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केंद्रीय कर्मचारियों और किसानों को मोदी सरकार का तोहफा, यस बैंक के री-स्‍ट्रक्‍चर प्‍लान को मिली मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनधारियों और किसानों को बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फैसलों के बारे में जानकारी दी। जहां कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाने को मंजूरी दी गई। वहीं यस बैंक के खाताधारकों को भी बड़ी राहत दी गई है।
मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ाने को मंजूरी दी है । इसका फायदा करीब 48 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स को होगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2020 से लागू होगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मोदी सरकार ने 1 जनवरी, 2016 को 7वें वेतन आयोग का फैसला लिया था, तब भी लोगों की सैलरी में अच्छा इजाफा हुआ था। अब डीए 17 से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया है। इसके लिए सरकार को कुल 14,595 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में 4 फीसदी की बढ़ोतरी से मंथली सैलरी में 720 रुपये से 10,000 रुपये के बीच बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले, मोदी सरकार की तरफ से 10 अक्टूबर, 2019 को भी केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता में इजाफा किया गया था। उस वक्त सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 12​ फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया था।
केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने कहा कि कोपरा जो खासकर दक्षिण भारत में तैयार किया जाता है, उसके एमएसपी में बढ़ोतरी की गई है, पहले इसकी दर 9521 रुपये थी लेकिन अब इसमें 439 रुपये की बढ़ोतरी के साथ इसकी दर 9960 रुपये होगी। इससे 30 लाख किसान को लाभ मिलेगा।

जावड़ेकर ने कहा कि हमारे देश के यूरिया का निर्यात ज्यादा बढ़े, जिससे हमें आयात पर निर्भर ना रहना पड़े इसके लिए यूरिया का देशी उत्पादन बढ़ेगा। संशोधित नई मूल्य निर्धारण योजना-III 2 अप्रैल, 2014 को अधिसूचित की गई थी। संशोधित एनपीएस-III के लागू होने से मौजूदा यूरिया इकाइयों को प्रस्‍ताव में उल्लिखित सीमा के अनुसार निर्धारित लागत में उनकी वास्‍तविक वृद्धि की सीमा तक लाभ मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित भी होगा कि किसी भी इकाई को अनुचित रूप से लाभ न मिले। इससे यूरिया इकाइयों के लगातार संचालन में मदद मिलेगी जिसके परिणामस्‍वरूप किसानों को यूरिया की निरंतर और नियमित आपूर्ति सुलभ होगी।
इस फैसले से उन यूरिया इकाइयों को 150 रूपये/मीट्रिक टन का विशेष मुआवजा भी मिलेगा जो 30 साल से अधिक पुरानी हैं और गैस में परिवर्तित हैं। इस मुआवजे से इन इकाइयों को प्रोत्‍साहन मिलेगा ताकि वे सतत उत्‍पादन के लिए व्‍यवहार्य बनी रहें।
केंद्र सरकार के कैबिनेट मीटिंग में यस बैंक के री-स्‍ट्रक्‍चर प्‍लान को मंजूरी मिल गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यस बैंक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 49 प्रतिशत शेयर खरीदेगा। उन्होंने कहा कि 26 प्रतिशत शेयर में 3 साल का लॉक इन है। वहीं निजी निवेशकों के लिए भी 3 साल का लॉक इन पीरियड होगा। निर्मला सीतारमण ने बताया कि री-स्‍ट्रक्‍चरिंग प्‍लान का नोटिफिकेशन जल्‍द जारी कर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री को गिफ्ट मिली पेंटिंग को प्रियंका गाँधी ने किस हैसियत से बेचा?

