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यस बैंक में खाता है तो नहीं निकाल पाएंगे 50 हजार से ज्यादा रुपये, RBI ने लगाई रोक

यस बैंक में खाता है तो नहीं निकाल पाएंगे 50 हजार से ज्यादा रुपये, RBI ने लगाई रोकआपके मन से एक सवाल पिछले 24 घंटे से चल रहा होगा. आखिर आज ही रिजर्व बैंक(RBI) ने क्यों यस बैंक (Yes Bank) के कामकाज पर रोक लगाई? अगर आप आर्थिक खबरों की थोड़ी भी जानकारी रखते हैं तो यस बैंक बंद होने की सुगबुगाहट पिछले कई महीनों से चल रही है. अब सवाल वहीं खड़ा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ पिछले दिनों कि रिजर्व बैंक को आनन फानन में यस बैंक पर गाज गिरानी पड़ी. हमसे जानिए बेहद आसान भाषा में बैंक पर रोक की मुख्य वजह...
शेयर बाजार सबसे आखिरी वजह
जानकारों का कहना है कि यस बैंक शुरुआती दिनों में काफी तेजी से बाजार में उभरा. लेकिन बैंक में ताला लगने की संभावना शेयर बाजार में स्टॉक गिरने से शुरू हुआ. 2008 में यस बैंक शेयर बाजार में काफी मजबूती के साथ खड़ा था. यस बैंक के लिए दो साल पहले 10 अगस्त, 2018 काफी अहम है. ये वही दिन है जब बैंक के एक शेयर की कीमत 393 रुपये की ऊंचाई तक पहुंची. लेकिन ठीक इसके बाद शेयर लुढ़कने शुरू हुए. और बैंक की माली हालत इतनी कमजोर हो गई कि निवेशकों ने बैंक के शेयर बेचने शुरू कर दिए. 5 मार्च, 2020 को यस बैंक के एक शेयर का दाम 2008 के मुकाबले 95 प्रतिशत गिरकर 20 रुपये से भी कम रह गया. जानकार बता रहे हैं कि आरबीआई के हस्तक्षेप का सबसे बड़ा कारण यही रहा. 

बीएसई का सवाल पूछना दूसरा कारण
एक अन्य जानकार बताते हैं कि गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने ने यस बैंक से पांच मार्च 2020 को स्पष्टीकरण मांगा था कि सरकार ने एसबीआई की यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की योजना को मंजूरी दी है या नहीं? इस खबर के बाद यस बैंक के बचे हुए निवेशकों ने भी अपने स्टॉक बेचना शुरू कर दिया. सरकार को डर था कि कहीं बिकवाली की वजह से यस बैंक को बंद नहीं करना पड़ जाए. सरकार के हस्तक्षेप की एक वजह यह भी बताई जा रही है.

RBI ने क्यों लगाई पाबंदी?
आसान शब्दों मे कहें तो सरकार किसी भी हालत में येस बैंक को डुबने से बचाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने बैंक पर ये पाबंदियां लगाई है. आरबीआई ने कहा कि सार्वजनिक हित और बैंक के जर्माकर्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बैंकिग नियम कानून 1949 की धारा 45 के तहत पाबंदियां लगाई गई है. इसके अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था. बयान में कहा गया कि बैंक के प्रबंधन ने इस बात का संकेत दिया था कि वह विभिन्न निवेशकों से बात हो रही है और इसमें सफलता मिलने की उम्मीद है, लेकिन विभिन्न वजहों से उन्होंने बैंक में कोई पूंजी नहीं डाली. 

50,000 रूपए से ज्यादा नहीं निकाल सकते 
यस बैंक (Yes Bank) के ग्राहकों के लिए बुरी खबर है. अब आप अपने यस बैंक के किसी भी तरह के अकाउंट से 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं निकाल सकते हैं. बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यस बैंक पर मोराटोरियम लगा दिया है. मोराटोरियम का मतलब किसी विशेष समय के लिए संबंधित गतिविधियों या कार्य को रोक देना होता है. मोराटोरियम लगने का मतलब है कि अब बैंक अब न लोन दे सकेगा और न ही बिना अनुमति विड्रॉल होंगे. यस बैंक का मोराटोरियम 5 मार्च से शुरु हो रहा है और अगले 30 दिन तक ये लागू रहेगा. यस बैंक के खाताधारकों पर विड्रॉल लिमिट लगने से ग्राहकों को काफी परेशानी आ रही है.
मुंबई के रहने वाले सुरेश वरोडे ने ज़ी मीडिया को बताया कि यस बैंक में उनका सैलरी अकाउंट है. उनकी सैलरी 26 तारीख को हर महीने खाते में आ जाती है. इस महीने भी 26 तारीख को सैलरी आई लेकिन बिजी होन के चलते वो बैंक से एकमुश्त पैसे नहीं निकाल सके. अब सुरेश के समस्या यह है कि बैंक से किस तरीके से अपने किराए के पैसे, घर चलाने के लिए पैसे और अपने बच्चों की फीस के लिए पैसे निकालें. सुरेश कल से अब तक 4 एटीएम का चक्कर लगा चुके हैं लेकिन एक भी पैसा निकालने में सफल नहीं हो पाए हैं. परेशानी की हालत ये है कि वो आज तड़के से ही बैंक का चक्कर लगा रहे हैं.
वहीं दूसरी तरफ मुंबई में ही रहने वाले फल कारोबारी राजाराम पाटिल ज़ी मीडिया से कहा कि अपने कारोबार के लिए यस बैंक को प्राइमरी बैंक बनाया था. अब बैंक से पैसे निकल पाएंगे या नहीं इस बात की चिंता है. आज सुबह जल्दी उठकर 3 एटीएम के चक्कर लगा चुका हूं लेकिन अपने ही पैसे बैंक से नहीं निकाल पा रहा हूं. राजाराम पाटिल को ये भी चिंता है कि उन्होंने बैंक में अपनी जमा पूंजी फिक्स डिपाजिट के रूप में रखी है, कहीं उस पर भी तो ग्रहण नहीं लग जाएगा या उसके लिए भी उन्हें चक्कर लगाना पड़ेगा. एक महीने में 50,000 रुपये निकालने से ना ही उनका कारोबार चल सकता है और ना ही घर.
गौरतलब है कि यस बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब हो गई थी. यस बैंक को लगातार घाटा हो रहा था. बैंक पर NPA था और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से संबंधित गड़बड़ियां भी पाई गई थीं. इन सभी स्थितियों को देखते हुए RBI ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत कार्रवाई की है. RBI ने बैंक का मौजूदा बोर्ड भंग कर दिया है और अपना एक एडमिनिस्ट्रेटर यस बैंक में बैठा दिया है. एडमिनिस्ट्रेटर का नाम है प्रशांत कुमार जो एसबीआई के पूर्व डिप्टी एमडी रहे हैं.
हालांकि अगर खाता धारकों को 50 हजार रुपये से ज्यादा पैसा निकालना है तो इमरजेंसी के लिए, शिक्षा, बीमारी या शादी के लिए रुपये निकाले जा सकते हैं. RBI का कहना है कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है, ग्राहकों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. अगर 30 दिन के बाद भी नया बोर्ड बैंक के लिए गठित नहीं होता है तो ये मोराटोरियम बढ़ाया भी जा सकता है.