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महरंग बलोच पर मलाला मौन… अफगान महिलाओं के लिए मंच-मंच भाषण, लेकिन पाकिस्तानी फौज के बलोचों के दमन पर नोबेल विजेता मलाला यूसुफजई खामोश क्यों?

                                      महरंग बलोच (बाएँ), मलाला यूसुफजई (दाएँ), (फोटो साभार : ChatGPT)
पाकिस्तान में अत्याचारों का कोई अंत नहीं होता है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन के खिलाफ संघर्ष करने वाली बलोच याकजेहती कमेटी (BYC) की मुखिया महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जिस डॉक्टर ने स्टेथोस्कोप के बदले जनता की आवाज को हथियार बनाया था, जिसे टाइम मैगजीन ने 2024 में ‘TIME100 नेक्स्ट’ में शामिल किया था और BBC ने 100 सबसे प्रेरणादायक महिलाओं में जगह दी थी उसे उम्रभर के लिए जेल में डाल दिया।

तभी से सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक गूँज रहा है… लेकिन तब दुनिया के कोने-कोने से मानवाधिकार का झंडा उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई की टाइमलाइन पर सन्नाटा है। हाँ, उन्हें फिक्र है तो अफगानिस्ता की, तालिबान की और वहाँ की महिलाओं की.. बाकी उनके खुद के मुल्क में महिलाओं के साथ जो होता हो वो होता रहे, उस पर कोई चिंता नहीं।

महरंग बलोच: ‘बलूचिस्तान की शेरनी’

महरंग बलोच को समझना हो तो पहले बलूचिस्तान को समझना होगा। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा प्रांत दशकों से ‘एनफोर्स्ड डिसअपियरेंस’ यानी सरकारी तंत्र द्वारा लोगों के जबरन गायब कर दिए जाने की त्रासदी झेल रहा है। महरंग के अब्बू अब्दुल गफ्फार लंगोव खुद इस तंत्र के शिकार हुए। जब महरंग मात्र 16 साल की थी तब 2009 में उनके अब्बू को हिरासत में ले लिया गया। तभी से इस लड़की ने विरोध को अपनी जिंदगी बना लिया।
बलोच मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई करते हुए भी महरंग सड़कों पर रही। उनके अब्बू का तो शव कुछ समय बाद मिल गया और तब से उन्होंने BYC के बैनर तले लॉन्ग मार्च निकाले, धरने दिए और हजारों लापता बलोचों के परिजनों की आवाज बनीं।
जुलाई 2024 में ग्वादर में हुए ‘राजी मुची’ बलोच राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुई हिंसा में फ्रंटियर कॉर्प्स के एक सिपाही शब्बीर बलोच की मृत्यु हो गई। पाकिस्तानी सरकार ने इसका ठीकरा महरंग पर फोड़ा। मार्च 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। फिर ट्रायल को खुली अदालत से जेल ट्रायल में बदला और फिर उन्हें उम्रकैद मिली। लेकिन इस पर दुनियाभर में महिला अधिकारों की झंडाबरदार मलाला युसूफजई खामोश हैं।