प्रियंका गाँधी, यस बैंक
ये ही है वो पेंटिंग, जिसे प्रियंका ने राणा कपूर को 2 करोड़ रुपए में बेचा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब ‘यस बैंक’ के संस्थापक राणा कपूर द्वारा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की पेंटिंग 2 करोड़ रुपए में ख़रीदने की बात आई, तब पार्टी चारों तरफ़ से आरोपों से घिर गई। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने बयान जारी कर उस पेंटिंग के बारे में डिटेल्स बताए। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दावा किया कि जो पेंटिंग प्रियंका ने राणा को बेचीं, वो मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को गिफ्ट की थी। ये बात 1985 की है, जब कांग्रेस अपना 100वाँ स्थापना दिवस मना रही थी। अब इसके बाद कई सवाल उठते हैं। क्या एमएफ हुसैन ने राजीव को जो पेंटिंग गिफ्ट की, उसे बेचने का हक़ उनके परिवार को है?
अगर किसी प्रधानमंत्री को कोई व्यक्ति कुछ गिफ्ट देता है तो वो उस पद को देता है या फिर व्यक्ति को? अगर पद को देता है तो वो चीज सरकारी संपत्ति हुई और उसे बेचने का हक़ उसके परिवार को नहीं है। राजीव उस समय कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। ऐसे में अगर वो गिफ्ट कांग्रेस पार्टी को दी गई थी तो प्रियंका गाँधी बिना पार्टी की अनुमति के उसे कैसे बेच सकती हैं? इस पेंटिंग के कारण ‘यस बैंक’ घोटाले से प्रियंका गाँधी के तार जुड़ रहे हैं और कांग्रेस पार्टी किसी तरह इस मुद्दे से किनारा करने में लगी हुई है।

भाजपा ने दावा किया है कि ‘यस बैंक’ घोटाले में प्रियंका गाँधी भी शामिल हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वित्तीय अपराधों की एक सूची शेयर कर के बताया कि भारत में हुए हर ऐसे घोटालों के तार गाँधी परिवार से जुड़ते रहे हैं। उन्होंने भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या के सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के संबधों का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि एक अन्य भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी की ब्राइडल ज्वेलरी कलेक्शन का उद्घाटन राहुल गाँधी ने किया था और अब राणा कपूर से प्रियंका गाँधी के तार जुड़ते नज़र आ रहे हैं।
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ईडी ने रविवार (मार्च 8, 2020) को राणा कपूर की रिमांड एप्लीकेशन को कोर्ट में जमा कर दिया। इस एप्लीकेश में ईडी ने राणा कपूर ...
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, मिलिंद देवड़ा ने राणा कपूर और प्रियंका गाँधी के बीच इस पेंटिंग को लेकर डील कराई थी। देवड़ा उन्हें ‘राणा अंकल’ कह कर सम्बोधित करते थे। ख़बर में दावा किया गया है कि पेंटिंग बेचने के बाद मिले रुपयों को प्रियंका गाँधी के ऑफिस को दे दिया गया। फिर प्रियंका गाँधी ने किस हैसियत से उस पेंटिंग को राणा कपूर को बेचा, ये अब तक साफ़ नहीं हो पाया है।

प्रियंका गाँधी कनेक्शन के बाद अब सेक्रेट्री का खुलासा: कपूर की बेटियों वाली कंपनी से होता था लोन-दलाली का खेल

