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‘5 साल तक उस औरत की तरह अत्याचार झेला, जिसका पति शराबी होता है’ – कांग्रेस छोड़ने के बाद तंवर

अशोक तंवर, हरियाणा चुनाव
हरियाणा विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी में चल रही गुटबाजी से परेशान होकर अशोक तंवर का आखिरकार पार्टी से मोहभंग हो गया। उन्होंने खुलेआम घोषणा कर दी कि वो कांग्रेस पार्टी को छोड़कर जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) को समर्थन देने वाले हैं। हालाँकि उन्होंने इस दौरान ये भी साफ किया कि वो जेजेपी को सिर्फ़ समर्थन देंगे, पार्टी में शामिल होने का उनका कोई विचार नहीं हैं।
अक्टूबर 16, 2019 को अपने निवास स्थान पर एक प्रेस वार्ता के दौरान अशोक तंवर ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उन्हें पार्टी (कांग्रेस) के शीर्ष ने अध्यक्ष पद से हटाया, जो कि एक आसामान्य प्रक्रिया थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “5 साल पार्टी में उस औरत की तरह अत्याचार सहन किया, जिसका पति शराबी होता है, जो उसे पीटता है। मगर वो औरत जुल्म सहती रहती है क्योंकि उसे बच्चे पालने होते हैं। हमें भी अपने साथियों के भविष्य की खातिर वो जुल्म सहने पड़े।”
इस कॉन्फ्रेंस के दौरान जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला भी उनके साथ मौजूद रहे। चौटाला की उपस्थिति में तंवर ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “मैंने बड़े दुख के साथ कांग्रेस पार्टी को छोड़ा है। अब मैं दुष्यंत और उनकी पार्टी को समर्थन दूँगा”
तंवर की मानें तो उन्हें कांग्रेस पार्टी से कोई नाराजगी नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ बीमारियाँ है, जिनका इलाज होना चाहिए। उन्होंने टिकट वितरण का मुद्दा उठाते हुए कहा, “ इन चुनावों में टिकट बाँटते वक्त हमारे जुझारू नेताओं की अनदेखी हुई। अब आगे की लड़ाई में हम अच्छे साथियों व उम्मीदवारों को समर्थन देंगे।” तंवर के अनुसार जेजेपी पार्टी में टिकट वितरण बड़े सरीखे से हुआ है। उनके अनुसार इन चुनावों में कांग्रेस का घमंड चूर-चूर होने वाला है। वह प्रदेश में तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई लड़ रहे हैं।
तंवर ने इस वार्ता में साफ किया कि उन्होंने जेजेपी को ज्वाइन नहीं किया और न ही इस मामले को लेकर उनका फिलहाल कोई इरादा है। उनके मुताबिक आईएमएलडी व जेजेपी के टूटने से प्रदेश में वोट बिखर गए, वरना भाजपा का हरियाणा में कोई औचित्य नहीं था।

इसके बाद समर्थन में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया कि हालातों के अनुसार अपने साथियों से पूछकर इस पर जवाब देंगे। उनके मुताबिक उन्होंने जेजेपी को समर्थन देने का फैसला भी साथियों से पूछकर ही किया है।
इस वार्ता में शामिल हुए जेजेपी नेताओं के जाने बाद इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला भी तंवर के निवास स्थान पर पहुँचे। जिसके बाद अशोक तंवर मे ऐलानाबाद में अभय सिंह का समर्थन किया। इस दौरान तंवर को चौटाला ने 19 अक्टूबर को ऐलानाबाद में होने वाली जनसभा के लिए आमंत्रित भी किया।
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अभय सिंह चौटाला के अनुसार तंवर ने कांग्रेस को मजबूत करने का काम किया। लेकिन जिस दिन तंवर ने कांग्रेस छोड़ी, मैंने उसी दिन इनका स्वागत किया। हम दोनों का मकसद कांग्रेस एवं भाजपा को सत्ता से दूर रखना है।

राहुल के खास बने सोनिया की फॉंस: हरियाणा में तंवर का इस्तीफा, महाराष्ट्र में निरुपम ने हड़काया

सोनिया-राहुल
राहुल गॉंधी के इस्तीफे के बाद भले सोनिया गॉंधी ने बतौर अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष की कमान भले सॅंभाल ली हो, लेकिन बगावत पर उतारू नेता मानने के मूड में नहीं दिख रहे। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया है। महाराष्ट्र में मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।
दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। निरुपम और तंवर दोनों टिकट बॅंटवारे में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। उल्लेखनीय है कि तंवर राहुल के काफी करीबी माने जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया था। सोनिया के कमान सॅंभालने के बाद ​हरियाणा में पार्टी की कमान कुमारी शैलजा को सौंप दी गई थी। साथ ही तंवर की अनदेखी कर हुड्डा को आगे किया गया।

तंवर ने अक्टूबर 3 को सोनिया को अपना इस्तीफा भेजा। तीन पन्ने के इस्तीफे में उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों के चयन में धांधली का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि उनकी अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पांच साल आठ माह तक हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत किया। इसके कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट छह फीसदी बढ़ा। उनके नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाई, लेकिन चुनाव के समय उन्हें किनारे लगा दिया गया
इससे पहले अक्टूबर 2 को तंवर ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।
दूसरी ओर, निरुपम ने अपने द्वारा सुझाए गए नाम को खारिज किए जाने के बाद अक्टूबर 3 को घोषणा की कि वह कांग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनसे जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब वह पार्टी को अलविदा कह देंगे।
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निरूपम को इस साल लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में मुंबई कांग्रेस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। उन पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप था। उनकी जगह मिलिंद देवड़ा को मुंबई कांग्रेस का प्रमुख बनाया गया था। आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद देवड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल मुंबई कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ हैं।