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केजरीवाल एक, गड़बड़ियाँ अनेक : राज्यपाल से झगड़ा, केंद्र से लफड़ा, कोरोना नाकामी और दिल्ली दंगों का दाग

कोरोना: दिल्ली के एलजी ने अरविंद ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने पहले कार्यकाल में राज्यपाल और केंद्र सरकार से लड़ाई में पूरे 5 साल गुजार दिए। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने कोरोना वायरस पर केंद्र सरकार का क्रेडिट खाने और मिसमैनेजमेंट में बीता दिया। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन का नाम दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में आया और पार्टी के एक अन्य नेता अमानतुल्लाह खान उनका खुलेआम बचाव करते रहे।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का कई बार बचाव किया। ताहिर के कुकृत्यों पर मजहब का पर्दा डालने की उसने कोशिश की थी। अमानतुल्लाह खान ने ट्वीट कर कहा था, “दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड बनाया है, जबकि पूरा देश जनता है कि दंगे किसने कराए। असल दंगाइयों से अभी तक पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। मुझे लगता है कि ताहिर हुसैन को सिर्फ मुसलमान होने की सज़ा मिली है।” 
Arvind Kejriwal, केजरीवाल फिर मुख्यमत्री ...दरअसल, कांग्रेस के गर्भ से जन्मी आम आदमी पार्टी (जब इस पार्टी का जन्म हुआ था, उन दिनों (2014 में ) एक हिन्दी पाक्षिक का सम्पादन करते शीर्षक "कांग्रेस और आप का DNA Positive में विस्तार से प्रकाशित किया था। जिसका किसी पक्ष ने आज तक खंडन नहीं किया। केजरीवाल के विरुद्ध समाचार प्रकाशित करने पर फ़ोन पर धमकी मिलने पर उक्त स्टोरी की थी।) अनेक प्रमाणों में प्रमुख है,  "दिल्ली चुनावों के समय केजरीवाल और प्रशांत भूषण तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोप लिए घूमते थे, लेकिन सत्ता हाथ आते ही सारे आरोप ठन्डे बस्ते में चले गए।"  कहने का अभिप्राय यह है कि जिस तरह कांग्रेस अपनी कुर्सी की खातिर छद्दम धर्म-निरपेक्षता की आड़ में हिन्दू-मुसलमानों के बीच नफरत  बीज बोए, उसी तर्ज पर केजरीवाल पार्टी चल रही है। 
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया था, “अमानतुल्लाह खान, दिल्ली पुलिस ने अभी ताहिर हुसैन को पकड़ा है तो इतनी बौखलाहट। तब क्या हाल होगा तुम्हारा जब पर्दे के पीछे के असली किरदार पकड़े जाएँगे। चिंता मत करो, दिल्ली पुलिस ईमानदारी से कार्य कर रही है। दिल्ली जलाने वाले 1 भी व्यक्ति को छोड़ेंगे नहीं।” 2 जून को दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में ताहिर को मुख्य आरोपित बनाया गया है।
जबकि CAA के विरुद्ध हो रहे प्रदर्शनों के उग्र होने पर अक्सर अपने ब्लॉग पर गोधरा दोहराये जाने की शंका व्यक्त करता था, जो एक-एक दंगाई को पकडे जाने से सिद्ध हो रही है। कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर को दंगे का आरोपी कहने वाले जवाब दें :"क्या इतना असला( ईंट, पत्थर, पेट्रोल बम और एसिड) क्या एक ही दिन में जमा हो गया था? दूसरे, जब CAA प्रदर्शनों में हिन्दू, योगी और मोदी आदि की कब्र खोदने की बात कौन कर रहा था? तब "हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई" और "गंगा-जमुना तहजीब" की बातों से भ्रमित करने वाले क्यों मुंह में दही जमाए बैठे थे? इससे पूर्व लाल कुआँ क्षेत्र में हिन्दू मंदिर को क्षति और हिन्दू महिलाओं को घर में घुसकर प्रताड़ित किया जा रहा था और हौज़ काज़ी थाने पर जमा होकर "नारा-ओ-तकबीर, अल्लाहु अकबर" के नारों से शोर मचाया जा रहा था, कोई छद्दम धर्म-निरपेक्ष बाहर नहीं आया, सबके कानों में सीसा भरा हुआ था, लेकिन जैसे ही क्षेत्रीय सांसद डॉ हर्षवर्धन, केन्द्रीय मंत्री, हरकत में आए, सबको "हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई और गंगा-जमुना तहजीब" याद आ गयी। क्या यह छद्दमवाद नहीं?