राणा कपूरईडी ने रविवार (मार्च 8, 2020) को राणा कपूर की रिमांड एप्लीकेशन को कोर्ट में जमा कर दिया। इस एप्लीकेश में ईडी ने राणा कपूर के सेक्रेट्री का हवाला देकर बताया कि राणा कपूर के सचिव ने ही DHFL के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेट किया था। जिसमें DOIT अर्बन वेंचर्स को कथित रूप से 600 करोड़ रुपए वापस मिले। बता दें कि DOIT अर्बन वेंचर्स को राणा कपूर की तीनों बेटियों द्वारा संचालित किया जाता है।
ईडी के अनुसार, यस बैंक द्वारा डीएचएफएल समूह की कंपनियों को 4,450 करोड़ रुपए के डिबेंचर निवेश और ऋण के बदले में ये उल्लेखित पैसा दिया गया था। इसके अलावा ईडी का यह भी आरोप है कि कपूर ने यस बैंक में अपने पद का कई मामलों में गलत इस्तेमाल करके करीब 2000 करोड़ रुपए अपनी कंपनी और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा चलाई जा रही कंपनियों के लिए किकबैक (दलाली) के रूप में हासिल किए।
सीबीआई ने यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर, दीवान हाउसिंह (डीएचएफएल) और डीओआईटी अर्बन वेंचर्स कंपनी के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। इसके बाद ईडी और अन्य जाँच एजेंसियों ने इनके ख़िलाफ़ पड़ताल की और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कपूर को गिरफ्तार कर लिया।
ईडी के मुताबिक यस बैंक पर यह भी आरोप है कि उसने अप्रैल-जून 2018 के बीच डीएचएफएल में 3,700 करोड़ रुपए निवेश किए और बाद में 750 करोड़ रुपए DHFL समूह की अन्य कंपनी को दिए। लेकिन बाद में बैंक ने धन की वसूली के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।
कपूर (62) से इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। जिसमें मालूम हुआ है कि डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कपूर परिवार की ही कंपनी है और उसे घोटाले से प्रभावित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल को 3000 करोड़ रुपए का कर्ज देने के बाद 600 करोड़ रुपए की राशि मिली, जो कथित तौर पर रिश्वत थी।
इसके अतिरिक्त डीएचएफएल के अध्यक्ष राजेंद्र मिराशी ने अपने बयान में बताया कि ED कि DOIT अर्बन वेंचर्स ने डीएचएफएल को 735 करोड़ रुपए के वैल्यूएशन के साथ पांच प्रॉपर्टीज़ दी। लेकिन बाद में मालूम पड़ा कि संपत्ति की खऱीद प्राइज केवल 40 करोड़ रुपए ही है। यानी डीएचएफएल से एक कंपनी को लोन जारी करवाने के लिए 40 करोड़ की संपत्ति की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर 735 करोड़ रुपए का बताया गया। जिसमें आरोप है कि कंपनियों से मिली रिश्वत से राणा कपूर एंड फैमिली ने संपत्ति में 2000 करोड़ रुपए का निवेश किया। हालाँकि, अभी इन तमाम आरोपों पर राणा कपूर ने चुप्पी साध रखी है। हिरासत में जान से पहले जब मीडिया ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की तो भी वे चुप्पी साधते नजर आए।
मिराशी के अनुसार, वह कपूर की तीनों बेटियों से कभी नहीं मिले। लेकिन उन्होंने राणा कपूर की सीनियर एक्जिक्यूटिव सेक्रेट्री से कॉर्डिनेट किया था। उनके अनुसार, कपिल वाधवान या उनके असिस्टेंट एस गोविंदन ने ही मिराशी को ट्रांजेक्शन करने के लिए निर्देश दिए।
मिराशी ने ईडी को बताया कि उसके बाद से उनके बीच कोई बिजनेस एक्टिविटी नहीं हुई और न ही कोई राजस्व आता दिखाई दिया। मगर फिर फिर भी 600 करोड़ रुपए का ऋण इस तरह से संरचित किया गया था, जैसे 2023 में एकल भुगतान होना हो। लेकिन वास्तविकता में अब तक सिर्फ़ उनसे ब्याज लिया जाता रहा।
इन सब पहलुओं के अलावा ईडी के अधिकारी के मुताबिक, जाँच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे साफ होता है कि कपूर परिवार के पास लंदन में भी कुछ संपत्ति है। अब ईडी इस संपत्ति को हासिल करने के लिए इस्तेमाल की कई रकम का सोर्स तलाश रही है। ईडी ने कपूर के खिलाफ कार्रवाई शुक्रवार को शुरू की थी। इसी दिन देर रात को उनके घर पर छापा मारा था। जाँच एजेंसी की टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी।
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‘यस बैंक’ के संस्थापक राणा कपूर की गिरफ़्तारी के बाद ये मामला और भी फँसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच .....
इससे पहले ने सीबीआई, दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि (DHFL) पर उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के भाविष्य निधि कोष से 2200 करोड़ रुपए के गबन के आरोप में पहले ही मुकदमा कायम कर चुकी है। इसके साथ ही इस बैंक के स्वामित्व का पुनर्गठन करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है ताकि बैंक को बचाया जा सके और इसमें धन जमा करने वाले इसके ग्राहकों का हित सुरक्षित किया जाएगा। आरबीआई की योजना के मसौदे के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक यस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगा।

