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कांग्रेस और AAP की पालतू मीडिया, राहुल और सोनिया के गुणगान पर मिलते थे पद्म श्री अवार्ड


2014 में जब से बीजेपी सरकार आयी है तब से कांग्रेस की पालतू मीडिया ने गोदी-मीडिया का भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रखा है जबकि हकीकत यह है कि मीडिया आज भी कांग्रेस की तर्ज पर काम कर रही है। अगर मीडिया गोदी-मीडिया होती तो राहुल गाँधी की दोहरी नागरिकता और दो नामों - राहुल गाँधी और राहुल विन्ची -पर शोर मचा रही होती। लेकिन सब मुंह में दही जमाए बैठी है। अगर स्थिति विपरीत होती देखो कितना शोर मच रहा होता। सच्चाई यह है कि विपक्ष ही ऐसे बेसिर पैर के मुद्दे उठाता रहता है जो खुद ही विस्फोट हो जाते हैं। और मीडिया अपनी TRP के चक्कर उसे भुनाता है।    

हिंदी के महान कवि दुष्यंत कुमार की कविता की दो पंक्तियां हैं, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” इन पंक्तियों से प्रेरणा लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में भाषण देने आते हैं, लेकिन उनका मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना होता है, इससे अभी तक ना सूरत बदली और ना ही सीरत। राहुल गांधी ने 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान 50 मिनट तक भाषण दिया। इस दौरान राहुल गांधी ने अपनी परंपरा को जारी रखा और इडियट जैसे असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। लेकिन देश की पालतू मीडिया इसे राहुल के नए अवतार के रूप में पेश कर रही है।

 राहुल गांधी के बचाव में उतरी पालतू मीडिया

अब आपको दिखाते हैं, किस तरह पालतू मीडिया राहुल गांधी के असंसदीय भाषा का बचाव कर रही है। उनके बचाव में नए-नए तथ्य गढ़ रही है। क्योंकि उन्हें राहुल गांधी को देखकर पुराने दिन याद आने लगते हैं, जब सत्ता की मलाई चाटने, पुरस्कार पाने, जमीन और फ्लैट पाने, विदेश यात्रा पर जाने, मंत्रिमंडल में अपने पसंद के लोगों को मंत्री बनाने का मौका मिलता था, जो मोदी सरकार में बंद हो गया है। इससे परेशान पत्रकार राहुल गांधी का कवच बनकर सामने आते हैं और नमक का हक अदा करते हैं। ऐसे में ही एक तथाकथित राजनीतिक विश्लेषक कुमार आशुतोष हैं, जो पहले पत्रकार से राजनेता और राजनेता से फिर पत्रकार बनकर गोदी मीडिया पर ज्ञान देते हैं। लेकिन पालतू पत्रकार बनकर राहुल गांधी का बचाव करने का कोई मौका नहीं चुकते हैं।  
कांग्रेस राज में पालतू पत्रकारों को मिला पद्म श्री पुरस्कार 
पालतू मीडिया के पत्रकार अपने निजी स्वार्थ के लिए ना सिर्फ पत्रकारिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि दूसरों पत्रकारों की जान का दुश्मन बन गए हैं। ऐसे पत्रकार अपनी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता खो चुके हैं। इसलिए दूसरों की विश्वसनीयता खत्म करना चाहते हैं। पालतू मीडिया के पत्रकार गांधी परिवार को छोड़कर किसी दूसरे की तारीफ नहीं सुनना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि उनकी तरह गांधी परिवार की गुलामी सभी पत्रकार करें। क्योंकि कांग्रेस सरकार से मिली सुविधाओं की कीमत पर अपनी निष्ठा बेच दी और पालतू पत्रकार बन गए। पालतू पत्रकारोंं की नजरों में नेहरू-गांधी परिवार इस देश का पालनहार है। नेहरू-गांधी परिवार का वारिस ही इस देश पर राज करने के लिए पैदा हुए हैं। कांग्रेस ने भी अपने पालतू पत्रकारों का पूरा ख्याल रखा। उनकी निष्ठा को देखते हुए कांग्रेस राज में पद्म श्री पुरस्कार से समानित किया था। 
पालतू पत्रकारों द्वारा गुणगान और महिमामंडन
2 अक्टूबर, 2022 को कर्नाटक के मैसूर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बारिश के बीच जनसभा को संबोधित किया। राजा बारिश में भीगकर भाषण क्या दिया, मानो उसने 2024 की बड़ी जंग जीत ली हो। राजा का शौर्य देखकर पालतू पत्रकार काफी खुश नजर आए। उन्होंने राहुल की शान में किस तरह कसीदे पढ़े उसे आप देख सकते हैं।  
AAP की पालतू मीडिया