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संघी महिलाएँ हॉट, चेहरा ढँक कर करो ‘हेट’ सेक्स,: लिबरलों की सोच वायरल

                                             संघी महिलाओं को लेकर लिबरलों की गंदी सोच
क्लब हाउस ऐप पर कथित सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की एक चर्चा 9 जून को ट्विटर पर 
वायरल हुई। इसमें वक्ता ‘संघियों’ के साथ ‘हेट सेक्स’ को नॉर्मल बता रहा था क्योंकि महिलाएं ‘हॉट’ होती हैं। क्लब हाउस ऐप पर ‘सेक्स विद योर एक्स’ शीर्षक पर एक चर्चा हुई, जिसमें ‘डू यू ऑनली डेट हॉट पीपुल’ टॉपिक पर बोलते हुए एक वक्ता नीरज कदंबूर ने उन महिलाओं पर बेहद आपत्तिजनक बात कही, जो उसकी राजनैतिक विचारधारा से मेल नहीं रखती हैं। Squineon नाम के एक ट्विटर यूजर ने ऑडियो शेयर करते हुए इसे ‘सेक्स जिहाद’ नाम दिया और बातचीत में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

क्लब हाउस की उस चर्चा में उपस्थित जेनिस नाम के एक यूजर ने नीरज से पूछा कि क्या वह सिर्फ हॉट लोगों को डेट करता है? इस पर नीरज ने जवाब दिया कि वह सभी के साथ डेट करता है लेकिन डेटिंग ऐप्स पर वह केवल मजे के लिए कुछ ‘संघी टाइप’ की तलाश में रहता है। नीरज के इस वक्तव्य पर कई लोग हँसे और क्लब हाउस पर उनमें से एक वर्षिता ने कहा कि संघी हॉट नहीं होते, जिस पर नीरज ने जवाब देते हुए कहा, “दे लुक हॉट बट…” इसके बाद उनकी चर्चा चलती रही।

नीरज ‘हॉट संघी महिलाओं’ के लिए अपनी कुंठा को सही ठहराया और पेपर बैग सेक्स का उदाहरण दिया। इस पर नीरज को रोकते हुए क्लब हाउस के एक अन्य सदस्य ने कहा कि यह ‘हेट सेक्स’ के जैसा है।

इन इंफ्लुएंसर्स की यह बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने जमकर आलोचना की। इस क्लब हाउस में एक और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स कुशा कपिला भी रही, जिसने बातचीत में महिलाओं के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों पर कुछ नहीं कहा।

पेपर बैग सेक्स 

यह एक अर्बन (शहरी) बोलचाल भाषा का वाक्यांश है, जिसका मतलब है सेक्स के दौरान लड़की के चेहरे को ढँक (आमतौर पर पेपर बैग से) देना। इसका मकसद होता है सामने वाले को बताना कि उसका (सामान्य तौर पर महिलाओं के लिए) फिगर तो अच्छा है लेकिन चेहरा आकर्षक नहीं है। 

हेट सेक्स 

इसे एक ऐसे सेक्स के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें दो लोगों में शारीरिक संबंध तो हों लेकिन कोई संवेदनात्मक संबंध न हो और दोनों में किसी एक के अंदर दूसरे के लिए घृणा का भाव हो। कई मामलों में इस प्रकार के संबंध बलात्कार, हत्या और एसिड अटैक के कारण बनते हैं।

वोक लिबरलों के ‘रेप कल्चर’ को ठहराया जाता है जायज भी

                                        ‘इंडिया टुडे’ की पूर्व पत्रकार ने रेप जोक्स को ठहराया जायज
‘इंडिया टुडे’ की पूर्व पत्रकार ऐश्वर्या सुब्रमण्यम ने वोक लिबरलों के रेप कल्चर का बचाव किया। सुब्रमण्यम भी उस क्लबहाउस बातचीत का हिस्सा थीं, जिसमें रेप कल्चर को जस्टिफाय किया गया और ‘संघियों’ के साथ ‘हेट सेक्स’ की बातें करते हुए उन्हें नीचा दिखाया गया। सुब्रमण्यम ने नीरज कदंबूर द्वारा रेप को लेकर जोक मारे जाने का ये कहते हुए
 बचाव किया कि वो गे है। उन्होंने दावा किया कि ये जोक एक ‘गे संघी’ को लेकर था, जो नीरज का दोस्त था और इसका महिलाओं से कोई लेनादेना नहीं।
साथ ही उन्होंने इसे हिंसा या रेप से जोड़ कर देखने पर भी आपत्ति जताई। इस कन्वर्सेशन में लगभग 8000 लोग शामिल थे, जिसमें नीरज ने ‘संघियों को लेकर अपनी फैंटसी और उनके साथ ‘हेट सेक्स’ की चाहत को लेकर बातें की।’ बता दें कि किसी व्यक्ति को न पसंद करने के बावजूद उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने को ‘हेट सेक्स’ नाम दिया गया है। ऐश्वर्या की मानें तो अगर ये पुरुषों को लेकर है तो इससे किसी को कोई दिक्क्त नहीं होनी चाहिए।