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जमीन खरीदकर ‘हारून सेठ’ खुलवाता है मदरसा, रिपोर्टर ने पूछा पैसा कहाँ से आता है तो बंद करने की दी धमकी: नेपाल बॉर्डर पर डेमोग्राफी जिहाद के लिए पाकिस्तान से फंडिंग

                                                                                                                                         साभार 
भारत से सटे नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यहाँ सैकड़ों मदरसे और मस्जिद कुछ सालों में बने हैं। इसकी रिपोर्ट आए दिन आते रहते हैं। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने 7 दिनों तक इन सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया। इस दौरान कई खुलासे हुए।

नेपाल के बेदोली गाँव भारत की सीमा से सिर्फ 7 किमी दूर है। गाँव में 24 घंटे लोकल लोग पहरा देते हैं। यहाँ आने-जाने वाले हर गैर-मुस्लिम से पूछताछ करना एक परंपरा बन गई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस गाँव के आस-पास 12 से ज़्यादा मदरसे हैं। गाँव में जहाँ भी खाली जमीन थी, वहाँ मदरसा बन गया।

यह हालत यूपी बॉर्डर से सिर्फ 5 से 7 किमी दूर नेपाल के 110 गाँवों में देखा जा सकता है। दैनिक भास्कर की टीम ने इन गाँवों में 7 दिन बिताए। नेपाल में कोई मदरसा बोर्ड नहीं है, फिर भी 4000 मदरसे चल रहे हैं। इनमें से भी आधे भारत-नेपाल बॉर्डर पर हैं। इसमें नए मदरसों की संख्या ज्यादा है। इन मदरसों को हवाला के जरिए पाकिस्तान से फंडिंग भी मिल रही है।

नेपाल के डेमोग्राफी में बदलाव

नेपाल में मार्च महीने में आम चुनाव हैं। ऐसे में मदरसों की तेज़ी से बढ़ती संख्या का मुद्दा गरम है। कुछ दिन पहले परसा के बीरगंज में हिन्दू-मुस्लिम हिंसा हुई थी। दैनिक भास्कर टीम ने पाया कि नए मदरसे भारत की सीमा से करीब 20-25 किमी के दायरे में ही खुल रहे हैं।

आस-पास के भारतीय गाँवों के कुछ बच्चे भी यहाँ पढ़ने जाते हैं। इस मदरसे को खोलने का कॉन्ट्रैक्ट एक लोकल बिजनेसमैन हारून सेठ को मिला है। बरोहियाँ और पकड़ी गाँवों के खेतों में अरबी एकेडमी भी बन रही हैं। यूपी से सटे नेपाल के इन हिस्सों में मदरसे डेमोग्राफी भी बदल रहे हैं। पूर्वी में गैर-मुस्लिम आबादी 70% थी, लेकिन 10 साल में तस्वीर बदल गई है। अब सिर्फ 10% से 18% गैर-मुस्लिम हैं।

हारून सेठ का नाम आते ही दैनिक भास्कर की टीम उसके घर पहुँची, लेकिन हारून वहाँ नहीं था। आस-पास के लोगों ने बताया कि गाँव में जो भी जमीन मिलती है, हारून उसे खरीद लेता है। मदरसा शुरू करता है। बच्चों के रहने के लिए बिल्डिंग बनाता है, हारून असल में एक मिडिल क्लास बिजनेसमैन है। हारून पैसे कहाँ से ला रहा है? भास्कर के रिपोर्टर ने पूछा तो गाँव वालों ने उसे कमरे में बंद करने की धमकी दी।

ज्यादातर मदरसे तराई इलाके में हैं। नेपाल सरकार 8 लाख रुपए मदद करती है, बाकी जकात से पैसा मिलता है। आज तक सरकारी पैसे दिए जाने का किसी ने विरोध नहीं किया था, लेकिन अब गैर मुस्लिम संगठन सामने आ रहे हैं। दरअसल इन मदरसे में गैर मुस्लिम पढ़ाई नहीं कर सकते। बच्चों को अरबी, उर्दू के साथ नेपाल की स्थानीय भाषा भी पढ़ाई जाती है।

नेपाल के इन बॉर्डर वाले गांवों में 250 से ज़्यादा मदरसे हैं। इनमें से कुछ पिछले साल के Gen-G आंदोलन के बाद से खुले हैं। भास्कर टीम हिडन कैमरे के साथ पकड़ी गाँव में बने मदरसा तुल ​​कुरान वसुन्ना पहुँची। यहां अब्दुल हलीम पढ़ाते दिखे। 2 मंजिला बिल्डिंग में 5 कमरे हैं। हलीम ने बताया कि इस मदरसे को बने कुछ साल हो गए हैं।

नेपाल में बढ़ती मुस्लिम आबादी को देखते हुए यहाँ महाकाल संस्था की स्थापना की गई है। इसके अध्यक्ष इंद्रजीत यादव का कहना है कि यहाँ कोई मदरसा बोर्ड नहीं है, लेकिन नेपाल में GEN Z आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव ने मधेश इलाके में मदरसा बोर्ड बनाया है। हिंदू इसका विरोध कर रहे हैं। धर्म बदलने के साथ-साथ 10 साल में मदरसों की संख्या तीन गुणा बढ़ गई है। किसी को भी रिहायशी मदरसों में जाने की इजाजत नहीं है।

नेपाल की आबादी करीब 3 करोड़ है, जिसमें करीब 40 लाख मुस्लिम हैं। 10 साल पहले मुस्लिम आबादी 12-13 लाख हुआ करती थी यानी मुस्लिम आबादी बेहिसाब बढ़ रही है।