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राजस्थान विधानसभा चुनाव : तारानगर से कांग्रेस प्रत्याशी नरेन्द्र बुडानिया का वीडियो वायरल, चुनाव जीतने के लिए किसी को भी मार डालो….कुछ भी करो, चुनाव जीतना है!

राजस्थान में हर 5 वर्ष के बाद सत्ता परिवर्तन होने की परम्परा चलती आ रही हैं। ना ही भाजपा को खुश होने की जरुरत है और ना ही कांग्रेस को दुखी। चुनावी रैलियों में सब एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई का आरोप लगाते हैं, लेकिन सत्तारुढ़ होने पर वही ये सब आरोप कहीं सोने चला जाता है, फिर 5 साल बाद अपनी कालकोठरी से बाहर निकल आते हैं।
दूसरे, आरक्षण के नाम पर सभी पार्टियों द्वारा संविधान की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं। जनता सत्तारूढ़ और विपक्ष से पूछे जब संविधान सबको बराबरी की बात करता है, फिर आरक्षण क्यों? जिसको देना अपनी पार्टी में दो, ये दोगलापन कब तक? इन समस्त पार्टियों का एक और दोगलापन देखिए, सभी पार्टियां आंबेडकर की डूबडूबी बजाते हैं, लेकिन जब डॉ आंबेडकर ने आरक्षण का दुरूपयोग होते देख, इसे समाप्त करने को कहा था, लेकिन आज तक नहीं हुआ। इन सभी से पार्टियों से जनता को पूछना चाहिए कि कब तक आरक्षण की आग में जनता को झुलझाते रहोगे? 

विधानसभा चुनाव में एक ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अकेले पड़ते दिख रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी हार के डर से ओछी बयानबाजी पर उतर आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजस्थान में सभाओं और बीजेपी थिकं टैंक की रणनीति का पॉजिटिव असर राजस्थान की जनता पर दिख रहा है और वो तीन दशक से चले आ रहे बदलाव के रिवाज की ओर बढ़ रही है। इस बीच तारानगर से कांग्रेस प्रत्याशी बुड़ानिया ने मर्यादा की सारी हदें लांघते हुए बयान दे डाला है। बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बुड़ानिया ने एक सभा में अपने समर्थकों से कह डाला है कि चुनाव जीतने के लिए किसी को भी मार डालो। कुछ भी करो हमें हर हाल में चुनाव जीतना है। बीजेपी ऐसी बयानबाजी की निर्वाचन आयोग से शिकायत करने का मन बना रही है।

‘चुनाव में किसी को मारना भी पड़े तो मार डालो, चुनाव हर हाल में जीतना है’
विधानसभा चुनाव में तारानगर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र बुडानिया का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद ही लोगों को पता चल रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी किस स्तर भी भाषणबाजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे किस हद तक गिरकर लोगों को उकसाने के लिए नैतिकता की सारी सीमाएं लांघ रहे हैं। दरअसल, वायरल वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी बुडानिया अपने भाषण में कह रहे हैं- ‘चुनाव में किसी को मारना भी पड़े तो मार डालो, चुनाव तो हर हाल में जीतना है।’

जनसंपर्क और प्रचार अभियान का बुडानिया का वीडियो वायरल
इस तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में जमीन पर बैठे लोग और मंच से नरेंद्र बुडानिया संबोधित करते दिख रहे हैं। ऐसे में साफ है कि ये जनसंपर्क और प्रचार अभियान के दौरान का ही वीडियो है। वीडियो के साथ कैप्शन दिया गया है- ‘हार के डर से नरेंद्र बुडानिया ने अपने कार्यकर्ताओं को लोगों को मारने के लिए उकसाया।’ दरअसल, बुडानिया ने चुनाव जीतने के लिए किसी को मारने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर ट्रौल- हार की बौखलाहट इतनी भी ठीक नहीं है
कांग्रेस प्रत्याशी के आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए यूजर्स ने अपने अलग-अलग रिएक्शन भी दे रहे हैं। सोशल प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने लिखा कि -‘तारानगर के कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र बुडानिया जी एक नया फतवा जारी कर रहे हैं ! सुनिए…! हार की बौखलाहट इतनी भी ठीक नहीं है।’ एक अन्य यूजर ने लिखा- ‘कांग्रेस प्रत्याशी जाट समाज के नरेंद्र बुडानिया का अपने समर्थकों को संदेश?’ वीडियो वायरल होने के बाद बुडानिया बौखला गए। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी बुडानिया के अपने फेसबुक पेज पर अपने ही वीडियो को कांट-छांट वाला बता दिया। ऐसी घटिया राजनीति तारानगर में कभी स्वीकार नहीं की गई है।