अब सवाल उठता है कि केजरीवाल ने अमानतुल्लाह खान द्वारा बार-बार दंगा आरोपित का बचाव किए जाने पर केजरीवाल चुप क्यों हैं? उन्होंने अमानतुल्लाह पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसका मतलब हो सकता है कि सब कुछ उनकी इच्छा से हो रहा हो क्योंकि कपिल मिश्रा पहले से ही आप नेता संजय सिंह पर ताहिर हुसैन का क़रीबी होने का आरोप लगाते रहे हैं। केजरीवाल का इस सम्बन्ध में कोई बयान नहीं आया।
केजरीवाल ने सर्जिकल स्ट्राइक के भी सबूत माँगे थे लेकिन जन आक्रोश को देखते हुए उन्होंने अपने हाथ वापस खींच लिए थे। आपको याद होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से प्रवासियों के भारी पलायन को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने इस पलायन पर नाराजगी जताई थी। वहीं इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी लॉकडाउन के बीच हुए पलायन पर केजरीवाल से गहरी चिंता व्यक्त कर चुके थे।
अनिल बैजल ने कड़े शब्दों में पत्र लिखते हुए केजरीवाल से कहा था कि लॉकडाउन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार के पास सभी शक्तियाँ थीं, फिर भी ऐसा नहीं हो सका। केंद्र इस बात से नाराज था कि दिल्ली सरकार ने प्रवासियों को बसों के जरिए सीमा पर छोड़ दिया। जिसके मद्देनजर गृह सचिव अजय भल्ला ने दिल्ली के मुख्य सचिव को इस मामले में लापरवाही के लिए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया था।
पिछले ही सप्ताह (जून 21 को न्यूज़18 पर) आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि "हमने 5000-5000 रूपए बांटे" जबकि मेरे मौहल्ले में बंटे मात्र 2000 रूपए। ऐसे में प्रश्न यह होता है कि जब पार्टी या दिल्ली सरकार ने 5000 रूपए दिए थे, फिर 3000 रूपए किसने रखे?  
अभी की ही एक हालिया घटना को उदाहरण के रूप में लेते हैं। जब केजरीवाल सरकार की नाकामी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मैदान में उतरे और उन्होंने कोरोना से निपटने की तैयारियों का जिम्मा सम्भाला, तब आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्यों का क्रेडिट खाने के मूड में भी है। भाजपा सरकार के काम की क्रेडिट लेना तो दूर की बात थी, आप नेता संजय सिंह ने तो एक क़दम और आगे बढ़ कर केंद्र सरकार द्वारा किए गए काम को लेकर केंद्र को ही कोसना शुरू कर दिया।
Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) | Twitter
उन्होंने दावा किया कि जहाँ लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्मृति में भाजपा ने सबसे ऊँची प्रतिमा बनवाई, वहीं आप सरकार ने सबसे बड़ा अस्पताल बनवाया। जबकि सच्चाई ये है कि दोनों काम केंद्र सरकार ने ही कराए हैं। उससे पहले अमित शाह ने केजरीवाल को ट्वीट कर पहले ही कहा था कि ये पहले ही बैठक में निर्णय लिया जा चुका है कि 10,000 बेड्स का अस्पताल बनवाया जाएगा। जब सीएम केजरीवाल ने उन्हें अस्पताल के इंस्पेक्शन के लिए आमंत्रित किया था, तब शाह ने उन्हें जवाब देते हुए ये बात लिखी थी।
कुल मिला कर देखा जाए तो अरविन्द केजरीवाल अब तक दिल्ली में सारी समस्याओं के मामले में टालमटोल ही करते आए हैं या फिर जब केंद्र ने किया तो उन्होंने उसका क्रेडिट खाया है। अब तो दिल्ली में टिड्डियों की समस्या भी आ गई है। हाँ, दिन-रात टीवी पर दिखने और बयान देने में उनका कोई सानी नहीं है। वो चाहते हैं कि दिल्ली के लोग सोते-जागते उनका ही चेहरा देखें। खैर, असली मूल्यांकन तो कोरोना समस्या ख़त्म होने के बाद ही होगा।
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महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 3390 नए मामल....

