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मध्य प्रदेश : महाघोटाला : एक ही दिन 50 IAS-IPS ने खरीदी कृषि भूमि, 16 महीने बाद पास हो गया 3200 करोड़ रूपए का वेस्टर्न बायपास: लैंड यूज बदलते ही 11 गुना बढ़ी कीमत

                                                                                           प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)
मध्य प्रदेश में आईएएस अफसरों की अचल संपत्ति की जाँच में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें देश के 50 अफसरों ने कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गाँव में एक ही दिन कृषि जमीन खरीद ली। यहाँ सिर्फ 16 महीनों में ही 3200 करोड़ रुपए का वेस्टर्न बायपास मंजूर हुआ और फिर 10 महीने में लैंड यूज बदलकर आवासीय कर दिया गया। इससे जमीन की कीमत 11 गुना बढ़ गई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में हुई। 50 लोगों ने संयुक्त रूप से यह जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में कीमत 5.5 करोड़ रुपए दर्ज की गई जबकि बाजार मूल्य 7.78 करोड़ रुपए बताया गया। आईपीआर में इसे ‘like-minded officers’ यानी एक जैसी सोच वाले अधिकारियों द्वारा खरीदी गई संपत्ति बताया गया। दस्तावेज बताते हैं कि 50 हिस्सों के पीछे असल खरीदार सिर्फ 41 हैं।

इस निवेश में सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के अफसर ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में तैनात कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। अफसरों ने मिलकर कृषि जमीन को खरीदा और बाद में सरकारी फैसलों का फायदा उठाया।

31 अगस्त 2023 को जमीन खरीद के 16 महीने बाद कैबिनेट ने वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दे दी। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार बायपास खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर है।

जून 2024 में बायपास मंजूरी के 10 महीने बाद ही जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय में बदल दिया गया। जब जमीन खरीदी गई थी तब वह पूरी तरह कृषि भूमि थी।

2022 में करीब 5 एकड़ यानी 2,17,800 वर्गफीट जमीन की दर लगभग 81.75 रुपए प्रति वर्गफीट थी। जून 2024 में लैंड यूज चेंज के बाद दर 557 रुपए प्रति वर्गफीट हो गई। वर्तमान बाजार दर 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट है। इससे जमीन का कुल मूल्य 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुँच गया है। हालाँकि अभी तक आवासीय प्रोजेक्ट के लिए कोई सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है। आवासीय प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन को सोसायटी के नाम ट्रांसफर करना होगा या प्लॉट आवंटित करने होंगे।

यह घटनाक्रम अफसरों पर सीधा निशाना साध रहा है और सवाल खड़ा कर रहा है कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी पहले से कैसे मिल गई। और फिर सवाल ये भी है कि क्या उन्होंने पद का दुरुपयोग कर अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाया? दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।