Yes Bank : राणा कपूर की तीनों बेटियों की 20 फर्जी कम्पनियाँ, ₹13000 करोड़ का गबन

यस बैंक, राणा कपूर‘यस बैंक’ के संस्थापक राणा कपूर की गिरफ़्तारी के बाद ये मामला और भी फँसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच की आँच अब राणा कपूर की पत्नी और उनकी तीनों बेटियों तक पहुँच गई है। राणा कपूर ने कई महँगी पेंटिंग्स ख़रीदी थीं, जिनकी क़ीमत करोड़ों में लगाई गई थी। इसके अलावा उनके 2000 करोड़ रुपए के निवेश की भी जाँच की जा रही है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ़्तार राणा कपूर एक दर्जन से भी अधिक मुखौटा कंपनियों के जरिए अपना कारोबार चला रहे हैं, जो जाँच की जद में आ गई है।
ईडी ने मुंबई कोर्ट को बताया है कि ‘यस बैंक’ ने डीएचएफएल के 3700 करोड़ मूल्य से भी अधिक के डिबेंचर ख़रीदे। डीबीएचएल ने डोलीट अर्बन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को 600 करोड़ का लोन दिया। इस कम्पनी में राणा कपूर की बेटियाँ बतौर डायरेक्टर कार्यरत हैं। बिना पर्याप्त कोलैटरल के उक्त लोन दे दिया गया और नियमों की अनदेखी की गई। दोनों कंपनियों के करार में 4300 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की बात ईडी ने कही है। इसके बाद कोर्ट ने राणा कपूर को 11 मार्च तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया।
ईडी ने राणा कपूर की पत्नी बिंदु और उनकी तीनों बेटियों के कई ठिकानों की तलाशी भी ली है। दिल्ली और मुंबई में चले इस तलाशी अभियान के दौरान राखी कपूर टंडन, राधा कपूर और रोशनी कपूर से पूछताछ भी की गई, जो कई घंटों तक चली। तीनों बेटियों पर आरोप है कि उनके नाम से कई कम्पनियाँ चलती हैं, जो दूसरी कंपनियों को ‘यस बैंक’ से लोन दिलाने के एवज में मोटी रकम वसूलती थीं। इस तलाशी अभियान के बाद मिले दस्तावेजों के आधार पर राणा कपूर के ख़िलाफ़ एक और अलग मामला दर्ज किया जा सकता है।

कपूर परिवार के पास 44 महँगे पेंटिंग्स मिले हैं। इनमें से कई राजनेतओं से ख़रीदी गई है। ईडी ने कपूर की पत्नी और तीनों बेटियों के बयान भी रिकॉर्ड किए हैं। आरबीआई ने ‘यस बैंक’ पर पाबन्दी लगाने के साथ ही उसके बोर्ड को भी भांग कर दिया है, ऐसे में कोई व्यक्ति अपनी जमापूँजी में से इस बैंक से 50,000 रुपए तक ही निकाल सकता है। सीबीआई ने ‘दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड’ और राणा कपूर की तीनों बेटियों के ख़िलाफ़ भी केस दर्ज किया है।
इस मामले के तार गैंगस्टर इक़बाल मिर्ची तक भी जुड़ते नज़र आ रहे हैं। ऐसे में ईडी फूँक-फूँक कर क़दम रख रही है। ‘यस बैंक’ के संस्थापक रहे राणा कपूर बाद में इसके एमडी और सीईओ बने। सितम्बर 2018 में उन्हें ये पद छोड़ना पड़ा था। आरोप है कि डीएफएचएल ने कुल 80 फ़र्ज़ी कंपनियों के जरिए 13,000 करोड़ रुपए का गबन किया है। एक ईडी अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि कपूर परिवार ने 20 फ़र्ज़ी कम्पनियाँ बना रखी हैं, जिनका इस्तेमाल इन गड़बड़ियों के लिए किया गया।