दिल्ली में 6 दिन में 3-गुणा होंगे कोरोना टेस्ट, 8000 बेड के साथ मिलेंगे 500 रेलवे कोच : अमित शाह

दिल्ली कोरोना केजरीवाल शाहदिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को कंट्रोल में लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों के साथ हालात पर चर्चा करने के लिए रविवार (14 जून, 2020) की सुबह बैठक की।
11 बजे से गृह मंत्रालय में शुरू हुई इस बैठक में दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर करीब 1 घंटे 20 मिनट चर्चा की गई। बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सुविधाएँ, बढ़ते मरीजों के लिए बेड, कोरोना को निपटाने के लिए एहतियात कदम उठने को लेकर बात की गई।
बैठक की समाप्ति के बाद अमित शाह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली की जनता की सुरक्षा व इस संक्रमण को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में लिए गए अहम फैसले 
  1. दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को देने का निर्णय लिया है।
  2. आइसोलेशन वार्ड में बदले गए रेलवे के 500 कोच के अंदर 8000 बेड होंगे। इसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सभी सुविधाओं मौजूद होंगी।
  3. दिल्ली के कंटेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग अच्छे से करने के लिए घर-घर जाकर हर व्यक्ति का व्यापक स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा। साथ ही इसकी रिपोर्ट 1 हफ्ते के अंदर ही आ जाएगी। जिससे संक्रमित व्यक्ति का पता जल्द लगने की वजह से संक्रमण को रोका जा सकेगा।
  4. हर व्यक्ति के स्वास्थ्य को मद्देनजर रखते हुए बेहतर मॉनिटरिंग के लिए सबके मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करवाया जाएगा।
  5. संक्रमण को रोकने के लिए अगले दो दिन में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाकर दो गुना किया जाएगा और 6 दिन बाद टेस्टिंग को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया जाएगा।
  6. केंद्र ने कोरोना के बढ़ते मामलों और हालात पर नजर रखने के लिए 5 वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली सरकार में तैनाती की भी बात कही है।
  7. सरकार ने स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस व अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं को इस महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं में वॉलंटियर के नाते जोड़ने का निर्णय लिया है।
  8. केंद्र सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के 60% कम में रेट में कोविड-19 के बेड को सरकार को देने के लिए तय किया है।
  9. कोरोना काल में मरीजों के इलाज से संबंधित आवश्यक संसाधन जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर व अन्य सभी उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार को पूर्णतः आश्वस्त किया है।
  10. कोविड-19 से मरने वालों के शवों की दुर्गति को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा अवधि को कम से कम करने के लिए सरकार ने अंतिम संस्कार के लिए नई गाइडलाइंस जारी करने का निर्णय भी लिया है।
  11. केंद्र व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग, सभी सम्बंधित विभाग व एक्सपर्ट्स को आज किए गए सभी निर्णयों को अच्छे से अमल किया जाए, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
  12. दिल्ली के छोटे अस्पतालों तक कोरोना संबंधित सही जानकारी व दिशा-निर्देश देने के लिए केंद्र सरकार ने AIIMS में टेलीफोन हेल्पलाइन नंबर जारी कर वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमिटी बनाने का निर्णय लिया। इसका हेल्पलाइन नंबर कल जारी हो जाएगा।
इस वक़्त दिल्ली में कोरोना वायरस की वजह से स्थिति काफी भयावह बनी हुई है। बढ़ते संक्रमितों और मौत के आँकड़ो, अस्पताल की बदतर स्थिति ने दिल्ली सरकार की हालत को खस्ता कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में अब तक संक्रमण के कुल 38,958 मालमे सामने आए हैं। इनमें 22742 एक्टिव केस है। 14945 लोग इस संक्रमण से ठीक हो कर घर जा चुके हैं। जबकि 1,271 लोगों ने इस महामारी की वजह से अपनी जान गँवा दी है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन होंगे स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन

कोरोना महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन होंगे स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, 22 मई को संभालेंगे पद
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन को कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन पद को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी है. डब्लूएचओ के 34 सदस्यों वाले बोर्ड में जापान के डॉक्टर हिरोकी नाकातानी की जगह अब डॉक्टर हर्ष वर्धन लेंगे. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डॉक्टर हर्ष वर्धन 22 मई को बोर्ड के चेयरमैन पद संभालेंगे. जिसके बाद डॉ. हर्ष वर्धन के पास भारत के साथ- साथ दूसरे देशों की जिम्मेदारी होगी. हालांकि, यह पूर्णकालिक जिम्मेदारी नहीं होगी लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को WHO की कुछ बैठकों में जरूर शामिल होना होगा.
