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ब्रिटिश संसद में फिर गूंजा मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल : प्राइवेट पार्ट में बोतल घुसाते, चेहरे को सिगरेट से दागते और क्रॉस देखकर करते दरिंदगी: ब्रिटिश सांसद ने ‘मुस्लिम गैंग’ की करतूतें दिलाई याद, बताया- ईद पर कैसे बढ़ते थे अत्याचार

        ब्रिटेन के सांसद रुपर्ट लोव ने ग्रूमिंग गैंग की पीड़िताओं की गवाही पेश की (साभार: X- @RupertLowe10)
ब्रिटेन की संसद में हाल ही में ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई। ग्रेट यारमाउथ से सांसद रुपर्ट लोव ने संसद में कई पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की गवाहियाँ पढ़कर सुनाईं। इन गवाहियों में टूटी बोतलों के टुकड़ों से रेप, पुलिस ऑफिसर द्वारा रेप, नस्लीय आधार पर ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाने जैसी बेहद दर्दनाक घटनाएँ सामने आई हैं।

संसद में बोलते हुए लोव ने कहा कि कई पीड़िताओं ने वर्षों तक अत्याचार झेला, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ अलग-अलग घटनाएँ नहीं थीं, बल्कि एक ऐसा संगठित अपराध था जिसे रोकने में कई संस्थाएँ नाकाम रहीं। सांसद लोव ने इन ग्रूमिंग गैंग के मामलों में स्वतंत्र रूप से जाँच की। जाँच में पता लगा कि इन बाल यौन शोषण के मामलों में स्थानीय क्षेत्रों से ज्यादा सबूत मिले हैं।

ग्रूमिंग गैंग में ‘मुस्लिम’ एंगल

लोव ने एक महिला की गवाही का जिक्र किया, जिसके अब्बा इमाम थे। उस महिला ने बताया कि कई वर्षों तक उसके साथ 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने रेप किया। एक बच्ची ने बताया कि उसके चेहरे को सिगरेट से दागा गया।

तो एक अन्य पीड़िता ने बताया कि जब वह 12 से 13 साल की थी तब उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल डाल कर फोड़ दी गई। एक ने गवाही दी कि ग्रूमिंग गैंग करने वाले नस्लीय टिप्पणियाँ भी करते थें और कहते थे- “गोरी लड़कियों के संस्कार मुस्लिम लड़कियों से कम होते हैं।”

एक पीड़िता ने बताया कि इस्लाम में त्यौहारों के समय उनके साथ अत्याचार बढ़ जाता था। खासकर, ईद के आसपास ज्यादा पार्टियाँ होती थीं तो उन्हें निशाना बनाया जाता था, जिनमें पार्टी में शामिल होने वाले अन्य लोग भी उनके साथ दुष्कर्म करते थे।

धर्म और नस्लीय भेदभाव के आधार पर बनाया निशाना

कई पीड़िताओं ने शारीरिक हिंसा के साथ-साथ मानसिक शोषण का भी जिक्र किया। एक पीड़िता ने बताया कि उसे ईसाई होने के नाते निशाना बनाया गया। पीड़िता ने बताया कि शोषण करते समय वे लोग क्रॉस देखते और कहते थे, “अब तुम्हारा ईश्वर कहाँ है? क्या तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हे त्याग दिया है?”

ग्रूमिंग गैंग ने अधिकतर ब्रिटिश मूल की गोरी लड़कियों को निशाना बनाया। पीड़िताओं ने बताया कि नस्लीय भेदभाव किया गया। उसने कहा, “मेरे साथ जितनी भी लड़िकयाँ थीं वे लगभग सभी श्वेत (ब्रिटिश मूल) थीं।” ऐसे ही एक अन्य पीड़िता ने कहा कि उसने 15 से 20 लड़कियों को कुत्तों के पिंजरों में बंद देखा था, जो सभी ब्रिटिश मूल की थीं।

इतना ही नहीं इन मामलों में पुलिस ऑफिसर की भी संलिप्तता सामने आई। एक पीड़िता ने बताया कि देश की अलग-अलग जगहों पर उसके साथ कई पुलिस ऑफिसर ने रेप किया।

दशकों से ब्रिटेन में खतरा है ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल

ब्रिटेन में फिर से चर्चा में आए ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल दशकों पुराना है। पिछले 20 सालों से बाल यौन शोषण के मामले सामने आते रहे हैं। इन मामलों में देश के रॉदरहैम के अलावा रोचडेल, ओल्डहम और टेलफोर्ड जैसे कई शहरों और कस्बों में संगठित समूह नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर रेप और शारीरिक शोषण जैसी घिनौनी घटनाओं का खुलासा हुआ। पुलिस की जाँच में कई मामलों में मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप भी सामने आए।

2002 के आसपास पहली बार ऐसे मामले उजागर हुए थे, जहाँ पाकिस्तानी मूल के पुरुषों पर इन नाबालिगों के शोषण के आरोप लगे थे। 2010 में यह ग्रूमिंग गैंग स्कैंडर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना, जब ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ ने जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट में इन बाल यौन शोषण के मामलों का खुलासा किया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अधिकतर आरोपित ब्रिटिश या पाकिस्तानी थे और वे कमजोर एवं असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाली लड़िकयों को अपना शिकार बना रहे थे।

बाद में ब्रिटेन सरकार की जाँच और रिपोर्ट्स में सामने आया कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियाँ समय पर कार्रवाई नहीं कर सकीं। कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही, पीड़ितों को ही जिम्मेदार ठहराने की सोच और कमजोर जाँच के कारण ये अपराध लंबे समय तक चलते रहे। इसी वजह से बड़ी संख्या में लड़कियाँ इसका शिकार बनीं।