यस बैंक में खाता है तो नहीं निकाल पाएंगे 50 हजार से ज्यादा रुपये, RBI ने लगाई रोक

यस बैंक में खाता है तो नहीं निकाल पाएंगे 50 हजार से ज्यादा रुपये, RBI ने लगाई रोकआपके मन से एक सवाल पिछले 24 घंटे से चल रहा होगा. आखिर आज ही रिजर्व बैंक(RBI) ने क्यों यस बैंक (Yes Bank) के कामकाज पर रोक लगाई? अगर आप आर्थिक खबरों की थोड़ी भी जानकारी रखते हैं तो यस बैंक बंद होने की सुगबुगाहट पिछले कई महीनों से चल रही है. अब सवाल वहीं खड़ा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ पिछले दिनों कि रिजर्व बैंक को आनन फानन में यस बैंक पर गाज गिरानी पड़ी. हमसे जानिए बेहद आसान भाषा में बैंक पर रोक की मुख्य वजह...
शेयर बाजार सबसे आखिरी वजह
जानकारों का कहना है कि यस बैंक शुरुआती दिनों में काफी तेजी से बाजार में उभरा. लेकिन बैंक में ताला लगने की संभावना शेयर बाजार में स्टॉक गिरने से शुरू हुआ. 2008 में यस बैंक शेयर बाजार में काफी मजबूती के साथ खड़ा था. यस बैंक के लिए दो साल पहले 10 अगस्त, 2018 काफी अहम है. ये वही दिन है जब बैंक के एक शेयर की कीमत 393 रुपये की ऊंचाई तक पहुंची. लेकिन ठीक इसके बाद शेयर लुढ़कने शुरू हुए. और बैंक की माली हालत इतनी कमजोर हो गई कि निवेशकों ने बैंक के शेयर बेचने शुरू कर दिए. 5 मार्च, 2020 को यस बैंक के एक शेयर का दाम 2008 के मुकाबले 95 प्रतिशत गिरकर 20 रुपये से भी कम रह गया. जानकार बता रहे हैं कि आरबीआई के हस्तक्षेप का सबसे बड़ा कारण यही रहा. 

बीएसई का सवाल पूछना दूसरा कारण
एक अन्य जानकार बताते हैं कि गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने ने यस बैंक से पांच मार्च 2020 को स्पष्टीकरण मांगा था कि सरकार ने एसबीआई की यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की योजना को मंजूरी दी है या नहीं? इस खबर के बाद यस बैंक के बचे हुए निवेशकों ने भी अपने स्टॉक बेचना शुरू कर दिया. सरकार को डर था कि कहीं बिकवाली की वजह से यस बैंक को बंद नहीं करना पड़ जाए. सरकार के हस्तक्षेप की एक वजह यह भी बताई जा रही है.

RBI ने क्यों लगाई पाबंदी?
आसान शब्दों मे कहें तो सरकार किसी भी हालत में येस बैंक को डुबने से बचाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने बैंक पर ये पाबंदियां लगाई है. आरबीआई ने कहा कि सार्वजनिक हित और बैंक के जर्माकर्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बैंकिग नियम कानून 1949 की धारा 45 के तहत पाबंदियां लगाई गई है. इसके अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था. बयान में कहा गया कि बैंक के प्रबंधन ने इस बात का संकेत दिया था कि वह विभिन्न निवेशकों से बात हो रही है और इसमें सफलता मिलने की उम्मीद है, लेकिन विभिन्न वजहों से उन्होंने बैंक में कोई पूंजी नहीं डाली. 

