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रमजान के बाद अवैध मस्जिद और नमाज पढ़ने वाला हॉल ढाह दो: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा – ‘कानून का उल्लंघन करती भीड़ का विरोध बर्दाश्त नहीं’

                                                                                                                              साभार: टीवी9
महाराष्ट्र की बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्देश के बाद भी एक अवैध मस्जिद को नहीं गिराने पर ठाणे नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि वे नागरिकों के मन में यह बात बैठा दें कि कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, इस मस्जिद को बनाने के लिए नगरपालिका से अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने 27 जनवरी को इसे गिराने का आदेश दिया, लेकिन इसकी पूरी तरह तामील नहीं की गई।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की पीठ ने की। पीठ ने मस्जिद को गिराने में देरी के लिए निगम के बहाने को खारिज कर दिया और कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी व्यक्ति या संगठन को यह कहने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह देश के कानून का पालन नहीं करेगा और इसका विरोध करेगा।

अदालत पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “ऐसी परिस्थितियों में कानून लागू करने वालों का कर्तव्य है कि वे ऐसे व्यक्ति/संगठन को देश के कानून का पालन करने के लिए बाध्य करें। कानून लागू करने वालों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे नागरिकों के मन में यह बात बैठा दें कि सरकार द्वारा कानून का उल्लंघन या कानून को लागू करने का विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

दरअसल, कासरवडावली के बोरिवडे गाँव में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की 18,000 वर्ग मीटर से अधिक की जमीन है। उस जमीन पर अवैध रूप से एक मस्जिद बना दी गई। इसके बाद कंपनी ने ठाणे नगर निगम से इस अवैध ढाँचे को ध्वस्त करने के लिए कहा। हालाँकि, नगर निगम ने इसमें कार्रवाई नहीं तो कंपनी हाई कोर्ट पहुँच गई।

कंपनी ने कोर्ट से नगर निगम को ढाँचा हटाने के लिए निर्देश देने की माँग की। याचिका के अनुसार, गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला हूले उर्फ ​​परदेशी बाबा ट्रस्ट ने साल 2013 से उसकी 18,122 वर्ग मीटर भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। इस पर अवैध ढाँचे का निर्माण कर दिया गया है, जिसमें एक मस्जिद और नमाज पढ़ने के लिए एक बड़ा हॉल शामिल है।

ठाणे नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि 1 जनवरी 2025 को साइट का निरीक्षण किया गया था। वहाँ 3,600 वर्ग फुट पर एक मंजिल का ढाँचा बना है। उसमें नमाज के लिए एक हॉल भी है। नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि 19 फरवरी को निगम के 10 अधिकारी 65 श्रमिकों तथा कुछ पुलिसकर्मियों के साथ ढाँचा गिराने पहुँचे, लेकिन वहाँ जमा हुई भारी भीड़ के विरोध के कारण यह काम पूरा नहीं हो सका।

हालाँकि, कोर्ट ने इसे बहाना बताते हुए नगर निगम के दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब इतनी बड़ी संरचना का निर्माण किया जा रहा था तो इसे नगर निगम के अधिकारियों ने रोकने के लिए क्या किया, इसको लेकर याचिकाकर्ताओं ने बार-बार पत्राचार किया था। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम कानून को सख्ती से लागू करने में असमर्थ रहा है।

कोर्ट ने कहा कि इसकी तस्वीरें देखने से पता चलता है कि ढाँचे का अधिकांश भाग गिरा दिया गया है। वहीं, रमजान के महीने के खत्म होते ही तुरंत गिराने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ढाँचे गिराने के बाद इसे दोबारा बनाने की कोशिश होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा है कि उसके आदेश के पूरी तरह लागू करने के लिए नगर निगम के अधिकारी जवाबदेह हैं।