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सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं पार्टी में? हमारे पास न नेता, न पैसा: कांग्रेस नेता सुशील शिंदे

सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, कांग्रेसपूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने अपने एक बयान से राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का विलय हो जाएगा। शिंदे की बेटी प्रणति शिंदे सोलापुर शहर की सीट से तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के मनोज मोरे को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। इनमें से एक सवाल कॉन्ग्रेस और NCP के विलय का था, जिसे उन्होंने अपना निजी विचार बताया और कहा कि दोनों पार्टियों की विचारधाराएँ और सिद्धांत एक हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी (कांग्रेस ) को छोड़कर जा चुके हैं अगर वे वापस आ जाएँ तो पार्टी देश की सबसे शक्तिशाली पार्टी बन जाएगी। कांग्रेस के लिए यह समय एकजुट होने का है।
इस संदर्भ में NCP की क्या प्रतिक्रिया है, इस पर शिंदे ने कहा,
“मैंने एक बहस शुरू की है, देखते हैं कि क्या होता है… मैंने अब तक उनके (पवार) मुद्दे पर चर्चा नहीं की है। टिप्पणी करने के बाद उन्होंने मुझे फोन नहीं किया। मैं उनसे जल्द ही पंढरपुर में मिलूँगा। देखते हैं कि उस बैठक में क्या होता है।”
सुशील कुमार शिंदे से यह पूछे जाने पर कि उनके द्वारा की गई टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना है कि नहीं, तो उन्होंने इंदिरा गाँधी के दौर का ज़िक्र करते हुए बताया कि उनके समय में भी कांग्रेस बुरे दौर से गुजरी थी। ग़रीब लोगों ने कांग्रेस  का समर्थन किया और पार्टी को बुरे दौर से उबार दिया, इसके बाद पार्टी पहले से अधिक मज़बूत हुई। फ़िलहाल, पार्टी में केवल सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के रूप में दो मज़बूत नेता हैं। सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं? कांग्रेस के पास नेता या पैसा नहीं है… वहीं दूसरी तरफ़, भाजपा भावनात्मक रूप से लोगों को धर्म के नाम पर ब्लैकमेल कर रही है… राम मंदिर और अनुच्छेद-370 जैसे मुद्दों को उठा रही है।
हँसी आती है शिंदे पर कि इतनी पुरानी पार्टी जिसने वर्षों राज किया और सिर्फ 5+साल बाहर रहने पर पार्टी का खजाना खाली, नेता और मंत्री भ्रष्टाचार में घिरते नज़र आ रहे हैं। जिस सोनिया और राहुल जैसे मजबूत नेताओं की बात करते हैं, ये भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, लेकिन पार्टी के पास पैसा नहीं, इससे बड़ा मजाक नहीं हो सकता।
दूसरे यह कि 1971 बांग्लादेश बनवाने के चक्कर में हुए इंडो-पाक युद्ध का चुनावों में लाभ उठाया। कभी गरीबी तो कभी समाजवाद के नाम पर चुनाव जीते। लेकिन अब जब भाजपा वही कार्ड खेल रही है, सबको बेचैनी हो रही है।
साक्षात्कार में शिंदे से महाराष्ट्र की स्थिति के बारे में पूछा गया कि वहाँ कांग्रेस का बुरा हाल है, लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने केवल एक सीट जीती, इसके मद्देनज़र विधानसभा चुनाव से पार्टी को क्या उम्मीदें है? इस पर शिंदे ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट माँगे। उस समय VBA से प्रकाश आंबेडकर चुनावी मैदान में खड़े हुए, जिन्होंने जाति कार्ड खेला… लेकिन अब कांग्रेस  में सुधार हो रहा है और हम इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमें (कांग्रेस -एनसीपी) 125 से 152 सीटें जीतने की उम्मीद है।
सीटों के लेकर किए गए शिंदे के दावे पर सवाल किया गया कि NCP के अजीत पवार ने तो कहा है कि गठबंधन 170 सीटें जीतकर सरकार बनाएँगे। इस पर शिंदे ने कहा,
“अगर अजीत पवार ऐसा कह रहे हैं, तो यह संभव हो सकता है। वह (शिंदे) महाराष्ट्र से बाहर हो गए हैं इसलिए वो (अजीत पवार) बेहतर जानते है। मैं ज़्यादा यात्रा नहीं कर पाया हूँ।”
पत्रकार ने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा की रैलियों के संदर्भ में सवाल किया तो शिंदे ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र में चुनाव हारने का डर है। उनके मन में अभी भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव का असर है, इसलिए वो (भाजपा) इस शर्मिंदगी से बचने के लिए बाहर जा रहे हैं।
प्रकाश अंबेडकर को कांग्रेस अपने पाले में नहीं ला सकी, इसकी क्या वजह हो सकती है? इस पर शिंदे ने कहा कि यह बेहद दु:खद है कि उन्होंने बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा प्रचारित धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों के ख़िलाफ़ व्यवहार किया। शिंदे ने खेद जताते हुए कहा कि प्रकाश अम्बेडकर धर्मनिरपेक्षता की हत्या कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनके रुख़ से कांग्रेस-NCP जैसी धर्म निरपेक्ष दलों के 9-10 उम्मीदवारों की हार हुई। अंत में उनसे शरद पवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिले नोटिस के बारे में पूछा गया, जिसे उन्होंने उत्पीड़न का नाम देते हुए पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

राहुल के खास बने सोनिया की फॉंस: हरियाणा में तंवर का इस्तीफा, महाराष्ट्र में निरुपम ने हड़काया

सोनिया-राहुल
राहुल गॉंधी के इस्तीफे के बाद भले सोनिया गॉंधी ने बतौर अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष की कमान भले सॅंभाल ली हो, लेकिन बगावत पर उतारू नेता मानने के मूड में नहीं दिख रहे। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया है। महाराष्ट्र में मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।
दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। निरुपम और तंवर दोनों टिकट बॅंटवारे में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। उल्लेखनीय है कि तंवर राहुल के काफी करीबी माने जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया था। सोनिया के कमान सॅंभालने के बाद ​हरियाणा में पार्टी की कमान कुमारी शैलजा को सौंप दी गई थी। साथ ही तंवर की अनदेखी कर हुड्डा को आगे किया गया।

तंवर ने अक्टूबर 3 को सोनिया को अपना इस्तीफा भेजा। तीन पन्ने के इस्तीफे में उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों के चयन में धांधली का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि उनकी अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पांच साल आठ माह तक हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत किया। इसके कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट छह फीसदी बढ़ा। उनके नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाई, लेकिन चुनाव के समय उन्हें किनारे लगा दिया गया
इससे पहले अक्टूबर 2 को तंवर ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।
दूसरी ओर, निरुपम ने अपने द्वारा सुझाए गए नाम को खारिज किए जाने के बाद अक्टूबर 3 को घोषणा की कि वह कांग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनसे जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब वह पार्टी को अलविदा कह देंगे।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकलापों पर हर कोई ऊँगली उठा रहा है, उठानी भी चाहिए। लेकिन...

निरूपम को इस साल लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में मुंबई कांग्रेस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। उन पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप था। उनकी जगह मिलिंद देवड़ा को मुंबई कांग्रेस का प्रमुख बनाया गया था। आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद देवड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल मुंबई कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ हैं।