मलाला के मौन पर सवाल

आप में से कई लोग इस नाम से परिचित होंगे, जो नहीं जानते होंगे उन्हें बताएँ कि मलाला आतंक के खिलाफ महिलाओं की आवाज का कथित प्रतीक हैं। मलाला यूसुफजई का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान की स्वात घाटी में हुआ था।। जब तालिबान ने स्वात पर कब्जा किया और लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी लगाई, तब ग्यारह साल की मलाला ने BBC उर्दू के लिए ‘गुल मकई’ नाम से डायरी लिखनी शुरू की। अक्टूबर 2012 में तालिबान के एक बंदूकधारी ने उनके स्कूली बस में उन्हें गोली मार दी। मलाला बचीं और ब्रिटेन में इलाज के बाद महिला अधिकारों की आवाज बन गईं। 2014 में महज 17 साल की उम्र में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
अब वह महिलाओं के लिए आवाज तो उठाती हैं लेकिन कहा जाता है कि तभी तक जब तक कि उनकी अपनी छवि को कोई नुकसान न हो? मार्च 2025 में जब महरंग को पहली बार गिरफ्तार किया गया था, तब मलाला ने कहा था, “मैं महरंग बलोच की हिरासत को लेकर परेशान और चिंतित हूँ, यह उनका अधिकार है कि वे आवाज उठाएँ। उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।” यह सराहनीय था।
लेकिन 22 जून 2026 को जब उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जब दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन बोल उठे, जब BYC ने इसे ‘बलोच राष्ट्र के प्रति नफरत की अभिव्यक्ति’ कहा तब मलाला की आवाज कहाँ थी? दूसरी तरफ अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए मलाला की आवाज निरंतर और मुखर है। वे तालिबान को ‘जेंडर अपार्थेड’ का दोषी कहती हैं, UN में भाषण देती हैं, हार्वर्ड में सेमिनार करती हैं। यह काम जरूरी है और इसकी तारीफ होनी चाहिए। लेकिन एक सवाल अनुत्तरित रहता है कि अफगानिस्तान की महिलाओं पर तालिबान का जुल्म जितना बड़ा मुद्दा है, क्या बलोचिस्तान में राज्य-प्रायोजित गुमशुदगियाँ, बलोच महिलाओं की पुकार और एक डॉक्टर-एक्टिविस्ट की उम्रकैद उतना बड़ा मुद्दा नहीं?
इससे और आगे बढ़ें तो पाकिस्तान में हर साल हजारों हिंदू और ईसाई लड़कियों का अपहरण कर जबरन धर्म-परिवर्तन और शादी करवाई जाती है। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के विश्लेषण के अनुसार, इन मामलों में 75% पीड़ित हिंदू महिलाएँ हैं और 80% मामले सिंध प्रांत से हैं।
मलाला ने कभी सीधे पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म-परिवर्तन को नाम लेकर नहीं कोसा। जब एक ट्विटर यूजर ने उनसे इन लड़कियों के लिए आवाज उठाने की गुजारिश की, तो मलाला ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। यहाँ सवाल चुनाव का है। जब मलाला तालिबान को ‘जेंडर अपार्थेड’ का मुजरिम कहती हैं तो वे सही हैं। लेकिन जब उसी पाकिस्तान में हिंदू बच्चियों को उठाकर उनकी जिंदगी तबाह की जाती है और जब एक बलोच डॉक्टर को उम्रकैद की सजा मिलती है तो यही मलाला क्यों चुप हो जाती हैं?
अफगानिस्तान की महिला पर बोलना आसान है क्योंकि तालिबान उनकी दुश्मन है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उनकी बात सुनता है और वहाँ उन्हें नहीं जाना है तो कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम नहीं है। लेकिन पाकिस्तान की फौज के खिलाफ बलोचों के दमन पर बोलना, वहाँ की हिंदू अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए लड़ना यह राजनीतिक रूप से जोखिमभरा है। और शायद यही कारण है कि मलाला की आवाज वहाँ पहुँचते-पहुँचते दब जाती है।

 

कांग्रेस की दुर्गति के लिए राहुल गांधी जिम्मेदारः आचार्य प्रमोद कृष्णम; मौहब्बत की दुकान में नफरत क्यों?


करीब 30 साल से अधिक समय तक कांग्रेस पार्टी में रहे वरिष्ठ नेता और धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस की दुर्गति के राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर उनकी बहन प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव लड़ती, तो पीएम मोदी को हार का मुंह देखना पड़ता। राहुल के इस बयान पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कांग्रेस की दुर्दशा देखकर मुझे दया आती है। मुझे अफसोस होता है कि इतनी पुरानी पार्टी की हालत आज इतनी बुरी कैसे हो गई। इस बर्बादी के लिए न ही नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार हैं, न भाजपा और न ही कोई और। इस बर्बादी के लिए अगर कोई जिम्मेदार है, तो वो राहुल गांधी हैं। वहीं आचार्य प्रमोद ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम अगर किसी ने किया है, तो वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

कांग्रेस का लगातार गिरता ग्राफ चिंता का विषय: आचार्य प्रमोद

आचार्य प्रमोद ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की दुर्दशा के लिए राहुल जिम्मेदार हैं। प्रमोद कृष्णम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कांग्रेस का ग्राफ गिरा है वो गांधी परिवार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इस पर गांधी परिवार को आत्मचिंतन करना चाहिए। अगर कांग्रेस सच में प्रियंका गांधी वाड्रा का सदुपयोग करना चाहती है, तो उन्हें सबसे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपे। यह कदम कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिए अच्छा रहेगा।