पहले बोले थे- मुख्यमंत्री नहीं हूं, लेकिन मुख्यमंत्री से कम भी नहीं हूं..
यह पहला मौका नहीं है जबकि कांग्रेस नेता नरेन्द्र बुडानिया का वीडियो विवादों में आया हो। कुछ साल पहले भी उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ बयान दिया था, जो वायरल हो गया था। तब राजस्‍थान की महिला और बाल विकास राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) ममता भूपेश के बाद कांग्रेस के ही विधायक नरेन्द्र बुडानिया का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो कह रहे थे कि मैं मुख्यमंत्री तो नहीं हूं, लेकिन मुख्यमंत्री से कम भी बिल्कुल नहीं हूं। विधायक बुडानिया के चूरू बाईपास पर कहा कि जिन मुद्दों पर चुनाव लड़ा वे मंत्री नहीं बनने से कमजोर नहीं हुए। वो ही प्राथमिकताएं हैं। गहलोत ने मंत्री नहीं बनाया तो वे कमजोर हो गए, ये नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वे इतना विश्वास दिलाना चाहेंगे कि वे अगर मुख्यमंत्री तो नहीं हैं, तो मुख्यमंत्री से किसी भी तरह कम भी नहीं हैं।

कांग्रेस दिग्गजों को घर में ही घेरने की भाजपा थिंक टैंक की रणनीति
राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा थिंक टैंक की रणनीति कांग्रेस दिग्गजों को घर में ही घेरने की है। ताकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत ये नेता अपनी सीटों को बचाने में ही उलझे रहें और उन्हें प्रदेश भर में चुनाव प्रचार का ज्यादा मौका ही न मिले। इसके चलते भाजपा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, स्पीकर सीपी जोशी, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट आदि के सामने अपने बड़े सूमराओं को उतारा है। इसके लिए बीजेपी ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के लिए खास प्लान तैयार किया है, ताकि चुनावी समर में वोट बैंक की राजनीति के साथ-साथ उन्हें चौतरफा घेरा जा सके।

बीजेपी ने चुनाव में सांसदों को उतारकर कांग्रेस की सांसे फुलाईं
राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी चुनावी अभियान में जुटी हुई है। इधर, बीजेपी कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए बीजेपी ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के लिए खास प्लान तैयार किया है। जिसके माध्यम से बीजेपी इन नेताओं की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में घेराबंदी करेगी। ताकि ये नेता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं निकल सके। इसके लिए बीजेपी विशेष रणनीति पर काम कर रही हैं। बीजेपी ने कुछ मुकाबले की सीटों पर अपने सांसदों को उतारकर कांग्रेस की सांसे फुला दी हैं। बीजेपी की इस चाल के बाद कांग्रेस काफी समय तक तो इन सीटों पर उम्मीदवार ही घोषित नहीं कर पाई थी। इसके साथ ही बड़े नेताओं को घेरने की खास रणनीति के तहत बीजेपी का प्रयास रहेगा कि यह नेता अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर नहीं निकल पाए। बीजेपी चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक नारायण पंचारिया ने दावा किया कि इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी 2013 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी।

सचिन पायलट: टोंक में गुर्जर वर्सेज गुर्जर की लड़ाई में चौतरफा घिरे
विधानसभा चुनाव में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को तो दोहरी घेराबंदी का सामना करना पड़ेगा। सीएम गहलोत से छत्तीस के आंकड़े के चलते पार्टी में ही उनकी कारसेवा करने वाले कई सिपहसालार हैं। दूसरी ओर टोंक से पायलट के सामने बीजेपी ने तीन बार विधायक अजीत मेहता को उतारकर गुर्जर वर्सेज गुर्जर की दिलचस्प लड़ाई छेड़ दी है। टोंक विधानसभा क्षेत्र के गुर्जर बहुल होने के चलते इस बार गुर्जर मतों का बंटना तय है। वैसे भी गुर्जर कांग्रेस से इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने पांच साल में पायलट को वादे के मुताबिक सीएम नहीं बनाया। बीजेपी ने इसके अलावा वरिष्ठ नेता रमेश विधूड़ी को भी यहां लगा रखा है। ऐसे में पायलट चौतरफा घिर गए हैं।