50,000 रूपए से ज्यादा नहीं निकाल सकते 
यस बैंक (Yes Bank) के ग्राहकों के लिए बुरी खबर है. अब आप अपने यस बैंक के किसी भी तरह के अकाउंट से 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं निकाल सकते हैं. बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यस बैंक पर मोराटोरियम लगा दिया है. मोराटोरियम का मतलब किसी विशेष समय के लिए संबंधित गतिविधियों या कार्य को रोक देना होता है. मोराटोरियम लगने का मतलब है कि अब बैंक अब न लोन दे सकेगा और न ही बिना अनुमति विड्रॉल होंगे. यस बैंक का मोराटोरियम 5 मार्च से शुरु हो रहा है और अगले 30 दिन तक ये लागू रहेगा. यस बैंक के खाताधारकों पर विड्रॉल लिमिट लगने से ग्राहकों को काफी परेशानी आ रही है.
मुंबई के रहने वाले सुरेश वरोडे ने ज़ी मीडिया को बताया कि यस बैंक में उनका सैलरी अकाउंट है. उनकी सैलरी 26 तारीख को हर महीने खाते में आ जाती है. इस महीने भी 26 तारीख को सैलरी आई लेकिन बिजी होन के चलते वो बैंक से एकमुश्त पैसे नहीं निकाल सके. अब सुरेश के समस्या यह है कि बैंक से किस तरीके से अपने किराए के पैसे, घर चलाने के लिए पैसे और अपने बच्चों की फीस के लिए पैसे निकालें. सुरेश कल से अब तक 4 एटीएम का चक्कर लगा चुके हैं लेकिन एक भी पैसा निकालने में सफल नहीं हो पाए हैं. परेशानी की हालत ये है कि वो आज तड़के से ही बैंक का चक्कर लगा रहे हैं.
वहीं दूसरी तरफ मुंबई में ही रहने वाले फल कारोबारी राजाराम पाटिल ज़ी मीडिया से कहा कि अपने कारोबार के लिए यस बैंक को प्राइमरी बैंक बनाया था. अब बैंक से पैसे निकल पाएंगे या नहीं इस बात की चिंता है. आज सुबह जल्दी उठकर 3 एटीएम के चक्कर लगा चुका हूं लेकिन अपने ही पैसे बैंक से नहीं निकाल पा रहा हूं. राजाराम पाटिल को ये भी चिंता है कि उन्होंने बैंक में अपनी जमा पूंजी फिक्स डिपाजिट के रूप में रखी है, कहीं उस पर भी तो ग्रहण नहीं लग जाएगा या उसके लिए भी उन्हें चक्कर लगाना पड़ेगा. एक महीने में 50,000 रुपये निकालने से ना ही उनका कारोबार चल सकता है और ना ही घर.
गौरतलब है कि यस बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब हो गई थी. यस बैंक को लगातार घाटा हो रहा था. बैंक पर NPA था और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से संबंधित गड़बड़ियां भी पाई गई थीं. इन सभी स्थितियों को देखते हुए RBI ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत कार्रवाई की है. RBI ने बैंक का मौजूदा बोर्ड भंग कर दिया है और अपना एक एडमिनिस्ट्रेटर यस बैंक में बैठा दिया है. एडमिनिस्ट्रेटर का नाम है प्रशांत कुमार जो एसबीआई के पूर्व डिप्टी एमडी रहे हैं.
हालांकि अगर खाता धारकों को 50 हजार रुपये से ज्यादा पैसा निकालना है तो इमरजेंसी के लिए, शिक्षा, बीमारी या शादी के लिए रुपये निकाले जा सकते हैं. RBI का कहना है कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है, ग्राहकों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. अगर 30 दिन के बाद भी नया बोर्ड बैंक के लिए गठित नहीं होता है तो ये मोराटोरियम बढ़ाया भी जा सकता है.