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नॉर्वे की प्रोपेगेंडाबाज Helle Lyng ने खुद कबूला- मुझे पता था ज्वाइंट ब्रीफिंग में पत्रकारों को नहीं पूछना सवाल

                                                                                              साभार - हेले लिंग का सोशल मीडिया हैंडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान हेले लिंग (Helle Lyng) नाम की पत्रकार की करतूत ने खूब चर्चा बटोरी। उसकी एक वीडियो के कारण भारत के वामपंथी उसे ‘हीरो’ बताने लगे और ऐसा फैलाया जैसे पीएम मोदी उसके पूछे सवालों से भागे हों। अब उसी हेले ने बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में खुद अपनी हरकत के पीछे की सच्चाई को बताया है।

हेले लिंग ने साफ कहा कि उन्हें पहले से पता था कि यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं बल्कि सिर्फ जॉइंट स्टेटमेंट था और दोनों देशों के प्रधानमंत्री सवाल नहीं लेने वाले थे। उन्होंने कहा, “मुझे अच्छी तरह पता था कि यह सिर्फ ज्वाइंट ब्रीफिंग है और कोई सवाल नहीं लिया जाएगा।”

दरअसल पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त उपस्थिति के दौरान पत्रकारों के सवाल पूछने का कार्यक्रम तय नहीं था। बाद में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की अलग टीम ने मीडिया के सवाल लिए।

पहले से पता था कि सवाल नहीं लिए जाएँगे

BBC हिन्दी से बातचीत में हेले लिंग ने माना कि पत्रकारों को पहले ही बता दिया गया था कि दोनों नेता सवाल नहीं लेंगे। इसके बावजूद उन्होंने पीएम मोदी के मंच से उतरते समय आवाज लगाई, “प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते?”

पीएम मोदी बिना जवाब दिए अपने नॉर्वेजियन समकक्ष के साथ आगे बढ़ गए। बाद में हेले लिंग ने खुद कहा कि उन्हें पहले से उम्मीद थी कि पीएम मोदी उनके सवाल का जवाब नहीं देंगे।

हेले लिंग ने सफाई दी कि उन्हें यह करना था क्योंकि पत्रकार के रूप में ये उनका काम है। वो किसी विदेशी नेता को उनके देश में लोकतंत्र के बारे में बात करने की अनुमति नहीं दे सकतीं।

उनकी यही हरकत वजह रही कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने इसे प्रेस की आजादी का मुद्दा बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि पत्रकार ने जानबूझकर तय प्रोटोकॉल तोड़कर सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश की।

मानवाधिकार रिपोर्टों और एक्टिविज्म पर भी उठे सवाल

इंटरव्यू में हेले लिंग ने यह भी कहा कि भारत में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर उनकी जानकारी का बड़ा स्रोत एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाएँ हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन पर पक्षपातपूर्ण सोच रखने का आरोप लगाया।

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जानकारी के अनुसार, हेले लिंग नॉर्वे के छोटे मीडिया संस्थान डगसाविसेन से जुड़ी हैं। घटना से पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर ज्यादा सक्रियता नहीं थी और फॉलोअर्स की संख्या भी काफी कम थी। लेकिन, पीएम मोदी से सवाल पूछने के बाद अचानक उन्हें भारत में बड़ी पहचान, समर्थन, आलोचना और मीडिया इंटरव्यू मिलने लगे।