कांग्रेस की दुर्दशा देखकर दया आती हैः आचार्य प्रमोद

आचार्य प्रमोद ने कहा कि कांग्रेस की दुर्दशा देखकर मुझे दया आती है। मुझे अफसोस होता है कि इतनी पुरानी पार्टी की हालत आज इतनी बुरी कैसे हो गई। इस बर्बादी के लिए न ही नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार हैं, न भाजपा और न ही कोई और। इस बर्बादी के लिए अगर कोई जिम्मेदार है, तो वो राहुल गांधी हैं।

 मोदी ने भारत को एक सूत्र में पिरोयाः आचार्य प्रमोद

आचार्य प्रमोद ने कहा कि पीएम मोदी ने आदिवासी समुदाय से तीन मुख्यमंत्री बनाए हैं, मैं ऐसा मानता हूं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक कर्नाटक से कटक तक और कामाख्या से द्वारका तक भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम अगर किसी ने किया है, तो वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। पीएम मोदी द्वारा कांग्रेस को आदिवासी विरोधी पार्टी बताए जाने पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि सबसे पहले आपको एक बात समझना होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 साल में इतिहास रच दिया है। उन्होंने जिस तरह से आदिवासियों के हित में कदम उठाए हैं, वो काबिले तारीफ है। एक आदिवासी बेटी को भारत का राष्ट्रपति बना दिया।

अगर प्रियंका वाड्रा वाराणसी से चुनाव लड़तीं तो मोदी हार जातेः राहुल गांधी

रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि अगर प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव लड़ जातीं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो-तीन लाख वोट से चुनाव हार जाते। रायबरेली सीट से चुनाव जीतने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी रायबरेली की जनता का आभार प्रकट करने के लिए वहां गए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख लगातार गिर रही है। उन्होंने कहा कि अगर वाराणसी लोकसभा सीट से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ती तो पीएम मोदी की हार निश्चित थी।

मुहब्बत की दुकान में इतनी नफरत …

इससे पहले आचार्य प्रमोद कृष्णम ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई न देने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा था। प्रमोद कृष्णम ने कहा, मुहब्बत की दुकान में इतनी नफरत कि बधाई का एक ट्वीट भी नहीं किया गया। आचार्य प्रमोद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भी पहुंचे और उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह भारत को गौरवान्वित करने वाले ऐतिहासिक पलों के साक्षी बनने का हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पूरी दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ऊंचाइयों के शिखर को छुएगा। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने एक और ट्वीट करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक बार फिर ब्रह्मांड में गूंजी वह आवाज “मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी” और बस शपथ हो गई “खटाखट”। इतना ही नहीं उन्होंने इस ट्वीट में राहुल गांधी को टैग भी किया।

कांग्रेस में रहने के लिए चमचागिरी जरूरी है

लोकसभा चुनाव से पहले 10 फरवरी 2024 को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेता और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर ​​​​आचार्य प्रमोद कृष्णम को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान जारी इसकी जानकारी दी। वेणुगोपाल ने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी के खिलाफ बार-बार बयान देने की शिकायतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रमोद कृष्णम को तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने के उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पार्टी से निष्कासन के बाद प्रमोद कृष्णम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- मैं शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं कि मुझे कांग्रेस से मुक्ति देने का फरमान जारी किया। क्या कांग्रेस में रहने का मतलब है कि हमें चमचागिरी करना और झूठ बोलना जरूरी है।

राम और राष्ट्र से समझौता नहींः आचार्य प्रमोद

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि क्या कांग्रेस में सिर्फ वो रह सकते हैं जो राम का अपमान करें। हिन्दू आस्था को ठेस पहुंचाएं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि राम और राष्ट्र पर समझौता नहीं किया जा सकता है। निष्कासन बहुत छोटी चीज है। हम अपने प्राणों को भी न्यौछावर करने के लिए तैयार हैं। लेकिन राष्ट्रीय अस्तित्व, अस्मिता और सनातन पर कोई आंच नहीं आने देंगे।