वैश्विक मंच पर भारत के प्रतिनिधित्व के प्रस्ताव पर 194 देशों ने हस्ताक्षर किए. हालांकि, संगठन की ओर से यह फैसला पिछली साल कर लिया गया था कि अगर चेयरमैन भारत की ओर से होगा. अधिकारियों के अनुसार, हर साल यह पद बदलता है और ऐसे में पिछले साल तय हुआ था कि अगला प्रतिनिधित्व भारत करेगा.

बोर्ड की साल में दो बार बैठक होती है जिसमें मुख्य बैठक आमतौर पर जनवरी और दूसरी बैठक मई में होती है. संगठन में कार्यकारी बोर्ड का मुख्य कार्य असेंबली के निर्णयों व पॉलिसी तैयार करने के लिए सलाह देना होता है. तकनीकी रूप से देखें तो स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर 34 देशों को ही कार्यकारी बोर्ड का सदस्य बनाया जाता है. हालांकि, इस बार कुछ पिछड़े देशों को शामिल किया गया है जिसमें बोट्सवाना, कोलंबिया, घाना, गिनी-बिसाऊ, मेडागास्कर समेत कई देश शामिल हैं.

पंजाब : 90,000 घर वापसी वालों में कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका ; केंद्र से माँगा 150 करोड़ रूपए

पंजाब, 90 हजार वापसीकोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप पर काबू पाने के लिए पंजाब में सरकार पहले ही कर्फ्यू का निर्देश दे चुकी है। मगर, इसी बीच सरकार के सामने एक नई मुसीबत आ गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, देश-विदेश में रहने वाले करीब 90,000 नागरिक राज्य में वापस लौट आए हैं। ऐसे में अब सरकार इन सभी की जाँच करना चाहती है। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र से 150 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज माँगा है। बता दें, इनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका जताई जा रही है। हो सकता है इन लोगों का मेडिकल चेक अप होने के बाद पंजाब के आँकड़ो में वृद्धि हो। ये बात खुद राज्य के मंत्री बलबीर सिंह सिंधू ने कही है।
प्राप्त सूचना के मुताबिक पंजाब के 22 जिलों में पहले ही कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके अलावा राज्य के मंत्री बलबीर सिंह संधू ने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठी लिखी है और केंद्र से 150 करोड़ रुपए की मदद के साथ ही माँग की है। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें सेना से भी हेल्प की अपील करनी होगी।
केंद्रीय मंत्री सिंधू ने विदेश से लौटे नागरिकों के बारे में केंद्र को सूचित करते हुए बताया कि कम से कम 90 हजार लोग वापस आए हैं। उनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो राज्य में संख्या एकाएक बहुत तेजी से बढ़ जाएगी।
पंजाब में सुरक्षा के मद्देनजर और लॉकडाउन का उल्लंघन होता देख सरकार ने पहले ही कर्फ्यू लगा दिया था। सरकार ने इस कड़े कदम के पीछे जनता की मनमानियों को वजह बताया था। सरकार ने कहा था कि जनता लॉकडाउन का पालन नहीं कर रही। इसलिए उन्होंने कर्फ्यू लगाया। ताकि लोग घरों में रहे।
एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, लोग लॉकडाउन के बाद भी बड़ी संख्या में घरों से निकल रहे थे इसलिए कर्फ्यू लागू किया गया। इसका मकसद लोगों को घरों में रखना है। इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि उपायुक्तों को आवश्यक आदेश देने को कहा गया है। प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई प्रतिबंध से छूट चाहता है तो उसे एक तय अवधि और काम के लिए यह छूट दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने लॉन्च किए पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन क्रैकर्स, SC ने लगाई थी रोक

ग्रीन क्रैकर्स, पटाखा, दिवाली
ग्रीन क्रैकर्स लॉन्च करते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन
(तस्वीर साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने शनिवार (6 अक्टूबर) को कहा कि इस बार दीपावली पर देशभर में कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन क्रैकर्स उपलब्ध रहेंगे, जो पर्यावारण के अनूकल होंगे। डॉ हर्षवर्धन ने अनुसंधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंन्स में कहा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद इस तरह के पटाखों को बनाने के बारे में सोचा गया और इसी दिशा में काम करते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्रीन क्रैकर्स के विकास में अहम भूमिका निभाई। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में CSIR की आठ सहयोगी प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग दिया।
इस अवसर पर डॉ हर्षवर्धन ने कहा,
“मुझे बहुत ख़ुशी है कि एक तरफ, हम इस दिवाली पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का इस्तेमाल करेंगे और दूसरी तरफ, रोशनी और पटाखों के साथ हमारे पारंपरिक त्योहार का उत्सव बरकरार रहेगा। लाखों घर जो आतिशबाज़ी की बिक्री और निर्माण पर निर्भर हैं, वे भी इस त्योहार का आनंद लेंगे। हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद!”
उन्होंने कहा कि CSIR के पटाखों के बारे में फॉर्मूलेशन के बाद पटाखा उत्पादकों ने इसी आधार पर पटाखे बनाए हैं और पटाखा उत्पादकों के साथ लगभग 230 आपसी सहमति पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने पटाखा उत्पादकों से CSIR की तरफ से सुझाए गए फॉर्मुलेशन के आधार पर पटाखे बनाने और बाजार में उतारे जाने से पहले इनकी जाँच तथा उत्सर्जन का आग्रह भी किया। CSIR द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं पर्यावरण शोध संस्थान (NEERI) तथा राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) की प्रयोगशालाओं में इनकी जाँच की जा सकेगी। इन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर CSIR के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांदे ने बताया कि CSIR के लिए ग्रीन क्रैकर्स के बारे में फॉर्मूलेशन तैयार करना और इस तरह के पटाखों की परिभाषा को तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है ताकि ऐसे पटाखों से कम से कम उत्सर्जक तत्व वातावरण में छूटें। CSIR ने ग्रीन क्रैकर्स के लिए बेंचमार्क के लिए तकनीकी कानूनी और नीतिगत हस्तक्षेप में अपनी तरफ से योगदान दिया और पारंपरिक पटाखों तथा ग्रीन क्रैकर्स में बेरियम के स्तर की जाँच की।
इस मौके पर NEERI के निदेशक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स के विकास में द्विस्तरीय प्रकिया अपनाई गई और CSIR के साथ मिलकर उनके संस्थान ने पांरपारिक पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम नाईट्रेट के स्तर की जाँच कर ग्रीन क्रैकर्स के लिए एक नया मानक अपनाया। इस विधि से ग्रीन क्रैकर्स में 30 से लेकर 90 प्रतिशत बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कम किया गया और कईं पटाखों में यह बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। इन पटाखों में ऑक्सीडेंट के तौर पर पोटेशियम नाईट्रेट का इस्तेमाल किया गया। 
उन्होंने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स बनाने वाली इकाइयों को नई एवं संशोधित विधियों को पूरा कर एक निश्चित बेंचमार्क तक पटाखे बनाने के लिए 530 उत्सर्जन प्रमाणपत्र दिए गए हैं। 
ग्रीन क्रैकर्स के बारे में CSIR की मुख्य वैज्ञानिक डॉ साधना रायालु और उनकी टीम का कहना है कि इन पर NEERI का ग्रीन ‘Logo’ और एक QR कोड है जो इनकी पहचान हैं। इस कोड की जाँच करके इनकी असलियत का पता लगाया जा सकता है।
ग्रीन क्रैकर्स के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसकी इमेल आईडी director@neeri.res.in और हेल्पलाइन नंबर +918617770964 और +919049598046 है।