानुभूति पाने के लिए जो मजहबी दावे करता था, वह अब खत्म हो चुके हैं। वैसे भी देवबंद भारत में ही है।”

भारत ने ऑपरेशन में पूरी गोपनीयता बरती

सालेह ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र की तमाम चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन के दौरान जबरदस्त गोपनीयता बनाए रखी। जहाँ लोकतांत्रिक देशों में अक्सर जानकारी लीक हो जाती है, भारत से ऑपरेशन के बारे में बहुत कम खबरें बाहर आईं। यह बात दर्शाती है कि भारत ने ऑपरेशन की गोपनीयता को बनाए रखने में बेहद कुशलता दिखाई।

पाकिस्तान का ऑपरेशन – सिर्फ प्रचार और दावा

अफगान नेता ने पाकिस्तान के ऑपरेशन ‘बनयान उल मरसूस’ की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। सालेह ने कहा कि इससे जुड़ी कोई ठोस तस्वीर या सबूत सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा, “मैंने पाकिस्तान के इस ऑपरेशन से जुड़ी कोई स्पष्ट तस्वीर (फोटो-वीडियो) नहीं देखा, जिससे लगता है कि यह शायद कभी ठीक से हुआ ही नहीं। वास्तव में युद्धविराम ने पाकिस्तान को शर्मिंदगी से बचा लिया।”
पूर्व अफगानी उप-राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने जरूर बड़ी-बड़ी बातें की हैं, लेकिन हकीकत में भारत का आकाश खुला रहा, उड़ानें सामान्य रहीं और न दिल्ली, न ही अमृतसर में कोई मिसाइल गिरने जैसी घटना हुई। इससे साफ होता है कि पाकिस्तान के दावे खोखले थे और युद्धविराम ने उसे बड़ी बेइज्जती से बचा लिया।

राजस्थान : दैनिक भास्कर का जबरदस्त खुलासा :12वीं पास भी है सरकारी ठप्पे वाला डॉक्टर: MBBS की पढ़ाई के बिना ही 98 को डिग्री, कोई सर्जन तो कोई गाइनी

                                       राजस्थान डॉक्टर बनाने का फर्जीवाड़ा (फोटो साभार: cbc)
आपने झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सुना होगा। संभव है कि कभी उनके फेरे में आप फँस भी चुके हों। पर राजस्थान में ऐसे लोगों को सरकारी ठप्पे के साथ डॉक्टर बना देने का मामला सामने आया है, जिन्होंने कभी एमीबीएस की पढ़ाई ही नहीं की। इनमें से कुछ तो 12वीं पास ही हैं।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश आकोदिया ने किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कम से कम 98 ऐसे लोगों का राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन किया गया है जो वास्तविकता में डॉक्टर नहीं हैं। उनका यह भी दावा है कि काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा ने इस खबर को रोकने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए देने का ऑफर दिया था।

रिपोर्ट से पता चलता है कि आरएमसी के पास जब ऑनलाइन आवेदन आए तो उन्होंने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि जाली ईमेल अटैच करके सत्यापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इन कथित डॉक्टरों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और एनओसी के फर्जी दस्तावेज अटैच किए थे। आरएमसी ने बिना किसी की डिग्री की पड़ताल किए ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इन फर्जी डॉक्टरों में से कुछ सर्जन हैं तो कुछ गाइनी।

रिपोर्ट में ऐसे कुछ डॉक्टरों के नाम भी उजागर किए हैं। जैसे डॉ. सरिमुल एच मजूमदार, डॉ. रामकिशोर महावर, डॉ. गीता कुमारी, डॉ. देवेंद्र नेहरा, डॉ. शांतनु कुमार, डॉ. पंकज यादव, डॉ. महेश कुमार गुर्जर आदि। इन फर्जी डॉक्टरों ने न तो कभी मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप का। बावजूद इनको सरकारी मुहर लगाकर डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र बाँट दिया गया।

भास्कर ने इस मामले में सच्चाई खोजने के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ राजेश का स्टिंग भी किया। स्टिंग में राजेश शर्मा ने स्वीकार किया कि ये इस तरह के फर्जी डॉक्टरों को आरएमसी ने सर्टिफिकेट दिया। बाद में उन्होंने कथित तौर पर रिपोर्टर से कहा कि वह इस खबर को कहीं छापे नहीं, इसके लिए वे 10 लाख रुपए देंगे। रजिस्ट्रार ने ये भी कहा कि वो ये पैसे उन्हीं लोगों से लेंगे जिनको जिनकी फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरियाँ लगी हैं। रजिस्ट्रार ने कैसे भी इस मामले को निपटाने की बात कही।